लोन

कितनी EMI भर सकते हैं? ₹50,000 और ₹1 लाख सैलरी पर सारी EMI मिलाकर

बैंक आपकी सारी EMI मिलाकर टेक-होम के 40% से 50% तक जाने देते हैं। ₹50,000 और ₹1 लाख के दो बजट दिखाते हैं कि किराया, इमरजेंसी फंड और SIP के बाद आराम की लिमिट असल में कहां है।

ऑयल पेंटिंग जैसा दुकान के काउंटर पर पीतल का तराजू: ₹1,00,000 टेक-होम के नोटों वाला पलड़ा घर, कार, कार्ड लिखे ₹40,000 EMI के बाटों से भारी
₹1 लाख के टेक-होम पर 40% का नियम सारी EMI ₹40,000 के अंदर रखता है। बैंक 50% तक मान सकते हैं।

जिग्नेश सूरत में एक कपड़े की ट्रेडिंग फर्म में अकाउंट्स देखता है और महीने के ₹50,000 हाथ में आते हैं। पिछले रविवार उसने एक छोटी हैचबैक की टेस्ट ड्राइव ली, और सोमवार शाम तक डीलर के फाइनेंस डेस्क से हां आ गई: ₹6 लाख का लोन, पांच साल के लिए महीने के ₹12,455। डेस्क पर किसी ने नहीं पूछा कि किराया कितना है, बहन की शादी के लिए लिया गया पर्सनल लोन कितना बाकी है, या क्रेडिट कार्ड पर फोन की किस्तें चल रही हैं या नहीं। सब जोड़ें तो उसकी EMI महीने की ₹23,355 बनती है। सैलरी का 46.7%, और लोन देने वाले को इसमें कोई दिक्कत नहीं थी।

तो असल में कितनी EMI अफोर्ड कर सकते हैं? बैंक का जवाब और सही जवाब दो अलग आंकड़े हैं। लोन देने वाले आम तौर पर आपकी सारी EMI मिलाकर आमदनी के 40% से 50% तक जाने देते हैं। लेकिन जिस घर के बजट में किराया भी भरना है, इमरजेंसी फंड भी बनाना है और SIP भी चालू रखनी है, वो बजट आम तौर पर कम आंकड़ा बताता है। नीचे दोनों आंकड़े, लाइन दर लाइन, ₹50,000 और ₹1 लाख की मंथली टेक-होम सैलरी पर निकाले गए हैं।

₹50,000 और ₹1 लाख पर छोटा जवाब

आम प्रतिशत रुपयों में कितने बनते हैं, ये देखिए। यहां "EMI" का मतलब है आपकी भरी जाने वाली सारी EMI जोड़कर: होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड की EMI, सब कुछ।

टेक-होम का हिस्सा₹50,000 परEMI के बाद बचे₹1,00,000 परEMI के बाद बचे
30%₹15,000₹35,000₹30,000₹70,000
40% (मोटा नियम)₹20,000₹30,000₹40,000₹60,000
50% (बैंक की आम रेंज का ऊपरी सिरा)₹25,000₹25,000₹50,000₹50,000

EMI वाले कॉलम नहीं, "बचे" वाले कॉलम देखिए। जिंदगी का बाकी सब इसी में से निकलना है: किराया, राशन, स्कूल फीस, मां-बाप की दवाइयां, इंश्योरेंस, बचत। ₹50,000 पर 30% और 50% का फर्क महीने के ₹10,000 है। कई घरों का पूरा राशन का बिल इतना ही होता है।

ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए काम का अंदाजा: घर अपना है तो सारी EMI मिलाकर टेक-होम के 40% के अंदर रखिए, और किराए पर रहते हैं तो उससे काफी कम। बैंक के 50% को टारगेट नहीं, ऐसी छत मानिए जिसे कभी छूना नहीं है।

हर EMI गिनी जाती है, ₹3,000 वाले फोन की भी

लोग "कितनी EMI अफोर्ड कर सकता हूं" पूछते वक्त एक ही लोन के बारे में सोचते हैं। बैंक ऐसे नहीं सोचता। वो आपकी क्रेडिट रिपोर्ट निकालता है, और आपके नाम पर जो कुछ है, सब उसमें दिखता है। ये सब गिनिए:

  • होम लोन और टॉप-अप लोन की EMI, वो लोन भी जिसमें आप सिर्फ को-बॉरोअर हैं।
  • कार और टू-व्हीलर लोन।
  • पर्सनल लोन, ऐप से लिए छोटे लोन और दो टैप में लिए "प्री-अप्रूव्ड" लोन भी।
  • क्रेडिट कार्ड की EMI: फोन, TV, फ्लाइट के टिकट जो आपने EMI में बदले। "नो कॉस्ट" EMI भी EMI ही है। वो असल में कितने की पड़ती है, ये नो कॉस्ट EMI और डेबिट कार्ड पर EMI में निकाला है।
  • दुकान के काउंटर से लिए कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन, और महीने की किस्त वाले एजुकेशन या गोल्ड लोन।

EMI न हो तब भी क्रेडिट कार्ड गिना जाता है। कुछ लोन देने वाले कार्ड के मिनिमम अमाउंट ड्यू को भी महीने की देनदारी में गिनते हैं। और कुछ किराया भी गिनते हैं, जो ठीक है, क्योंकि किराया भी EMI की तरह हर महीने खाते से जाता है।

छोटी EMI एक-एक करके देखें तो मासूम लगती हैं। लेकिन बैंक के लिए बंधा हुआ पैसा, बंधा हुआ पैसा है। 8% पर 20 साल के हिसाब से ₹3,000 की फोन वाली EMI जब तक चल रही है, बैंक करीब ₹3.59 लाख कम होम लोन देगा। इसलिए अगर अगले कुछ महीनों में होम लोन के लिए अप्लाई करना है, तो छोटी EMI पहले खत्म कर लीजिए।

बैंक कितना मानता है: FOIR, और आंकड़ा क्यों बदलता है

आमदनी का जितना हिस्सा EMI में जाता है, उसे बैंक वाले FOIR कहते हैं, यानी फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टु इनकम रेशियो। होम, कार या पर्सनल लोन के लिए RBI का कोई नियम एक FOIR तय नहीं करता। हर लोन देने वाला अपनी क्रेडिट पॉलिसी में अपनी लिमिट रखता है, और जो आंकड़े सामने आते हैं वो रेंज हैं।

  • उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक का लेख 40% से कम FOIR को अच्छा मानता है, कहता है कि कुछ लोन देने वाले 50% तक मान लेते हैं, और 50% से ऊपर को ज्यादा जोखिम मानता है। वो किराए और क्रेडिट कार्ड पेमेंट को भी फिक्स्ड देनदारी में गिनाता है।
  • उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक का होम लोन FOIR वाला पेज (अगस्त 2026) कहता है कि ज्यादातर भारतीय बैंक और NBFC नेट या ग्रॉस मंथली इनकम के करीब 40% से 50% की रेंज में काम करते हैं, और ये लोन देने वाले और इनकम ब्रैकेट के हिसाब से बदलता है।

"नेट या ग्रॉस" पर ध्यान दीजिए। कुछ लोन देने वाले आपकी EMI को ग्रॉस सैलरी से, यानी PF और टैक्स कटने से पहले की सैलरी से भाग देते हैं। इससे वही EMI छोटी दिखती है। जिग्नेश के आंकड़ों में ग्रॉस सैलरी ₹53,250 है, तो ग्रॉस का 50% ₹26,625 बनता है, जबकि टेक-होम पर ₹25,000। प्लानिंग टेक-होम पर ही कीजिए। खाते में असल में वही पैसा आता है।

RBI एक जगह पक्की सीमा लिखता है। उसके माइक्रोफाइनेंस फ्रेमवर्क के मुताबिक साल में ₹3 लाख तक कमाने वाले परिवार की सारी लोन किस्तें मिलाकर महीने की आमदनी के 50% से ज्यादा नहीं हो सकतीं। ये नियम सबसे गरीब कर्जदारों को बचाने के लिए है। वहां भी रेगुलेटर ने 50% को अधिकतम सीमा रखा है, आराम वाला लेवल नहीं।

कार लोन के लिए बैंक क्या देखता है, ये ₹30,000, ₹50,000 और ₹1 लाख सैलरी पर कार लोन कितना मिलेगा में है। होम लोन के लिए हर सैलरी पर कितना लोन मिलेगा, ये हमारी आने वाली पोस्ट ₹50,000 सैलरी पर होम लोन में होगा। होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर में आप FOIR खुद तय कर सकते हैं, चल रही EMI जोड़ सकते हैं और देख सकते हैं कि लोन की रकम कितनी घटती है।

कौन सी सैलरी? टेक-होम, CTC नहीं

इस लेख में हर रुपये का आंकड़ा मंथली टेक-होम है: PF, प्रोफेशनल टैक्स और TDS कटने के बाद बैंक खाते में जो आता है। आपका CTC कहीं बड़ा आंकड़ा है, पर उससे EMI नहीं भरी जाती।

इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर दिखाता है कि हमारी दोनों सैलरी मोटे तौर पर कहां से आती हैं। इसमें FY 2026-27 की नई टैक्स रिजीम, CTC का आधा बेसिक, ₹25,000 की वेज सीलिंग पर PF और ₹200 प्रोफेशनल टैक्स लिया गया है:

सालाना CTCमहीने का ग्रॉसआपका PFइनकम टैक्समहीने में हाथ में
₹6.75 लाख₹53,250₹3,000शून्य₹50,050
₹12.75 लाख₹1,03,250₹3,000शून्य₹1,00,050

दोनों पर इनकम टैक्स नहीं लगता, क्योंकि टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से नीचे रहती है और वहां तक नई रिजीम की रिबेट पूरा टैक्स खत्म कर देती है। आपकी सैलरी का ढांचा अलग होगा, इसलिए सैलरी स्लिप देख लीजिए।

बोनस, इंसेंटिव और वेरिएबल पे को EMI के हिसाब से बाहर रखिए। लोन देने वाले भी अक्सर इन्हें नहीं गिनते, या दो साल का औसत लेते हैं। दिवाली बोनस लोन में प्रीपेमेंट के लिए बढ़िया है। बारह EMI उसके भरोसे चलाना गलत है।

40% का नियम, और ये कहां नहीं चलता

40% का नियम किसी रेगुलेटर का नहीं है। ये फाइनेंशियल प्लानर का मोटा नियम है, जो जानबूझकर बैंक की रेंज के निचले सिरे पर रखा गया है, ताकि आप कभी किनारे पर खड़े होकर लोन न लें। एक तरह के घर के लिए ये बढ़िया चलता है, बाकियों के लिए नहीं।

घर अपना हो (यानी होम लोन ने किराए की जगह ले ली हो), पति-पत्नी दोनों कमाते हों या परिवार छोटा हो, और बैंक में पहले से बचत हो, तब ये चलता है।

चार आम हालात में ये टूटता है:

  • आप किराया भरते हैं। किराया भी EMI जैसी ही हर महीने की तय रकम है। इसे EMI में जोड़िए और कुल 40% से 45% के आसपास रखिए। 40% EMI और 22% किराया भरने वाले किरायेदार की 62% सैलरी राशन का पहला बिल आने से पहले ही चली जाती है।
  • एक कमाई, कई लोग। एक ही सैलरी पर पत्नी, बच्चे और मां-बाप हों, तो उतने ही टेक-होम वाले दो कमाई वाले कपल से ज्यादा गुंजाइश चाहिए।
  • अभी इमरजेंसी फंड नहीं है। बिना किसी बफर के बड़ी EMI हो, तो एक अस्पताल का बिल या दो नौकरियों के बीच दो महीने का गैप सीधे छूटी हुई EMI और बिगड़ा क्रेडिट स्कोर बन जाता है।
  • फ्लोटिंग रेट। आज की EMI अगले साल की EMI नहीं है। इस पर नीचे और बात है।

कई परिवारों के लिए काम करने वाला बंटवारा: होम लोन टेक-होम का करीब 30% तक, और बाकी सब (कार, पर्सनल, कार्ड) मिलाकर करीब 10% तक। इससे आप 40% के अंदर रहते हैं, और सबसे बड़ा लोन काम का काम करता है। कार इस 10% में फिट हो सकती है। कार खरीदने का 20/4/10 नियम सिर्फ EMI नहीं, गाड़ी का पूरा चलाने का खर्च इसके अंदर रखता है।

₹50,000 में जिग्नेश का महीना

वापस जिग्नेश पर। वो ₹3 लाख के पर्सनल लोन (12%, चार साल) पर महीने के ₹7,900 भरता है, और ₹36,000 के फोन के लिए 12 महीने की क्रेडिट कार्ड EMI में ₹3,000। कुल ₹10,900, यानी टेक-होम का 21.8%। 40% के नियम के आराम से अंदर। आज उसका महीना, और कार लोन लेने पर उसका महीना:

महीने का खर्चआजकार लोन के साथ
किराया (1BHK)₹11,000₹11,000
राशन, दूध, गैस₹9,000₹9,000
बिजली, फोन, इंटरनेट₹2,500₹2,500
आना-जाना (बाइक का पेट्रोल, ऑटो)₹2,500₹2,500
घर पर मां-बाप को भेजता है₹4,000₹4,000
टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस₹1,500₹1,500
कपड़े, बाहर खाना, बाकी सब₹3,600₹3,600
सारी EMI₹10,900₹23,355
कुल खर्च₹45,000₹57,455
इमरजेंसी फंड और SIP के लिए बचे₹5,000₹7,455 कम पड़ें

आज ₹5,000 बचते हैं: ₹3,000 इमरजेंसी फंड में और ₹2,000 SIP में। कार लोन के साथ हर महीने ₹7,455 कम पड़ते हैं, और वो भी गाड़ी के एक लीटर पेट्रोल, इंश्योरेंस या पहली सर्विस से पहले। लोन देने वाले ने 46.7% देखा और हां कह दी, क्योंकि वो उसकी रेंज में है। उसका बजट ना कहता है।

बैंक के हिसाब से जो छूट जाता है, वो किराया है। आज किराया और EMI मिलाकर ₹21,900 है, यानी सैलरी का 43.8%। किरायेदार के लिए 40% से 45% वाली लाइन करीब-करीब यहीं है। अभी ₹12,455 की EMI के लिए जगह नहीं है।

उसके बजट की गाड़ी वो है जो पर्सनल लोन खत्म होने पर आए। करीब तीन साल में वो ₹7,900 खाली हो जाएंगे। वही ₹7,900 कार की EMI के तौर पर, 9% पर पांच साल के लिए, करीब ₹3.8 लाख का लोन उठाते हैं, और बचत को हाथ भी नहीं लगता। बीच में एक-दो इंक्रीमेंट और बचाया हुआ डाउन पेमेंट जोड़िए, तो बिना खींचतान के अच्छी गाड़ी आएगी।

₹1 लाख में सुनील का महीना

सुनील पुणे में पत्नी और सात साल के बेटे के साथ रहता है, हाथ में ₹1,00,000 आते हैं और घर में वो अकेला कमाता है। उसके पास 8% पर 20 साल का ₹30 लाख का होम लोन (EMI ₹25,093) और 9% पर पांच साल का ₹6 लाख का कार लोन (EMI ₹12,455) है। दोनों मिलाकर ₹37,548, यानी सैलरी का 37.5%। 40% के नियम में मुश्किल से फिट है।

दिवाली से पहले उसे किचन नया करवाना है और घर में पेंट करवाना है, करीब ₹3 लाख का काम। 12% पर तीन साल के पर्सनल लोन की EMI महीने की ₹9,964 आती है, हमारे ₹3 लाख लोन की EMI वाले पेज का ही आंकड़ा। उसकी EMI ₹47,512 हो जाएगी, यानी 47.5%। ज्यादातर लोन देने वाले फिर भी मंजूर कर देंगे।

महीने का खर्चआजरिनोवेशन लोन के साथ
होम लोन EMI₹25,093₹25,093
कार लोन EMI₹12,455₹12,455
पर्सनल लोन EMIशून्य₹9,964
राशन, घर की कामवाली₹15,000₹15,000
सोसाइटी मेंटेनेंस, बिजली, गैस, फोन, इंटरनेट₹5,000₹5,000
स्कूल फीस और ट्यूशन₹8,000₹8,000
गाड़ी का पेट्रोल, इंश्योरेंस, सर्विस₹5,000₹5,000
मां-बाप की दवाइयां₹4,000₹4,000
टर्म और हेल्थ इंश्योरेंस₹2,500₹2,500
कपड़े, बाहर खाना, त्योहार, तोहफे₹6,000₹6,000
कुल खर्च₹83,048₹93,012
SIP और इमरजेंसी फंड के लिए बचे₹16,952₹6,988

आज सुनील ₹10,000 SIP में और ₹4,000 इमरजेंसी फंड में डालता है, और ₹2,952 खुले रखता है। लोन के साथ इमरजेंसी फंड चालू रखने के लिए तीन साल तक SIP ₹2,000 करनी पड़ेगी।

लोन का ₹58,715 ब्याज असली कीमत नहीं है। असली कीमत वो ₹8,000 की SIP है जो 36 महीने रुकी रहेगी। यानी ₹2,88,000 बिना निवेश के। सालाना 12% मानें तो SIP कैलकुलेटर तीन साल बाद इसके ₹3.48 लाख दिखाता है, और 17 साल और बढ़ने दें तो करीब ₹23.9 लाख। इक्विटी का रिटर्न गारंटीड नहीं है, पर दिशा साफ है।

साफ रास्ता पहले बचाने का है। 30 महीने तक हर महीने ₹9,964 अलग रखें तो बिना ब्याज के ही ₹2,98,920 हो जाते हैं, और कुछ गड़बड़ हो तो चुकाने को कोई EMI नहीं। या फिर पेंट अभी बचत से करवाइए और किचन तब, जब कार लोन खत्म हो।

अगली EMI से पहले इमरजेंसी फंड और SIP

"ये EMI अफोर्ड होगी?" की सही जांच: कल सैलरी बंद हो जाए, तब भी क्या छह महीने सारी EMI भर पाएंगे? इमरजेंसी फंड इसी के लिए है। आम सलाह तीन से छह महीने के खर्च की है। EMI चल रही हो तो छह महीने का रखिए, क्योंकि छूटी EMI पर पेनल्टी चढ़ती है और क्रेडिट स्कोर बिगड़ता है, जो बाहर का एक खाना छोड़ने से कभी नहीं होता।

  • जिग्नेश का EMI समेत महीने का खर्च ₹45,000 है, तो टारगेट करीब ₹2.7 लाख।
  • सुनील का खर्च ₹83,048 है, तो टारगेट करीब ₹5 लाख।

ये पैसा सेविंग्स खाते में, स्वीप-इन FD में या लिक्विड फंड में रखिए, जहां से एक-दो दिन में मिल जाए। जिस फंड के लिए पेनल्टी भरकर FD तोड़नी पड़े या बुरे वक्त पर शेयर बेचने पड़ें, वो असल में इमरजेंसी फंड नहीं है।

फिर SIP। EMI यानी पहले से खर्च हो चुका पैसा। SIP यानी आगे के लिए पैसा: रिटायरमेंट, बच्चे का कॉलेज, घर का डाउन पेमेंट। हर नए लोन पर SIP रुकती रही, तो 45 की उम्र में गाड़ी का लोन चुका होगा और निवेश कुछ नहीं। इसलिए बजट में SIP को बिल की तरह गिनिए। EMI उसके बाद तय कीजिए, उल्टा नहीं।

जो क्रम टिकता है: पहले इंश्योरेंस, फिर इमरजेंसी फंड, फिर SIP, और उसके बाद ही नई EMI, जितना बचे उतनी।

₹10,000 की EMI में कितना लोन आता है, और रेट बढ़े तो क्या होता है

उसी EMI में लोन के प्रकार और अवधि के हिसाब से बिल्कुल अलग रकम आती है। अक्टूबर 2026 में लोन देने वाले जो रेट ले रहे हैं उसके आसपास के रेट पर, EMI कैलकुलेटर के हिसाब से:

लोनरेट और अवधिमहीने के ₹10,000 कितना लोन चुकाते हैं
होम लोन8%, 20 साल₹11.96 लाख
होम लोन8%, 25 साल₹12.96 लाख
कार लोन9%, 5 साल₹4.82 लाख
कार लोन9%, 7 साल₹6.22 लाख
पर्सनल लोन12%, 3 साल₹3.01 लाख
पर्सनल लोन12%, 5 साल₹4.50 लाख

रेट के लिए: SBI का होम लोन 15 अक्टूबर 2026 से 7.50% से शुरू होता है, और उसका नया कार लोन क्रेडिट स्कोर के हिसाब से 8.55% से 9.50% है। हमने 8% और 9% लिए हैं, क्योंकि ज्यादातर लोगों को शुरुआती रेट नहीं मिलता। पर्सनल लोन का 12% सिर्फ उदाहरण है। आपका रेट आपके स्कोर और कंपनी पर निर्भर करता है।

इस टेबल से दो बातें। छोटा और महंगा लोन बजट सबसे जल्दी खाता है: महीने के ₹10,000 में ₹3 लाख का पर्सनल लोन आता है, पर करीब ₹12 लाख का होम लोन। और अवधि बढ़ाने से थोड़ा ज्यादा लोन मिलता है पर ब्याज बहुत बढ़ता है, इसीलिए शोरूम में सात साल का कार लोन इतना आसान लगता है।

फिर खुद रेट। 7 अक्टूबर 2026 को RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% किया, और रेपो से जुड़े होम लोन उसके पीछे चलते हैं। सुनील के ₹30 लाख के लोन पर 8% से 8.25% होने पर EMI ₹25,093 की जगह ₹25,562, यानी EMI बढ़े तो महीने के करीब ₹469 ज्यादा। पूरा 1% बढ़कर 9% हो तो ₹26,992, यानी ₹1,899 ज्यादा। RBI के फ्लोटिंग रेट EMI लोन के नियमों के मुताबिक रेट रीसेट होने पर लोन देने वाले को आपको ज्यादा EMI, लंबी अवधि या दोनों का मेल चुनने देना होगा। बजट में ज्यादा EMI के लिए जगह रखिए, ताकि लंबी अवधि अकेला रास्ता न बचे। इसका हिसाब रेपो रेट बढ़ने पर होम लोन की EMI में है।

एक और EMI पर साइन करने से पहले पांच सवाल

शोरूम जाने से पहले या "EMI में बदलें" दबाने से पहले, घर बैठकर पिछले तीन महीने के बैंक स्टेटमेंट खोलकर ये देखिए।

  1. इस नई के साथ मेरी सारी EMI मिलाकर टेक-होम का कितना प्रतिशत बनती हैं? कार्ड की EMI और जिस लोन पर आपने साइन किया है, वो भी गिनिए। 40% से ऊपर मतलब चेतावनी। 50% से ऊपर मतलब रुकिए।
  2. क्या मैं किराया भरता हूं? तो उसे जोड़िए, और किराया और EMI मिलाकर 40% से 45% को लाइन मानिए।
  3. क्या मेरा इमरजेंसी फंड नई EMI समेत छह महीने का खर्च कवर करता है? नहीं करता तो पहले वो बनाइए।
  4. क्या मेरी SIP बचती है? नई EMI सिर्फ SIP काटकर ही फिट होती है, तो लोन या तो बहुत बड़ा है या बहुत जल्दी।
  5. हर EMI कब खत्म होती है? चार महीने बाकी वाली ₹3,000 की EMI और चार साल बाकी वाली ₹3,000 की EMI बिल्कुल अलग हैं। कई बार सबसे सस्ता रास्ता यही है कि एक लोन खत्म हो, फिर दूसरा शुरू करें।

जवाब साफ हैं तो EMI अफोर्डेबल है, लोन देने वाले की लिमिट जो भी हो। नहीं हैं, तो बैंक की हां का मतलब सिर्फ इतना है कि बैंक को अपना पैसा वापस मिलने की उम्मीद है। जो बचेगा उसमें जीना तो आपको है।

लोग अक्सर पूछते हैं

₹50,000 की सैलरी पर कितनी EMI अफोर्ड कर सकते हैं?

सारी EMI मिलाकर महीने की करीब ₹15,000 से ₹20,000, यानी टेक-होम का 30% से 40%। बैंक करीब ₹25,000 (50%) तक मान सकता है। किराया भरते हैं तो उसे EMI में जोड़िए और कुल ₹20,000 से ₹22,500 के आसपास रखिए। हमारे उदाहरण में ₹10,900 की EMI वाले ₹50,000 सैलरी के किरायेदार के पास बचत के लिए महीने के सिर्फ ₹5,000 बचते थे।

₹1 लाख की सैलरी पर कितनी EMI सुरक्षित है?

सारी EMI मिलाकर महीने की करीब ₹40,000 तक, जिसमें होम लोन करीब ₹30,000 और बाकी सब करीब ₹10,000 के अंदर। अकेले कमाने वाले पर बच्चों और मां-बाप की जिम्मेदारी हो तो इससे कम रखिए। ₹47,512 की EMI पर हमारे ₹1 लाख वाले उदाहरण को SIP ₹10,000 से घटाकर ₹2,000 करनी पड़ी।

FOIR क्या है और बैंक कितना मानते हैं?

FOIR यानी फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टु इनकम रेशियो, आपकी महीने की आमदनी का वो हिस्सा जो EMI और दूसरी तय किस्तों में जाता है। बैंकों के पेज आम रेंज करीब 40% से 50% बताते हैं, और हर लोन देने वाला अपनी लिमिट खुद रखता है। कुछ ग्रॉस सैलरी पर गिनते हैं और कुछ टेक-होम पर, इसलिए वही EMI एक जगह पास हो सकती है और दूसरी जगह नहीं।

क्या क्रेडिट कार्ड EMI और नो कॉस्ट EMI FOIR में गिनी जाती हैं?

हां। क्रेडिट कार्ड की EMI, नो कॉस्ट EMI भी, किसी भी लोन की तरह आपकी क्रेडिट रिपोर्ट में दिखती है, और कुछ लोन देने वाले कार्ड का मिनिमम अमाउंट ड्यू भी गिनते हैं। 8% पर 20 साल के हिसाब से ₹3,000 की फोन वाली EMI जब तक चलती है, होम लोन करीब ₹3.59 लाख कम मिलता है।

क्या सैलरी का 50% EMI में जाना ज्यादा है?

ज्यादातर घरों के लिए हां। 50% बैंक की आम रेंज का ऊपरी सिरा है। ₹50,000 के टेक-होम पर इससे किराया, खाना, इंश्योरेंस और बचत के लिए ₹25,000 बचते हैं, और रेट बढ़े तो कोई गुंजाइश नहीं। 8% के ₹30 लाख के 20 साल के होम लोन पर 1% रेट बढ़ने से EMI ₹1,899 बढ़ जाती है।

क्या नए लोन के लिए SIP बंद कर देनी चाहिए?

जहां तक हो सके, नहीं। EMI समेत करीब छह महीने के खर्च जितना इमरजेंसी फंड बनाइए, SIP चालू रखिए, और जो बचे उसके हिसाब से नई EMI तय कीजिए। हमारे उदाहरण में तीन साल ₹8,000 की SIP रोकने से, 12% रिटर्न मानें तो, 20 साल बाद करीब ₹23.9 लाख कम हो सकते हैं।

यह लेख आम जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं। रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए। कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए। एडिटोरियल पॉलिसी · संपर्क