आपके 12% और कंपनी के 12% कहां जाते हैं
EPF यानी एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड, नौकरी करने वालों का बचत खाता, जिसमें आप और कंपनी दोनों हर महीने पैसा डालते हैं। रोहन 25 साल का है और उसकी बेसिक सैलरी + DA ₹30,000 महीना है। वो 12% यानी ₹3,600 डालता है। कंपनी भी उतना ही डालती है, पर ₹25,000 की वेज सीलिंग तक की सैलरी का 8.33% पेंशन स्कीम (EPS) में चला जाता है। ये ₹2,083 महीना बनता है, जो 17 सितंबर 2026 से इसकी सबसे ऊंची सीमा है। बाकी ₹1,517 ही EPF में जाते हैं।
यानी रोहन के EPF में हर महीने ₹5,117 जमा होते हैं। अगर हर साल सैलरी 5% बढ़े और EPF पर 8.25% ब्याज मिलता रहे, तो 58 की उम्र तक करीब ₹2.01 करोड़ बनेंगे। इसमें ₹34.59 लाख रोहन के, ₹26.34 लाख कंपनी के और करीब ₹1.40 करोड़ ब्याज के हैं। इन सालों में ₹8.25 लाख और EPS में जाते हैं।
ब्याज कैसे जुड़ता है
EPFO हर महीने के आखिरी बैलेंस पर ब्याज निकालता है और साल में एक बार खाते में डालता है। कैलकुलेटर भी ऐसे ही गिनता है:
साल का ब्याज = Σ हर महीने के आखिर का बैलेंस × दर ÷ 1200
रोहन के पहले साल में ये ब्याज ₹2,744 बनता है। FY 2025-26 के लिए दर 8.25% है, और EPFO हर साल नई दर तय करता है।
PF ₹25,000 तक या पूरी बेसिक पर
कई कंपनियां PF सिर्फ ₹25,000 तक की सैलरी पर काटती हैं। तब रोहन ₹3,600 की जगह ₹3,000 डालेगा, और कंपनी का EPF वाला हिस्सा घटकर करीब ₹917 रह जाएगा, क्योंकि EPS के ₹2,083 तो जाएंगे ही। पूरी नौकरी में PF ऐसे ही कैप रहा, तो 58 पर ₹2.01 करोड़ की जगह करीब ₹75.48 लाख बनेंगे। इसका दूसरा पहलू इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर में दिखेगा: हर महीने हाथ में ज्यादा सैलरी आती है।
VPF और EPS पेंशन
12% से ज्यादा भी डाल सकते हैं। ये ज्यादा वाला हिस्सा वॉलंटरी PF (VPF) कहलाता है और इस पर भी उतना ही ब्याज मिलता है, पर कंपनी 12% ही डालती है। रोहन 20% डाले तो 58 तक करीब ₹2.81 करोड़ बनेंगे। बस ध्यान रखें कि आपके अपने योगदान में साल के ₹2.5 लाख से ऊपर की रकम के ब्याज पर टैक्स लगता है।
EPS का पैसा EPF बैलेंस में नहीं गिना जाता। 10 साल की नौकरी पूरी हो तो 58 से इसमें से हर महीने पेंशन मिलती है। अगर नौकरी जॉइन करते समय सैलरी वेज सीलिंग से ज्यादा थी, तो हो सकता है आप EPS में न हों। तब कंपनी का पूरा 12% EPF में जाता है।
| आपका हिस्सा | बेसिक सैलरी + DA का 12%, VPF के साथ ज्यादा |
|---|---|
| कंपनी का हिस्सा | 12%, इसमें से EPS वाला भाग घटाकर |
| EPS की सीमा | ₹2,083 महीना (17 सितंबर 2026 से वेज सीलिंग ₹25,000) |
| ब्याज दर | FY 2025-26 के लिए 8.25%, हर साल नई तय होती है |
लोग अक्सर पूछते हैं
EPF पर अभी कितना ब्याज मिल रहा है?
FY 2025-26 के लिए 8.25% सालाना, जिसे जून 2026 में मंजूरी मिली। EPFO हर साल नई दर तय करता है। ब्याज हर महीने के आखिरी बैलेंस पर निकलता है और साल में एक बार खाते में आता है। कैलकुलेटर आगे के सभी सालों के लिए यही दर मानता है।
कंपनी के 12% में से EPS में कितना जाता है?
आपकी ₹25,000 तक की सैलरी का 8.33% एम्प्लॉइज पेंशन स्कीम (EPS) में जाता है। 17 सितंबर 2026 से वेज सीलिंग ₹25,000 है, इसलिए EPS में ज्यादा से ज्यादा ₹2,083 महीना जाता है। कंपनी के 12% में से बाकी आपके EPF खाते में जमा होता है।
मेरा PF सिर्फ ₹3,000 महीना क्यों कटता है?
कई कंपनियां PF पूरी बेसिक पर नहीं, बल्कि वेज सीलिंग तक की सैलरी पर ही काटती हैं, जो 17 सितंबर 2026 से ₹25,000 महीना है। ₹25,000 का 12% यानी ₹3,000। आपकी कंपनी कैसे काटती है, ये सैलरी स्लिप में दिख जाएगा।
VPF क्या है, क्या उस पर भी उतना ही ब्याज मिलता है?
जरूरी 12% से ऊपर आप अपनी मर्जी से जो डालते हैं, वो वॉलंटरी PF (VPF) है। इस पर भी EPF वाली दर से ब्याज मिलता है, पर कंपनी 12% ही डालती है। अपने योगदान में साल के ₹2.5 लाख से ऊपर की रकम के ब्याज पर टैक्स लगता है, इसलिए बहुत बड़े VPF पर टैक्स का फायदा घटता है।
क्या EPS पेंशन मेरे EPF बैलेंस में गिनी जाती है?
नहीं। EPS में गया पैसा EPF बैलेंस में नहीं गिना जाता। 10 साल की नौकरी पूरी हो तो 58 की उम्र से इसमें से हर महीने पेंशन मिलती है। कैलकुलेटर EPS में गई रकम अलग दिखाता है और उसे बैलेंस में नहीं जोड़ता।
कैलकुलेटर की जिम्मेदारी: मनोज. आखिरी बार चेक किया: 19-10-2026। दरें और नियम ऑफिशियल सोर्स से मिलाए जाते हैं। कुछ बदल गया हो तो हमें बताएं। संपर्क