ब्याज पर ब्याज, रुपयों में
चक्रवृद्धि ब्याज (कंपाउंड इंटरेस्ट) का मतलब है कि मिला हुआ ब्याज मूल रकम में जुड़ जाता है और फिर उस पर भी ब्याज मिलता है। ₹1 लाख को 8% सालाना पर, सालाना कंपाउंडिंग के साथ, 10 साल के लिए छोड़ दीजिए। ये करीब ₹2,15,893 हो जाता है। उसी ₹1 लाख पर साधारण ब्याज सिर्फ ₹80,000 बनता। यानी कंपाउंडिंग से ₹35,893 ज्यादा मिले, सिर्फ इसलिए कि ब्याज भी ब्याज कमाता रहा।
समय जितना लंबा, फर्क उतना बड़ा। वही ₹1 लाख 30 साल रखें तो करीब ₹10.06 लाख हो जाता है। साधारण ब्याज पर सिर्फ ₹3.4 लाख।
फॉर्मूला
A = P × (1 + r ÷ n)n × t
- P = शुरुआती रकम
- r = सालाना ब्याज दर, दशमलव में (8% यानी 0.08)
- n = साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है
- t = कितने साल
मिला ब्याज यानी A में से P घटाएं। साधारण ब्याज बस P × r × t होता है।
सालाना, तिमाही, मासिक या रोज
ब्याज जितनी बार जुड़ेगा, उतना ज्यादा मिलेगा, पर फर्क लोगों की सोच से छोटा होता है। वही ₹1 लाख, 8% पर, 10 साल के लिए:
| कंपाउंडिंग | 10 साल बाद रकम | असली सालाना दर |
|---|---|---|
| सालाना | ₹2,15,893 | 8.00% |
| छमाही | ₹2,19,112 | 8.16% |
| तिमाही | ₹2,20,804 | 8.24% |
| मासिक | ₹2,21,964 | 8.30% |
| रोज | ₹2,22,535 | 8.33% |
सालाना से तिमाही पर जाएं तो करीब ₹4,900 बढ़ते हैं। मासिक से रोज पर जाएं तो ₹600 भी नहीं। दो डिपॉजिट की तुलना करें तो बताई गई दर नहीं, असली सालाना दर (effective rate) देखें। ज्यादातर बैंक FD और RD में तिमाही कंपाउंडिंग होती है, और FD कैलकुलेटर व RD कैलकुलेटर इसी हिसाब से चलते हैं।
हर महीने पैसा जोड़ें तो
हर महीने कुछ जोड़ते रहते हैं तो आखिरी बॉक्स भरिए। ₹1 लाख से शुरू करें, हर महीने के आखिर में ₹5,000 जोड़ें, 8% पर 10 साल, तो करीब ₹11.17 लाख बनते हैं। आपने ₹7 लाख डाले, यानी ₹4.17 लाख ब्याज। हर जोड़ी गई रकम जिस महीने जाती है, उसी महीने से उसी दर पर ब्याज कमाती है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड के लिए SIP कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। उनमें रिटर्न तय दर पर नहीं मिलता और उसकी कोई गारंटी नहीं होती।
झटपट जांच के लिए 72 का नियम
72 को ब्याज दर से भाग दें तो पता चल जाता है कि पैसा करीब कितने साल में डबल होगा। 8% पर 9 साल, और कैलकुलेटर भी यही कहता है: ₹1 लाख 9 साल में करीब ₹1,99,900 हो जाता है। 12% पर नियम 6 साल कहता है और कैलकुलेटर ₹1,97,382 दिखाता है। मन में आंकड़ा जांचने के लिए ठीक है, सटीक प्लानिंग के लिए नहीं।
लोग अक्सर पूछते हैं
चक्रवृद्धि ब्याज का फॉर्मूला क्या है?
A = P × (1 + r ÷ n)^(n × t)। P यानी शुरुआती रकम, r यानी सालाना दर दशमलव में, n यानी साल में कितनी बार ब्याज जुड़ता है और t यानी कितने साल। A में से P घटाएं तो मिला ब्याज निकल आता है।
साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज में क्या फर्क है?
साधारण ब्याज सिर्फ मूल रकम पर मिलता है। चक्रवृद्धि में पहले जुड़े ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। ₹1 लाख 8% पर 10 साल रखें तो साधारण ब्याज ₹80,000 और सालाना कंपाउंडिंग से ₹1,15,893 बनता है, यानी ₹35,893 ज्यादा।
मासिक कंपाउंडिंग बेहतर है या तिमाही?
एक ही दर पर मासिक में थोड़ा ज्यादा मिलता है। ₹1 लाख 8% पर 10 साल में तिमाही कंपाउंडिंग से ₹2,20,804 और मासिक से ₹2,21,964 बनते हैं। दो डिपॉजिट की तुलना करें तो असली सालाना दर देखें, यहां 8.24% और 8.30%।
72 का नियम क्या है?
72 को सालाना ब्याज दर से भाग दें तो पता चलता है कि पैसा करीब कितने साल में डबल होगा। 8% पर लगभग 9 साल। कैलकुलेटर भी दिखाता है कि 8% पर ₹1 लाख 9 साल में ₹1,99,900 हो जाता है, यानी नियम काफी सही बैठता है।
क्या हर महीने रकम जोड़ सकते हैं?
हां। आखिरी बॉक्स में भरिए। हर रकम महीने के आखिर में जुड़ती है और तब से उसी दर पर ब्याज कमाती है। ₹1 लाख के साथ हर महीने ₹5,000 जोड़ें, 8% पर 10 साल, तो करीब ₹11.17 लाख बनते हैं। इसमें ₹4.17 लाख ब्याज है।
कैलकुलेटर की जिम्मेदारी: मनोज. आखिरी बार चेक किया: 19-10-2026। दरें और नियम ऑफिशियल सोर्स से मिलाए जाते हैं। कुछ बदल गया हो तो हमें बताएं। संपर्क