रेखा बेन इस साल वडोदरा के एक प्राइवेट स्कूल में 26 साल की नौकरी के बाद रिटायर हुईं। पेंशन नहीं है, पर PF, ग्रेच्युटी और पिछले साल बेचे सावली के पास के प्लॉट का पैसा मिलाकर ₹50 लाख बनते हैं, और उन्हें इसमें से हर महीने करीब ₹29,000 चाहिए। बैंक मैनेजर के पास सीधा जवाब है: सीनियर सिटिजन FD, मंथली ब्याज, हर महीने की पहली तारीख को ₹28,998, कुछ देखना नहीं। पुणे में रहने वाले दामाद का जवाब अलग है: पैसा म्यूचुअल फंड में डालिए और SWP से उतनी ही रकम निकालिए। SWP यानी सिस्टेमैटिक विड्रॉल प्लान: फंड हर महीने आपकी कुछ यूनिट बेचकर तय रकम खाते में भेज देता है। "टैक्स कम, और पैसा बढ़ता भी रहेगा।"
दोनों की बात में दम है। पर टैक्स वाली दलील, जो लोग सबसे पहले देते हैं, रेखा बेन के लिए ठीक ₹0 की है। ₹15 लाख पेंशन वाले किसी रिटायर्ड अफसर के लिए वही दलील ₹10 लाख से ज्यादा की है। इसलिए इस लेख में उसी ₹50 लाख को 20 साल तक दोनों रास्तों पर चलाकर देखा है, टैक्स के बाद, चार अलग-अलग तरह के रिटायर्ड लोगों के लिए। और फिर खुलकर देखा है कि दोनों में क्या गड़बड़ हो सकती है।
तुलना कैसे की: वही ₹50 लाख, वही ₹28,998 महीना
बात बराबरी की रहे, इसलिए दोनों रास्तों से हर महीने ठीक उतनी ही रकम हाथ में आती है। फर्क सिर्फ इसमें है कि अंदर क्या होता है।
- FD का रास्ता: ₹50 लाख नॉन-क्यूमुलेटिव FD में, 7% ब्याज, हर महीने पेआउट। अक्टूबर 2026 तक बड़े बैंक सीनियर सिटिजन को करीब 6.75% से 7.05% दे रहे हैं (SBI के रेट कार्ड पर 5 से 10 साल के लिए 7.05% है, We-care का एक्स्ट्रा मिलाकर)। मंथली ब्याज देते समय बैंक थोड़ा कम रेट लगाते हैं, तो पेआउट बनता है ₹50,00,000 × ((1 + 7/400)1/3 − 1) = ₹28,998 महीना, यानी साल के ₹3,47,976। हमने माना है कि 20 साल तक FD इसी 7% पर रिन्यू होती रहेगी। ये बड़ा अनुमान है, इस पर आगे बात करेंगे।
- SWP का रास्ता: वही ₹50 लाख एक ऐसे म्यूचुअल फंड में जिस पर इक्विटी फंड वाला टैक्स लगता है (ये क्यों जरूरी है, नीचे देखेंगे), और हर महीने वही ₹28,998 निकासी। सालाना 8% रिटर्न माना है, जो हमारे SWP कैलकुलेटर का डिफॉल्ट है। ये अंदाजा है, किसी का वादा नहीं।
- टैक्स: नई रिजीम, FY 2026-27 के स्लैब, 20 साल तक यही रहेंगे ऐसा माना है।
SWP आपके लिए नया है तो हमारा लेख SWP से म्यूचुअल फंड से हर महीने इनकम पढ़िए। उसमें SWP कैसे चलता है और ₹50 लाख अलग-अलग निकासी पर कितने साल चलते हैं, ये समझाया है। यहां सिर्फ आमने-सामने की तुलना है।
FD की तरफ एक छोटी बात। वही ₹50 लाख 7% पर क्यूमुलेटिव FD में एक साल रखें तो FD कैलकुलेटर ₹3,59,295 ब्याज दिखाता है। पेआउट वाली FD में ₹3,47,976 मिलते हैं। फर्क बस इतना है कि हर महीने निकाल लिया गया ब्याज आगे कंपाउंड नहीं हो सकता।
SWP खुद कैसे चलता है, यूनिट, NAV और पैसा कितना चलेगा ये किस पर टिका है, ये SWP क्या है में समझाया गया है।
20 साल बाद: किसमें कितना बचता है
दोनों रास्तों से 20 साल में कुल ₹69,59,520 हाथ में आते हैं (₹28,998 × 240)। नीचे अंदर पड़ी रकम है, टैक्स से पहले:
| साल के अंत में | 7% की FD | 8% मानकर SWP |
|---|---|---|
| 1 | ₹50,00,000 | ₹50,53,975 |
| 5 | ₹50,00,000 | ₹53,18,547 |
| 10 | ₹50,00,000 | ₹57,93,132 |
| 15 | ₹50,00,000 | ₹65,00,191 |
| 20 | ₹50,00,000 | ₹75,53,600 |
FD कभी नहीं बढ़ती, क्योंकि ब्याज का हर रुपया बैंक से बाहर चला जाता है। SWP वाला फंड आपकी निकासी से थोड़ा ज्यादा कमाता है, तो वो बढ़त अंदर रहकर कंपाउंड होती है। 20 साल बाद कागज पर करीब ₹25.5 लाख ज्यादा।
अब वो बात जो बैंक के ब्रोशर में नहीं लिखी होती। ज्यादातर परिवार 6% महंगाई मानकर प्लान करते हैं। ये मानें तो FD के ₹50 लाख 2046 में आज के करीब ₹15.59 लाख जितना ही खरीद पाएंगे। और पहले साल घर चलाने वाले ₹28,998 बीसवें साल में आज के करीब ₹9,042 जितने ही रह जाएंगे। SWP भी ये समस्या हल नहीं करता, क्योंकि दोनों में निकासी फिक्स है। फर्क इतना है कि SWP में बड़ी रकम बचती है, जिससे बाद में निकासी बढ़ाई जा सकती है।
SWP की हर किस्त में असल में क्या होता है
टैक्स की पूरी कहानी यहीं से शुरू होती है। FD का पेआउट 100% ब्याज है, और ब्याज मतलब इनकम। SWP का पेआउट मतलब फंड हाउस आपकी कुछ यूनिट वापस खरीदता है। ₹28,998 में से एक हिस्सा आपका अपना पैसा वापस आ रहा है, और बाकी ही मुनाफा है।
एक बार में निवेश किया हो तो हिसाब आसान है। खरीदने के बाद NAV जितने गुना (G) बढ़ी, हर निकासी में से ₹28,998 ÷ G आपकी लागत है और बाकी मुनाफा। पहले महीने G लगभग 1 ही होता है, तो करीब-करीब सब आपका ही पैसा। 240वें महीने तक, 8% सालाना पर, G करीब 5 हो जाता है, तो ज्यादातर हिस्सा मुनाफा।
| साल | अपना पैसा वापस | मुनाफा (टैक्स वाला हिस्सा) | मुनाफे का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ₹3,33,355 | ₹14,621 | 4.2% |
| 2 | ₹3,07,807 | ₹40,169 | 11.5% |
| 5 | ₹2,42,322 | ₹1,05,654 | 30.4% |
| 10 | ₹1,62,649 | ₹1,85,327 | 53.3% |
| 15 | ₹1,09,172 | ₹2,38,804 | 68.6% |
| 20 | ₹73,277 | ₹2,74,699 | 78.9% |
पूरे 20 साल में जो निकला, उसमें ₹34.67 लाख उनका अपना पैसा है और ₹34.93 लाख मुनाफा। यानी "SWP की किस्त में ज्यादातर मूलधन होता है" वाली बात शुरुआती सालों में सही है, बाद में नहीं। ये मायने रखता है, क्योंकि टैक्स का फर्क शुरू में सबसे ज्यादा होता है और साल बीतने के साथ घटता जाता है।
टैक्स के नियम, अक्टूबर 2026 तक
FD का ब्याज आपकी इनकम में जुड़ता है और हर साल आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है। एक बैंक से साल का ब्याज सीनियर सिटिजन के लिए ₹1 लाख और बाकी लोगों के लिए ₹50,000 पार करते ही बैंक 10% TDS काटता है (इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 की धारा 393)। TDS सिर्फ एडवांस है। असली टैक्स आपका स्लैब तय करता है।
म्यूचुअल फंड की निकासी पर कैपिटल गेन टैक्स लगता है, और वो भी सिर्फ मुनाफे वाले हिस्से पर। कितना लगेगा, ये फंड के टाइप पर टिका है:
- इक्विटी-ओरिएंटेड फंड, यानी कम से कम 65% भारत के लिस्टेड शेयरों में। कुछ हाइब्रिड फंड इसी वजह से इक्विटी का हिस्सा 65% या उससे ऊपर रखते हैं, तो शुरू करने से पहले देख लीजिए कि आपके फंड पर कैसा टैक्स लगता है। 12 महीने के अंदर बेची यूनिट: मुनाफे पर 20% (धारा 196)। इससे ज्यादा रखी हों तो: साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर 12.5% (धारा 198)। ऊपर से 4% सेस।
- डेट फंड (65% से ज्यादा डेट और मनी मार्केट में), 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदे गए: मुनाफा शॉर्ट-टर्म माना जाता है और आपके स्लैब से टैक्स लगता है, चाहे जितना भी रखें (धारा 76)। ऊंचे स्लैब वालों के लिए डेट फंड की SWP में FD के मुकाबले टैक्स का खास फायदा नहीं। फर्क बस इतना कि टैक्स सिर्फ मुनाफे वाले हिस्से पर और निकालने पर ही लगता है।
- बीच वाले हाइब्रिड (35% से 65% इक्विटी): 24 महीने बाद लॉन्ग-टर्म, फिर 12.5%। उससे पहले स्लैब रेट। फंड हाउस हर साल टैक्स रेकनर निकालते हैं जिसमें हर टाइप लिखा होता है, जैसे 2026-27 का ये।
नीचे के आंकड़े दो बातें तय करती हैं। पहली, ₹12 लाख तक की इनकम पर मिलने वाली जीरो-टैक्स छूट यानी रिबेट (धारा 156) लॉन्ग-टर्म इक्विटी मुनाफे के टैक्स पर लागू नहीं होती। धारा 198 कहती है कि रिबेट सिर्फ बाकी इनकम के टैक्स के सामने मिलेगी। दूसरी, आपकी बाकी इनकम ₹4 लाख से कम है, जो नई रिजीम में बेसिक छूट की लिमिट है, तो बची हुई छूट उस मुनाफे में एडजस्ट हो जाती है। हमारे उदाहरण में पूरे समय इक्विटी टैक्स वाला रास्ता लिया है। डेट फंड की SWP FD के काफी करीब आ जाएगी।
20 साल का टैक्स, चार तरह के रिटायर्ड लोगों के लिए
वही ₹50 लाख, वही ₹28,998 महीना, वही 7% की FD और 8% माना हुआ फंड। बदलती है सिर्फ व्यक्ति की बाकी इनकम। FD का टैक्स मतलब ब्याज की वजह से बढ़ा टैक्स, जो इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर ब्याज के साथ और बिना ब्याज के निकाला है। SWP का टैक्स ऊपर की टेबल के मुनाफे वाले हिस्से से निकाला है।
| साल की बाकी इनकम | FD टैक्स, हर साल | FD टैक्स, 20 साल | SWP टैक्स, 20 साल | टैक्स के बाद FD का महीने का पेआउट |
|---|---|---|---|---|
| कुछ नहीं (रेखा बेन) | जीरो | जीरो | जीरो | ₹28,998 |
| पेंशन ₹6 लाख | जीरो | जीरो | ₹1,73,170 | ₹28,998 |
| पेंशन ₹15 लाख | ₹63,280 | ₹12,65,600 | ₹1,73,170 | ₹23,725 |
| ₹25 लाख (30% स्लैब) | ₹1,08,570 | ₹21,71,400 | ₹1,73,170 | करीब ₹19,950 |
एक-एक लाइन पढ़िए, क्योंकि जवाब पलट जाता है।
कोई और इनकम नहीं। FD का ₹3,47,976 ब्याज ₹4 लाख की छूट के अंदर है, तो कोई टैक्स नहीं। SWP का मुनाफा भी उसी बची हुई छूट में समा जाता है। SWP का मशहूर टैक्स फायदा यहां जीरो है।
₹6 लाख पेंशन। पेंशन और FD ब्याज मिलाकर करीब ₹9.5 लाख, ₹12 लाख की रिबेट के अंदर, तो FD पर कोई टैक्स नहीं। यहां टैक्स SWP पर लगता है: रिबेट लॉन्ग-टर्म मुनाफे को कवर नहीं करती, तो सातवें साल से, जब साल का मुनाफा ₹1.25 लाख पार करता है, ऊपर की रकम पर 12.5% और सेस देना होता है। दसवें साल ₹7,840, बीसवें साल ₹19,460। यहां टैक्स में FD ही ₹1.73 लाख से जीतती है।
₹15 लाख पेंशन। अब ब्याज का हर रुपया 15% और 20% के स्लैब में गिरता है। FD पर साल का ₹63,280 टैक्स जाता है, और SWP का टैक्स छोटा ही रहता है। 20 साल में फर्क करीब ₹10.9 लाख, SWP के पक्ष में।
₹25 लाख की बाकी इनकम। ब्याज पर सेस मिलाकर 31.2% टैक्स। FD के ₹28,998 में से हाथ में करीब ₹19,950 बचते हैं। 20 साल में ₹21.71 लाख टैक्स, सामने SWP में ₹1.73 लाख।
आखिरी तीन लाइनों में SWP का टैक्स एक ही, ₹1,73,170, है क्योंकि मुनाफा वही है और 12.5% का रेट आपके स्लैब पर नहीं टिका। पहले साल ₹3,040 (शॉर्ट-टर्म मुनाफे पर 20%), दूसरे से छठे साल तक जीरो, और सातवें साल से धीरे-धीरे बढ़ता है।
एक ईमानदार नोट। 20 साल के अंत में SWP में ₹75.54 लाख पड़े हैं, और इनमें से ₹60.20 लाख ऐसा मुनाफा है जिस पर अभी टैक्स नहीं भरा गया। एक ही साल में सब बेचें तो करीब ₹7.66 लाख टैक्स बनेगा, और ₹67.87 लाख बचेंगे। फिर भी ₹50 लाख से काफी आगे, पर टैक्स टला है, खत्म नहीं हुआ।
TDS, फॉर्म 121 और कागजी काम
₹50 लाख एक ही बैंक में हों तो FD साल का ₹3,47,976 ब्याज देती है, जो सीनियर की ₹1 लाख की लिमिट से कहीं ज्यादा है। तो बैंक 10% TDS, यानी साल के ₹34,798, काट लेगा, रेखा बेन के भी, जिनका टैक्स जीरो है। हर टैक्स साल की शुरुआत में बैंक को फॉर्म 121 दे दें तो TDS नहीं कटेगा। इसने फॉर्म 15G और 15H की जगह ली है, और अंदाजन इनकम पर टैक्स जीरो हो तो सीनियर सिटिजन इसे दे सकते हैं (इनकम टैक्स विभाग के FAQ)। भूल गए तो पैसा सिर्फ ITR भरकर रिफंड से वापस मिलेगा।
₹15 लाख पेंशन वाले के लिए उल्टी दिक्कत है। 10% TDS 15 से 20% टैक्स को पूरा नहीं करता, तो बाकी टैक्स एडवांस टैक्स के तौर पर या रिटर्न के समय भरना पड़ेगा। पूरा तरीका हमारे लेख FD ब्याज पर टैक्स, TDS और फॉर्म 121 में है।
रेजिडेंट निवेशक के लिए SWP पर कोई TDS नहीं। इनकम कैपिटल गेन हो तो धारा 393 के हिसाब से TDS नहीं कटता। फंड हाउस या उसके रजिस्ट्रार से कैपिटल गेन स्टेटमेंट डाउनलोड कर सकते हैं, और ये मुनाफा रिटर्न में दिखाना होता है। हर किस्त का टैक्स और बारीकी से देखना हो तो हमारा आने वाला लेख SWP पर टैक्स के नियम इसी के लिए है।
रिस्क की बात, सीधे शब्दों में
ऊपर चार में से तीन लाइनों में SWP अच्छा दिखा। अब वो बात जो तय करती है कि SWP आपके लिए है भी या नहीं।
FD में क्या गड़बड़ हो सकती है। रेट सिर्फ मैच्योरिटी तक फिक्स है, और बैंक FD ज्यादा से ज्यादा 10 साल की होती है। रिन्यू के समय रेट कम हुए तो पेआउट घट जाएगा। ₹50 लाख 7% की जगह 6% पर रिन्यू हुए तो महीने का ब्याज ₹28,998 से घटकर ₹24,876 हो जाएगा। फिर बीमे की बात। DICGC हर बैंक में एक जमाकर्ता के ₹5 लाख तक का बीमा देता है, मूलधन और ब्याज मिलाकर, तो एक ही बैंक में ₹50 लाख का बड़ा हिस्सा बिना बीमे के है। बड़े बैंकों में ज्यादातर लोग ये रिस्क मान लेते हैं। फिर भी कई रिटायर्ड लोग पैसा दो-तीन बैंकों में बांट देते हैं। और महंगाई, जैसा देखा, फिक्स पेआउट को चुपचाप खाती रहती है।
SWP में क्या गड़बड़ हो सकती है। 8% हमारा अंदाजा है, कोई कॉन्ट्रैक्ट नहीं। फंड गिर सकता है, और गिरे हुए समय में भी आप यूनिट बेचते रहते हैं। वही ₹28,998 महीना, अलग-अलग नतीजों में, सब SWP कैलकुलेटर पर निकाला हुआ (क्रैश वाली लाइन में पहला साल महीने-दर-महीने निकाला है और बाकी 19 साल कैलकुलेटर पर):
| फंड क्या करता है | 20 साल बाद बचा |
|---|---|
| हर साल 10% | ₹1,46,20,191 |
| हर साल 8% | ₹75,53,600 |
| हर साल 7% | ₹50,87,863 |
| हर साल 6% | ₹31,52,761 |
| पहले साल 25% गिरे, फिर हर साल 8% | ₹2,29,308 |
आखिरी दो लाइनें देखिए। लगातार 6% मिले तो 20 साल बाद भी पैसा बचा रहता है, बस कम। पर एक खराब पहला साल, और उसके बाद ठीक-ठाक 8%, तो लगभग कुछ नहीं बचता। पहले साल के बाद बैलेंस ₹34,43,964 रह जाता है, और साल के ₹3,47,976 बची रकम के 10% से ज्यादा हो जाते हैं। निकासी सस्ते भाव पर यूनिट बेचती रहती है, और बाद के अच्छे साल उस नुकसान की भरपाई नहीं कर पाते। इसे सीक्वेंस रिस्क कहते हैं, और SWP "बेहतर टैक्स वाली FD" नहीं है, इसकी ये सबसे बड़ी वजह है।
65% या उससे ज्यादा इक्विटी वाला फंड इतना गिर सकता है। डेट फंड में उतार-चढ़ाव काफी कम होता है, पर तब इक्विटी वाला टैक्स फायदा नहीं मिलता। इसलिए सवाल कभी सिर्फ "SWP या FD" नहीं होता। सवाल ये है कि टैक्स और बढ़त के बदले आप बाजार का कितना रिस्क उठा सकते हैं।
दोनों का मेल: आधा-आधा, बफर के साथ
ज्यादातर रिटायर्ड लोगों को एक ही तरफ चुनने की जरूरत नहीं। ₹50 लाख के दो हिस्से कीजिए:
- ₹25 लाख 7% की मंथली पेआउट वाली FD में: ₹14,499 महीना, और मूलधन जस का तस।
- ₹25 लाख एक इक्विटी-ओरिएंटेड हाइब्रिड फंड में, ₹14,499 महीने की SWP के साथ।
कुल वही ₹28,998 महीना। 8% मानकर 20 साल बाद SWP वाले आधे में ₹37,76,800 होंगे, यानी कुल करीब ₹62.77 लाख। पहले साल फंड 25% गिर जाए तो बीसवें साल SWP वाले आधे में ₹1,14,654 ही बचेंगे, पर FD वाले आधे में ₹25 लाख सुरक्षित हैं। कुल करीब ₹26.15 लाख, ₹2.29 लाख से कहीं बेहतर।
टैक्स में, ₹15 लाख पेंशन वाले का FD टैक्स साल के ₹63,280 से घटकर ₹27,140 हो जाता है। और पहले साल के थोड़े शॉर्ट-टर्म टैक्स को छोड़ दें तो SWP वाले आधे का मुनाफा सत्रहवें साल तक ₹1.25 लाख की छूट के अंदर रहता है। 20 साल में उसका टैक्स करीब ₹5,440।
इस मेल से एक काम की सुविधा भी मिलती है। बाजार नीचे हो तो एक साल SWP रोककर उसकी जगह एक FD तोड़ सकते हैं, ताकि खराब भाव पर यूनिट न बेचनी पड़ें। आसान तरीका ये है कि SWP की दो-तीन साल की निकासी (यहां करीब ₹3.5 लाख से ₹5.2 लाख) छोटी FD में बफर की तरह रखिए, और अच्छे सालों में फंड से उसे फिर भर दीजिए।
60 या उससे ज्यादा उम्र है तो FD वाले हिस्से का कुछ भाग सीनियर सिटिजन सेविंग्स स्कीम में जा सकता है, जो अक्टूबर से दिसंबर 2026 के लिए 8.2% दे रही है (स्मॉल सेविंग्स की दरें), हर व्यक्ति के लिए ₹30 लाख की लिमिट के साथ (डाक विभाग का ऑर्डर)। पर ये हर महीने नहीं, हर तिमाही ब्याज देती है। हमारी सीनियर सिटिजन FD गाइड में सीनियर रेट, ₹1 लाख की TDS लिमिट, SCSS और पोस्ट ऑफिस MIS आमने-सामने रखे हैं, तो यहां दोहराते नहीं। SCSS कैलकुलेटर आपकी रकम पर तिमाही का ब्याज बता देगा।
किसे क्या चुनना चाहिए
चार लाइनों वाली टेबल और क्रैश वाली टेबल फिर से देखिए। ज्यादातर लोग इनमें से किसी एक में आएंगे:
- बाकी इनकम बहुत कम या नहीं, और यही पूरी जमा-पूंजी है। FD (और 60 पार हैं तो SCSS) काम कर देगी। SWP से टैक्स बचत जीरो या लगभग जीरो है, और एक खराब पहला साल पूरी जिंदगी भारी पड़ सकता है। थोड़ी बढ़त चाहिए तो फंड वाला हिस्सा छोटा रखिए।
- पेंशन या किराया जो आपको ₹12 लाख के अंदर रखता है। आपके लिए FD टैक्स-फ्री है, SWP नहीं। SWP सिर्फ बढ़त और महंगाई के लिए लीजिए, टैक्स के लिए नहीं।
- ₹15 लाख या ज्यादा पेंशन, या नौकरी अभी चल रही है। सालों में FD का टैक्स लाखों में पहुंचता है, और इक्विटी टैक्स वाली SWP उसका बड़ा हिस्सा बचा लेती है। फिर भी कुछ सालों की निकासी FD में रखिए, ताकि क्रैश आए तो बेचना न पड़े।
- 20 साल तक मूलधन को हाथ नहीं लगाना और उसे बढ़ता देखना है। मेल, जिसमें फंड वाला हिस्सा उतना ही रखिए जितना 25% गिरता देखकर भी आप घबराएं नहीं।
- पहले ही महीने से ₹28,998 का एक-एक रुपया चाहिए, कम में चलाने की कोई गुंजाइश नहीं। फिक्स इनकम की तरफ झुकिए। SWP उन लोगों के लिए बेहतर है जो खराब साल में कम निकाल सकें।
किसी भी कागज पर साइन करने से पहले अपने नंबर चलाकर देखिए। अपनी रकम और निकासी SWP कैलकुलेटर में 8% के साथ 6% पर भी डालिए, और अपनी पेंशन प्लस FD का ब्याज इनकम टैक्स कैलकुलेटर में डालिए। FD का टैक्स जीरो आए तो इस लेख की सबसे काम की बात आपको मिल गई: आपके लिए SWP का टैक्स फायदा जीरो है, और फैसला सिर्फ बढ़त और रिस्क का है।
लोग अक्सर पूछते हैं
हर महीने की इनकम के लिए SWP बेहतर है या FD?
ये आपकी बाकी इनकम और बाजार का रिस्क उठाने की ताकत पर टिका है। ₹50 लाख से हर महीने ₹28,998 लें तो 8% मानकर SWP में 20 साल बाद करीब ₹75.5 लाख बचते हैं, FD में ₹50 लाख, और ऊंचे स्लैब में हैं तो टैक्स भी काफी बचता है। पर पहले साल फंड 25% गिर जाए तो वही SWP बीसवें साल तक लगभग खाली हो सकता है। FD का पेआउट मैच्योरिटी तक फिक्स है।
SWP पर टैक्स FD ब्याज के टैक्स से कैसे अलग है?
FD का पूरा ब्याज हर साल आपके स्लैब से टैक्स होता है। SWP में हर निकासी के सिर्फ मुनाफे वाले हिस्से पर टैक्स लगता है। इक्विटी-ओरिएंटेड फंड में 12 महीने के अंदर 20%, उसके बाद साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर 12.5%, ऊपर से 4% सेस। अप्रैल 2023 के बाद खरीदे डेट फंड में मुनाफे पर स्लैब से टैक्स।
मेरी इनकम ₹12 लाख से कम है, तो भी टैक्स में SWP बेहतर है?
अक्सर नहीं। नई रिजीम में कुल इनकम ₹12 लाख की रिबेट लिमिट के अंदर रहे तो FD का ब्याज टैक्स-फ्री है। रिबेट लॉन्ग-टर्म इक्विटी मुनाफे को कवर नहीं करती, इसलिए ₹6 लाख पेंशन वाले के लिए हमारे उदाहरण में SWP पर 20 साल में ₹1,73,170 टैक्स जाता है और FD पर कुछ नहीं।
SWP की निकासी पर TDS कटता है?
रेजिडेंट निवेशक के लिए नहीं, क्योंकि ये इनकम कैपिटल गेन है। FD में एक बैंक से साल का ब्याज सीनियर सिटिजन के लिए ₹1 लाख और बाकी के लिए ₹50,000 पार होते ही बैंक 10% TDS काटता है। साल का टैक्स जीरो हो तो फॉर्म 121 देने से TDS नहीं कटता।
बाजार गिरे तो SWP का क्या होता है?
आप सस्ते भाव पर यूनिट बेचते रहते हैं, तो पैसा तेजी से घट सकता है। हमारे उदाहरण में ₹50 लाख से हर महीने ₹28,998 लेने पर लगातार 8% मिले तो 20 साल बाद ₹75.5 लाख बचते हैं, पर पहले साल फंड 25% गिरे और फिर 8% मिले तो सिर्फ करीब ₹2.29 लाख। दो-तीन साल की निकासी FD में रखें तो खराब साल में SWP रोक सकते हैं।
क्या पैसा FD और SWP दोनों में बांट सकते हैं?
हां, और कई रिटायर्ड लोग यही करते हैं। ₹25 लाख FD में और ₹25 लाख SWP में रखें तो भी हर महीने वही ₹28,998 मिलते हैं। 8% मानकर 20 साल बाद करीब ₹62.77 लाख बचते हैं, और पहले साल 25% की गिरावट के बाद भी करीब ₹26.15 लाख, क्योंकि FD वाला आधा हिस्सा छुआ ही नहीं गया।
यह लेख आम जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं। रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए। कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए। एडिटोरियल पॉलिसी · संपर्क