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FD के ब्याज पर टैक्स: TDS के नियम, फॉर्म 121 और असली हिसाब

FD पर कटा 10% TDS आपका आखिरी टैक्स नहीं है। FD के ब्याज पर असल में टैक्स कैसे लगता है, फॉर्म 121 कौन दे सकता है, और बेवजह कटा TDS वापस कैसे लें।

बार चार्ट: ₹5 लाख की पांच साल की FD, 6.5% पर, टैक्स के बाद हाथ में बचा ब्याज: जीरो टैक्स पर ₹1,90,210, 10% स्लैब में ₹1,67,613, 20% में ₹1,45,720 और 30% में ₹1,24,510
₹5 लाख, 5 साल की FD, 6.5%: स्लैब के हिसाब से टैक्स के बाद बचा ब्याज।

ज्यादातर लोग मानते हैं कि बैंक ने जो TDS काटा, वही उनकी FD का टैक्स है। ऐसा नहीं है। बैंक का काटा 10% बस एक एडवांस है। FD के ब्याज पर असली टैक्स आपके स्लैब से तय होता है, और बहुत से परिवारों के लिए इसका मतलब है या तो ITR के वक्त ऊपर से और टैक्स भरना, या उल्टा, उस पैसे के रिफंड के लिए महीनों इंतजार करना जो कटना ही नहीं चाहिए था।

1 अप्रैल 2026 से कुछ नाम भी बदल गए हैं। फॉर्म 15G और 15H अब नहीं रहे, उनकी जगह एक ही फॉर्म 121 आ गया है, और इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 अब "पिछला साल" की जगह "टैक्स साल" कहता है। हां, FD के ब्याज के बुनियादी नियम वही हैं। नीचे इन्हें कुछ आम मामलों पर लगाकर देखा है, ₹12 लाख की लाइन के पास खड़े नौकरीपेशा से लेकर दो बैंकों में FD रखने वाले रिटायर्ड सज्जन तक।

टैक्स आपका स्लैब तय करता है, बैंक का 10% नहीं

FD के ब्याज को कोई खास छूट नहीं मिलती। ये आपकी बाकी इनकम (सैलरी, पेंशन, किराया) में जुड़ता है और आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, ठीक RD और पोस्ट ऑफिस डिपॉजिट के ब्याज की तरह। न कम रेट, न सालाना छूट।

देखना है आपका सबसे ऊपर वाला स्लैब। ब्याज के हर रुपये पर उसी रेट से टैक्स लगता है, ऊपर से 4% सेस।

  • नई रिजीम में ₹15.25 लाख की सैलरी: टैक्स ₹1,01,400। इसमें ₹1 लाख FD का ब्याज जोड़िए, टैक्स ₹1,17,000 हो जाता है। यानी ₹1 लाख ब्याज पर ₹15,600 टैक्स, 15.6%।
  • 30% स्लैब में (नई रिजीम में ₹24 लाख से ऊपर, पुरानी में ₹10 लाख से ऊपर) हर ₹1 लाख ब्याज पर ₹31,200 टैक्स जाता है।

अब वो जाल जिसमें नई रिजीम में बहुत लोग फंसते हैं। आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख या उससे कम रहे, तो रिबेट (पुराना 87A, अब सेक्शन 156) पूरा टैक्स खत्म कर देती है। ₹12 लाख से जरा भी ऊपर गए, तो ये सहारा चला जाता है। मान लीजिए सैलरी ₹12.25 लाख है: ₹75,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद टैक्सेबल इनकम ₹11.5 लाख, टैक्स जीरो। अब इसमें ₹1 लाख FD का ब्याज जोड़िए। टैक्सेबल इनकम ₹12.5 लाख हो गई, और इनकम टैक्स कैलकुलेटर ₹52,000 टैक्स दिखाता है। मार्जिनल रिलीफ के बाद भी ₹1 लाख के ब्याज में से आधे से ज्यादा टैक्स में चला गया। आप ₹12 लाख के आसपास हैं, तो FD का प्लान उसी हिसाब से बनाइए।

क्यूम्युलेटिव FD: टैक्स हर साल, मैच्योरिटी पर नहीं

क्यूम्युलेटिव FD में मैच्योरिटी तक हाथ में कुछ नहीं आता, तो बहुत लोग सोचते हैं टैक्स भी आखिर में ही लगेगा। ऐसा होता नहीं है। बैंक ब्याज को हर साल कमाया हुआ मानते हैं, हर साल उस पर TDS काटते हैं और हर साल टैक्स डिपार्टमेंट को रिपोर्ट करते हैं। कानूनी तौर पर कोई व्यक्ति कैश बेसिस अपनाकर सारा ब्याज मैच्योरिटी पर दिखा सकता है, लेकिन तब TDS का क्रेडिट और आपकी इनकम अलग-अलग सालों में पड़ते हैं, और ये बेमेल सिरदर्द बन जाता है। ज्यादातर CA यही कहेंगे कि हर साल दिखाओ। हम भी यही कहेंगे।

FD कैलकुलेटर पर ₹10 लाख, 6.5% पर पांच साल, हर तिमाही कंपाउंडिंग: मैच्योरिटी ₹13,80,420 बनती है।

सालउस साल बना ब्याज10% TDS (लगभग)
1₹66,602₹6,660
2₹71,037₹7,104
3₹75,769₹7,577
4₹80,815₹8,081
5₹86,197₹8,620
कुल₹3,80,420₹38,042

हर साल का ब्याज ₹50,000 से ऊपर है, तो TDS हर साल कटता है, भले एक रुपया भी हाथ में न आया हो। बैंक आमतौर पर ये TDS FD में से ही वसूल लेता है (या लिंक किए सेविंग्स खाते से), इसलिए असली मैच्योरिटी कैलकुलेटर से थोड़ी कम आती है। और FD का साल अप्रैल से मार्च वाले टैक्स साल से शायद ही मेल खाता है, तो आपके AIS के आंकड़े इस टेबल से हूबहू नहीं मिलेंगे। ये नॉर्मल है।

अगर ब्याज हर महीने या तिमाही में खाते में लेना चाहते हैं, तो टैक्स बिल्कुल वही रहता है। फर्क सिर्फ कैश फ्लो का है, जिसकी बात क्यूम्युलेटिव vs नॉन-क्यूम्युलेटिव FD में की है।

FD पर TDS: ₹50,000 और ₹1 लाख की लिमिट

इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 393 के तहत बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस तब TDS काटता है जब किसी टैक्स साल में वो आपको जो ब्याज देता या जोड़ता है, वो इससे ऊपर चला जाए:

  • ₹50,000, अगर आपकी उम्र 60 से कम है
  • ₹1,00,000, अगर आप सीनियर सिटिजन हैं (60 या ऊपर)

रेट 10% है। PAN न हो, या आधार से लिंक न होने की वजह से PAN इनऑपरेटिव हो गया हो, तो ये 20% हो जाता है, और फॉर्म 121 भी नहीं चलेगा। PAN को आधार से लिंक कर लीजिए, दोनों दिक्कतें खत्म। लिमिट हर बैंक के हिसाब से गिनी जाती है, उस बैंक की सारी ब्रांच की सारी FD और RD मिलाकर, हर FD के हिसाब से नहीं। एक बैंक में ₹2-2 लाख की दस FD हैं, तो उनका ब्याज एक ही ढेर माना जाएगा।

TDS तो बस टैक्स का एडवांस है। आखिर में कितना देना है, ये आपका स्लैब तय करता है। मान लीजिए आप 30% स्लैब में हैं और ₹10 लाख की एक साल की FD 7% पर है:

₹10 लाख, 1 साल, 7%रकम
ब्याज₹71,859
बैंक ने काटा TDS (10%)₹7,186
असली टैक्स, 30% + सेस (31.2%)₹22,420
अभी खुद भरना बाकी₹15,234

FD अलग-अलग बैंकों में बांट देना ताकि हर जगह ब्याज ₹50,000 से कम रहे, ये कानूनी है और इससे TDS रुक जाता है। टैक्स नहीं रुकता। हर बैंक आपका ब्याज रिपोर्ट करता है, और सब एक ही जगह दिख जाता है, आपके AIS में।

फॉर्म 121: नया 15G और 15H

अगर साल का आपका टैक्स जीरो बनेगा, तो बैंक को फॉर्म 121 दे दीजिए, वो TDS नहीं काटेगा। 1 अप्रैल 2026 से इसने 15G और 15H दोनों की जगह ले ली है। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के फॉर्म 121 वाले FAQ में शर्तें ये हैं:

  • 60 से कम उम्र: दो शर्तें। साल की अनुमानित कुल इनकम पर टैक्स जीरो हो (रिबेट यहां गिनी जाती है), और जिस इनकम के लिए फॉर्म दे रहे हैं, जैसे FD का ब्याज, वो बेसिक छूट की लिमिट से ज्यादा न हो। नई रिजीम में ये ₹4 लाख है।
  • 60 या उससे ऊपर: सिर्फ पहली शर्त। कुल टैक्स जीरो बनता है, तो फॉर्म दे सकते हैं। फिर भी ब्याज ₹12 लाख पार हो जाए, तो कई बैंक इसे नहीं लेते।
  • सही और चालू PAN जरूरी है। PAN नहीं, तो फॉर्म 121 नहीं।
  • हर बैंक को अलग फॉर्म, हर टैक्स साल। कुछ बैंक हर नई FD के लिए भी नया फॉर्म मांगते हैं।
  • टैक्स साल की शुरुआत में ही दे दीजिए, पहला ब्याज जुड़ने से पहले। कई बैंक नेट बैंकिंग से ऑनलाइन भी ले लेते हैं।
  • ये सिर्फ रेजिडेंट के लिए है। NRI इसे नहीं दे सकते, और NRO FD के ब्याज पर अलग और ज्यादा TDS लगता है।

दो बैंकों में FD वाले रिटायर्ड सज्जन। मान लीजिए 66 साल के एक व्यक्ति को साल की ₹3 लाख पेंशन मिलती है और दो बैंकों से ₹5 लाख FD का ब्याज, यानी कुल ₹8 लाख। नई रिजीम में इनकम टैक्स कैलकुलेटर उनका टैक्स जीरो दिखाता है। दोनों बैंकों में ब्याज ₹1 लाख से ऊपर है, तो फॉर्म 121 के बिना दोनों 10% काटेंगे, कुल करीब ₹50,000, जिसे वापस पाने के लिए फिर इंतजार करना पड़ेगा। वो फॉर्म 121 दे सकते हैं, और अप्रैल में ही दोनों बैंकों को दे देना चाहिए।

विरासत के पैसे वाली गृहिणी। मान लीजिए 45 साल की एक महिला को पिता से ₹70 लाख विरासत में मिले और उन्होंने सारा पैसा एक ही बैंक में 6.5% की एक साल की FD में डाल दिया। ब्याज ₹4,66,211 बनता है, और उनकी कोई दूसरी इनकम नहीं है। रिबेट की वजह से दोनों रिजीम में उनका टैक्स जीरो है। पर ब्याज ₹4 लाख से ऊपर है, तो दूसरी शर्त फेल, और फॉर्म 121 नहीं दे सकतीं। बैंक ₹46,621 काटेगा और उन्हें ITR में वापस क्लेम करना होगा। पैसा अलग-अलग बैंकों में ऐसे बांटा होता कि हर बैंक का ब्याज ₹50,000 से कम रहे, तो TDS कटता ही नहीं, और यहां ये बिल्कुल ठीक है, क्योंकि उनका टैक्स वैसे भी जीरो है।

फॉर्म 121 एक कानूनी घोषणा है, और झूठी घोषणा अपराध है। इनकम टैक्सेबल है तो सिर्फ TDS बचाने के लिए इस पर साइन मत कीजिए।

TDS कट चुका? वापस सिर्फ ITR से मिलेगा

एक बार TDS कट गया, तो बैंक उसे वापस नहीं करता, चाहे आप बाद में फॉर्म 121 दे दें। देर से दिया फॉर्म सिर्फ आगे के ब्याज पर TDS रोकता है, तो अप्रैल में भूल गए थे तो अभी दे दीजिए। जो कट चुका, उसका एक ही रास्ता है: आपकी ITR।

यहीं बहुत लोग गलती करते हैं। "बैंक ने तो टैक्स काट लिया" सोचकर ITR भरना टाल देते हैं। टैक्स जीरो है, तो ITR तो भरनी ही है, चाहे इनकम टैक्सेबल लिमिट से कम हो। ऊपर वाली महिला के ₹46,621 तभी वापस आएंगे जब वो ITR भरेंगी और रिटर्न प्रोसेस होगा, आमतौर पर कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों में। ITR नहीं, तो रिफंड नहीं। पैसा वापस लेना हो या ऊपर से भरना हो, ITR भरने के स्टेप वही हैं, और वो इस पोस्ट के आखिरी हिस्से में दिए हैं।

एडवांस टैक्स: ऊंचे स्लैब वाले यहीं चूकते हैं

ऊंचे स्लैब में TDS के बाद भी टैक्स बाकी रहता है, और टैक्स डिपार्टमेंट नहीं चाहता कि वो बकाया सीधे जुलाई में भरा जाए। ऊपर वाले ₹10 लाख के उदाहरण में TDS के बाद ₹15,234 अभी भरने बाकी हैं।

यहीं एडवांस टैक्स की बात आती है। TDS के बाद साल का बकाया टैक्स ₹10,000 या ज्यादा है, तो उसे किस्तों में भरना होता है (15 जून तक 15%, 15 सितंबर तक 45%, 15 दिसंबर तक 75%, 15 मार्च तक पूरा), ये डिपार्टमेंट के एडवांस टैक्स FAQ में लिखा है। चूके तो ऊपर से ब्याज लगता है। तीन आसान रास्ते:

  • नौकरीपेशा लोग FD का ब्याज अपने एम्प्लॉयर को बता सकते हैं, और कई एम्प्लॉयर फिर सैलरी से थोड़ा ज्यादा TDS काटकर इसे कवर कर देते हैं।
  • बिजनेस इनकम न हो, तो रेजिडेंट सीनियर सिटिजन को एडवांस टैक्स भरना ही नहीं पड़ता। जो बकाया है, वो ITR से पहले भर दें।
  • ऊपर का टैक्स ₹10,000 से कम है, तो ITR के वक्त सेल्फ-असेसमेंट टैक्स के तौर पर भर दीजिए।

टैक्स के बाद FD असल में कितना देती है, स्लैब के हिसाब से

₹5 लाख, पांच साल की FD, 6.5% पर, ये मानकर कि हर साल के ब्याज का टैक्स उसी ब्याज में से जाता है। टैक्स से पहले ये ₹6,90,210 बनती है। टैक्स के बाद:

आपका स्लैबसेस मिलाकर टैक्सटैक्स के बाद रेट5 साल बाद रकमहाथ में बचा ब्याज
जीरो (नई रिजीम, टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख तक)0%6.50%₹6,90,210₹1,90,210
5%5.2%6.16%₹6,78,822₹1,78,822
10%10.4%5.82%₹6,67,613₹1,67,613
15%15.6%5.49%₹6,56,580₹1,56,580
20%20.8%5.15%₹6,45,720₹1,45,720
25%26%4.81%₹6,35,031₹1,35,031
30%31.2%4.47%₹6,24,510₹1,24,510

जीरो स्लैब और 30% स्लैब के बीच वही FD पांच साल में करीब ₹65,700 कम देती है। सालाना असरदार रिटर्न के हिसाब से 6.66% घटकर 4.55% रह जाता है।

अब इसे महंगाई के सामने रखिए: अगस्त 2026 में 4.82%, और ज्यादातर लोग 5–6% मानकर प्लान करते हैं। 20% या 30% स्लैब में 6.5% की FD टैक्स के बाद मुश्किल से महंगाई के बराबर चल पाती है। उसका काम फिर भी है (इमरजेंसी फंड, दो साल दूर का लक्ष्य, वो पैसा जिस पर रिस्क नहीं ले सकते), पर ऊंचे स्लैब में ये पैसा बढ़ाने का जरिया नहीं है। लंबे समय वाली बात हमारी SIP vs FD तुलना में है।

60 पार होते ही FD के टैक्स में क्या बदलता है

  • TDS की ऊंची लिमिट: हर बैंक से साल का ₹1 लाख तक ब्याज, ₹50,000 की जगह।
  • फॉर्म 121 की आसान शर्त: सिर्फ टैक्स जीरो होना चाहिए, ₹4 लाख वाली लिमिट नहीं।
  • ब्याज पर ₹50,000 की छूट: नए एक्ट का सेक्शन 153 (पुराना 80TTB) रेजिडेंट सीनियर सिटिजन को बैंक, को-ऑपरेटिव और पोस्ट ऑफिस के ₹50,000 तक के ब्याज पर छूट देता है, सेविंग्स और FD मिलाकर। पर सिर्फ पुरानी रिजीम में। ऊपर वाले ₹8 लाख वाले रिटायर्ड सज्जन के लिए पुरानी रिजीम में इस छूट के बाद भी ₹52,000 टैक्स बनता है; नई रिजीम में जीरो।
  • एडवांस टैक्स नहीं, अगर बिजनेस इनकम नहीं है।

सीनियर रेट, ब्याज लेने के ऑप्शन और SCSS (अक्टूबर–दिसंबर 2026 के लिए 8.2%) जैसे दूसरे रास्ते हमारी सीनियर सिटिजन FD वाली पोस्ट में हैं।

बिना कोई नियम तोड़े टैक्स कम कीजिए

  • नई रिजीम की ₹12 लाख वाली लिमिट का फायदा लीजिए। इसके अंदर FD का ब्याज असल में टैक्स-फ्री है। बस ₹12 लाख की लाइन पार न हो, ये देखते रहिए।
  • कम स्लैब वाले घरवाले, पर सही तरीके से। आप माता-पिता को पैसा गिफ्ट करें और वो अपने नाम FD करें, तो ब्याज पर टैक्स उनके हाथ में लगेगा, जो जीरो भी हो सकता है, और वो फॉर्म 121 भी दे सकते हैं। पत्नी या पति को गिफ्ट किया पैसा अलग मामला है: क्लबिंग के नियम से उसका ब्याज आपकी ही इनकम माना जाता है। नाबालिग बच्चे की FD पर भी यही।
  • लंबे समय के सुरक्षित पैसे के लिए PPF। अभी 7.1%, और ब्याज पूरा टैक्स-फ्री, साल के ₹1.5 लाख तक। PPF कैलकुलेटर पर देख लीजिए।
  • टैक्स-सेवर FD, सिर्फ पुरानी रिजीम में। ₹1.5 लाख तक पर छूट मिलती है (पुराना 80C, अब सेक्शन 123), पर ब्याज पर टैक्स फिर भी लगता है, और पैसा पांच साल के लिए लॉक।
  • बड़ी रकम के लिए डेट या आर्बिट्राज फंड। डेट फंड के मुनाफे पर भी स्लैब से टैक्स लगता है, पर बेचने पर, हर साल नहीं। आर्बिट्राज फंड पर इक्विटी फंड की तरह टैक्स लगता है। दोनों में थोड़ा रिस्क है जो FD में नहीं।

दो-एक साल दूर के लक्ष्यों के लिए सीधी FD या RD अब भी ठीक है। टैक्स के नियम वही।

ITR भरने से पहले: AIS, TDS और ITR का मिलान

हर बैंक आपका ब्याज आपके PAN पर रिपोर्ट करता है, और सब आपके एनुअल इनफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) में आ जाता है। ITR में FD का ब्याज छोड़ देना, या सिर्फ उतना दिखाना जितने पर TDS कटा, नौकरीपेशा लोगों को मिसमैच नोटिस आने की सबसे आम वजहों में से एक है। तो ITR भरने से पहले ये काम इसी क्रम में कर लीजिए:

  1. ई-फाइलिंग पोर्टल पर AIS और फॉर्म 26AS (अब इसे फॉर्म 168 कहते हैं) खोलिए। देखिए कि हर बैंक का ब्याज और TDS आपके PAN पर दिख रहा है, उन बैंकों का भी जहां सिर्फ सेविंग्स खाता या RD है।
  2. हर बैंक का TDS सर्टिफिकेट (पहले इसे फॉर्म 16A कहते थे) नेट बैंकिंग से डाउनलोड कर लीजिए। AIS में किसी बैंक का आंकड़ा गड़बड़ लगे, तो इसी से मिलाइए। FD का साल अप्रैल से मार्च से मेल नहीं खाता, तो थोड़ा फर्क आना नॉर्मल है। पर पूरा बैंक ही गायब हो, तो वो नॉर्मल नहीं।
  3. पूरे साल का ब्याज जोड़िए और सारा दिखाइए, "Income from Other Sources" में, क्यूम्युलेटिव FD समेत। जो ब्याज सिर्फ FD में जुड़ा है, हाथ में नहीं आया, वो भी गिना जाता है। फिर सारा TDS उसके सामने क्लेम कीजिए।
  4. बाकी हिसाब निपटाइए। स्लैब के हिसाब से टैक्स TDS से ज्यादा बनता है, तो फर्क की रकम सेल्फ-असेसमेंट टैक्स के तौर पर ITR सबमिट करने से पहले भर दीजिए। टैक्स जीरो है, तब भी ITR भरिए, TDS रिफंड होकर वापस आएगा।
  5. जिस खाते में रिफंड चाहिए, वो बैंक खाता प्री-वैलिडेट कीजिए। रिफंड सिर्फ उसी में आता है।
  6. पोर्टल पर हैं ही, तो अगले साल की तैयारी भी कर लीजिए। PAN आधार से लिंक है, ये चेक कीजिए, अगले साल का ब्याज आपको ₹12 लाख के पार तो नहीं ले जाएगा, ये देखिए, और टैक्स जीरो रहना है तो अप्रैल में हर बैंक को फॉर्म 121 दे दीजिए।

ITR भरने से पहले AIS के साथ बीस मिनट बिता लीजिए। बाद में नोटिस का जवाब देने से ये कहीं आसान है।

लोग अक्सर पूछते हैं

क्या क्यूम्युलेटिव FD का ब्याज भी हर साल टैक्सेबल है?

हां, व्यवहार में यही होता है। बैंक हर साल ब्याज को कमाया हुआ मानते हैं, हर साल TDS काटते हैं और आपके AIS में रिपोर्ट करते हैं, इसलिए ITR में भी हर साल स्लैब रेट से दिखाना चाहिए। सारा ब्याज मैच्योरिटी पर दिखाने से हर साल के TDS क्रेडिट से मेल नहीं बैठता।

2026 में FD के ब्याज पर TDS की लिमिट क्या है?

किसी एक बैंक से टैक्स साल का ब्याज ₹50,000 पार होते ही बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक या पोस्ट ऑफिस 10% TDS काटता है, 60 या ऊपर हैं तो ₹1 लाख पार होने पर। ये लिमिट उस बैंक की सारी FD और RD मिलाकर है। PAN न हो या इनऑपरेटिव हो, तो TDS 20% कटता है।

फॉर्म 121 क्या है और कौन दे सकता है?

1 अप्रैल 2026 से फॉर्म 121 ने 15G और 15H की जगह ली है। 60 से कम उम्र में ये तभी दे सकते हैं जब साल का टैक्स जीरो हो और जिस ब्याज के लिए फॉर्म दे रहे हैं वो बेसिक छूट की लिमिट (नई रिजीम में ₹4 लाख) के अंदर हो। सीनियर सिटिजन के लिए बस टैक्स जीरो होना काफी है। हर टैक्स साल की शुरुआत में हर बैंक को दे दीजिए।

FD के ब्याज पर कटा TDS वापस कैसे मिलेगा?

बैंक इसे वापस नहीं करेगा, चाहे बाद में फॉर्म 121 दे दें। अपना AIS और फॉर्म 26AS (अब फॉर्म 168) देखिए, ITR में पूरा ब्याज दिखाकर सारा TDS क्लेम कीजिए, और ई-फाइलिंग पोर्टल पर बैंक खाता प्री-वैलिडेट रखिए। रिटर्न प्रोसेस होने के बाद रिफंड आता है।

FD अलग-अलग बैंकों में बांटने से टैक्स बचता है?

इससे हर बैंक का ब्याज ₹50,000 से कम रखकर TDS बच सकता है, पर टैक्स उतना ही रहता है। हर बैंक आपका ब्याज PAN पर रिपोर्ट करता है, सब आपके AIS में दिखता है और ITR में दिखाना ही पड़ता है।

सीनियर सिटिजन को FD के ब्याज पर कोई टैक्स फायदा मिलता है?

हां। हर बैंक में TDS की लिमिट ₹1 लाख है, फॉर्म 121 के लिए सिर्फ टैक्स जीरो होना चाहिए, और बिजनेस इनकम न हो तो एडवांस टैक्स नहीं भरना पड़ता। पुरानी रिजीम में सेक्शन 153 (पुराना 80TTB) बैंक और पोस्ट ऑफिस के ₹50,000 तक के ब्याज पर छूट देता है, हालांकि अक्सर नई रिजीम फिर भी सस्ती पड़ती है।

यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क