तीन लोग, एक ही सवाल, एक ही हफ्ते में। किरण राजकोट में हीरे के कारखाने में काम करता है और हाथ में ₹30,000 आते हैं। निलेश अहमदाबाद में IT सपोर्ट में है, तनख्वाह ₹50,000। प्रिया पुणे में बैंक की ब्रांच मैनेजर है, महीने के ₹1 लाख। तीनों ने गूगल पर "car loan kitna milega" जैसा कुछ लिखा, और तीनों को डीलर का जवाब मिला: "सर, 100% फंडिंग, कोई दिक्कत नहीं।" ये सेल्स की लाइन है, बैंक का सैंक्शन लेटर नहीं।
बैंक का जवाब एक आंकड़ा होता है, और वो दो नियमों से निकलता है जो आप खुद निकाल सकते हैं। एक, आपकी तनख्वाह कितनी EMI उठा सकती है। दूसरा, गाड़ी की कीमत का कितना हिस्सा बैंक देगा। नीचे दोनों नियम हैं, अक्टूबर 2026 के हिसाब से SBI और HDFC बैंक के कार लोन पेज के असली आंकड़ों के साथ। तीनों को 5 और 7 साल पर कितना लोन मिलेगा, कितनी ऑन-रोड कीमत की गाड़ी बैठेगी, और कौन सी चीजें वो आंकड़ा आप तक पहुंचने से पहले चुपचाप छोटा कर देती हैं।
बैंक दो दरवाजे देखता है, पहले आपकी तनख्वाह
कार लोन के सैंक्शन में दो लिमिट होती हैं, और आपको दोनों में से नीची मिलती है।
- आमदनी की लिमिट। बैंक तय करता है कि आपके हाथ में आने वाली तनख्वाह से कितनी EMI निकल सकती है, फिर अपने रेट और टेन्योर से उल्टा गिनकर लोन की रकम निकालता है। आमदनी का जितना हिस्सा EMI में जाता है, उसे बैंक वाले FOIR (फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टु इनकम रेशियो) या EMI/NMI रेशियो कहते हैं।
- गाड़ी की लिमिट। बैंक गाड़ी की ऑन-रोड कीमत का कुछ प्रतिशत देता है, जिसे लोन-टु-वैल्यू (LTV) कहते हैं। बाकी आपका डाउन पेमेंट।
ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए पहला दरवाजा ही अटकता है। ₹30,000 की तनख्वाह से ₹12 लाख की गाड़ी की EMI नहीं निकलेगी, बैंक चाहे कितने भी प्रतिशत देने को तैयार हो। डीलर की "100% फंडिंग" वाली बात सिर्फ दूसरे दरवाजे की है। आपकी आमदनी पहला दरवाजा पार करती है या नहीं, उस पर वो कुछ नहीं कहती।
आपकी तनख्वाह कितनी EMI उठा सकती है
बैंक कार लोन के लिए कोई एक FOIR का आंकड़ा नहीं बताते। आम तौर पर हाथ में आने वाली तनख्वाह का करीब 40% से 50%, आपकी सारी EMI मिलाकर। कम तनख्वाह और पहले से लोन चल रहा हो तो सख्त वाली तरफ, यानी 40%। प्लानिंग 40% से ही कीजिए, क्योंकि उसमें किराया, स्कूल फीस और घर खर्च के लिए जगह बचती है। अगर आपको सिर्फ CTC पता है, तो इन-हैंड सैलरी कैलकुलेटर महीने की हाथ में आने वाली तनख्वाह निकाल देगा।
बैंक के पेज पर कुछ पक्की लिमिट भी हैं। SBI की नई कार लोन स्कीम में साल की नेट आमदनी कम से कम ₹3,00,000 चाहिए (आवेदक और को-एप्लिकेंट मिलाकर), और नौकरीपेशा का लोन नेट मासिक आमदनी के 48 गुना से ज्यादा नहीं। HDFC बैंक का एलिजिबिलिटी पेज भी साल के वही ₹3 लाख मांगता है, पति-पत्नी या को-एप्लिकेंट की आमदनी जोड़कर, साथ में नौकरी में दो साल और मौजूदा कंपनी में कम से कम एक साल।
| हाथ में तनख्वाह | साल की नेट आमदनी | 40% से EMI | SBI की 48 × NMI लिमिट |
|---|---|---|---|
| ₹30,000 (किरण) | ₹3.6 लाख | ₹12,000 | ₹14.4 लाख |
| ₹50,000 (निलेश) | ₹6 लाख | ₹20,000 | ₹24 लाख |
| ₹1,00,000 (प्रिया) | ₹12 लाख | ₹40,000 | ₹48 लाख |
किरण ₹3 लाख की आमदनी वाली लिमिट बस-बस पार करता है। महीने के ₹24,000 कमाने वाला पार नहीं करेगा, और अर्जी देने के लिए भी को-एप्लिकेंट चाहिए होगा। 48 गुना वाली लिमिट यहां कहीं नहीं अटकती, क्योंकि 40% EMI का नियम उससे काफी छोटा लोन पहले ही निकाल देता है।
हर तनख्वाह पर 5 और 7 साल में कितना लोन मिलेगा
अब रेट। SBI नई कार लोन का रेट क्रेडिट स्कोर से तय करता है। 15 अक्टूबर 2026 के हिसाब से उसके ऑटो लोन रेट पेज पर 8.55% से 9.50% है, पूरे लोन के लिए फिक्स्ड। 800 या ऊपर के स्कोर को 3 से 5 साल के लिए 8.55% और उससे लंबे के लिए 8.65%। 721 से 756 के स्कोर को 9.05% और 9.15%। हम पूरे लेख में 9% लेंगे, जो ठीक उसी बीच वाले बैंड में बैठता है। 9% पर हर ₹1 लाख का लोन 5 साल में महीने के ₹2,076 और 7 साल में ₹1,609 पड़ता है।
40% वाली EMI को कार लोन EMI कैलकुलेटर में उल्टा डालिए, या बस EMI को ऊपर वाले प्रति लाख आंकड़े से भाग दीजिए, लोन निकल आएगा।
| हाथ में तनख्वाह | अधिकतम EMI (40%) | 5 साल में लोन | 7 साल में लोन |
|---|---|---|---|
| ₹30,000 | ₹12,000 | ₹5,78,080 | ₹7,45,848 |
| ₹50,000 | ₹20,000 | ₹9,63,467 | ₹12,43,079 |
| ₹1,00,000 | ₹40,000 | ₹19,26,935 | ₹24,86,159 |
मान्यताएं: साल का 9%, रिड्यूसिंग बैलेंस, कोई और EMI नहीं, हाथ में आने वाली तनख्वाह का 40% EMI की लिमिट। मन में राउंड कर लीजिए: 5 साल में ₹5.8 लाख, ₹9.6 लाख और ₹19.3 लाख, या 7 साल में ₹7.5 लाख, ₹12.4 लाख और ₹24.9 लाख।
7 साल वाला कॉलम करीब 29% बड़ा है, और डीलर का फाइनेंस डेस्क ठीक यही बेचता है: "सर, 7 साल कर दो, बड़ी गाड़ी हो जाएगी।" इसकी कीमत ब्याज है। किरण का ₹5.78 लाख का लोन 5 साल में ₹1,41,920 ब्याज खाता है। उसकी ₹12,000 की EMI को 7 साल तक खींचिए तो ₹7.46 लाख के लोन पर ₹2,62,152 ब्याज। निलेश 5 साल में ₹2,36,533 भरता है, 7 साल में ₹4,36,921। प्रिया के 7 साल के लोन पर ₹8,73,841 ब्याज, 5 साल के ₹4,73,065 का लगभग दोगुना। कार लोन 5 या 7 साल वाला लेख ये हिसाब ठीक से समझाता है। यहां बात सीधी है: लंबी टेन्योर आपको मिलने वाला लोन बढ़ाती है, आपको जो गाड़ी पोसाती है वो नहीं।
कितनी ऑन-रोड कीमत बैठती है, और वो कौन सा सेगमेंट है
लोन मतलब गाड़ी की कीमत नहीं। लोन में अपना डाउन पेमेंट जोड़िए, जो ऑन-रोड कीमत आए उतनी गाड़ी देखनी है। 20% डाउन समझदार केस और 10% डाउन खिंचा हुआ केस।
| तनख्वाह | लोन (5 साल) | 20% डाउन के साथ ऑन-रोड | डाउन पेमेंट | 10% डाउन के साथ ऑन-रोड | डाउन पेमेंट |
|---|---|---|---|---|---|
| ₹30,000 | ₹5,78,080 | ₹7,22,601 | ₹1,44,520 | ₹6,42,312 | ₹64,231 |
| ₹50,000 | ₹9,63,467 | ₹12,04,334 | ₹2,40,867 | ₹10,70,519 | ₹1,07,052 |
| ₹1,00,000 | ₹19,26,935 | ₹24,08,669 | ₹4,81,734 | ₹21,41,039 | ₹2,14,104 |
देखिए, 20% डाउन वाले केस में ऑन-रोड कीमत 10% डाउन से ज्यादा आती है। पहली नजर में उल्टा लगता है, पर वजह सीधी है: लोन तो तनख्वाह से फिक्स हो गया, इसलिए आप जेब से जितना ज्यादा डालेंगे उतनी बड़ी गाड़ी आएगी। डाउन पेमेंट बैंक की लगाई रुकावट नहीं है। यही एक लीवर है जो आपके हाथ में है।
उन कीमतों में क्या आता है, मॉडल से नहीं सेगमेंट से, ऑटोकार इंडिया की हैचबैक लिस्ट और उसकी SUV लिस्ट के हिसाब से, दोनों 12 अक्टूबर 2026 को अपडेट हुई। ये एक्स-शोरूम आंकड़े हैं। ऑन-रोड में रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस जुड़ता है, तो राज्य और वेरिएंट के हिसाब से करीब 10% से 15% ऊपर मानिए।
- ₹6.4 से ₹7.2 लाख ऑन-रोड (किरण): एंट्री और मिड हैचबैक, जिनके एक्स-शोरूम दाम करीब ₹3.7 लाख से शुरू होकर मिड वेरिएंट में करीब ₹7 लाख तक जाते हैं। असल में छोटी हैचबैक का बेस या मिड वेरिएंट, या बड़े सेगमेंट की अच्छी रखी हुई पुरानी गाड़ी।
- ₹10.7 से ₹12 लाख ऑन-रोड (निलेश): प्रीमियम हैचबैक के टॉप वेरिएंट, कॉम्पैक्ट सेडान, और 4 मीटर से छोटी कॉम्पैक्ट SUV के निचले और बीच वाले वेरिएंट, जो एक्स-शोरूम करीब ₹5.7 लाख से शुरू होकर टॉप में ₹15 लाख के ऊपर जाती हैं।
- ₹21 से ₹24 लाख ऑन-रोड (प्रिया): ज्यादातर मिडसाइज SUV सेगमेंट, जो एक्स-शोरूम करीब ₹11 लाख से ₹22 लाख के बीच बैठता है, या टॉप-स्पेक कॉम्पैक्ट SUV और काफी बचा हुआ।
किरण का बैंड तंग है, और ₹30,000 की तनख्वाह का सही मतलब यही है। निलेश के पास सच में चुनाव है। प्रिया को जितनी लेनी चाहिए उससे ज्यादा गाड़ी पोसाती है, जो अलग ही दिक्कत है, उसकी बात आगे।
दूसरा दरवाजा: गाड़ी का कितना हिस्सा बैंक देता है
"100% फंडिंग" यहीं से आती है, और ये झूठ नहीं है, बस ऊपरी लिमिट है। SBI का नई कार लोन वाला पेज कहता है "ऑन-रोड कीमत के 100% तक फाइनेंसिंग", और साफ लिखता है कि ऑन-रोड कीमत में रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस शामिल हैं। HDFC बैंक का एलिजिबिलिटी पेज "चुनिंदा मॉडल के लिए 100% तक ऑन-रोड फंडिंग" देता है। असली शब्द हैं "तक" और "चुनिंदा"। पूरे 100% मजबूत प्रोफाइल को मिलते हैं, ऐसी गाड़ी पर जिसे बैंक जरूरत पड़े तो जब्त करके बेच सके। कई खरीदारों को ऑन-रोड का 80% से 90%, या एक्स-शोरूम का 100% ऑफर होता है, जो लगभग एक ही बात है। एक्सेसरी, एक्सटेंडेड वारंटी और डीलर के ऐड-ऑन आम तौर पर इसके बाहर।
पुरानी गाड़ी पर काफी कम मिलता है। SBI का सर्टिफाइड प्री-ओन्ड कार लोन बैंक के वैल्यूएशन का 85% देता है (आपने बेचने वाले से जो कीमत तय की उसका नहीं), शर्तों में 20% मार्जिन, कम से कम ₹2 लाख का लोन, और टेन्योर 10 साल माइनस गाड़ी की उम्र, ज्यादा से ज्यादा 5 साल। रेट भी ऊंचा, उसी रेट पेज पर 10.60% से 15.75%, नई गाड़ी के 8.55% से 9.50% के सामने। ₹4 लाख का लोन 5 साल में 9% पर EMI ₹8,303 और ब्याज ₹98,201। 10.6% पर EMI ₹8,617 और ब्याज ₹1,17,043। पुरानी गाड़ी के लिए कार लोन या पर्सनल लोन वाला लेख ये बात आगे ले जाता है।
100% मिल रहा हो तब भी दो बार सोचिए। पहले साल में गाड़ी की कीमत 15% से 20% गिर जाती है, तो 100% लोन लेंगे तो एक-दो साल आपका लोन गाड़ी की कीमत से ज्यादा रहेगा। 20% डाउन पेमेंट आपको पहले दिन से सही तरफ रखता है।
चालू EMI और को-एप्लिकेंट से आंकड़ा तेजी से बदलता है
40% सारी EMI मिलाकर है, सिर्फ गाड़ी की नहीं। किरण की फोन और टू-व्हीलर की महीने ₹5,000 की EMI चल रही है। वो सीधे उसके ₹12,000 से घटती है, ₹7,000 बचते हैं, और 5 साल का लोन ₹5.78 लाख से घटकर ₹3,37,214 हो जाता है। 7 साल में ₹4,35,078। एक ₹5,000 की EMI ने ₹2.4 लाख का कार लोन ले लिया।
निलेश की ₹8,000 की पर्सनल लोन EMI चल रही है, 14 महीने बाकी। उसकी लिमिट ₹20,000 से घटकर ₹12,000, और 5 साल का लोन ₹9.63 लाख से ₹5,78,080, यानी बिना लोन वाले किरण जितना ही। 14 महीने रुककर पहले पर्सनल लोन बंद करे, तो पूरे ₹9.63 लाख वापस आ जाते हैं। चौदह महीने का सब्र ₹3.85 लाख की एलिजिबिलिटी के बराबर। बैंक का स्टेटमेंट हाथ में न हो तो पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर बताता है कि चालू लोन में कितना बाकी है।
क्रेडिट कार्ड का बकाया भी गिना जाता है। अर्जी से पहले कार्ड चुका दीजिए, बाद में नहीं।
को-एप्लिकेंट जोड़ना
SBI और HDFC बैंक दोनों को-एप्लिकेंट की आमदनी गिनते हैं, और SBI ₹3 लाख की लिमिट के लिए भी यही कहता है। किरण की पत्नी हेतल स्कूल में ₹25,000 कमाती है। दोनों मिलाकर ₹55,000, EMI की लिमिट ₹22,000 हो जाती है, और 5 साल का लोन बढ़कर ₹10,59,814, 7 साल में ₹13,67,387। इससे वो लोग बेस हैचबैक से कॉम्पैक्ट SUV तक पहुंचते हैं। निलेश ₹30,000 कमाने वाली पत्नी के साथ ₹80,000 का घर बनता है, और 5 साल का लोन ₹15,41,548।
को-एप्लिकेंट पूरे लोन पर साइन करता है, आधे पर नहीं। EMI छूटी तो दोनों की क्रेडिट रिपोर्ट बिगड़ती है। को-एप्लिकेंट आमदनी की लिमिट पार करने या थोड़ी बेहतर गाड़ी लेने के लिए लगाइए। एक तनख्वाह जितना आराम से निकले उससे दोगुना लोन लेने के लिए नहीं।
CIBIL स्कोर और सैलरी अकाउंट क्या करते हैं
कार लोन पर स्कोर की कीमत कितनी है, इसकी सबसे साफ तस्वीर SBI का रेट टेबल है। 5 साल के लोन के लिए 800 या ऊपर को 8.55%, 775 से 799 को 8.70%, 757 से 774 को 8.80%, 721 से 756 को 9.05%, 700 से 720 को 9.30% और 650 से 699 को 9.40%। 650 से नीचे टेबल में ही नहीं। जिनकी क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है उन्हें अलग स्कोर पर 8.80% या 9.05%।
₹8 लाख के लोन पर 5 साल में 8.55% पर EMI ₹16,433 और ब्याज ₹1,85,951। 9.40% पर EMI ₹16,762 और ब्याज ₹2,05,745। फर्क महीने ₹329, यानी पूरे लोन में ₹19,794। 7 साल में ये फर्क ₹28,975 हो जाता है। कमजोर स्कोर सिर्फ रेट नहीं, रकम भी घटा सकता है। HDFC बैंक का पेज कहता है कि कार लोन के लिए कोई मिनिमम स्कोर नहीं है, कम स्कोर लोन की रकम घटा सकता है, और 750 से ऊपर एक्सीलेंट माना जाता है।
लोन देने वाले बैंक में सैलरी अकाउंट हो तो दाम से ज्यादा कागजों में मदद मिलती है। जिस सैलरी पैकेज ग्राहक का सैलरी अकाउंट 12 महीने से SBI में हो, उसके लिए SBI फॉर्म 16 और ITR माफ करता है, और छह महीने के बैंक स्टेटमेंट भी। उसके रेट पेज पर लॉयल्टी कार लोन स्कीम भी है, 8.50% से 9.45%, आम रेंज से पांच बेसिस पॉइंट नीचे। तो डीलर के पास जाने से पहले उस बैंक से पूछिए जो आपकी तनख्वाह पहले से देखता है।
सीधी जांच: एलिजिबिलिटी मतलब पोसाना नहीं
ऊपर का सब बैंक का मैक्सिमम है। वो बैंक को बचाने के लिए बना है, जिसे आपका घर पांच साल खिंचाव में रहे तब भी पैसा वापस मिल जाता है। गाड़ी खरीदने का 20/4/10 नियम आपको बचाने के लिए बना है: 20% डाउन, लोन ज्यादा से ज्यादा 4 साल, और गाड़ी का खर्च हाथ में आने वाली तनख्वाह के 10% के अंदर। वही तीन तनख्वाहें इससे निकालिए।
| तनख्वाह | बैंक की अधिकतम EMI (40%) | बैंक का लोन, 7 साल | 20/4/10 EMI (10%) | 20/4/10 लोन, 4 साल | 20% डाउन के साथ ऑन-रोड |
|---|---|---|---|---|---|
| ₹30,000 | ₹12,000 | ₹7,45,848 | ₹3,000 | ₹1,20,554 | ₹1,50,693 |
| ₹50,000 | ₹20,000 | ₹12,43,079 | ₹5,000 | ₹2,00,924 | ₹2,51,155 |
| ₹1,00,000 | ₹40,000 | ₹24,86,159 | ₹10,000 | ₹4,01,848 | ₹5,02,310 |
नियम जितना कहता है उसका छह गुना बैंक निलेश को देगा। दोनों में से कोई आंकड़ा गलत नहीं है। "कितना मिलेगा" बैंक का सवाल है। "कितना लेना चाहिए" आपका है, और उसका जवाब दोनों कॉलम के बीच कहीं है, डीलर को जितना पसंद आए उससे ज्यादा दाहिने कॉलम के पास। ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए वाजिब बीच का रास्ता: हाथ में आने वाली तनख्वाह का करीब 15% से 20% EMI, 5 साल, 20% डाउन। निलेश के लिए मतलब ₹7,500 से ₹10,000 की EMI, करीब ₹3.6 लाख से ₹4.8 लाख का लोन, और ऑन-रोड ₹5 लाख से ₹6 लाख के आसपास की गाड़ी। अच्छी हैचबैक, वो कॉम्पैक्ट SUV नहीं जो सैंक्शन लेटर दिखाता है।
बैंक 40% की जगह 50% लगाए तो सैंक्शन के आंकड़े और बड़े हो जाते हैं: 5 साल में किरण के लिए ₹7,22,601, निलेश के लिए ₹12,04,334 और प्रिया के लिए ₹24,08,669। बड़ा सैंक्शन कोई तारीफ नहीं है। ये बैंक का भरोसा है कि वो गाड़ी वापस ले सकेगा।
वो लाइन जो लोन में नहीं आती
जो भी गाड़ी लीजिए, EMI महीने की पहली लाइन है, इकलौती नहीं। 20/4/10 वाला लेख गिनता है कि छोटी हैचबैक को भी सड़क पर रखने में महीने करीब ₹7,000 जाते हैं: शहर के आम इस्तेमाल का पेट्रोल, हर साल इंश्योरेंस रिन्यूअल, सर्विस, वक्त के साथ टायर, और पार्किंग का किराया हो तो वो। कॉम्पैक्ट SUV में इनमें से हर चीज ज्यादा। किरण के लिए ₹12,000 EMI और ₹7,000 रनिंग खर्च मतलब ₹19,000, हाथ में आने वाली तनख्वाह का 63%। ₹30,000 की तनख्वाह पर बैंक का मैक्सिमम खराब टारगेट क्यों है, और उसके लिए पुरानी गाड़ी या 20% से 25% की EMI क्यों ज्यादा समझदारी है, असली वजह यही है।
इंश्योरेंस की अलग लाइन इसलिए कि RC पर बैंक का नाम चढ़ता है और लोन चलने तक कॉम्प्रिहेंसिव कवर लोन की शर्त है। पहले साल का प्रीमियम ऑन-रोड कीमत में होता है। दूसरे साल से वो आपको भरना है, हर साल।
आखिर में, चार्ज। 1 अक्टूबर 2024 से RBI के की फैक्ट्स स्टेटमेंट के नियम के मुताबिक हर रिटेल टर्म लोन के साथ KFS देना पड़ता है, जिसमें सारे चार्ज मिलाकर सालाना रेट (APR) हो, और इंश्योरेंस जैसी थर्ड-पार्टी चीजें अलग दिखाई हों। बैंकों की तुलना उस APR पर कीजिए, डीलर मुंह से जो रेट बोले उस पर नहीं। प्रीपेमेंट पर SBI का नई कार लोन वाला पेज कहता है कि प्रीपेमेंट चार्ज नहीं और दो साल बाद फोरक्लोजर चार्ज नहीं। बाकी बैंक फिक्स्ड रेट लोन पर अपनी शर्तें रखते हैं, तो साइन करने से पहले KFS में वो लाइन पढ़ लीजिए।
किरण, निलेश और प्रिया ने इन आंकड़ों का क्या किया
किरण का बैंक उसे 5 साल में ₹5.78 लाख देगा, या टू-व्हीलर की EMI चलने तक ₹3.37 लाख। उसने और हेतल ने तय किया कि पहले वो EMI बंद करेंगे, डाउन पेमेंट के लिए महीने ₹5,000 बचाते रहेंगे, और एक साल बाद पुरानी हैचबैक देखेंगे, जब ₹7,000 की EMI (तनख्वाह का 23%) करीब ₹3.4 लाख का लोन देगी और बचत जोड़कर करीब ₹4 लाख की गाड़ी आएगी।
निलेश का मन ₹11.5 लाख ऑन-रोड की कॉम्पैक्ट SUV पर था, जो पर्सनल लोन बंद होने के बाद बैंक दे देगा। उसने 14 महीने रुकना चुना, छूटे हुए महीने के ₹8,000 डाउन पेमेंट के लिए रिकरिंग डिपॉजिट में डालना, और फिर करीब ₹8 लाख लेना, 5 साल में ₹16,600 के आसपास की EMI। अब भी तनख्वाह का एक तिहाई, पर कोई और लोन नहीं और गाड़ी में ₹3.5 लाख अपने।
प्रिया का सैंक्शन, 5 साल में ₹19.27 लाख, पाने में सबसे आसान और गलत इस्तेमाल में भी सबसे आसान। ₹1 लाख की तनख्वाह पर ₹24 लाख की SUV मतलब 40% EMI और ऊपर से रनिंग खर्च, और दो साल में जो होम लोन लेने की सोच रही है वो तो अभी बाकी। होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर दिखाता है कि ₹40,000 की कार EMI उसमें कितना खा जाती है: वही 40% से 50% का FOIR दोनों लोन के लिए संभालना पड़ता है। उसने 5 साल में ₹10 लाख लिए, EMI ₹20,758, मिडसाइज SUV के लिए ₹4 लाख अपने डाउन। उसकी वजह वो एक लाइन है जिस पर ये पूरा लेख टिका है। बैंक बताता है कि वो ज्यादा से ज्यादा कितना देगा। उसमें से कितना लेना है, ये आपके सिवा कोई तय नहीं करता।
लोग अक्सर पूछते हैं
₹30,000 की सैलरी पर कार लोन कितना मिलेगा?
सारी EMI हाथ में आने वाली तनख्वाह के 40% के अंदर रखें तो EMI की लिमिट ₹12,000। 9% पर यानी 5 साल में करीब ₹5.78 लाख या 7 साल में ₹7.46 लाख का लोन। 20% डाउन के साथ करीब ₹7.2 लाख ऑन-रोड की गाड़ी आती है। चालू EMI सीधे ₹12,000 से घटती है, तो ₹5,000 की टू-व्हीलर EMI 5 साल का लोन घटाकर करीब ₹3.37 लाख कर देती है।
₹50,000 की सैलरी पर कार लोन कितना मिलेगा?
40% की EMI लिमिट मतलब महीने ₹20,000, जो 9% पर 5 साल में करीब ₹9.63 लाख या 7 साल में ₹12.43 लाख का लोन देती है। 20% डाउन के साथ 5 साल में करीब ₹12 लाख ऑन-रोड की गाड़ी। SBI की नेट मासिक आमदनी के 48 गुना वाली लिमिट (यहां ₹24 लाख) नहीं अटकती, EMI का नियम छोटा आंकड़ा पहले निकाल देता है।
बैंक कार लोन की एलिजिबिलिटी कैसे गिनते हैं?
दो जांच। पहली, आपकी नेट आमदनी कितनी EMI उठा सकती है, आम तौर पर सारे लोन मिलाकर हाथ में आने वाली तनख्वाह का 40% से 50%, जिसे बैंक के रेट और टेन्योर पर लोन की रकम में बदला जाता है। दूसरी, गाड़ी की ऑन-रोड कीमत का कितना हिस्सा बैंक देता है, अक्टूबर 2026 के हिसाब से SBI और HDFC बैंक में कागज पर 100% तक, पर असल में अक्सर 80% से 90%। दोनों में से नीचा आंकड़ा आपको मिलता है।
कार लोन के लिए कम से कम कितनी सैलरी चाहिए?
SBI की नई कार लोन स्कीम और HDFC बैंक का एलिजिबिलिटी पेज दोनों साल की कम से कम ₹3 लाख नेट आमदनी मांगते हैं, यानी महीने ₹25,000, और दोनों इसमें को-एप्लिकेंट की आमदनी गिनने देते हैं। SBI नौकरीपेशा का लोन नेट मासिक आमदनी के 48 गुना तक ही देता है। HDFC बैंक को नौकरी में दो साल और मौजूदा कंपनी में एक साल चाहिए।
क्या बैंक सच में ऑन-रोड कीमत का 100% कार लोन देते हैं?
पेज पर लिखा है ऑन-रोड कीमत के 100% तक, जिसमें SBI में रजिस्ट्रेशन और इंश्योरेंस शामिल है, और HDFC बैंक में सिर्फ चुनिंदा मॉडल के लिए। पूरे 100% मजबूत प्रोफाइल को, बैंक को जंचने वाली गाड़ी पर मिलते हैं। पुरानी गाड़ी पर काफी कम: SBI की सर्टिफाइड प्री-ओन्ड स्कीम बैंक के वैल्यूएशन का 85% देती है, 10.60% से 15.75% के ऊंचे रेट पर।
क्या CIBIL स्कोर से कार लोन की रकम बदलती है?
पहले रेट बदलता है, और रकम भी घट सकती है। SBI 5 साल का नया कार लोन 800 या ऊपर के स्कोर पर 8.55% से 650 से 699 के स्कोर पर 9.40% तक देता है। ₹8 लाख पर 5 साल में यानी महीने ₹16,433 के सामने ₹16,762, यानी पूरे लोन में ₹19,794 ज्यादा ब्याज। HDFC बैंक कहता है कि कम स्कोर लोन की रकम घटा सकता है और 750 से ऊपर एक्सीलेंट है।
यह लेख आम जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं। रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए। कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए। एडिटोरियल पॉलिसी · संपर्क