7 साल के कार लोन का तीसरा साल चल रहा है (₹8 लाख, 9% पर, इस पूरी पोस्ट वाला उदाहरण) और आप बैंक ऐप पर लोन अकाउंट खोलते हैं। आंकड़े देखकर थोड़ा झटका लगता है। ₹12,871 की 36 किस्तें जा चुकी हैं, कुल ₹4.6 लाख से थोड़ा ज्यादा। इसमें से करीब ₹1.81 लाख तो सिर्फ ब्याज में गया। ₹8 लाख के लोन में से अभी भी ₹5.17 लाख बकाया दिख रहा है, और 48 किस्तें बाकी हैं। यही लोन 3 साल का लिया होता, तो इसी महीने आखिरी किस्त कट जाती।
लोन की अवधि EMI के आंकड़े से कहीं ज्यादा तय करती है: आप कितना ब्याज भरेंगे, कितने समय तक गाड़ी की कीमत से ज्यादा कर्ज सिर पर रहेगा, और जब गाड़ी को नए टायर और बैटरी चाहिए होंगे तब भी किस्तें चल रही होंगी या नहीं। नीचे उसी ₹8 लाख के लोन पर 3, 5 और 7 साल को आमने-सामने रखा है, रुपयों में, कार लोन EMI कैलकुलेटर पर निकालकर।
3, 5 या 7 साल: EMI बनाम कुल ब्याज
मान लीजिए गाड़ी की एक्स-शोरूम कीमत ₹9 लाख है। रजिस्ट्रेशन, रोड टैक्स और पहले साल का इंश्योरेंस जोड़कर ऑन-रोड करीब ₹10.5 लाख बैठती है (ये राज्य के हिसाब से काफी बदलता है)। आप ₹2.5 लाख डाउन पेमेंट देते हैं और ₹8 लाख का लोन 9% सालाना पर लेते हैं। अच्छे क्रेडिट स्कोर पर ये ठीक-ठाक रेट है, सबसे सस्ता नहीं।
| अवधि | महीने की EMI | कुल ब्याज | बैंक को कुल भुगतान |
|---|---|---|---|
| 3 साल | ₹25,440 | ₹1,15,832 | ₹9,15,832 |
| 4 साल | ₹19,908 | ₹1,55,586 | ₹9,55,586 |
| 5 साल | ₹16,607 | ₹1,96,401 | ₹9,96,401 |
| 6 साल | ₹14,420 | ₹2,38,271 | ₹10,38,271 |
| 7 साल | ₹12,871 | ₹2,81,186 | ₹10,81,186 |
5 की जगह 7 साल लेने पर EMI महीने में करीब ₹3,735 घटती है। पर ब्याज करीब ₹84,800 बढ़ जाता है। 3 की जगह 5 साल लेने पर EMI ₹8,833 घटती है और ब्याज करीब ₹80,600 बढ़ता है। यानी EMI जितनी नीचे लाओ, हर अगला कदम उतना ही महंगा पड़ता है, क्योंकि बढ़े हुए सालों में धीरे-धीरे घटती रकम पर ब्याज लगता रहता है।
दूसरे तरीके से देखें: 7 साल के लोन में ब्याज उधार ली गई रकम का 35% बनता है, जबकि 3 साल के लोन में 14.5%। उसी गाड़ी के लिए ₹1.65 लाख ज्यादा।
लंबा लोन टेबल में दिखने से ज्यादा महंगा क्यों पड़ता है
लंबा कार लोन EMI देखकर जितना हल्का लगता है, असल में उससे भारी पड़ता है। इसकी दो वजहें हैं।
शुरुआती किस्तों में ज्यादातर ब्याज होता है। 7 साल के लोन के पहले साल में आप ₹1,54,455 EMI भरते हैं, जिसमें ₹68,512 ब्याज है। लोन सिर्फ करीब ₹86,000 घटता है। 3 साल के लोन में पहला साल ही बकाया रकम से ₹2.43 लाख कम कर देता है।
लंबी अवधि मतलब अक्सर ऊंचा रेट। बैंकों को 7 साल का कार लोन ज्यादा रिस्की लगता है। मसलन SBI नए कार लोन का रेट क्रेडिट स्कोर और अवधि के हिसाब से तय करता है: 800 या उससे ऊपर के स्कोर पर 3–5 साल के लिए 8.40% और 5 साल से ऊपर के लिए 8.50%, ऐसा उसके ऑटो लोन रेट पेज पर लिखा है (आखिरी अपडेट सितंबर 2026)। SBI में ये फर्क छोटा है। कुछ लेंडर्स के यहां, खासकर डीलर के जरिए करवाए गए लोन में, ये ज्यादा हो सकता है। अगर 7 साल का लोन 9% की जगह 9.5% पर मिला, तो EMI ₹13,075 होगी और कुल ब्याज करीब ₹2.98 लाख हो जाएगा।
एक बात और, होम लोन से उलट, ज्यादातर कार लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, यानी साइन करते वक्त जो EMI तय हुई, वही आखिर तक चलती है। कुछ सरकारी बैंक कम शुरुआती रेट पर फ्लोटिंग रेट कार लोन देते हैं; उनका रेट बाजार के साथ ऊपर-नीचे होता है, दोनों तरफ।
डेप्रिसिएशन: जब कर्ज गाड़ी की कीमत से ज्यादा हो
नई गाड़ी आपके नाम रजिस्टर होते ही उसकी कीमत गिरने लगती है। लोन का बकाया धीरे-धीरे घटता है। अगर बकाया गाड़ी की कीमत से ज्यादा है, तो आप "अंडरवॉटर" हैं: गाड़ी बेचकर भी लोन पूरा नहीं होगा, और चोरी या टोटल लॉस के बाद इंश्योरेंस के पैसे से भी नहीं।
सबसे आसान पैमाना है IDV (इंश्योर्ड डिक्लेयर्ड वैल्यू), यानी गाड़ी चोरी हो जाए या पूरी तरह बर्बाद हो जाए तो इंश्योरेंस कंपनी ज्यादा से ज्यादा इतना देगी। IDV ऑन-रोड कीमत से नहीं, एक्स-शोरूम कीमत से निकलती है, और उसमें से उम्र के हिसाब से तय डेप्रिसिएशन घटता है। इंश्योरेंस कंपनियां ये टेबल इस्तेमाल करती हैं (उदाहरण के लिए IFFCO Tokio की IDV टेबल):
| गाड़ी की उम्र | डेप्रिसिएशन | ₹9 लाख एक्स-शोरूम गाड़ी की IDV |
|---|---|---|
| 6 महीने तक | 5% | ₹8,55,000 |
| 6 महीने से 1 साल | 15% | ₹7,65,000 |
| 1 से 2 साल | 20% | ₹7,20,000 |
| 2 से 3 साल | 30% | ₹6,30,000 |
| 3 से 4 साल | 40% | ₹5,40,000 |
| 4 से 5 साल | 50% | ₹4,50,000 |
पांच साल के बाद कोई तय प्रतिशत नहीं है; आप और इंश्योरेंस कंपनी मिलकर कीमत तय करते हैं, और वो नीचे ही जाती है।
अब हमारे उदाहरण के लिए अच्छी खबर। ₹2.5 लाख डाउन पेमेंट और ₹8 लाख के लोन में हर रिन्यूअल पर बकाया लोन IDV से नीचे रहता है, 7 साल वाले में भी। एक साल बाद 7 साल के लोन में ₹7.14 लाख बाकी होते हैं और IDV ₹7.65 लाख। डाउन पेमेंट ही आपको बचा रहा है।
जीरो डाउन पेमेंट पर तस्वीर बिल्कुल अलग है। कई बैंक ऑन-रोड कीमत का 100% तक लोन दे देते हैं (SBI अपने नए कार लोन पर यही बताता है)। पूरे ₹10.5 लाख 9% पर उधार लीजिए और बकाया को IDV से मिलाइए:
| ₹10.5 लाख का लोन, 9% | IDV | 3 साल का लोन | 5 साल का लोन | 7 साल का लोन |
|---|---|---|---|---|
| पहले दिन | ₹8,55,000 | ₹1.95 लाख कम | ₹1.95 लाख कम | ₹1.95 लाख कम |
| 1 साल बाद | ₹7,65,000 | ₹34,000 ऊपर | ₹1.11 लाख कम | ₹1.72 लाख कम |
| 2 साल बाद | ₹7,20,000 | ₹3.38 लाख ऊपर | ₹35,000 ऊपर | ₹94,000 कम |
| 3 साल बाद | ₹6,30,000 | लोन खत्म | ₹1.53 लाख ऊपर | ₹49,000 कम |
| 4 साल बाद | ₹5,40,000 | लोन खत्म | ₹2.91 लाख ऊपर | ₹9,000 ऊपर |
(कम = IDV बकाया लोन से इतनी कम है; ऊपर = IDV बकाया लोन से इतनी ज्यादा है।)
बिना डाउन पेमेंट वाले 7 साल के लोन में आप करीब चार साल अंडरवॉटर रहते हैं। 5 साल वाले में करीब दो साल। अगर गाड़ी दो साल पूरे होने के कुछ ही दिन बाद चोरी हो जाए, तो इंश्योरेंस कंपनी ₹7.2 लाख देगी और बैंक के करीब ₹94,000 आपको अपनी जेब से भरने होंगे, उस गाड़ी के लिए जो अब आपके पास है ही नहीं।
सेकंड-हैंड बाजार में बिक्री की कीमत IDV जैसी नहीं होती, और पॉपुलर मॉडल ज्यादा भी दिला सकते हैं। पर सबसे तेज गिरावट पहले दो-तीन साल में ही होती है, ठीक तब जब लंबा लोन मुश्किल से घटना शुरू हुआ होता है।
RC पर बैंक का नाम है, तब तक इंश्योरेंस का क्या
जब तक लोन चल रहा है, गाड़ी बैंक के पास हाइपोथिकेट रहती है। आपकी RC और इंश्योरेंस पॉलिसी पर बैंक का नाम होता है, और लोन एग्रीमेंट के हिसाब से पूरी अवधि में कॉम्प्रिहेंसिव (ओन-डैमेज और थर्ड-पार्टी दोनों) इंश्योरेंस रखना पड़ता है। 7 साल का लोन यानी सात साल फुल-कवर का प्रीमियम।
अगर कम डाउन पेमेंट के साथ लंबा लोन ले ही रहे हैं, तो रिटर्न टू इनवॉइस ऐड-ऑन देखिए। चोरी या टोटल लॉस पर ये डेप्रिसिएशन वाली IDV की जगह इनवॉइस की कीमत (आमतौर पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स समेत) देता है, जिससे वो गैप ज्यादातर भर जाता है। ये आमतौर पर गाड़ी के शुरुआती कुछ सालों तक ही मिलता है, तो सही शर्तें अपनी इंश्योरेंस कंपनी से समझ लीजिए। जीरो-डेप्रिसिएशन कवर अलग चीज है; वो रिपेयर क्लेम में काम आता है, IDV वाले गैप में नहीं।
एक प्रैक्टिकल बात। पांचवें से सातवें साल के बीच आमतौर पर वारंटी खत्म हो चुकी होती है, टायर और बैटरी बदलने का समय आता है, और रिपेयर के बिल शुरू होते हैं। 7 साल के लोन में ये खर्च और EMI दोनों साथ भरने पड़ते हैं।
और जब आखिरी किस्त भर जाए, तो हाइपोथिकेशन अपने आप नहीं हटता। बैंक से NOC लीजिए, RC से बैंक का नाम हटवाने के लिए RTO में फॉर्म 35 भरिए, और इंश्योरेंस कंपनी में भी अपडेट करवाइए। इसके बिना बाद में गाड़ी बेचना सिरदर्द बन जाता है।
बड़ी गाड़ी वाला जाल
ज्यादातर लोग 7 साल के लोन में ऐसे ही पहुंचते हैं। पहले EMI तय करते हैं, और अवधि अपने आप फिट हो जाती है।
मान लीजिए आपका बजट महीने में करीब ₹16,600 है। 9% पर 5 साल में ये ₹8 लाख का लोन चुका देता है। 7 साल में यही EMI करीब ₹10.3 लाख का लोन चुकाती है। तो शोरूम वाले "उसी EMI" में अगला वेरिएंट या कॉम्पैक्ट SUV दिखा देते हैं। बड़े लोन पर ब्याज ₹1.96 लाख की जगह करीब ₹3.63 लाख बनता है, दो साल ज्यादा किस्तें भरनी पड़ती हैं, और महंगी गाड़ी का इंश्योरेंस और मेंटेनेंस भी ज्यादा होता है।
अगर किसी गाड़ी के लिए 5 साल के लोन की EMI भारी लग रही है, तो ज्यादातर मामलों में वो गाड़ी अभी आपके लिए महंगी है। किस सैलरी पर कितनी कीमत की गाड़ी ठीक बैठती है, ये 20/4/10 नियम वाली पोस्ट में देखिए।
"7 साल लो और बचा पैसा निवेश करो"
एक समझदारी वाली लगती दलील: 7 साल का लोन लो, और हर महीने बचने वाले ₹3,735 निवेश कर दो। क्या ये चलता है? दो ऐसे लोगों की तुलना करते हैं जो बिल्कुल बराबर पैसा खर्च करते हैं: पांच साल तक हर महीने ₹16,607, फिर अगले दो साल हर महीने ₹12,871।
- 5 साल के लोन वाला: 5 साल की EMI भरता है। लोन खत्म होने के बाद दो साल तक हर महीने ₹12,871 6.5% की RD में डालता है। 7वें साल के आखिर में: ₹3.31 लाख (RD कैलकुलेटर पर)।
- 7 साल के लोन वाला: 7 साल की EMI भरता है और पांच साल हर महीने ₹3,735 6.5% की RD में डालता है (₹2.65 लाख), फिर किस्तें चलते हुए दो साल वो पैसा 6.5% की FD में रखता है। 7वें साल के आखिर में: ₹3.02 लाख (FD कैलकुलेटर पर जांच लीजिए)।
5 साल वाला टैक्स से पहले करीब ₹29,000 ज्यादा बचा लेता है। वजह सीधी सी है: 9% पर उधार लेकर 6.5% पर बचत करने से फायदा नहीं हो सकता। RD के ब्याज पर टैक्स जोड़ें तो फर्क और बढ़ जाता है।
इक्विटी में 12% मानें तो 7 साल वाला रास्ता करीब ₹36,000 आगे निकलता है (SIP कैलकुलेटर पर ₹3.86 लाख बनाम ₹3.51 लाख, टैक्स से पहले)। पर इसके लिए पांच साल तक हर महीने बिना चूके SIP चलनी चाहिए, बाजार साथ देना चाहिए, और गाड़ी के रिपेयर के लिए उसमें से पैसा नहीं निकलना चाहिए। कम EMI के लिए 7 साल लेने वाले ज्यादातर लोग बचा पैसा कभी निवेश करते ही नहीं। अगर आप ये सोच रहे हैं कि लोन लें भी या नहीं, तो कार लोन या कैश वाली पोस्ट देखिए।
प्रीपेमेंट: 7 साल लेकर जल्दी बंद कर सकते हैं?
कुछ लोग लंबी अवधि बैकअप के तौर पर लेते हैं और बोनस से प्रीपे करने का प्लान बनाते हैं। चार्ज आड़े न आए तो ये चल सकता है।
RBI के प्री-पेमेंट चार्ज वाले निर्देश कहते हैं कि 1 जनवरी 2026 या उसके बाद मंजूर या रिन्यू हुए, व्यक्तियों को बिजनेस के अलावा किसी काम के लिए दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लगेगा। पर ज्यादातर कार लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, और उन पर बैंक की अपनी पॉलिसी चलती है। कुछ बैंक कोई चार्ज नहीं लेते (SBI के नए कार लोन पेज के मुताबिक कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं, और दो साल के बाद कोई फोरक्लोजर चार्ज नहीं)। कुछ बकाया रकम का कुछ प्रतिशत लेते हैं, अक्सर पहले एक-दो साल में।
चार्ज जो भी हो, वो आपके सैंक्शन लेटर, लोन एग्रीमेंट और की फैक्ट्स स्टेटमेंट (KFS) में लिखा होना चाहिए। अक्टूबर 2024 से RBI के KFS नियमों के तहत हर रिटेल लोन के लिए बैंक को KFS देना होता है, जिसमें APR (सारी फीस मिलाकर साल का कुल खर्च) और पूरा रीपेमेंट शेड्यूल होता है। जो फीस KFS में नहीं है, वो आपकी साफ मंजूरी के बिना नहीं ली जा सकती। हेडलाइन रेट नहीं, APR मिलाइए: प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज और डीलर के जोड़े हुए ऐड-ऑन असली खर्च बदल देते हैं, और KFS में लिखा APR यही दिखाता है। पार्ट-पेमेंट का सही इस्तेमाल कैसे करें, ये लोन प्रीपे करने वाली पोस्ट में है।
टैक्स: पर्सनल गाड़ी पर कोई फायदा नहीं
अगर आप सैलरी वाले हैं और गाड़ी निजी इस्तेमाल के लिए है, तो कार लोन के ब्याज पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती, न पुरानी रिजीम में न नई में। इलेक्ट्रिक गाड़ी के लोन के ब्याज पर पुरानी छूट (80EEB) सिर्फ अप्रैल 2019 से मार्च 2023 के बीच मंजूर लोन पर थी। यानी होम लोन की तरह यहां लंबी अवधि की तरफ धकेलने वाला कोई टैक्स फायदा नहीं है।
सेल्फ-एम्प्लॉयड लोग और प्रोफेशनल्स अगर गाड़ी काम के लिए इस्तेमाल करते हैं, तो आमतौर पर बिजनेस इस्तेमाल के हिसाब से ब्याज और डेप्रिसिएशन बिजनेस इनकम में खर्च के तौर पर घटा सकते हैं। कितना गिना जाएगा, ये अपने CA से पूछ लीजिए।
एक ही ₹9 लाख की गाड़ी, दो परिवार: अवधि कैसे तय करें
मान लीजिए ऊपर वाले उदाहरण की ही गाड़ी दो परिवार खरीद रहे हैं। कीमत वही, 9% का रेट वही। पर हालात बिल्कुल अलग।
पहले परिवार के पास ₹2.5 लाख डाउन पेमेंट जमा है, गाड़ी आठ-दस साल चलाने का इरादा है, और SIP रोके बिना वो हर महीने ₹16,607 भर सकते हैं। 3 साल की ₹25,440 वाली EMI घर का बजट खींच देगी। इनके लिए 5 साल ठीक है, और ₹19,908 चल जाए तो 4 साल और बेहतर: ब्याज ₹1,96,401 की जगह ₹1,55,586, और बड़े मेंटेनेंस वाले साल आने से पहले किस्तें खत्म। इतने डाउन पेमेंट के साथ ये किसी भी अवधि में अंडरवॉटर नहीं होते। बैंक प्रीपेमेंट चार्ज न ले तो 5 साल का लोन लेकर बोनस से उसे करीब चार साल में निपटा सकते हैं। इन्हें 7 साल की तरफ देखने की भी जरूरत नहीं।
दूसरे परिवार के पास डाउन पेमेंट के लिए कुछ नहीं है। डीलर ₹10.5 लाख की पूरी ऑन-रोड कीमत 7 साल के लिए फाइनेंस करने को तैयार है, और इनका प्लान तीन-चार साल में गाड़ी बदलने का है। इस पूरी पोस्ट में ये सबसे खराब मेल है। 3 साल बाद भी इन पर गाड़ी की ₹6.3 लाख की IDV से करीब ₹49,000 ज्यादा कर्ज होगा, यानी गाड़ी बेचते वक्त पुराने लोन का कुछ हिस्सा अपनी जेब से भरना पड़ेगा, अगली गाड़ी में एक रुपया लगने से पहले। अगर डीलर डाउन पेमेंट के लिए पर्सनल लोन सुझाए, तो पहले उसे पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर पर निकालकर देखिए। एक गाड़ी के लिए दो EMI अच्छा संकेत नहीं है। असली इलाज, इसी क्रम में: एक साल रुककर डाउन पेमेंट जोड़िए, या ऐसी सस्ती गाड़ी लीजिए जिसकी 5 साल की EMI फिट हो, या कम से कम 5 साल का लोन लीजिए, जिसमें ये गैप दूसरे साल तक खत्म हो जाता है। 7 साल लेना ही है, तो सिर्फ बिना प्रीपेमेंट चार्ज वाले लोन और रिटर्न टू इनवॉइस कवर के साथ।
हमारी राय सीधी है। नई गाड़ी के लिए EMI आराम से चल जाए तो 3 या 4 साल, 20% या ज्यादा डाउन पेमेंट के साथ ज्यादातर सैलरी वाले परिवारों के लिए 5 साल, और 7 साल तभी जब इससे छोटा कुछ फिट न हो, आपको यही गाड़ी चाहिए, डाउन पेमेंट अच्छा-खासा है और प्रीपेमेंट पर कोई चार्ज नहीं है। बड़ी गाड़ी अफोर्ड करने के लिए 7 साल कभी नहीं। सेकंड-हैंड गाड़ी पर लोन छोटा रखिए: यूज्ड कार लोन महंगा पड़ता है (SBI का प्री-ओन्ड कार लोन 10.45–15.60%), और गाड़ी पहले से पुरानी है। जो भी सोच रहे हों, अपनी रकम और रेट हर अवधि के लिए कार लोन EMI कैलकुलेटर पर चलाइए और EMI से पहले कुल ब्याज वाली लाइन पढ़िए। किसी और लोन के लिए आम EMI कैलकुलेटर यही काम करता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
₹8 लाख के कार लोन की 5 साल और 7 साल की EMI कितनी होगी?
9% सालाना पर 5 साल की EMI करीब ₹16,607 और 7 साल की ₹12,871 बनती है। कुल ब्याज 5 साल में करीब ₹1.96 लाख और 7 साल में ₹2.81 लाख, यानी कम EMI के लिए आप करीब ₹84,800 ज्यादा देते हैं।
क्या 7 साल का कार लोन लेना सही है?
ज्यादातर मामलों में नहीं। ब्याज काफी ज्यादा लगता है, रेट कभी-कभी ऊंचा होता है, और कम डाउन पेमेंट पर करीब चार साल तक लोन गाड़ी की IDV से ज्यादा रह सकता है। तभी सोचिए जब किसी और तरह EMI बैठ ही न रही हो, डाउन पेमेंट अच्छा हो और प्रीपेमेंट चार्ज न हो ताकि लोन जल्दी बंद कर सकें।
कार लोन के लिए सबसे अच्छी अवधि कौन सी है?
ज्यादातर लोगों के लिए तीन से पांच साल। तीन-चार साल में ब्याज सबसे कम और बड़े मेंटेनेंस से पहले EMI खत्म; 20% या ज्यादा डाउन पेमेंट हो तो पांच साल व्यावहारिक डिफॉल्ट है। गाड़ी के हिसाब से लोन खींचने की जगह वो गाड़ी लीजिए जो 5 साल की EMI में फिट हो।
क्या लंबी अवधि के कार लोन पर बैंक ज्यादा ब्याज लेते हैं?
कई बैंक लेते हैं। मसलन SBI 800 या ज्यादा क्रेडिट स्कोर पर 3–5 साल के लिए 8.40% और 5 साल से ऊपर के लिए 8.50% दिखाता है (उसका रेट पेज, सितंबर 2026)। दूसरे बैंकों और डीलर के जरिए मिले लोन में फर्क ज्यादा हो सकता है, इसलिए की फैक्ट्स स्टेटमेंट में दिया APR मिलाइए।
क्या कार लोन बिना चार्ज के जल्दी चुका या बंद कर सकते हैं?
1 जनवरी 2026 से व्यक्तियों को मंजूर फ्लोटिंग रेट लोन पर RBI के नियम के तहत कोई प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लग सकता। ज्यादातर कार लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, जिन पर बैंक की पॉलिसी चलती है: कुछ बैंक कोई चार्ज नहीं लेते, कुछ बकाया का कुछ प्रतिशत लेते हैं। जो भी लागू है, वो सैंक्शन लेटर, लोन एग्रीमेंट और KFS में लिखा होना चाहिए।
लोन वाली गाड़ी चोरी हो जाए और लोन IDV से ज्यादा हो तो क्या होगा?
इंश्योरेंस कंपनी IDV देगी, और गाड़ी हाइपोथिकेट होने की वजह से वो पैसा पहले बैंक को जाएगा। बकाया लोन ज्यादा है तो बाकी आपको खुद भरना होगा। शुरुआती कुछ सालों में मिलने वाला रिटर्न टू इनवॉइस ऐड-ऑन इनवॉइस की कीमत देता है और ये गैप ज्यादातर भर देता है।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क