बहुत से घरों में कार का पैसा पहले से रखा होता है। दो-तीन बैंकों में ₹8–10 लाख की FD पड़ी है, जो किसी प्लान से कम और आदत से ज्यादा, हर साल रिन्यू होती रहती है। तो कार तय होने के बाद घर में असली बहस इन्हीं FD को लेकर होती है। तोड़कर पूरा पैसा दे दें? या FD को हाथ न लगाएं, लोन ले लें और FD कमाती रहे?
FD तोड़ना ऐसा लगता है जैसे पीछे जा रहे हों। सालों में जोड़ी है, और लोन लें तो बैलेंस जैसा का तैसा रहता है। पर इस फीलिंग में दो नंबर छूट जाते हैं: लोन कितने का पड़ता है, और टैक्स कटने के बाद FD असल में कितना कमाती है। दोनों को आमने-सामने रखिए, फिर सोचिए कि बैंक में कितना पैसा बचा रहना चाहिए और कार की कीमत कितनी तेजी से घटती है, जवाब लगभग अपने आप मिल जाता है। पूरा हिसाब ₹10 लाख की कार पर करते हैं।
FD तोड़ें या रखें: असल में तुलना किसकी है
नकद देना मुफ्त नहीं होता। वो पैसा जो कमा सकता था, वो आप छोड़ देते हैं। इसी को ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट कहते हैं। लोन लें तो बचत और उसकी कमाई आपके पास रहती है, पर ब्याज भरना पड़ता है।
तो कागज पर तुलना सीधी है। अगर आपकी बचत टैक्स के बाद लोन के रेट से ज्यादा कमाती है, तो लोन का मतलब बनता है। कम कमाती है, तो नकद देना सस्ता पड़ता है। ज्यादातर परिवारों की बचत FD में होती है, और वहां हिसाब एकतरफा हो जाता है, आगे देखेंगे।
यहां "नकद" का मतलब है अपनी बचत से बैंक ट्रांसफर या चेक से पेमेंट, थैले में नोट भरकर शोरूम जाना नहीं। इनकम टैक्स के नियम (पुराना सेक्शन 269ST) वैसे भी बेचने वाले को एक सौदे में ₹2 लाख या उससे ज्यादा नोटों में लेने नहीं देते।
अभी कार लोन कितने का पड़ता है
अच्छा क्रेडिट स्कोर हो तो बड़े बैंकों में कार लोन करीब 8.4% से शुरू होकर 9.5% तक जाता है। जैसे SBI का नई कार वाला लोन उसके रेट पेज के मुताबिक 8.40% से 9.35% है, क्रेडिट स्कोर के हिसाब से, और पूरे लोन में रेट फिक्स रहता है। डीलर के जरिए NBFC का लोन अक्सर महंगा होता है, तो डीलर के फाइनेंस वाले के पास बैठने से पहले अपने बैंक का रेट पता कर लीजिए। लोन की रकम में बीमा और एक्सेसरीज जोड़ दी गई हों तो ध्यान रहे, उन पर भी लेंडर ब्याज कमाता है। उदाहरणों में हम 9% लेंगे।
मान लीजिए कार की ऑन-रोड कीमत ₹10 लाख है और आप ₹8 लाख का लोन लेते हैं (बैंक आमतौर पर कीमत का 80–90% तक लोन देते हैं)। 9% पर ये लोन कितने का पड़ता है, कार लोन EMI कैलकुलेटर से देखिए:
| ₹8 लाख, 9% | महीने की EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 3 साल | ₹25,440 | ₹1,15,832 |
| 5 साल | ₹16,607 | ₹1,96,401 |
| 7 साल | ₹12,871 | ₹2,81,186 |
ब्याज के ऊपर आमतौर पर प्रोसेसिंग फीस लगती है, और लोन जल्दी बंद करें तो फोरक्लोजर चार्ज। प्रीपेमेंट चार्ज पर RBI की रोक आम लोगों को दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर है, और ज्यादातर कार लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं, तो वो राहत आमतौर पर आप तक नहीं पहुंचती। RBI के 2025 वाले प्रीपेमेंट नियमों के मुताबिक बाकी लोन में लेंडर की अपनी पॉलिसी चलती है, पर चार्ज पहले से बताना पड़ता है। फिक्स्ड रेट कार लोन में अक्सर बचे हुए अमाउंट का 2–5% चार्ज होता है।
और हां, पर्सनल कार के लोन के ब्याज पर सैलरी वाले को कोई टैक्स छूट नहीं मिलती। पुराना 80EEB डिडक्शन सिर्फ अप्रैल 2019 से मार्च 2023 के बीच मंजूर हुए इलेक्ट्रिक गाड़ी के लोन के लिए था (इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का पेज)। यानी 9% ही असली खर्च है। ITR के वक्त कुछ वापस नहीं आता।
टैक्स के बाद आपकी FD असल में कितना कमाती है
अब दूसरी तरफ। बड़े बैंकों की FD एक से पांच साल के लिए करीब 6–6.5% देती है, और स्मॉल फाइनेंस बैंक 7–8% तक। लेकिन FD के ब्याज पर हर साल आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, और इससे तस्वीर काफी बदल जाती है।
| आपका टैक्स स्लैब | 6.5% की FD, टैक्स के बाद | कार लोन का खर्च |
|---|---|---|
| टैक्स नहीं (इनकम रिबेट के अंदर) | 6.5% | 9% |
| 20% स्लैब (सेस मिलाकर 20.8%) | करीब 5.1% | 9% |
| 30% स्लैब (सेस मिलाकर 31.2%) | करीब 4.5% | 9% |
बिना टैक्स वाला 6.5% भी 9% से काफी नीचे है। 30% स्लैब में आप FD पर 4.5% कमाते हैं और लोन पर 9% भरते हैं। बचत से देने की बजाय जो हर रुपया उधार लेते हैं, उस पर साल का करीब 4.5% का फर्क।
स्लैब जितना ऊंचा, नकद का केस उतना मजबूत। "लोन लो और पैसा निवेश में रहने दो" वाली बात बिजनेस लोन पर चलती है जहां ब्याज खर्च में घटता है, सैलरी वाले की कार पर नहीं।
₹10 लाख की कार: नकद vs लोन, पूरा हिसाब
ज्यादातर लोग ये तुलना करते हैं, और ये गलत है। "मेरी ₹8 लाख की FD पांच साल में ₹3.04 लाख कमाती है, लोन का ब्याज सिर्फ ₹1.96 लाख, तो मैं ₹1 लाख फायदे में।" इसमें ये भूल जाते हैं कि लोन हर महीने आपकी सैलरी से चुक रहा है। नकद दिया होता, तो ₹16,607 की वो EMI बचत के लिए खाली होती।
सही तरीका है कि दोनों केस में महीने का खर्च बराबर रखिए:
- लोन वाला रास्ता: ₹2 लाख डाउन पेमेंट, ₹8 लाख का लोन 5 साल के लिए 9% पर, और ₹8 लाख 6.5% की FD में पड़े रहने दीजिए। ₹16,607 की EMI सैलरी से जाती है।
- नकद वाला रास्ता: पूरे ₹10 लाख बचत से दीजिए। फिर वही ₹16,607 हर महीने 6.5% की RD में 5 साल तक डालिए।
| 5 साल बाद | लोन वाला रास्ता (₹8 लाख की FD) | नकद वाला रास्ता (₹16,607 महीने की RD) |
|---|---|---|
| टैक्स से पहले रकम | ₹11,04,336 | ₹11,78,945 |
| मिला ब्याज | ₹3,04,336 | ₹1,82,525 |
| 30% स्लैब में टैक्स (31.2%) | ₹94,953 | ₹56,948 |
| हाथ में, 30% स्लैब | ₹10,09,383 | ₹11,21,997 |
दोनों रास्तों के आखिर में कार आपकी, लोन खत्म। नकद वाले रास्ते में टैक्स से पहले करीब ₹74,600 ज्यादा बचते हैं, और 30% स्लैब में करीब ₹1.13 लाख ज्यादा। 7.5% वाली स्मॉल फाइनेंस बैंक FD लें, तब भी टैक्स से पहले नकद करीब ₹50,500 आगे रहता है। आंकड़े FD कैलकुलेटर और RD कैलकुलेटर पर चेक कर सकते हैं।
एक शर्त है: नकद वाला रास्ता तभी काम करता है जब आप हर महीने वो ₹16,607 सच में बचाएं। अगर "EMI वाला पैसा" चुपचाप खर्च हो जाए, तो लोन वाले रास्ते में कम से कम ₹8 लाख तो अलग रखे रहे। यहां खुद से ईमानदार रहिए।
अगर बचत म्यूचुअल फंड में है
"मेरा पैसा इक्विटी फंड में 12% कमा रहा है। 9% के लोन के लिए क्यों निकालूं?" बात जायज है, तो इसका हिसाब भी कर लेते हैं, फिर से महीने का खर्च बराबर रखकर।
लोन वाला रास्ता: ₹8 लाख इक्विटी फंड में ही रहते हैं। सालाना 12% मानें तो लमसम कैलकुलेटर पर 5 साल में ₹14,09,873 बनते हैं।
नकद वाला रास्ता: कार के लिए ₹8 लाख के फंड बेचिए, फिर ₹16,607 महीने की SIP चलाइए। 12% पर SIP कैलकुलेटर ₹13,69,851 दिखाता है।
टैक्स से पहले लोन वाला रास्ता करीब ₹40,000 आगे है। इक्विटी टैक्स (₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन पर 12.5%, आखिरी साल के शॉर्ट-टर्म गेन पर 20%, ऊपर से सेस) के बाद पांच साल में ये फर्क घटकर करीब ₹10,000 रह जाता है। और ये छोटा सा फायदा भी हर साल 12% मानकर है। 10% पर तो टैक्स से पहले ही नकद वाला रास्ता करीब ₹8,300 आगे है।
मतलब 9% के कार लोन को सही ठहराने के लिए आपके इक्विटी के पैसे को टैक्स के बाद साल का करीब 11% कमाना होगा, और उन पांच सालों में कोई बुरा दौर नहीं आना चाहिए। हो सकता है, गारंटी नहीं, और ₹8 लाख बाजार में रखकर लोन ढोने के लिए ₹10,000 बहुत कम हैं। अपवाद बस एक है: अभी बेचने पर बड़ा कैपिटल गेन टैक्स लगे, या बाजार बुरी तरह गिरने के बाद बेचना पड़े। तब छोटा और कम समय का लोन कम नुकसान वाला रास्ता है।
पैसा देने के बाद बैंक में कितना बचा रहना चाहिए
लोन के पक्ष में सबसे मजबूत दलील ब्याज दर की नहीं है। वो है लिक्विडिटी, यानी जरूरत के वक्त हाथ में पैसा। FD तोड़ने में पूरी बचत साफ हो रही है, तो ऐसा मत कीजिए।
कार पर एक रुपया भी लगाने से पहले इतना इमरजेंसी फंड अलग रखिए कि घर करीब छह महीने चल सके, FD या स्वीप-इन अकाउंट में। नौकरी जाए या अस्पताल का बिल आए, वो इंतजार नहीं करता, और जल्दबाजी में लिया पर्सनल लोन 9% से कहीं महंगा पड़ता है। मान लीजिए आपका महीने का खर्च ₹50,000 है और ₹12 लाख की बचत है। ₹10 लाख नकद देने पर ₹2 लाख बचते हैं, बस चार महीने का खर्च। यहां छोटा लोन (नीचे डिटेल है) बेहतर रास्ता है, भले थोड़ा ब्याज देना पड़े। सिर पर कर्ज न हो पर बैंक में भी कुछ न हो, ये हालत छोटे लोन से ज्यादा जोखिम वाली है।
किसी और काम के लिए रखे पैसे का भी यही हाल है। वो FD अगले साल बच्चे के एडमिशन के लिए है, तो आज पड़ी है इसलिए "फालतू" नहीं हो जाती।
डेप्रिसिएशन: कार की कीमत तो घटेगी ही
लोन हो या न हो, रजिस्ट्रेशन वाले दिन से कार की कीमत घटने लगती है। बीमा कंपनियां एक्स-शोरूम कीमत पर एक तय डेप्रिसिएशन टेबल लगाकर बीमे की कीमत (IDV) तय करती हैं:
| कार की उम्र | IDV में कटौती |
|---|---|
| 6 महीने तक | 5% |
| 6 महीने से 1 साल | 15% |
| 1 से 2 साल | 20% |
| 2 से 3 साल | 30% |
| 3 से 4 साल | 40% |
| 4 से 5 साल | 50% |
(बीमा कंपनियों की छापी हुई टेबल, जैसे IFFCO Tokio की IDV टेबल।)
लोन के फैसले में ये क्यों मायने रखता है: कम डाउन पेमेंट और लंबी अवधि हो, तो कार की कीमत से ज्यादा लोन बाकी रह सकता है। मान लीजिए एक्स-शोरूम कीमत ₹9 लाख है और आपने 7 साल के लिए 9% पर ₹9 लाख का लोन लिया। एक साल बाद भी करीब ₹8.03 लाख बाकी हैं, जबकि रिन्यूअल पर IDV ₹7.65 लाख। कार चोरी हो जाए या टोटल लॉस हो, तो बीमे के पैसे से लोन भी पूरा नहीं चुकेगा। इस पर और बात 3, 5 या 7 साल का कार लोन वाले लेख में है।
लोन कब ठीक है, और नकद कब बेहतर
नकद आमतौर पर बेहतर है जब:
- अलग रखी उस रकम और पास के दूसरे लक्ष्यों के अलावा पूरा पैसा आपके पास हो।
- आपकी बचत FD, सेविंग्स अकाउंट या डेट फंड में टैक्स से पहले 6–7% कमा रही हो।
- आप 20% या 30% स्लैब में हों, यानी FD टैक्स के बाद 4.5–5% ही दे।
- आपको भरोसा हो कि कार लेने के बाद हर महीने "EMI" जितनी बचत सच में करेंगे।
लोन ज्यादा सही बैठता है जब:
- नकद देने में वो अलग रखी रकम या किसी तय लक्ष्य का पैसा लग रहा हो।
- आपका पैसा लंबे समय के लिए इक्विटी में है, और अभी बेचने पर बड़ा टैक्स लगे या बड़ी गिरावट के बाद बेचना पड़े।
- कार बिजनेस या प्रोफेशन में इस्तेमाल होती हो। तब ब्याज और डेप्रिसिएशन बिजनेस खर्च में गिने जा सकते हैं, तो टैक्स के बाद लोन सस्ता पड़ता है। कितना लागू होगा, ये आपके CA बता देंगे।
- सच में सस्ता ऑफर मिल रहा हो। कुछ कार कंपनियां नवरात्रि-दिवाली पर कम रेट या "0%" वाली स्कीम लाती हैं।
"0%" ऑफर में देखिए कि बदले में क्या छोड़ रहे हैं। अक्सर नकद वाला डिस्काउंट चुपचाप गायब हो जाता है या प्रोसेसिंग फीस जुड़ जाती है। मान लीजिए पूरा पैसा एक साथ देने पर ₹40,000 कम लगते हैं, यानी आज ₹7.6 लाख, या "0%" पर 36 महीनों में ₹8 लाख (₹22,222 महीना)। ठीक से हिसाब लगाएं तो वो "0%" लोन साल का करीब 3.4% पड़ता है। 30% टैक्स के बाद भी FD इससे ज्यादा देती है, तो यहां लोन ठीक है। पर पता तभी चलेगा जब हिसाब करेंगे। अक्टूबर 2024 से RBI के नियम के मुताबिक रिटेल लोन पर लेंडर को आपको की फैक्ट्स स्टेटमेंट (KFS) देना होता है, जिसमें सारे चार्ज मिलाकर सालाना रेट (APR) लिखा होता है। विज्ञापन वाला रेट नहीं, वो APR मिलाइए। बताया गया रेट कैसे गुमराह कर सकता है, ये फ्लैट vs रिड्यूसिंग ब्याज दर वाले लेख में समझाया है।
बीच का रास्ता: थोड़ा नकद, थोड़ा लोन
एक ही छोर पकड़ना जरूरी नहीं। बहुत से परिवारों के लिए सबसे अच्छा जवाब है बड़ा डाउन पेमेंट और छोटा, कम समय का लोन।
वही ₹10 लाख की कार लीजिए। ₹6 लाख बचत से दीजिए और ₹4 लाख का लोन 3 साल के लिए 9% पर लीजिए। EMI ₹12,720 और कुल ब्याज ₹57,916। ₹8 लाख, 5 साल वाले लोन के ₹1,96,401 से मिलाइए। बैंक में ₹4 लाख ज्यादा रहते हैं, और कार की कीमत असल में गिरने से काफी पहले लोन खत्म हो जाता है।
| ₹10 लाख की कार के लिए विकल्प | बचत से | लोन | EMI | कुल ब्याज |
|---|---|---|---|---|
| पूरा नकद | ₹10 लाख | नहीं | नहीं | नहीं |
| थोड़ा नकद + लोन, 3 साल | ₹6 लाख | ₹4 लाख | ₹12,720 | ₹57,916 |
| 80% लोन, 5 साल | ₹2 लाख | ₹8 लाख | ₹16,607 | ₹1,96,401 |
| 80% लोन, 7 साल | ₹2 लाख | ₹8 लाख | ₹12,871 | ₹2,81,186 |
आखिरी लाइन से बचिए। बड़ी कार EMI में "फिट" करने के लिए 7 साल खींचेंगे, तो ब्याज कहीं ज्यादा लगेगा और कार की कीमत से ज्यादा लोन बाकी रहने का असली खतरा रहेगा।
काम का नियम: अलग रखी रकम छुए बिना जितना डाउन पेमेंट हो सके कीजिए, बाकी का लोन 3–4 साल से ज्यादा नहीं, और EMI इतनी छोटी रखिए कि महीने की SIP पर कैंची न चले। 20/4/10 नियम (20% डाउन पेमेंट, ज्यादा से ज्यादा 4 साल, EMI और कार चलाने का खर्च मिलाकर महीने की इनकम के 10% से कम) चेक करने का अच्छा तरीका है। बोनस आए तो छोटा लोन जल्दी चुकाना आसान है (पहले फोरक्लोजर चार्ज चेक कर लीजिए)। साल-दर-साल बकाया कैसे घटता है, ये साधारण EMI कैलकुलेटर पर दिखता है।
FD तोड़नी है तो इस क्रम में तोड़िए
मान लीजिए हिसाब नकद की तरफ जाता है, या बड़े डाउन पेमेंट और छोटे लोन की तरफ। फिर भी FD तोड़ने में थोड़ा ध्यान चाहिए, क्योंकि सारी FD एक जैसी नहीं होतीं।
पहले हर FD की रकम, रेट और मैच्योरिटी की तारीख एक कागज पर लिख लीजिए। कौन सी FD अलग रखी रकम के तौर पर रहेगी, ये पहले तय कीजिए, हो सके तो वो जो सबसे आसानी से हाथ आए, जैसे सैलरी अकाउंट पर लगा स्वीप-इन। बाकी तोड़ी जा सकती हैं। सबसे कम रेट वाली पहले तोड़िए, और कोई FD कुछ हफ्तों में मैच्योर हो रही हो तो उसे पूरा होने दीजिए। FD जल्दी बंद करें तो ज्यादातर बैंक बुक किया हुआ रेट नहीं, बल्कि पैसा जितने समय सच में रहा उस अवधि का रेट देते हैं, और कई बैंक ऊपर से थोड़ी पेनल्टी भी काटते हैं। सही नियम आपके बैंक के ऐप या FD की रसीद पर मिल जाएगा। आमतौर पर इससे जवाब नहीं बदलता, क्योंकि 30% स्लैब में आप साल के करीब 4.5% के फर्क से निकल रहे हैं, पर कौन सी FD पहले तोड़नी है, ये इससे तय हो सकता है।
फिर फाइनेंस की बात से पहले कीमत पक्की कीजिए। डीलर से पूछिए कि पूरा पैसा एक साथ देने पर ऑन-रोड कीमत कितनी होगी, लिखकर लीजिए, और उसके बाद ही पूछिए कि लोन या "0%" स्कीम में कितना पड़ेगा। थोड़ा लोन ले रहे हैं, तो साइन करने से पहले KFS मांगिए और उसमें APR और फोरक्लोजर चार्ज पढ़ लीजिए। पेमेंट अपने खाते से बैंक ट्रांसफर से कीजिए।
जो कदम ज्यादातर लोग छोड़ देते हैं, वो डिलीवरी के बाद का है। अगली सैलरी वाले दिन, जो EMI आपने नहीं ली, उतनी की RD शुरू कीजिए, हमारे उदाहरण में ₹16,607 महीना, और स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन दे दीजिए ताकि खर्च होने से पहले पैसा खाते से निकल जाए। ऊपर की टेबल में नकद वाला रास्ता आगे निकला, उसकी पूरी वजह यही RD है। ये न हो, तो आपने बस अपनी FD खर्च कर दी।
हमारी राय सीधी है। सैलरी वाले हैं, 20% या 30% स्लैब में हैं, और पैसा FD में पड़ा है, तो कार के लिए FD तोड़िए, अलग रखी रकम को हाथ मत लगाइए, और जो EMI भरनी थी उसे महीने की बचत बना दीजिए। लोन सिर्फ उतने हिस्से का लीजिए जो उस रकम को घटाए बिना न दे पाएं, और उसे तीन-चार साल में खत्म कीजिए। टैक्स के बाद 4.5% कमाने वाली FD पासबुक में दिखती रहे, इसके लिए 9% भरना, ये हिसाब बैठता नहीं।
लोग अक्सर पूछते हैं
कार नकद में लेना बेहतर है या लोन पर?
पैसा FD में है और देने के बाद भी बैंक में घर के कुछ महीनों के खर्च जितना पैसा बचा रहता है, तो ज्यादातर नकद सस्ता पड़ता है। कार लोन करीब 9% का पड़ता है और सैलरी वालों को उस पर टैक्स छूट नहीं मिलती, जबकि 6.5% की FD 30% स्लैब में टैक्स के बाद करीब 4.5% ही देती है। नकद देने के बाद बैंक में लगभग कुछ न बचे, तो छोटा और कम समय का लोन ज्यादा सुरक्षित है।
क्या कार खरीदने के लिए FD तोड़नी चाहिए?
ज्यादातर हां, उतना हिस्सा जो इमरजेंसी फंड या पास के किसी लक्ष्य के लिए नहीं है। ₹10 लाख की कार के उदाहरण में, नकद देकर EMI जितनी रकम RD में डालने पर ₹8 लाख का लोन लेकर FD रखने से टैक्स से पहले करीब ₹74,600 ज्यादा बचे, और 30% स्लैब में करीब ₹1.13 लाख ज्यादा।
₹8 लाख के कार लोन पर 9% से EMI कितनी बनेगी?
5 साल के लिए करीब ₹16,607 महीना, और कुल ब्याज करीब ₹1.96 लाख। 3 साल में EMI करीब ₹25,440 और ब्याज करीब ₹1.16 लाख; 7 साल में EMI घटकर ₹12,871 हो जाती है पर ब्याज बढ़कर करीब ₹2.81 लाख।
कार लोन के ब्याज पर टैक्स छूट मिलती है?
सैलरी वाले हैं और कार पर्सनल है, तो नहीं। पुराना 80EEB डिडक्शन सिर्फ अप्रैल 2019 से मार्च 2023 के बीच मंजूर हुए इलेक्ट्रिक गाड़ी के लोन के लिए था। कार बिजनेस या प्रोफेशन में इस्तेमाल होती है, तो ब्याज और डेप्रिसिएशन बिजनेस खर्च में गिने जा सकते हैं; कितना लागू होगा, CA से पूछिए।
क्या कार लोन बिना चार्ज के जल्दी बंद कर सकते हैं?
प्रीपेमेंट चार्ज के खिलाफ RBI का नियम व्यक्तियों के फ्लोटिंग रेट लोन पर है, और ज्यादातर कार लोन फिक्स्ड रेट वाले होते हैं। इसलिए लेंडर की पॉलिसी के हिसाब से फोरक्लोजर चार्ज, अक्सर बकाया का 2–5%, लग सकता है। ये लोन के की फैक्ट्स स्टेटमेंट में लिखा होना चाहिए, तो साइन से पहले देख लीजिए।
कार पर कितना डाउन पेमेंट करना चाहिए?
कम से कम 20%, और बैंक में ठीक-ठाक पैसा छोड़कर हो सके तो ज्यादा। ₹10 लाख की कार में ₹6 लाख देकर ₹4 लाख का लोन 3 साल के लिए 9% पर लें तो ब्याज करीब ₹57,916 बनता है, जबकि ₹8 लाख, 5 साल वाले लोन में करीब ₹1.96 लाख।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क