अपने होम लोन का स्टेटमेंट खोलिए और दो लाइनें देखिए: बकाया प्रिंसिपल, और कितनी EMI बाकी हैं। पार्ट पेमेंट करने पर पहली लाइन तो हर हाल में घटती है। दूसरी का क्या होगा, ये बैंक के प्रीपेमेंट फॉर्म के एक सवाल पर टिका है, या ऐप के एक टॉगल पर, अगर आपका बैंक उसे दिखाता है तो: इस पैसे से EMI कम करनी है, या लोन की अवधि यानी टेन्योर?
ज्यादातर लोग वही टिक कर देते हैं जो ब्रांच वाले कह दें, या खाली छोड़ देते हैं और बैंक का सिस्टम खुद तय कर लेता है। ₹50 लाख के होम लोन पर यही एक चॉइस तय कर सकती है कि वही ₹5 लाख आपका करीब ₹4.5 लाख ब्याज बचाएंगे या करीब ₹13 लाख। नीचे होम लोन और पर्सनल लोन दोनों के असली नंबर हैं, RBI लेंडर को क्या चार्ज लेने देता है, पैसा फंड में डालना बेहतर रहेगा या नहीं, और आखिर में ये कि रिक्वेस्ट असल में कैसे दें और कैसे पक्का करें कि बैंक ने वही किया जो आपने कहा।
प्रीपेमेंट से लोन में होता क्या है
भारत में होम लोन और पर्सनल लोन रिड्यूसिंग बैलेंस पर चलते हैं। हर महीने बैंक सिर्फ उतने प्रिंसिपल पर ब्याज लगाता है जितना अभी बाकी है, और EMI का बाकी हिस्सा उस प्रिंसिपल को घटाने में जाता है।
शुरू के सालों में बकाया रकम बड़ी होती है, इसलिए EMI का ज्यादातर हिस्सा ब्याज में जाता है। ₹50 लाख का लोन, 8.5% पर, 20 साल के लिए: EMI ₹43,391 बनती है। पहले साल आप ₹5.21 लाख EMI में भरते हैं और उसमें से सिर्फ करीब ₹99,500 लोन घटाते हैं। ये बंटवारा कैसे बदलता है, वो EMI कैसे कैलकुलेट होती है वाली पोस्ट में देखिए।
प्रीपेमेंट में ब्याज वाला हिस्सा पूरा छूट जाता है। हर रुपया सीधे प्रिंसिपल घटाता है, और कम प्रिंसिपल का मतलब है बाकी पूरे लोन में हर महीने कम ब्याज। इसीलिए शुरू में किया गया प्रीपेमेंट आखिरी सालों में किए गए उतने ही पैसे से कहीं ज्यादा बचाता है।
प्रिंसिपल घटते ही बैंक लोन का हिसाब दोबारा बैठाता है। या तो EMI वही रखकर लोन जल्दी खत्म कर दे, या आखिरी तारीख वही रखकर EMI घटा दे। फॉर्म पर यही सवाल होता है।
फॉर्म के दो खाने
टेन्योर घटाना। आप वही EMI भरते रहते हैं, और बकाया प्रिंसिपल कम होने से लोन जल्दी बंद हो जाता है। बचत ज्यादा होती है, क्योंकि जो प्रिंसिपल आपने घटाया उस पर बाकी के सारे सालों का ब्याज लगना बंद हो जाता है।
EMI घटाना। लोन उसी तारीख पर खत्म होता है जो पहले तय थी, बस घटे हुए प्रिंसिपल पर EMI दोबारा निकाली जाती है। हर महीने थोड़ी राहत मिलती है। ब्याज की बचत कम होती है, क्योंकि लोन उतने ही साल चलता है।
| टेन्योर घटाना | EMI घटाना | |
|---|---|---|
| हर महीने की EMI | पहले जितनी | कम हो जाती है |
| लोन कब खत्म | जल्दी | पहले वाली तारीख पर ही |
| ब्याज की बचत | काफी ज्यादा | कम |
| किसके लिए ठीक | EMI आराम से भर पाते हैं, इनकम पक्की है | बजट टाइट है, घर में एक ही कमाने वाला, नौकरी की चिंता |
बैंकों का तरीका अलग-अलग है। कुछ अपने आप टेन्योर घटाते हैं, कुछ EMI। आप कुछ नहीं बताएंगे तो जो उनका सिस्टम करेगा, वही होगा।
₹50 लाख के होम लोन पर पूरा हिसाब
मान लीजिए आपने ₹50 लाख 8.5% पर 20 साल के लिए लिए हैं। (बड़े बैंकों में सबसे अच्छे प्रोफाइल वालों को करीब 7.25–8% मिलता रहा है, पर बहुत से लोन 8.5% या उससे ऊपर चल रहे हैं।) EMI ₹43,391 है, और कोई प्रीपेमेंट न करें तो 20 साल में कुल ब्याज ₹54.14 लाख बनता है। यानी लोन से भी ज्यादा।
36 EMI के बाद ₹46,74,300 बकाया है। अब आप ₹5 लाख प्रीपे करते हैं:
| 3 साल बाद, ₹5 लाख प्रीपेमेंट | प्रीपेमेंट नहीं | EMI घटाएं | टेन्योर घटाएं |
|---|---|---|---|
| चौथे साल से EMI | ₹43,391 | ₹38,750 | ₹43,391 |
| लोन खत्म होगा | 240 EMI बाद (20 साल) | 240 EMI बाद (20 साल) | 199 EMI बाद (करीब 16 साल 7 महीने) |
| चौथे साल से बचा हुआ ब्याज | ₹41,77,497 | ₹37,30,639 | ₹28,57,858 |
| ब्याज की बचत | - | ₹4,46,858 | ₹13,19,639 |
वही ₹5 लाख। EMI घटाने से करीब ₹4.47 लाख बचते हैं और हर महीने ₹4,641 ज्यादा हाथ में रहते हैं। टेन्योर घटाने से करीब ₹13.2 लाख बचते हैं और लोन 41 EMI पहले बंद हो जाता है। सीधी सी बात है, तीन गुना बचत।
ये आप होम लोन EMI कैलकुलेटर पर जांच सकते हैं: ₹46,74,300, 17 साल, 8.5% डालिए तो पुरानी EMI ही आएगी, और ₹41,74,300 पर 17 साल डालिए तो घटी हुई EMI। टेन्योर वाली तरफ के लिए EMI कैलकुलेटर में ₹41,74,300, 8.5%, 13.5 साल डालिए। EMI ₹43,400 आती है, आपकी किस्त से जरा सी ज्यादा, इसीलिए लोन खत्म होने में करीब 162 EMI और लगती हैं।
तय नहीं कर पा रहे? "EMI घटाएं" चुन लीजिए ताकि बैंक के साथ पक्की देनदारी कम रहे, फिर भी पुरानी EMI जितना ही भरते रहिए और फर्क वाली रकम पार्ट पेमेंट के तौर पर डालते रहिए। ये चलता रहे तो बचत लगभग टेन्योर घटाने जितनी हो जाती है। किसी साल हाथ तंग हो तो एक्स्ट्रा रोक दीजिए। पहले बैंक से पूछ लीजिए कि छोटे पार्ट पेमेंट बिना झंझट लेता है या नहीं।
हर साल ₹1 लाख: ये आदत क्या कर देती है
एक बार में ₹5 लाख होना जरूरी नहीं। मान लीजिए उसी लोन पर आप हर साल के आखिर में बोनस से ₹1 लाख प्रीपे करते हैं, और हर बार EMI वही रखते हैं।
कुल 13 बार प्रीपेमेंट होता है, यानी ₹13 लाख, और लोन 168 EMI में बंद हो जाता है। 20 की जगह 14 साल। कुल ब्याज ₹54.14 लाख से घटकर करीब ₹35.58 लाख रह जाता है, यानी करीब ₹18.55 लाख की बचत। बच्चे की कॉलेज फीस का टाइम आए और उन्हीं छह सालों में EMI न हो, तो ये बहुत बड़ी राहत है।
रकम से ज्यादा आदत मायने रखती है। साल का ₹25,000 भी अगर शुरू से डाला जाए तो लोन के कई महीने कम कर देता है। 17वें साल में शुरू करें तो फर्क न के बराबर।
पर्सनल लोन का प्रीपेमेंट
पर्सनल लोन महंगा पड़ता है। बड़े बैंक करीब 10% से शुरू होने वाले रेट दिखाते हैं, पर क्रेडिट स्कोर और कंपनी के हिसाब से बहुत लोग 13–16% या उससे ज्यादा भरते हैं। मान लीजिए ₹5 लाख, 14% पर, 5 साल के लिए। पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर पर EMI ₹11,634 और कुल ब्याज ₹1,98,048 आता है। 12 EMI के बाद ₹4,25,746 बकाया है, और आप ₹1 लाख प्रीपे करते हैं।
| 12 EMI के बाद ₹1 लाख प्रीपेमेंट | EMI घटाएं | टेन्योर घटाएं |
|---|---|---|
| नई EMI | ₹8,901 | ₹11,634 (वही) |
| लोन खत्म होगा | 60 EMI बाद | 47 EMI बाद |
| ब्याज की बचत | ₹31,167 | ₹61,739 |
| 3% चार्ज + 18% GST (₹3,540) कटने के बाद | ₹27,627 | ₹58,199 |
ज्यादातर पर्सनल लोन और कार लोन फिक्स्ड रेट पर होते हैं, इसलिए लेंडर प्रीपेमेंट पर चार्ज ले सकता है। बहुत से बैंक करीब 2–4% (बैंक के हिसाब से प्रीपे की गई रकम पर या बकाया पर) और ऊपर से GST लेते हैं, कुछ साल भर बाद ये माफ कर देते हैं, और कुछ साल में एक ही बार, एक लिमिट तक पार्ट पेमेंट लेते हैं। 14% वाले लोन पर, एक साल बाद, चार्ज देकर भी बचत अच्छी खासी है। लोन के आखिर में हिसाब उलट जाता है: जिस लोन का एक साल बचा हो, उस पर 4% चार्ज ज्यादातर बचत खा जाता है। पैसा भेजने से पहले सैंक्शन लेटर या Key Facts Statement में शर्तें पढ़ लीजिए।
प्रीपेमेंट चार्ज: RBI क्या कहता है
किसी व्यक्ति ने अपनी निजी जरूरत (बिजनेस नहीं) के लिए फ्लोटिंग रेट पर जो लोन लिया है, और ज्यादातर होम लोन ऐसे ही होते हैं, उस पर कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं लगता। फ्लोटिंग रेट होम लोन और व्यक्तिगत टर्म लोन पर ये नियम 2012–2014 से है, और RBI के Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025 ने 1 जनवरी 2026 से सैंक्शन या रिन्यू हुए लोन के लिए इसे और सख्त किया:
- बैंक, को-ऑपरेटिव बैंक और NBFC सब पर लागू, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां भी।
- पार्ट पेमेंट हो या पूरा लोन बंद करना, पैसा अपनी बचत से हो या लोन ट्रांसफर करते वक्त दूसरे बैंक से: कोई चार्ज नहीं, और कोई मिनिमम लॉक-इन भी नहीं।
- लोगों और छोटे बिजनेस के फ्लोटिंग रेट बिजनेस लोन भी इसमें आते हैं, हालांकि स्मॉल फाइनेंस बैंक, RRB और कुछ और ₹50 लाख से ऊपर के लोन पर चार्ज ले सकते हैं।
- बाकी लोन, जैसे फिक्स्ड रेट वाले, पर चार्ज लेंडर की पॉलिसी से लगता है, पर उसे सैंक्शन लेटर, एग्रीमेंट और Key Facts Statement में दिखाना जरूरी है। जो चार्ज बताया नहीं गया वो लिया नहीं जा सकता, और पहले माफ की गई फीस बाद में नहीं वसूली जा सकती।
RBI के KFS सर्कुलर के तहत अक्टूबर 2024 से रिटेल लोन पर Key Facts Statement देना जरूरी है। अगर बैंक फ्लोटिंग रेट होम लोन के पार्ट प्रीपेमेंट पर चार्ज मांगे, तो लिखित में पूछिए कि किस क्लॉज के तहत।
एक पेच: जो लोन "पहले कुछ साल फिक्स्ड, फिर फ्लोटिंग" होते हैं, उनमें ये देखा जाता है कि प्रीपेमेंट वाले दिन रेट फ्लोटिंग है या नहीं।
जब रेट बढ़ने से लोन चुपचाप लंबा हो जाए
RBI ने 7 अक्टूबर 2026 को रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया। ज्यादातर नए फ्लोटिंग रेट होम लोन रेपो रेट से जुड़े हैं, तो अगले रीसेट पर उनका रेट भी बढ़ेगा। और कई बैंक EMI नहीं बढ़ाते, टेन्योर लंबा कर देते हैं, और पता तब चलता है जब आप स्टेटमेंट पढ़ते हैं।
वही लोन लीजिए, 3 साल बाद: ₹46.74 लाख बाकी, 17 साल बचे। रेट 8.5% से 8.75% हो जाए तो समय पर लोन खत्म करने के लिए EMI ₹710 बढ़कर ₹44,102 करनी पड़ेगी। अगर बैंक EMI ₹43,391 ही रखे, तो बचा हुआ टेन्योर 204 महीने से बढ़कर करीब 212 हो जाता है। सिर्फ 0.25% की बढ़ोतरी से आठ EMI ज्यादा।
RBI के फ्लोटिंग रेट रीसेट वाले 2023 के सर्कुलर के मुताबिक बैंक को आपको बताना होगा, ज्यादा EMI, लंबा टेन्योर या दोनों का मेल चुनने देना होगा, और कभी भी प्रीपे करने देना होगा। उसे हर तिमाही एक स्टेटमेंट भी भेजना होता है जिसमें बची हुई EMI की गिनती हो, तो हर रेट बदलाव के बाद उसे देखिए। "टेन्योर घटाएं" वाला प्रीपेमेंट वो महीने वापस खींच लाता है। इस पर और जानकारी रेपो रेट बदलने से EMI पर असर वाली पोस्ट में है।
प्रीपेमेंट करें या वही पैसा निवेश करें
8.5% वाले लोन का प्रीपेमेंट मतलब पक्का 8.5% रिटर्न, बिना किसी रिस्क के। इक्विटी फंड 15–20 साल में ज्यादा दे सकता है, पर पक्का नहीं।
वही ₹5 लाख लीजिए, लोन के 17 साल बाकी हैं:
- निवेश करें इक्विटी फंड में। 12% सालाना मानें तो लमसम कैलकुलेटर पर 17 साल में ₹34.33 लाख बनते हैं। 10% पर ₹25.27 लाख। 8.5% पर ₹20.01 लाख।
- प्रीपे करें टेन्योर घटाकर, फिर जो EMI खाली हुई (आखिरी 41 महीने ₹43,391 महीना) उसे उसी फंड में पुरानी आखिरी तारीख तक डालें। इससे 12% पर करीब ₹22.22 लाख, 10% पर ₹21.51 लाख और 8.5% पर ₹20.98 लाख बनते हैं।
12% पर टैक्स से पहले निवेश करीब ₹12 लाख आगे है। लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स (₹1.25 लाख से ऊपर 12.5%, साथ में सेस) लमसम के फायदे में से करीब ₹3.65 लाख ले लेता है, फिर भी निवेश साफ आगे है, अगर 12% सच में मिले। 10% पर फर्क टैक्स से पहले ₹4 लाख से भी कम रह जाता है, और उसके लिए 17 साल मार्केट का रिस्क। 8.5% पर प्रीपेमेंट जीतता है।
ज्यादातर लोगों के लिए फैसला इन बातों से होता है:
- टैक्स के बाद तुलना करें। 6–6.5% की FD ऊंचे स्लैब में टैक्स में अच्छा खासा हिस्सा खो देती है। जो फालतू पैसा वैसे FD में पड़ा रहता, उसके लिए 8.5% वाले लोन का प्रीपेमेंट बेहतर सौदा है।
- सबसे महंगा लोन पहले। 14% का पर्सनल लोन, या क्रेडिट कार्ड का बकाया जो उससे भी कहीं महंगा है, ज्यादातर निवेश की भरोसेमंद कमाई से ज्यादा खा जाता है। क्रम ये रखिए: पहले क्रेडिट कार्ड, फिर पर्सनल लोन, फिर कार लोन, फिर होम लोन।
- बांट दीजिए। बहुत लोग बोनस का आधा प्रीपेमेंट में और आधा SIP में डालते हैं। कुछ पक्की बचत, कुछ ग्रोथ।
जो भी तय करें, प्रीपेमेंट नए पैसे से कीजिए: बोनस, मैच्योर हुई FD, एरियर। गिरते मार्केट में लंबे समय वाला फंड सिर्फ प्रीपे करने के लिए बेचेंगे तो कुछ समय की गिरावट पक्का नुकसान बन जाएगी।
क्या प्रीपेमेंट से ₹2 लाख की छूट बेकार जाती है?
नई रिजीम में, जो अब ज्यादातर सैलरी वाले लोग लेते हैं, खुद के रहने वाले घर के होम लोन पर कोई छूट नहीं मिलती। ब्याज का हर बचा रुपया पूरी बचत है।
पुरानी रिजीम में खुद के रहने वाले घर पर साल का ₹2 लाख तक ब्याज क्लेम होता है (पुराना सेक्शन 24(b)), और प्रिंसिपल, प्रीपेमेंट समेत, सेक्शन 123 (पुराना 80C) की ₹1.5 लाख की लिमिट में गिना जाता है। लोगों को डर लगता है कि प्रीपेमेंट से छूट "बर्बाद" हो जाएगी। हमारे लोन पर चौथे साल का ब्याज ₹3.92 लाख है। ₹5 लाख के प्रीपेमेंट के बाद ₹3.48 लाख, यानी तब भी ₹2 लाख की लिमिट से ऊपर, और करीब 11वें साल तक ₹2 लाख से ऊपर ही रहता है। क्लेम दोनों हालात में ₹2 लाख का ही होगा, और लिमिट से ऊपर वाले ब्याज पर वैसे भी कोई टैक्स फायदा नहीं।
छूट तभी मायने रखती है जब साल का ब्याज ₹2 लाख से नीचे आ जाए, और 80C की लिमिट तो ज्यादातर PF और EMI के प्रिंसिपल से पहले ही भर जाती है। पक्का न हो तो इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर दोनों रिजीम चलाकर देख लीजिए।
टेन्योर, EMI, या अभी रुकिए
टेन्योर घटाइए अगर EMI आराम से निकल जाती है (मान लीजिए हाथ में आने वाली सैलरी के 35–40% से कम), इनकम पक्की है, और आप बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट जैसे बड़े खर्च से पहले लोन से छुट्टी चाहते हैं। 30 और 40 की उम्र वाले ज्यादातर सैलरी वाले लोगों के लिए यही डिफॉल्ट है।
EMI घटाइए अगर EMI महीने का बजट दबा रही है, घर में कमाने वाले आप अकेले हैं, नौकरी डांवाडोल लग रही है, या रेट रीसेट से EMI बढ़ गई है। जल्दी कोई और लोन लेने का प्लान हो तब भी कम EMI काम आती है, क्योंकि बैंक देखता है कि आपकी इनकम का कितना हिस्सा पहले से EMI में जा रहा है।
अभी रुक जाइए अगर कुछ महीनों का खर्च FD या सेविंग्स खाते में अलग नहीं रखा है, जिसे आप छूते नहीं। प्रीपेमेंट का पैसा बैंक में गया तो वापस नहीं आता, और अगले महीने अस्पताल का बिल आ गया तो उसके लिए 14% पर उधार लेना पड़ेगा। क्रेडिट कार्ड का बकाया या कोई महंगा लोन चल रहा हो, या लोन के आखिरी कुछ साल बचे हों, तब भी रुकिए। आखिर में ब्याज वाला हिस्सा छोटा होता है, तो प्रीपेमेंट से बचत भी कम होती है। लंबे लोन में प्रीपेमेंट का फायदा ज्यादा है (देखिए होम लोन 20 साल या 30 साल)।
पैसा कैसे भेजें, और कैसे पक्का करें कि टेन्योर सच में घटा
सबसे पहले लोन का ताजा स्टेटमेंट या बैंक ऐप का लोन वाला हिस्सा खोलिए। तीन चीजें नोट कीजिए: आज कितना प्रिंसिपल बकाया है, कितनी EMI बाकी हैं, और आज की तारीख में रेट फ्लोटिंग है या नहीं। लोन फिक्स्ड रेट पर है तो पैसा भेजने से पहले Key Facts Statement में प्रीपेमेंट चार्ज देख लीजिए, ताकि बाद में कोई झटका न लगे।
अब रिक्वेस्ट। बहुत से बैंक नेट बैंकिंग या ऐप से पार्ट पेमेंट ले लेते हैं। कुछ चेक या NEFT के साथ उस ब्रांच में साइन की हुई रिक्वेस्ट मांगते हैं जहां से आपका लोन चलता है। कुछ ऐप पेमेंट वाली स्क्रीन पर ही EMI या टेन्योर का ऑप्शन दिखाते हैं, कई नहीं दिखाते, और तब बैंक का डिफॉल्ट लग जाता है। इसलिए हर हाल में अपनी पसंद लिखकर दीजिए। छोटा सा लेटर, या लोन में रजिस्टर्ड ईमेल से एक ईमेल काफी है: लोन अकाउंट नंबर, रकम, पेमेंट की तारीख, और एक सीधी लाइन, जैसे "Please apply this amount to principal and reduce the tenure, keeping the EMI unchanged." रसीद या एक्नॉलेजमेंट मांगिए और संभालकर रखिए।
नया रीपेमेंट शेड्यूल आए तो तीन चीजें देखिए। एक, जिस दिन पैसा भेजा उसी दिन प्रिंसिपल पूरी रकम से घटा हो। अगर पैसा "एडवांस EMI" में दिख रहा है, या कहीं बिना एडजस्ट हुए पड़ा है, तो वो अभी कोई ब्याज नहीं बचा रहा, तुरंत बैंक से बात कीजिए। दो, EMI बिल्कुल पहले जितनी हो। तीन, बाकी EMI की गिनती घटी हो। ₹50 लाख वाले उदाहरण में 3 साल बाद ₹5 लाख प्रीपे करने से आखिरी EMI 41 महीने पहले आ जानी चाहिए, यानी शुरू से करीब 16 साल 7 महीने पर। अगर आपने कम EMI चुनी थी, तो ₹38,750 की EMI और पुरानी आखिरी तारीख देखिए। अगली तिमाही के स्टेटमेंट में भी यही दिखना चाहिए।
अगर बैंक ने उल्टा कर दिया, तो अपनी एक्नॉलेजमेंट का हवाला देकर लिखिए और सुधार मांगिए। 30 दिन में ठीक जवाब न मिले तो cms.rbi.org.in पर RBI ओम्बड्समैन के पास शिकायत कर सकते हैं।
हर एक्नॉलेजमेंट और नया शेड्यूल उसी फाइल में रखिए जिसमें सैंक्शन लेटर है। अगर आपने कुछ बार "टेन्योर घटाएं" चुना, तो लोन उस लेटर वाली तारीख से कई साल पहले बंद होगा, और तब आपको क्लोजर लेटर और घर के ओरिजिनल कागज बिना दौड़-भाग के वापस चाहिए होंगे। RBI के नियम से लेंडर को आखिरी पेमेंट के 30 दिन के अंदर ये कागज लौटाने होते हैं।
लोग अक्सर पूछते हैं
होम लोन प्रीपेमेंट में EMI घटाना बेहतर है या टेन्योर?
टेन्योर घटाने से कहीं ज्यादा ब्याज बचता है। ₹50 लाख, 8.5%, 20 साल के लोन पर 3 साल बाद ₹5 लाख प्रीपे करें तो EMI वही रखकर टेन्योर घटाने से करीब ₹13.2 लाख बचते हैं, जबकि EMI घटाने से सिर्फ करीब ₹4.47 लाख। कम EMI तभी चुनिए जब महीने के बजट को सच में राहत चाहिए।
क्या बैंक होम लोन प्रीपेमेंट पर चार्ज लेते हैं?
व्यक्ति के निजी (बिजनेस नहीं) फ्लोटिंग रेट लोन पर नहीं, और ज्यादातर होम लोन ऐसे ही होते हैं। RBI के नियम इन पर प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर चार्ज मना करते हैं, पार्ट पेमेंट हो या पूरा, पैसा कहीं से भी आए। फिक्स्ड रेट लोन पर लेंडर की पॉलिसी से चार्ज लग सकता है, और वो सैंक्शन लेटर और Key Facts Statement में दिखाना जरूरी है।
होम लोन प्रीपे करूं या SIP में पैसा लगाऊं?
8.5% वाले लोन का प्रीपेमेंट पक्की 8.5% बचत है, बिना रिस्क। इक्विटी 15–20 साल में आगे निकल सकती है अगर सच में 11–12% मिले, पर ये पक्का नहीं, और लोन रेट के आसपास रिटर्न पर प्रीपेमेंट जीतता है। बहुत लोग बोनस दोनों में बांट देते हैं, और महंगे लोन पहले चुकाते हैं।
क्या होम लोन प्रीपे करने से टैक्स छूट कम हो जाती है?
नई रिजीम में खुद के रहने वाले घर के होम लोन पर कोई छूट है ही नहीं, तो कुछ नहीं जाता। पुरानी रिजीम में ब्याज की छूट साल के ₹2 लाख तक है। प्रीपेमेंट के बाद भी साल का ब्याज ₹2 लाख से ऊपर रहे, जैसा ₹50 लाख के लोन पर कई साल रहता है, तो क्लेम दोनों हालात में ₹2 लाख का ही होगा।
लोन प्रीपे करने का सबसे अच्छा समय कब है?
जितना जल्दी हो सके। शुरू के सालों में EMI का ज्यादातर हिस्सा ब्याज होता है, तो प्रीपे किया हर रुपया कई सालों का ब्याज रोक देता है। लोन के आखिरी कुछ सालों में ब्याज वाला हिस्सा छोटा होता है और प्रीपेमेंट से बचत भी कम।
क्या पर्सनल लोन प्रीपे कर सकते हैं, और कितना खर्च आएगा?
हां, पर ज्यादातर पर्सनल लोन फिक्स्ड रेट पर होते हैं, तो बैंक चार्ज ले सकते हैं, अक्सर करीब 2–4% और GST, और कुछ पार्ट पेमेंट पर लिमिट रखते हैं। ₹5 लाख, 14%, 5 साल के लोन पर एक साल बाद ₹1 लाख प्रीपे करके EMI वही रखें तो करीब ₹61,739 ब्याज बचता है, 3% चार्ज के बाद भी फायदे का सौदा।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क