अगले कुछ हफ्तों में फ्लोटिंग रेट होम लोन वाले लगभग हर व्यक्ति को बैंक से एक SMS या ईमेल आएगा, कुछ ऐसा: "Your ROI has been revised"। इसे बिना पढ़े हटा देने का मन करता है। ऐसा मत कीजिए, क्योंकि इस मैसेज के पीछे 7 अक्टूबर की RBI की 0.25% रेपो बढ़ोतरी है, फरवरी 2023 के बाद पहली, और आप इसे कैसे चुकाएंगे ये बैंक ज्यादातर पहले ही तय कर चुका है। बड़ी EMI के रूप में नहीं। ज्यादातर लोन के आखिर में चुपचाप जुड़ गए कुछ महीनों, कभी-कभी तो सालों के रूप में।
नीचे देखेंगे कि ये बढ़ोतरी आपके लोन तक कैसे पहुंचती है, 0.25% या 0.5% बढ़ने से ₹30 लाख और ₹50 लाख के लोन पर क्या फर्क पड़ता है, "EMI वही रहने दो" वाला रास्ता लाखों का क्यों पड़ सकता है, और अगले रीसेट से पहले असल में करना क्या है।
रेपो 5.50% पर, और एक और बढ़ोतरी की बात
रेपो रेट वो दर है जिस पर RBI बैंकों को थोड़े समय के लिए पैसा उधार देता है। ये बढ़ता है तो बैंकों के लिए पैसा महंगा होता है, और वो ये बोझ लोन लेने वालों पर डाल देते हैं। 7 अक्टूबर की पॉलिसी में मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने रेपो 5.25% से 5.50% किया और अपना रुख "न्यूट्रल" से बदलकर "कैलिब्रेटेड टाइटनिंग" कर दिया। गवर्नर ने ये भी कहा कि आगे कुछ समय तक रेट कट की उम्मीद कम है, यानी अगला कदम या तो रुकना होगा या फिर एक और बढ़ोतरी (पूरी जानकारी Business Today की पॉलिसी रिपोर्ट में है)। कुछ अर्थशास्त्री इस दौर में 0.5% और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं। पक्का कोई नहीं जानता, इसलिए एक और बढ़ोतरी मानकर प्लान कीजिए।
ये बढ़ोतरी उस साल के बाद आई है जिसमें लगातार कटौती से होम लोन अच्छे-खासे सस्ते हो गए थे: 2025 में RBI ने रेपो में कुल 1.25% की कटौती की थी, 6.50% से 5.25% तक। अगर आपने उसी दौरान लोन लिया है, तो ये पहली बार है जब आपका रेट उल्टी दिशा में जा रहा है।
बैंकों ने एक दिन के अंदर कदम उठा लिया। जैसे, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 8 अक्टूबर से अपना रेपो से जुड़ा लेंडिंग रेट 7.90% से बढ़ाकर 8.15% कर दिया। बाकी बैंक भी ज्यादातर यही करेंगे।
रेपो का बदलाव आपके लोन तक कैसे पहुंचता है
ये इस पर निर्भर है कि आपका लोन किससे जुड़ा है। सैंक्शन लेटर या बैंक का ऐप देखिए, कहीं न कहीं EBLR, RLLR, MCLR या PLR लिखा होगा।
EBLR / RLLR (रेपो से जुड़े) लोन। 1 अक्टूबर 2019 से बैंक का हर नया फ्लोटिंग रेट होम लोन किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना जरूरी है, और लगभग सभी बैंकों ने रेपो रेट चुना। आपका रेट ऐसे बनता है: रेपो, उस पर बैंक का मार्क-अप, और फिर सैंक्शन के वक्त तय एक स्प्रेड (प्लस या माइनस), जो ज्यादातर आपके क्रेडिट स्कोर पर टिका होता है। रेपो 0.25% ऊपर-नीचे हुआ, तो आपका रेट भी 0.25% ऊपर-नीचे होगा। एक्सटर्नल बेंचमार्क लेंडिंग पर RBI का सर्कुलर कहता है कि रेट कम से कम हर तीन महीने में एक बार रीसेट होना चाहिए, और आपका क्रेडिट स्प्रेड तब तक नहीं बढ़ाया जा सकता जब तक आपकी क्रेडिट प्रोफाइल में बड़ा बदलाव न हो। पुराने लोन पर नया रेट ठीक किस तारीख से लगेगा, ये हर बैंक में अलग है, पर ये तीन महीने से ज्यादा दूर नहीं हो सकता। मतलब ये बढ़ोतरी आपको सालों में नहीं, हफ्तों में महसूस होगी।
MCLR लोन। पुराने लोन (मोटे तौर पर अक्टूबर 2019 से पहले वाले) अक्सर अब भी MCLR पर चल रहे हैं। MCLR बैंक का अंदरूनी रेट है। ये रेपो के पीछे चलता है, पर धीरे, और आपका लोन सिर्फ अपनी रीसेट डेट पर बदलता है, जो अक्सर छह महीने या साल में एक बार आती है। हो सकता है बढ़ोतरी आप तक कुछ समय बाद पहुंचे, पर 2025 की कटौती भी आप तक देर से ही पहुंची थी। और अगर 2019 से पहले लिया लोन आपने कभी रेपो बेंचमार्क पर नहीं बदलवाया, तो काफी चांस है कि आप उसी प्रोफाइल वाले नए ग्राहक से ज्यादा भर रहे हैं। इसकी बात आखिर में।
हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) के लोन। HFC अपने खुद के बेंचमार्क पर लोन देती हैं, जिसे अक्सर PLR कहा जाता है। ये आमतौर पर रेपो के साथ चलता है, पर कोई ऑटोमैटिक लिंक नहीं है और कब बदलना है ये कंपनी तय करती है। बढ़ोतरी तो टाइम पर आ जाती है, कटौती आराम से आती है। इसलिए सिर्फ EMI बदलने पर नहीं, RBI की हर पॉलिसी के बाद अपना रेट चेक कीजिए।
| आपका लोन किससे जुड़ा है | अक्टूबर वाली बढ़ोतरी कब पहुंचेगी | कितनी |
|---|---|---|
| रेपो (EBLR / RLLR), बैंक लोन | कुछ हफ्तों में, अगले रीसेट पर (कम से कम हर 3 महीने में एक बार) | आमतौर पर पूरी 0.25% |
| MCLR, बैंक लोन | आपकी रीसेट डेट पर, अक्सर 6 या 12 महीने बाद | तब तक MCLR जितना बढ़ा हो |
| HFC का अपना बेंचमार्क (PLR) | जब कंपनी तय करे | कंपनी तय करे |
| फिक्स्ड रेट | फिक्स्ड अवधि के दौरान नहीं | कुछ नहीं, फिक्स्ड अवधि खत्म होने तक |
आपकी EMI शायद बदले ही नहीं, क्यों
रेट बढ़ने पर बैंक या तो आपकी EMI बढ़ा सकता है, या EMI वही रखकर आखिर में महीने जोड़ सकता है। ज्यादातर बैंक अपने आप दूसरा रास्ता चुनते हैं। न नया ECS मैंडेट, न ग्राहकों के गुस्से वाले फोन, और आपको पता भी नहीं चलता। फिर एक दिन लोन स्टेटमेंट खोलते हैं तो आखिरी तारीख 2046 से खिसककर 2047 हो चुकी होती है।
इसके लिए RBI के नियम हैं। अगस्त 2023 का EMI लोन पर फ्लोटिंग रेट रीसेट वाला RBI सर्कुलर कहता है कि रेट रीसेट होने पर लोन देने वाले को:
- बेंचमार्क बदलने से EMI या टेन्योर बढ़े तो आपको साफ-साफ बताना होगा;
- आपको चुनने देना होगा कि EMI बढ़े, टेन्योर बढ़े, या दोनों थोड़े-थोड़े;
- लोन का कुछ हिस्सा या पूरा लोन कभी भी चुकाने देना होगा;
- फिक्स्ड रेट पर जाने का ऑप्शन तभी देना है जब उसकी अपनी पॉलिसी में हो (अक्टूबर 2025 से ये बैंकों के लिए जरूरी नहीं, उनकी मर्जी है), और उसका चार्ज पहले से बताना होगा;
- टेन्योर इतना कभी नहीं खींचना है कि लोन का बैलेंस बढ़ने लगे (यानी "नेगेटिव अमॉर्टाइजेशन" नहीं होना चाहिए);
- हर तिमाही एक स्टेटमेंट देना होगा, जिसमें अब तक चुकाई गई मूल रकम और ब्याज, EMI, बची हुई EMI और सालाना ब्याज दर हो।
तो चुनना आपके हाथ में है, बस मांगना पड़ता है। तब तक लोन को EMI से नहीं, आखिरी तारीख से नापिए: EMI वही पर 12 किस्तें ज्यादा, ये वही खर्च नहीं है। नई आखिरी तारीख तिमाही स्टेटमेंट में दिखती है। बैंक को सटीक नियम दिखाने हों तो इन नियमों पर RBI के FAQ छोटे और आसान हैं।
एक उम्र की सीमा भी होती है। ज्यादातर बैंक चाहते हैं कि लोन एक तय उम्र तक खत्म हो जाए, बैंक और आपकी नौकरी के हिसाब से अक्सर 60 से 75 साल के बीच। अगर आपका लोन पहले से उस उम्र के करीब तक चल रहा है, तो बैंक उसे और नहीं खींच सकता, और EMI बढ़ेगी ही।
0.25% और 0.5% बढ़ने पर ₹30 लाख और ₹50 लाख का हिसाब
मान लीजिए लोन के 20 साल बाकी हैं और बढ़ोतरी से पहले रेट 7.75% था। अच्छे क्रेडिट स्कोर वाले सैलरी वाले व्यक्ति के लिए ये ठीक-ठाक बीच का रेट है (अक्टूबर से पहले बड़े बैंकों में अच्छी प्रोफाइल को मोटे तौर पर 7.1–8% मिल रहा था)। अब देखिए रेट 0.25% बढ़े (8%) और 0.5% बढ़े (8.25%, अगर एक और बढ़ोतरी आई) तो क्या होता है।
| लोन, 20 साल बाकी | 7.75% पर EMI | 8% पर EMI | 8.25% पर EMI |
|---|---|---|---|
| ₹30 लाख | ₹24,628 | ₹25,093 (+₹465) | ₹25,562 (+₹934) |
| ₹50 लाख | ₹41,047 | ₹41,822 (+₹775) | ₹42,603 (+₹1,556) |
सीधी सी बात: 20 साल के लोन पर हर 0.25% बढ़ोतरी से, बकाया हर ₹1 लाख पर EMI करीब ₹15–16 बढ़ती है। इनमें से कोई भी लाइन आप होम लोन EMI कैलकुलेटर पर जांच सकते हैं।
अब यही बढ़ोतरी दूसरे तरीके से, जब बैंक EMI वही रखता है और महीने जोड़ देता है।
| लोन, 20 साल बाकी | बढ़ोतरी | EMI बढ़ाएं: ज्यादा ब्याज | EMI वही: ज्यादा महीने | EMI वही: ज्यादा ब्याज |
|---|---|---|---|---|
| ₹30 लाख | +0.25% | ₹1.12 लाख | 12 | ₹2.85 लाख |
| ₹30 लाख | +0.5% | ₹2.24 लाख | 26 | ₹6.20 लाख |
| ₹50 लाख | +0.25% | ₹1.86 लाख | 12 | ₹4.76 लाख |
| ₹50 लाख | +0.5% | ₹3.73 लाख | 26 | ₹10.33 लाख |
₹50 लाख वाले लोन पर 0.5% की बढ़ोतरी देखिए। हर महीने ₹1,556 ज्यादा भरें तो पूरे लोन पर ₹3.73 लाख ज्यादा ब्याज लगता है। बैंक को टेन्योर खींचने दें तो ₹10.33 लाख ज्यादा, और ऊपर से दो साल और EMI। करीब ₹6.6 लाख का ये फर्क ही वो कीमत है जो आप महीने का बजट न बदलने के लिए चुकाते हैं।
(EMI कैलकुलेटर आपसे टेन्योर पूछता है, इसलिए ये बढ़े हुए महीने उसमें नहीं दिखते। हमने इन्हें महीने-दर-महीने निकाला है: पुरानी EMI, नया रेट, और बैलेंस जीरो होने तक गिनती। एक EMI के पीछे का गणित हमारी पोस्ट EMI कैसे निकलती है में है।)
25 साल का लोन चुपचाप 33 साल का कैसे बन जाता है
जितना लंबा बाकी टेन्योर, "EMI वही रखो" वाला रास्ता उतना ही महंगा। लंबे लोन में हर EMI का ज्यादातर हिस्सा ब्याज होता है। रेट बढ़ता है तो मूल रकम के लिए बचा हिस्सा बहुत पतला हो जाता है, और लोन रेंगने लगता है।
मान लीजिए आपने ₹50 लाख 25 साल के लिए 7.75% पर लिया। EMI ₹37,766। अब रेट 0.5% बढ़ता है:
EMI बढ़ाई: EMI ₹39,423 हो जाती है (₹1,656 ज्यादा)। पूरे लोन पर ज्यादा ब्याज: करीब ₹4.97 लाख।
EMI वही रखी: 52 महीने ज्यादा, यानी 4 साल 4 महीने और। ज्यादा ब्याज: करीब ₹19.55 लाख।
और अगर रेट कुल मिलाकर 0.75% बढ़ जाए, तो EMI वही रखने पर 94 महीने जुड़ जाते हैं, करीब आठ साल। यानी 25 साल का लोन चुपचाप 33 साल का बन जाता है। असल में उससे पहले ही बैंक उम्र की सीमा पर पहुंच जाएगा और EMI वैसे भी बढ़ा देगा, शायद किसी और बुरे वक्त पर।
अगर आप 25 या 30 साल के लोन की शुरुआत में हैं, तो संभल सके तो EMI बढ़वा लीजिए। लंबे टेन्योर इतने महंगे क्यों पड़ते हैं, ये हमारी पोस्ट होम लोन 20 साल या 30 साल में समझाया है।
ये बढ़ोतरी झेलने के पांच तरीके
1. EMI बढ़वा लीजिए। कुल ब्याज के हिसाब से सबसे सस्ता, और लोन अपनी पुरानी तारीख पर ही खत्म होता है। नुकसान साफ है: ₹775 या ₹1,556 महीना कहीं से तो आना है। अगर EMI पहले ही आपकी इन-हैंड सैलरी का 40% से ज्यादा खा रही है, तो इतना मत खींचिए कि बचत ही बंद हो जाए।
2. एकमुश्त रकम से प्रीपेमेंट कीजिए। अक्सर ये सबसे साफ हल है। ₹50 लाख, 20 साल वाले लोन पर करीब ₹93,000 का एक बार का प्रीपेमेंट आपको 8% पर भी पुरानी EMI और पुरानी आखिरी तारीख पर वापस ले आता है। 8.25% पर इसके लिए करीब ₹1.83 लाख चाहिए। साल के आखिर का बोनस या मैच्योर हुई FD इसमें काम आ सकती है; बस नौकरी जाने या अस्पताल के बिल के लिए अलग रखा पैसा इसमें मत लगाइए। RBI के नियमों के मुताबिक किसी व्यक्ति के फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं लग सकता, तो कोई पेनल्टी नहीं। प्रीपेमेंट करते वक्त बैंक को लिखकर बताइए कि EMI घटानी है या टेन्योर। ये चुनाव कैसे करें, ये हमारी पोस्ट प्रीपेमेंट: EMI घटाएं या टेन्योर में है।
3. दोनों मिलाकर। अभी EMI थोड़ी बढ़ने दीजिए, और हर साल बोनस से थोड़ा प्रीपेमेंट कीजिए, चाहे ₹50,000 ही क्यों न हो। ज्यादातर परिवारों के लिए असल में यही चलता है।
4. टेन्योर बढ़ने दीजिए। तभी ठीक है जब 10–12 साल से कम बाकी हों, आप उम्र की सीमा से काफी दूर हों, और आगे प्रीपेमेंट का प्लान हो। इसे अपने आप होने मत दीजिए।
5. फिक्स्ड रेट पर चले जाइए। तभी हो सकता है जब आपका बैंक ये ऑप्शन दे। फिक्स्ड रेट आमतौर पर फ्लोटिंग से महंगा होता है, स्विच करने की फीस लगती है, और कई "फिक्स्ड" लोन सिर्फ पहले कुछ साल फिक्स्ड रहते हैं। आगे रेट गिरे तो उसका फायदा भी नहीं मिलेगा। ज्यादातर लोगों के लिए ये ठीक नहीं बैठता।
लोन दूसरे बैंक में ले जाना कब फायदे का सौदा है
अगर आपका रेट नए ग्राहकों के रेट से काफी ऊपर है और आपका बैंक उसे घटाने को तैयार नहीं, तो आप लोन किसी दूसरे बैंक में ले जा सकते हैं (बैलेंस ट्रांसफर)। नया बैंक आपका पुराना लोन चुका देता है और आप उसके साथ नए सिरे से शुरू करते हैं।
मान लीजिए ₹40 लाख बाकी हैं, 18 साल बचे हैं, और पुराना लोन 8.75% पर है। दूसरा बैंक 8% दे रहा है। EMI ₹36,836 से घटकर ₹34,999 हो जाती है, यानी महीने के करीब ₹1,837 कम, और 18 साल में करीब ₹3.97 लाख ब्याज बचता है। इस पर गंभीरता से सोचना बनता है।
पर बैलेंस ट्रांसफर मुफ्त नहीं है। प्रोसेसिंग फीस, लीगल और वैल्यूएशन चार्ज, और कुछ राज्यों में नए मॉर्गेज पर स्टांप ड्यूटी लगती है। कुल खर्च पहले ही पूछ लीजिए। मोटा हिसाब ये है कि फर्क करीब 0.5% या ज्यादा हो और 10 या ज्यादा साल बाकी हों, तभी बदलना फायदेमंद है। फर्क छोटा हो या टेन्योर कम बचा हो, तो खर्च ही बचत खा जाता है। पहले अपने बैंक से बात कीजिए; सिर्फ कन्वर्जन फीस वाला उनका काउंटर-ऑफर अक्सर सस्ता पड़ता है।
और बैंक बदलते वक्त टेन्योर मत बढ़ाइए। आखिरी तारीख वही रखिए या पहले की कीजिए, वरना कम रेट का फायदा बढ़े हुए सालों में बह जाएगा।
ज्यादा ब्याज पर कोई टैक्स राहत नहीं
पुरानी रिजीम में खुद रहने वाले घर के लोन के ब्याज पर साल में ₹2 लाख तक की छूट मिलती है (पुराना सेक्शन 24(b))। नई रिजीम में खुद रहने वाले घर पर कुछ नहीं मिलता। ₹50 लाख के लोन पर पहले साल का ब्याज ही 7.75% पर करीब ₹3.84 लाख और 8% पर करीब ₹3.96 लाख है। दोनों ₹2 लाख से काफी ऊपर हैं, यानी इस बढ़ोतरी से जो ज्यादा ब्याज लगेगा उस पर कोई टैक्स राहत नहीं। पूरी मार आप पर। रिजीम चुन रहे हैं तो अपने नंबर इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर डालकर देखिए।
अभी घर ले रहे हैं? उसी सैलरी पर लोन कम मिलेगा
रेट बढ़ने का मतलब ये भी है कि उसी सैलरी पर बैंक आपको कम लोन देंगे। ₹1 लाख महीने की इन-हैंड सैलरी, बैंक उसका 50% EMI के लिए मानें, और 20 साल का लोन, तो होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर 7.75% पर करीब ₹60.9 लाख, 8% पर ₹59.8 लाख और 8.25% पर ₹58.7 लाख दिखाता है। हर 0.25% से करीब ₹1.1 लाख कम। अपनी लिमिट से थोड़ा कम लोन लीजिए ताकि एक-दो और बढ़ोतरी झेलने की गुंजाइश रहे। एक आम लोन साइज का पूरा हिसाब ₹50 लाख के होम लोन की EMI वाली पोस्ट में है।
इस महीने क्या करें
पहले, रीसेट वाला मैसेज ढूंढिए। रेट बदलने का SMS, ईमेल या लेटर देखिए। न मिले तो बैंक के ऐप में लोन वाला पेज या आखिरी तिमाही स्टेटमेंट अभी का रेट दिखा देगा। तीन चीजें नोट कीजिए: नया रेट, वो किस तारीख से लागू है, और कितनी EMI बाकी हैं। ये आखिरी नंबर अक्टूबर से पहले वाले स्टेटमेंट से मिलाइए। बढ़ गया है, तो आपका टेन्योर खींच दिया गया है।
फिर बैंक को फोन कीजिए या ऐप में रिक्वेस्ट डालिए, और जवाब लिखित में लीजिए (ईमेल भी चलेगा)। ये पूछिए:
- मेरा नया रेट क्या है, और किस तारीख से लागू है?
- मेरा लोन किससे जुड़ा है (रेपो, MCLR, PLR), और उस पर मेरा स्प्रेड कितना है?
- क्या मेरा टेन्योर बढ़ाया गया है? अब कितनी EMI बाकी हैं और नई आखिरी तारीख क्या है?
- पुरानी आखिरी तारीख रखनी हो तो मेरी EMI कितनी होगी?
- EMI बदलने या प्रीपेमेंट पर कोई फीस है? (फ्लोटिंग रेट होम लोन पर प्रीपेमेंट चार्ज नहीं होना चाहिए।)
- मेरे जैसे क्रेडिट स्कोर वाले नए ग्राहकों को आप किस रेट पर लोन दे रहे हैं? अगर वो मेरे रेट से कम है, तो मुझे उस पर लाने का क्या खर्च है?
ये आखिरी सवाल लोगों की सोच से ज्यादा काम का है। कई लोग सालों तक पुराने स्प्रेड या पुराने MCLR लोन पर बैठे रहते हैं, कभी-कभी नए ग्राहक से 0.5% या उससे भी ज्यादा भरते हुए। मांगें तो कई बैंक एक बार की कन्वर्जन फीस लेकर आपका स्प्रेड घटा देते हैं।
फिर EMI या टेन्योर, तय करके लिखकर बताइए। 10–12 साल से ज्यादा बाकी हैं, और खासकर अगर आप 25 या 30 साल के लोन की शुरुआत में हैं, तो वो बढ़ी हुई EMI मांगिए जिससे पुरानी आखिरी तारीख बनी रहे। अगर EMI पहले ही आपकी इन-हैंड सैलरी का 40% से ज्यादा है, तो बढ़ोतरी का कुछ हिस्सा EMI में लीजिए और बाकी प्रीपेमेंट से पूरा कीजिए। 10–12 साल से कम बचे हैं और आप बैंक की उम्र सीमा से काफी दूर हैं, तो टेन्योर बढ़ने देना चल जाएगा, बशर्ते हर साल थोड़ा प्रीपेमेंट करते रहें। बस इसे उस ऑप्शन पर मत छोड़िए जो बैंक ने अपने आप चुन लिया।
आखिर में, तय कीजिए कि इस साल लोन दूसरे बैंक में ले जाना है या नहीं। नए ग्राहकों का रेट (आपके बैंक में या कहीं और) आपके रेट से करीब 0.5% या ज्यादा कम है, और 10 या ज्यादा साल बाकी हैं, तो पहले अपने बैंक से स्प्रेड घटाने को कहिए। वो मना करे, तभी बैलेंस ट्रांसफर की फीस भरना वसूल है, और उसका हिसाब वैसे ही लगाइए जैसे ऊपर बैंक बदलने वाले हिस्से में लगाया है।
इसमें एक फोन और एक ईमेल से ज्यादा कुछ नहीं लगता, और RBI की अगली पॉलिसी के बाद शायद फिर यही करना पड़े। रेट RBI तय करता है। ये लोन कितना लंबा चलने देना है, ये अब भी आपके हाथ में है।
लोग अक्सर पूछते हैं
रेपो रेट बढ़ने से होम लोन पर क्या असर होता है?
अगर आपका लोन रेपो से जुड़ा है (EBLR या RLLR), तो आपका रेट भी उतना ही बढ़ता है, आमतौर पर कुछ हफ्तों में, क्योंकि बैंकों को ये लोन कम से कम हर तीन महीने में रीसेट करने होते हैं। MCLR लोन सिर्फ अपनी रीसेट डेट पर बदलते हैं, जो अक्सर 6 या 12 महीने दूर होती है। हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां अपना बेंचमार्क अपनी मर्जी से बदलती हैं।
अक्टूबर 2026 की रेपो बढ़ोतरी के बाद क्या मेरी EMI बढ़ेगी?
अक्सर नहीं। ज्यादातर बैंक EMI वही रखते हैं और लोन के आखिर में महीने जोड़ देते हैं। RBI के नियमों के तहत आप इसकी जगह EMI बढ़ाने, टेन्योर बढ़ाने या दोनों का मेल मांग सकते हैं, और दोनों में से कुछ भी बढ़े तो बैंक को आपको बताना होता है।
0.25% बढ़ोतरी पर ₹50 लाख के होम लोन की EMI कितनी बढ़ेगी?
20 साल बाकी हों और रेट 7.75% हो, तो EMI ₹41,047 से ₹41,822 हो जाती है, यानी करीब ₹775 ज्यादा। 0.5% बढ़ने पर ये ₹42,603 हो जाती है। मोटा नियम: 20 साल के लोन पर हर 0.25% से बकाया हर ₹1 लाख पर EMI करीब ₹15–16 बढ़ती है।
रेट बढ़ने पर EMI बढ़ाना बेहतर है या टेन्योर?
EMI बढ़ाना काफी सस्ता पड़ता है। 20 साल बाकी वाले ₹50 लाख के लोन पर 0.5% बढ़ोतरी से, ज्यादा EMI भरने पर करीब ₹3.73 लाख ज्यादा ब्याज लगता है, पर टेन्योर खिंचने पर करीब ₹10.33 लाख और 26 महीने ज्यादा। लंबे लोन पर ये फर्क और बड़ा होता है।
क्या होम लोन का प्रीपेमेंट बिना चार्ज के कर सकते हैं?
हां, अगर ये फ्लोटिंग रेट होम लोन है और आपने व्यक्ति के तौर पर लिया है; RBI के नियम इन पर प्रीपेमेंट चार्ज की इजाजत नहीं देते। ₹50 लाख, 20 साल के लोन पर करीब ₹93,000 का एक बार का प्रीपेमेंट 0.25% बढ़ोतरी का असर खत्म कर देता है। बैंक को लिखकर बताइए कि EMI घटानी है या टेन्योर।
रेट बढ़ने के बाद होम लोन दूसरे बैंक में ले जाना चाहिए?
पहले अपने बैंक से नए ग्राहकों वाला रेट पूछिए; कई बैंक कन्वर्जन फीस लेकर आपका स्प्रेड घटा देते हैं। बैलेंस ट्रांसफर आमतौर पर तब फायदेमंद है जब फर्क करीब 0.5% या ज्यादा हो और 10 या ज्यादा साल बाकी हों, प्रोसेसिंग, लीगल और स्टांप ड्यूटी का खर्च जोड़ने के बाद।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क