₹50 लाख का होम लोन उस फ्लैट के लिए चाहिए जिसकी कीमत करीब ₹62–65 लाख हो। ज्यादातर शहरों में सबसे महंगे इलाकों से थोड़ा हटकर इतने में ठीक-ठाक 2BHK मिल जाता है, इसलिए ये सबसे आम लोन अमाउंट में से एक है। सब लोग पहले EMI पूछते हैं। पर असली सवाल ये हैं कि 20 या 30 साल में ये लोन आपको कुल कितने का पड़ेगा, और रजिस्ट्री वाले दिन हाथ में कितना कैश चाहिए।
छोटा जवाब पहले: 8% पर 20 साल के लिए EMI ₹41,822 बनती है, और आखिरी किस्त तक बैंक के पास कुल करीब ₹1 करोड़ पहुंच जाता है। बाकी लेख उस बारे में है जो EMI के नंबर में नहीं दिखता: अवधि खींचने का असली खर्च, बैंक एक रुपया देने से पहले कितनी सैलरी और कितना कैश चाहिए, टैक्स का फायदा जितना लगता है उतना बड़ा क्यों नहीं है, और साइन करने से पहले क्या पक्का कर लेना है।
₹50 लाख के होम लोन की EMI: 15, 20, 25 और 30 साल
मान लीजिए ब्याज दर 8% सालाना है। ठीक-ठाक क्रेडिट स्कोर वाले नौकरीपेशा व्यक्ति को आज मोटे तौर पर इतना ही मिल रहा है। होम लोन EMI कैलकुलेटर ये दिखाता है:
| अवधि | महीने की EMI | कुल ब्याज | कुल चुकाएंगे |
|---|---|---|---|
| 15 साल | ₹47,783 | ₹36.01 लाख | ₹86.01 लाख |
| 20 साल | ₹41,822 | ₹50.37 लाख | ₹1.00 करोड़ |
| 25 साल | ₹38,591 | ₹65.77 लाख | ₹1.16 करोड़ |
| 30 साल | ₹36,688 | ₹82.08 लाख | ₹1.32 करोड़ |
20 से 30 साल करने पर EMI करीब ₹5,100 महीना कम होती है। लेकिन ब्याज करीब ₹31.7 लाख बढ़ जाता है। 30 साल के लोन में बैंक को आपके ₹50 लाख तो वापस मिलते ही हैं, ऊपर से ₹82 लाख ब्याज भी।
और हर पांच साल बढ़ाने पर राहत कम, खर्च ज्यादा। 20 से 25 साल करने पर महीने के ₹3,231 बचते हैं और ब्याज ₹15.4 लाख बढ़ता है। 25 से 30 करने पर सिर्फ ₹1,903 महीना बचता है और ब्याज ₹16.3 लाख और बढ़ जाता है।
फिर भी लंबी अवधि हमेशा गलत नहीं है। जब सैलरी कम हो और बच्चे छोटे हों, तब कम EMI से महीने का बजट थोड़ा हल्का रहता है, और बाद में प्रीपेमेंट कर सकते हैं। अलग-अलग अवधि की पूरी तुलना होम लोन 20 साल vs 30 साल वाले लेख में है।
प्लानिंग किस रेट से करें, और विज्ञापन वाला रेट आपको क्यों नहीं मिलता
7 अक्टूबर 2026 को RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.25% से 5.50% कर दिया। लगातार कटौती के लंबे दौर के बाद ये पहली बढ़ोतरी है। पॉलिसी वाले दिन सरकारी बैंकों के सबसे सस्ते होम लोन करीब 7–7.35% से शुरू हो रहे थे (SBI और PNB 7.25%, बैंक ऑफ बड़ौदा 7.20%)। एक-दो दिन में ही PNB, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और दूसरे बैंकों ने अपने रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट 0.25% बढ़ा दिए।
"शुरुआती" रेट उन्हीं को मिलते हैं जिनका क्रेडिट स्कोर सबसे अच्छा है, अक्सर 800 या उससे ऊपर, और कई बार साथ में शर्तें भी होती हैं, जैसे उसी बैंक में सैलरी अकाउंट। ज्यादातर लोग थोड़ा ज्यादा देते हैं, और प्राइवेट बैंक व हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां आमतौर पर सरकारी बैंकों से महंगी पड़ती हैं। तो प्लानिंग 7.5% से 8.5% मानकर कीजिए, और स्कोर कमजोर हो या इनकम अनियमित हो तो 9%।
| ब्याज दर | EMI (₹50 लाख, 20 साल) | कुल ब्याज |
|---|---|---|
| 7.5% | ₹40,280 | ₹46.67 लाख |
| 8% | ₹41,822 | ₹50.37 लाख |
| 8.5% | ₹43,391 | ₹54.14 लाख |
| 9% | ₹44,986 | ₹57.97 लाख |
हर 0.5% का मतलब है करीब ₹1,550 महीना और 20 साल में लगभग ₹4 लाख। इसलिए अप्लाई करने से पहले क्रेडिट स्कोर ठीक कीजिए, कम से कम तीन बैंकों से तुलना कीजिए, और रेट सैंक्शन लेटर पर लिखवाइए। शुरुआत उस बैंक से कीजिए जिसमें सैलरी आती है, वहां अक्सर थोड़ी बेहतर डील मिल जाती है।
आज लगभग हर होम लोन फ्लोटिंग होता है: रेपो रेट और उसके ऊपर एक स्प्रेड, जो सैंक्शन के समय तय हो जाता है। रेपो हिला तो आपका रेट भी हिलेगा। अगर आपका लोन पहले से चल रहा है और आप नए ग्राहकों से 0.5% या ज्यादा दे रहे हैं, तो बैंक से स्प्रेड घटाने को कहिए (कुछ बैंक इसकी छोटी फीस लेते हैं) या लोन कहीं और शिफ्ट कर लीजिए।
रेपो बढ़े तो: EMI बढ़ेगी या लोन लंबा होगा
रेपो से जुड़े लोन में रेट का कोई भी बदलाव अगले रीसेट पर लागू होता है, और ऐसे लोन बैंकों को कम से कम हर तीन महीने में एक बार रीसेट करने होते हैं।
मान लीजिए आपने 7.75% पर 20 साल के लिए ₹50 लाख लिए। EMI: ₹41,047। 0.25% बढ़ने से रेट 8% हो गया। बैंक इसे दो तरीके से संभाल सकता है:
- EMI बढ़ा दे: करीब ₹775 बढ़कर ₹41,822। 20 साल में करीब ₹1.86 लाख ज्यादा ब्याज।
- EMI वही रखे और अवधि बढ़ा दे: करीब 12 महीने ज्यादा। ज्यादा ब्याज: करीब ₹4.76 लाख।
ज्यादातर बैंक डिफॉल्ट में दूसरा तरीका ही अपनाते हैं, क्योंकि EMI न बदले तो कोई शिकायत नहीं करता। पर ये दोगुने से भी ज्यादा महंगा पड़ता है। अगर एक और 0.25% बढ़ोतरी आ गई (कुल 0.5%), तो EMI करीब ₹1,556 ज्यादा, या 25 महीने ज्यादा और ₹10 लाख से ऊपर का एक्स्ट्रा ब्याज। इसलिए रेट बदलने के बाद वाले स्टेटमेंट में सिर्फ EMI नहीं, ये भी देखिए कि कितनी किस्तें बाकी हैं।
फ्लोटिंग रेट EMI लोन के रीसेट पर RBI के नियम आपके साथ हैं। EMI या अवधि बढ़े तो बैंक को आपको बताना होगा, आपको ज्यादा EMI, लंबी अवधि या दोनों का मिक्स चुनने देना होगा, और हर तिमाही एक स्टेटमेंट भेजना होगा जिसमें लगा ब्याज और बची EMI दिखें। फिक्स्ड रेट पर स्विच करने देना अब हर बैंक की अपनी पॉलिसी पर है। अगर बजट में हो, तो बैंक से कहिए कि अवधि की जगह EMI बढ़ाए। ज्यादा जानकारी रेपो रेट बदलने से होम लोन EMI कैसे बदलती है में।
शुरू के सालों में आपकी EMI कहां जाती है
ब्याज बचे हुए बैलेंस पर लगता है, इसलिए शुरुआती EMI में ज्यादातर हिस्सा ब्याज का होता है। 8% पर 20 साल के ₹50 लाख में पहले साल की EMI कुल ₹5.02 लाख बनती है। इसमें ₹3.96 लाख ब्याज है और सिर्फ ₹1.06 लाख से लोन घटता है। दस साल बाद भी करीब ₹34.5 लाख बकाया रहता है। मूलधन, ब्याज से आगे 12वें साल में जाकर निकलता है।
30 साल के लोन में हालत और साफ दिखती है। पहले साल ₹3.98 लाख ब्याज, मूलधन सिर्फ ₹41,768। पांच साल में करीब ₹22 लाख EMI भरने के बाद भी ₹47.5 लाख बकाया। अगर कुछ साल में फ्लैट बेचने या लोन शिफ्ट करने का इरादा है, तो ये बात याद रखिए।
साल-दर-साल का हिसाब EMI कैलकुलेटर पर दिखता है। इसी वजह से लोन के शुरू में किया प्रीपेमेंट, बाद में किए उतने ही प्रीपेमेंट से ज्यादा बचाता है।
₹50 लाख के होम लोन के लिए कितनी सैलरी चाहिए
बैंक देखता है कि आपकी महीने की इनकम का कितना हिस्सा सारी EMI मिलाकर जाता है। इसे FOIR (फिक्स्ड ऑब्लिगेशन टू इनकम रेशियो) कहते हैं। ज्यादातर बैंक इनकम और कंपनी के हिसाब से नेट मंथली इनकम का 40% से 60% तक मानते हैं। आम तौर पर चलने वाले 50% पर, 8% पर ₹50 लाख के लिए (कोई और लोन न हो तो) इतनी इन-हैंड सैलरी चाहिए:
| अवधि | EMI | जरूरी नेट मंथली सैलरी (50% FOIR) |
|---|---|---|
| 15 साल | ₹47,783 | करीब ₹95,600 |
| 20 साल | ₹41,822 | करीब ₹83,700 |
| 25 साल | ₹38,591 | करीब ₹77,200 |
| 30 साल | ₹36,688 | करीब ₹73,400 |
पहले से चल रही EMI इसमें से कटती है। मान लीजिए हाथ में ₹1 लाख महीना आता है और ₹12,000 की कार EMI चल रही है, तो 8% पर 20 साल के लिए बैंक की लिमिट घटकर करीब ₹45.4 लाख रह जाती है। कार लोन चलते हुए पूरे ₹50 लाख के लिए करीब ₹1,07,700 इन-हैंड चाहिए। अपने नंबर होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर पर डालकर देखिए।
लंबी अवधि या कमाने वाले जीवनसाथी को को-बॉरोअर बनाना, दोनों से एलिजिबिलिटी बढ़ती है। पर बैंक की लिमिट वो है जितना वो ज्यादा से ज्यादा देगा, ये नहीं कि आपके लिए आराम से कितना चलेगा। इन-हैंड का आधा EMI में चला गया तो स्कूल फीस, मां-बाप के इलाज और SIP के लिए कम बचता है। 35–40% के आसपास रखें तो घर आराम से चलता है।
डाउन पेमेंट और पहले दिन के बाकी खर्च
₹30 लाख से ₹75 लाख तक के लोन पर RBI के नियम से लोन प्रॉपर्टी की कीमत का ज्यादा से ज्यादा 80% हो सकता है। यानी ₹50 लाख के लोन के लिए फ्लैट कम से कम ₹62.5 लाख का होना चाहिए, और ₹12.5 लाख आपको खुद लगाने होंगे। बैंक का वैल्यूएशन आपकी एग्रीमेंट कीमत से कम आया, तो 80% उसी कम रकम का होगा।
स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन लोन के लिए प्रॉपर्टी की कीमत में नहीं गिने जाते, ये आपको अपनी जेब से देने होते हैं। स्टांप ड्यूटी राज्य तय करता है: गुजरात में 4.9%, मुंबई में 6%, ज्यादातर बड़े राज्यों में 5–7%, और कई राज्य महिला खरीदार को 1–2% की छूट देते हैं। रजिस्ट्रेशन आमतौर पर करीब 1% है, कुछ राज्यों में इसकी लिमिट है (महाराष्ट्र में ₹30,000)। ₹62.5 लाख के रेडी फ्लैट पर, 6% स्टांप ड्यूटी मानकर:
| खर्च | रकम |
|---|---|
| डाउन पेमेंट (20%) | ₹12,50,000 |
| स्टांप ड्यूटी (6%; अपने राज्य का रेट देखें) | ₹3,75,000 |
| रजिस्ट्रेशन (1%) | ₹62,500 |
| प्रोसेसिंग फीस (मान लीजिए लोन का 0.5% + 18% GST) | ₹29,500 |
| कुल कैश, मोटे तौर पर | ₹17.2 लाख |
इसमें लीगल और वैल्यूएशन चार्ज, सोसाइटी ट्रांसफर फीस, ब्रोकरेज और थोड़ा फर्नीचर जोड़िए, तो ₹18–20 लाख मानना ज्यादा सही है। अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट पर 5% GST भी लगता है (यहां करीब ₹3.13 लाख); कंप्लीशन सर्टिफिकेट वाले रेडी फ्लैट पर नहीं।
₹50 लाख या उससे ज्यादा की प्रॉपर्टी पर खरीदार होने के नाते आपको कीमत में से 1% TDS (यहां ₹62,500) काटकर टैक्स डिपार्टमेंट में जमा करना होता है। ये एक्स्ट्रा खर्च नहीं है, बस सेलर को उतना कम देते हैं, पर लोग भूल जाते हैं और बाद में नोटिस आता है।
यहां बहुत लोग एक गलती करते हैं: सारी बचत इसी में झोंक देते हैं। नौकरी बदले या घर में कोई बीमार पड़े, EMI तो आती ही रहेगी, इसलिए कुछ महीनों का घरखर्च अलग रहने दीजिए, चाहे फ्लैट थोड़ा छोटा लेना पड़े। फ्लैट ढूंढते वक्त डाउन पेमेंट का पैसा FD या लिक्विड फंड में रखिए, शेयर में नहीं। तब तक उस पर कितना ब्याज बनेगा, ये FD कैलकुलेटर बता देगा।
ब्याज पर ₹2 लाख की छूट, और ये नई रिजीम से कम ही जीतती है
इनकम-टैक्स एक्ट 2025 में होम लोन की छूट अब भी है, बस सेक्शन नंबर नए हैं, और जिस घर में आप खुद रहते हैं उसके लिए ये सिर्फ पुरानी रिजीम में मिलती है:
- ब्याज: सेक्शन 22 (पुराना 24(b)) में साल का ₹2 लाख तक। लोन लेने वाले टैक्स साल के खत्म होने से पांच साल के अंदर घर बन जाना चाहिए, वरना लिमिट ₹30,000 रह जाती है। पजेशन से पहले भरा ब्याज, घर बनने वाले साल से पांच बराबर हिस्सों में क्लेम होता है, उसी ₹2 लाख के अंदर।
- मूलधन: सेक्शन 123 (पुराना 80C) में, PF, PPF और बीमे के साथ उसी ₹1.5 लाख की लिमिट में। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन भी इसी में आते हैं, जिस साल भरे उस साल।
हमारे लोन पर पहले साल का ब्याज करीब ₹3.96 लाख है, यानी क्लेम सिर्फ ₹2 लाख का होगा। ₹1.06 लाख का मूलधन अक्सर पूरा नहीं समा पाता, क्योंकि ₹1.5 लाख का बड़ा हिस्सा PF में ही चला जाता है।
अब कड़वी बात। ₹20 लाख कमाने वाला कोई व्यक्ति सेक्शन 123 में ₹1.5 लाख, हेल्थ इंश्योरेंस के ₹25,000 और ब्याज के पूरे ₹2 लाख क्लेम करे, तो इनकम टैक्स कैलकुलेटर के हिसाब से पुरानी रिजीम में टैक्स ₹2,96,400 बनता है। नई रिजीम में, बिना किसी छूट के, ₹1,92,400। नई रिजीम फिर भी ₹1.04 लाख सस्ती। ब्याज वाली छूट करीब ₹62,400 बचाती है, पर इतने से फासला नहीं भरता।
तो टैक्स बचाने के लिए बड़ा लोन मत लीजिए। ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए होम लोन के साथ भी नई रिजीम सस्ती रहती है, जब तक साथ में बड़ा HRA क्लेम या दूसरी बड़ी छूट न हों। फ्लैट दोनों के नाम हो और लोन जॉइंट हो, तो पुरानी रिजीम में हर को-बॉरोअर अपना हिस्सा अलग से क्लेम कर सकता है।
प्रीपेमेंट: ₹10–17 लाख ब्याज बचाने का सबसे आसान तरीका
व्यक्तियों को दिए फ्लोटिंग रेट होम लोन पर बैंक कोई प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर चार्ज नहीं ले सकते। RBI के प्री-पेमेंट चार्ज पर 2025 के निर्देश 1 जनवरी 2026 से मंजूर लोन के लिए यही बात दोहराते हैं, बिना किसी लॉक-इन के। यानी एक्स्ट्रा भरा हर रुपया सीधे मूलधन घटाता है।
8% पर 20 साल के लिए ₹50 लाख, EMI वही, अवधि घटने दी जाए:
| एक्स्ट्रा पेमेंट | लोन कब खत्म | ब्याज की बचत |
|---|---|---|
| कुछ नहीं | 20 साल | कुछ नहीं |
| साल में एक एक्स्ट्रा EMI (₹41,822) | 16 साल 11 महीने | करीब ₹9.1 लाख |
| ₹50,000 साल | 16 साल 4 महीने | करीब ₹10.5 लाख |
| ₹1 लाख साल | 14 साल | करीब ₹17 लाख |
हर साल का बोनस या इंक्रीमेंट का एरियर लोन अकाउंट में डाल दीजिए, बस इतना काफी है। प्रीपेमेंट करते वक्त बैंक से EMI नहीं, अवधि घटाने को कहिए; इससे ब्याज कहीं ज्यादा बचता है। दोनों का फर्क EMI घटाएं या अवधि में समझाया है।
प्रीपेमेंट करें या निवेश? नई रिजीम में 8% का लोन पूरा 8% का पड़ता है, यानी प्रीपे किया हर रुपया पक्का 8% कमाता है। इक्विटी SIP 15 साल में 10–12% दे सकती है, पर ये अंदाजा है। ज्यादातर परिवार दोनों करते हैं: लंबे लक्ष्यों के लिए SIP, बोनस लोन में।
15, 20 या 30 साल: आपकी सैलरी और उम्र के हिसाब से
- हाथ में ₹1 लाख या ज्यादा और कोई दूसरा लोन नहीं: 15 साल। 20 साल से करीब ₹14 लाख कम ब्याज, और बच्चों के कॉलेज से पहले कर्ज खत्म।
- 20 के आखिर या 30 की उम्र वाले ज्यादातर नौकरीपेशा: 20 साल। EMI संभलने लायक, ब्याज काबू में।
- मुश्किल से एलिजिबल, या कम उम्र और बढ़ती सैलरी: 25 या 30 साल, पर चलाइए 20 साल के लोन की तरह। हर साल प्रीपे कीजिए या हर इंक्रीमेंट के बाद EMI बढ़ाइए। लंबी अवधि सहारा है, प्लान नहीं।
- 40 की उम्र के बाद: ज्यादातर बैंक चाहते हैं कि लोन 60 से 70 की उम्र तक खत्म हो जाए, तो अवधि कम मिलती है। रिटायरमेंट तक खिंचने वाली EMI से बेहतर है बड़ा डाउन पेमेंट।
सैंक्शन लेटर पर साइन से पहले: बैंक से ये छह सवाल पूछिए
बैंक वाले मुंह से जो कहें वो नहीं, सैंक्शन लेटर में जो लिखा है वही पक्का है। लेटर बैंक के काउंटर पर खड़े-खड़े नहीं, घर पर बैठकर पढ़िए, और साइन करने से पहले ये पूछ लीजिए।
पहला सवाल: "रेपो रेट के ऊपर मेरा स्प्रेड कितना है?" रेपो 5.50% है और लोन 8% पर मिल रहा है, तो स्प्रेड 2.50% है। अगले 20 साल रेपो वाला हिस्सा ऊपर-नीचे होगा, पर स्प्रेड आमतौर पर वहीं रहता है जहां साइन वाले दिन था। इसलिए बैंकों की तुलना विज्ञापन वाले रेट पर नहीं, स्प्रेड पर कीजिए। इस लोन पर स्प्रेड में हर 0.25% का मतलब है करीब ₹775 महीना, और 20 साल में करीब ₹1.86 लाख।
दूसरा: "रेट बढ़ा तो आप मेरी EMI बढ़ाएंगे या अवधि, और क्या मैं अभी से चुन सकता हूं?" जवाब "डिफॉल्ट में अवधि" हो, तो लिखवा लीजिए कि आपको EMI बढ़वानी है। ऊपर वाले 7.75% से 8% के उदाहरण में इसी एक लाइन से ₹1.86 लाख और ₹4.76 लाख एक्स्ट्रा ब्याज का फर्क पड़ता है।
तीसरा: "फ्लैट का आपका वैल्यूएशन कितना आया?" बैंक ₹62.5 लाख के फ्लैट को ₹60 लाख का माने, तो उसका 80% यानी ₹48 लाख, और बाकी ₹2 लाख आपको रजिस्ट्री से पहले कैश में जुटाने होंगे। पजेशन से एक हफ्ता पहले पता चलने से अच्छा है कि अभी पता चल जाए।
चौथा: "लोन मिलने से पहले सब मिलाकर मुझे क्या-क्या देना है?" हमारे उदाहरण में प्रोसेसिंग फीस GST के साथ ₹29,500 है, पर लीगल, वैल्यूएशन और डॉक्यूमेंटेशन चार्ज ऊपर से आते हैं। पूरी लिस्ट लिखकर मांगिए, ताकि कैश प्लान वाले ₹17.2 लाख चुपचाप ₹19 लाख न बन जाएं।
पांचवां: "क्या लोन का इंश्योरेंस जरूरी है?" होना नहीं चाहिए, लेना है या नहीं ये आपकी मर्जी है। लोन में जोड़ा गया सिंगल-प्रीमियम कवर अक्सर सादे टर्म प्लान से महंगा पड़ता है, और प्रीमियम लोन का हिस्सा बन जाता है तो उस पर भी 8% ब्याज लगता है। आपके नाम पर कम से कम ₹50 लाख का टर्म प्लान ज्यादातर कम खर्च में यही काम कर देता है।
छठा: "प्रीपेमेंट या फोरक्लोजर का कोई चार्ज है?" व्यक्ति को दिए फ्लोटिंग रेट होम लोन पर जवाब "नहीं" ही होना चाहिए। लेटर में कोई चार्ज लिखा है, तो साइन से पहले ठीक से समझ लीजिए कि आपको असल में कौन सा लोन मंजूर हुआ है, क्योंकि ऊपर वाला पूरा प्रीपेमेंट प्लान इसी पर टिका है।
जवाब ठीक लगें और EMI इन-हैंड सैलरी के 35–40% के आसपास हो, तो साइन कर दीजिए। ₹62–65 लाख का फ्लैट लेने वाले ज्यादातर लोगों के लिए 20 साल का लोन और हर साल ₹50,000 या ज्यादा प्रीपेमेंट, यही सबसे समझदारी वाला रास्ता है: EMI संभल जाती है, और लोन 20 की जगह करीब 16 साल में खत्म।
लोग अक्सर पूछते हैं
₹50 लाख के होम लोन की 20 साल की EMI कितनी होगी?
8% सालाना पर ₹41,822 महीना, और 20 साल में करीब ₹50.37 लाख ब्याज। 7.5% पर EMI ₹40,280, 8.5% पर ₹43,391 और 9% पर ₹44,986 बनती है। हर 0.5% बढ़ने पर EMI करीब ₹1,550 बढ़ती है।
₹50 लाख के होम लोन के लिए कितनी सैलरी चाहिए?
ज्यादातर बैंक आपकी सारी EMI मिलाकर नेट मंथली इनकम का 40–60% तक मानते हैं। 50% और 8% पर 20 साल के लोन के लिए करीब ₹83,700 इन-हैंड चाहिए, 25 साल के लिए ₹77,200 और 30 साल के लिए ₹73,400। कार लोन जैसी चल रही EMI हो तो लोन कम मिलता है।
₹50 लाख के होम लोन के लिए डाउन पेमेंट कितना चाहिए?
₹30 लाख से ₹75 लाख के लोन पर बैंक प्रॉपर्टी की कीमत का 80% तक दे सकता है, यानी फ्लैट कम से कम ₹62.5 लाख का चाहिए और ₹12.5 लाख आपके। ऊपर से स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस, तो राज्य के हिसाब से कुल करीब ₹17–20 लाख कैश चाहिए।
अक्टूबर 2026 में रेपो रेट बढ़ा, तो क्या मेरी होम लोन EMI बढ़ेगी?
लोन रेपो रेट से जुड़ा है तो 5.50% तक की 0.25% बढ़ोतरी अगले रीसेट पर लागू होगी, जो कम से कम तीन महीने में एक बार होता है। कई बैंक डिफॉल्ट में EMI वही रखकर अवधि बढ़ा देते हैं, जिसमें ब्याज ज्यादा लगता है। 20 साल के ₹50 लाख पर 7.75% से 8% होने पर EMI करीब ₹775 बढ़ती है, या अवधि करीब 12 महीने।
होम लोन 30 साल का लें या 20 साल का?
30 साल में EMI कम है पर ब्याज बहुत ज्यादा। 8% पर ₹50 लाख के लिए 30 साल लेने पर 20 साल के मुकाबले EMI करीब ₹5,100 महीना घटती है, लेकिन ब्याज करीब ₹31.7 लाख बढ़ जाता है। कम EMI सच में जरूरी हो तभी लंबी अवधि लीजिए, और जब हो सके प्रीपे कीजिए।
क्या नई टैक्स रिजीम में होम लोन पर टैक्स छूट मिलती है?
जिस घर में आप खुद रहते हैं उसके लिए नहीं। ब्याज पर ₹2 लाख की छूट (सेक्शन 22, पुराना 24(b)) और सेक्शन 123 (पुराना 80C) में मूलधन की छूट सिर्फ पुरानी रिजीम में है। ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए होम लोन के साथ भी नई रिजीम सस्ती पड़ती है, तो इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर दोनों मिलाकर देखिए।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क