निरव और हेतल ने दिवाली से एक हफ्ता पहले सूरत के वेसु इलाके में अपने 2BHK की चाबी ली। ₹50 लाख का जॉइंट लोन, 20 साल, 8.5%, महीने की EMI ₹43,391। साइन करवाते वक्त बैंक के सेल्स वाले ने दो बार कहा था: "टैक्स बेनिफिट भी मिलेगा, सर।" जनवरी में निरव के HR पोर्टल ने पुरानी या नई रिजीम चुनने को कहा, और तब उसे समझ आया कि वो बेनिफिट असल में है क्या और नई रिजीम में फाइल करने वाले के लिए है भी या नहीं, ये किसी ने बताया ही नहीं।
ये रही सच्ची बात, साइट के कैलकुलेटर पर ठीक उन्हीं के लोन के लिए निकाली हुई। पुरानी रिजीम में ब्याज और मूलधन दोनों पर छूट मिलती है। नई रिजीम में जिस घर में आप रहते हैं उस पर कुछ नहीं, और किराए पर दिए घर पर थोड़ा सा। और ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए पुरानी रिजीम का पूरा फायदा भी पुरानी रिजीम को सस्ता नहीं बनाता। नीचे के आंकड़े बताते हैं कि वो लाइन कहां आती है, और लोन जॉइंट हो, फ्लैट किराए पर हो या बिल्डिंग अभी बन रही हो तो क्या बदलता है।
₹50 लाख के लोन में साल दर साल कितना ब्याज जाता है
टैक्स के नियम ब्याज और मूलधन को अलग-अलग देखते हैं, इसलिए पहले ये देखिए कि साल में दोनों में से कितना जाता है। होम लोन EMI कैलकुलेटर पर ₹50 लाख 8.5% पर 20 साल के लिए लें तो EMI ₹43,391 आती है, यानी साल के ₹5,20,694। बंटवारा हर साल बदलता है:
| साल | चुकाया ब्याज | भरा मूलधन | क्लेम हो सकने वाला ब्याज (सीमा ₹2 लाख) |
|---|---|---|---|
| 1 | ₹4,21,182 | ₹99,511 | ₹2,00,000 |
| 2 | ₹4,12,387 | ₹1,08,307 | ₹2,00,000 |
| 5 | ₹3,81,053 | ₹1,39,641 | ₹2,00,000 |
| 10 | ₹3,07,420 | ₹2,13,274 | ₹2,00,000 |
| 14 | ₹2,21,415 | ₹2,99,279 | ₹2,00,000 |
| 15 | ₹1,94,961 | ₹3,25,733 | ₹1,94,961 |
| 18 | ₹1,00,726 | ₹4,19,968 | ₹1,00,726 |
| 20 | ₹23,202 | ₹4,97,492 | ₹23,202 |
मान्यताएं: ₹50 लाख, पूरी अवधि 8.5% फिक्स, 20 साल, पहले महीने से EMI। 20 साल में ब्याज कुल ₹54,13,879 होता है, जिसमें से सिर्फ ₹34,83,494 ही साल की ₹2 लाख की सीमा में समाता है। बाकी ₹19,30,385 को किसी भी रिजीम में कोई टैक्स राहत नहीं।
8.5% के बारे में। 7 अक्टूबर 2026 को RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% किया, बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक। उसी दिन सबसे सस्ते सरकारी बैंकों के होम लोन सबसे अच्छे क्रेडिट स्कोर के लिए 7.0% से 7.35% से शुरू हो रहे थे, और बढ़ोतरी के बाद रेट ऊपर जाने की उम्मीद थी। आम स्कोर वाला दंपति प्राइवेट बैंक में 8 से 8.5% के आसपास पहुंचता है, इसलिए यहां वही रेट लिया है। EMI वाला हिस्सा ₹50 लाख होम लोन की EMI में आ चुका है। ये पोस्ट सिर्फ टैक्स के बारे में है।
पुरानी रिजीम में क्या मिलता है
1 अप्रैल 2026 से इनकम-टैक्स एक्ट 2025 लागू है। जानी-पहचानी धाराओं के नंबर बदले हैं, नियम नहीं। नीचे के लिंक उन साइटों पर जाते हैं जो धारा का टेक्स्ट जस का तस देती हैं।
| फायदा | पुराना नंबर | नया नंबर | साल की सीमा |
|---|---|---|---|
| अपने रहने वाले घर का ब्याज | 24(b) | 22(1)(b) | ₹2,00,000 |
| भरा मूलधन, साथ में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन | 80C | 123, शेड्यूल XV के साथ | ₹1,50,000, PF, PPF, बीमा, ELSS के साथ साझा |
| अतिरिक्त ब्याज, सस्ता घर | 80EEA | 131 | ₹1,50,000, सिर्फ 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच मंजूर लोन |
| किराए पर दिए घर का घाटा सैलरी के सामने | 71(3A) | 109(1) | ₹2,00,000 |
ब्याज: धारा 22, पुरानी 24(b)
अपने रहने वाले घर के लिए नए एक्ट की धारा 22 लोन का ब्याज साल के ₹2,00,000 तक घटाने देती है, दो शर्तों पर: लोन लेने वाले टैक्स साल के अंत से पांच साल के अंदर घर खरीदा या बन गया हो (वरना सीमा ₹30,000 रह जाती है), और बैंक ब्याज का सर्टिफिकेट दे। निरव और हेतल का पहले साल का ब्याज ₹4,21,182 है, इसलिए ये लोन साल में ज्यादा से ज्यादा ₹2 लाख ही क्लेम कर सकता है, और 14वें साल तक यही रहता है।
मूलधन: धारा 123, पुरानी 80C
EMI का मूलधन वाला हिस्सा धारा 123 की ₹1.5 लाख की टोकरी में जाता है, जो EPF, PPF, LIC प्रीमियम और ELSS के साथ साझा है। स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन भी गिने जाते हैं, सिर्फ जिस साल भरें उसी साल, उसी ₹1.5 लाख के अंदर। ₹62.5 लाख के फ्लैट पर (₹50 लाख उसका 80% है) ज्यादातर राज्यों में स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन ₹3 लाख के ऊपर जाते हैं, इसलिए उस एक साल सीमा उसी से भर जाती है। उसके बाद मूलधन: पहले साल ₹99,511, पांचवें साल ₹1,39,641, छठे साल से अकेले ही ₹1.5 लाख के ऊपर। आम EPF जोड़ दें तो तीसरे-चौथे साल तक टोकरी भर जाती है।
80EEA: अभी लिए लोन के लिए नहीं
धारा 80EEA, अब धारा 131, ₹45 लाख तक की स्टांप ड्यूटी वैल्यू वाले पहले घर पर ब्याज की ₹1.5 लाख की एक और छूट देती थी। ये सिर्फ 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2022 के बीच मंजूर हुए लोन पर लागू होती है, जैसा ClearTax का 80EEA वाला पेज भी बताता है। 2026 में मंजूर हुए लोन को इससे कुछ नहीं मिलता।
नई रिजीम में क्या मिलता है: अपने घर पर कुछ नहीं
नई रिजीम डिफॉल्ट है, और इनकम-टैक्स एक्ट 2025 की धारा 202 (पुरानी 115BAC) लिस्ट देती है कि वो क्या-क्या बंद करती है। होम लोन के लिए उसमें की तीन बातें मायने रखती हैं:
- अपने रहने वाले घर के लिए धारा 22(1)(b) की ब्याज छूट। यानी ₹2 लाख गए।
- चैप्टर VIII की छूटें, जिसमें धारा 123 आती है। यानी मूलधन और स्टांप ड्यूटी पर कुछ नहीं।
- "घर से आय" के घाटे का किसी और आय के सामने सेट-ऑफ। यानी किराए पर दिए घर का घाटा सैलरी की आय कम नहीं कर सकता।
जिस घर में आप रहते हैं उसके लिए बात इतनी ही: टैक्स बेनिफिट शून्य। बदले में मिलते हैं कम स्लैब रेट और पुरानी रिजीम के ₹50,000 के मुकाबले ₹75,000 का स्टैंडर्ड डिडक्शन। ये सौदा आपके लिए अच्छा है या नहीं, यही अगले दो हिस्से गिनकर बताते हैं।
किराए पर दिए घर के लिए अभी भी कुछ बचता है। धारा 22 के तहत किराए की आय निकालते वक्त ब्याज घटता है, और वो हिस्सा बंद नहीं हुआ। किराया आता है, 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन और पूरा ब्याज घटता है, और नतीजा शून्य या माइनस आए तो किराए पर टैक्स नहीं। घाटा बस उससे आगे नहीं जा सकता।
30% स्लैब वाले के लिए पुरानी रिजीम में साल दर साल बचा टैक्स
निरव साल के ₹15 लाख कमाता है। पुरानी रिजीम में ₹50,000 के स्टैंडर्ड डिडक्शन के बाद उसकी टैक्सेबल इनकम ₹14.5 लाख, यानी 30% स्लैब में (सेस के साथ 31.2%)। छूट का हर ₹1 उसके 31.2 पैसे बचाता है। मान लीजिए वो EPF और PPF से धारा 123 के ₹1.5 लाख पहले से भरता है और हेल्थ इंश्योरेंस के ₹25,000 देता है। इनकम टैक्स कैलकुलेटर लोन के बिना उसका पुरानी रिजीम का टैक्स ₹2,02,800 बताता है। लोन का ब्याज जोड़ें तो:
| साल | क्लेम किया ब्याज | पुरानी रिजीम का टैक्स | लोन से बचा | फिर भी नई रिजीम से कितना ज्यादा |
|---|---|---|---|---|
| 1 से 14 | ₹2,00,000 | ₹1,40,400 | ₹62,400 | ₹42,900 |
| 15 | ₹1,94,961 | ₹1,41,970 | ₹60,830 | ₹44,470 |
| 16 | ₹1,66,169 | ₹1,50,950 | ₹51,850 | ₹53,450 |
| 17 | ₹1,34,832 | ₹1,60,730 | ₹42,070 | ₹63,230 |
| 18 | ₹1,00,726 | ₹1,71,370 | ₹31,430 | ₹73,870 |
| 19 | ₹63,604 | ₹1,82,960 | ₹19,840 | ₹85,460 |
| 20 | ₹23,202 | ₹1,95,560 | ₹7,240 | ₹98,060 |
मान्यताएं: हर साल ₹15 लाख की सैलरी (लोन का असर दिखे इसलिए एक जैसी रखी), उम्र 60 से कम, धारा 123 ₹1.5 लाख से भरी, ₹25,000 हेल्थ इंश्योरेंस, FY 2026-27 के स्लैब। उसी सैलरी पर नई रिजीम का टैक्स: ₹97,500।
दो बातें तुरंत दिखती हैं। लोन निरव के चौदह साल तक साल के ₹62,400 और पूरे बीस साल में ₹10,86,860 बचाता है, जो असली पैसा है। फिर भी उन हर साल में उसका पुरानी रिजीम का बिल नई रिजीम से ₹42,900 ज्यादा ही रहता है। धारा 123 की टोकरी भरी हो तब भी नई रिजीम के सस्ते स्लैब उसके लिए ₹2 लाख की छूट से ज्यादा कीमती हैं। बैंक वाला सही था कि बेनिफिट है, और गलत था कि निरव को उससे फर्क पड़ता है।
₹20 लाख पर फासला कम नहीं, और बढ़ता है: उन्हीं छूटों और पूरे ₹2 लाख के ब्याज के साथ पुरानी रिजीम में ₹2,96,400, नई में ₹1,92,400। ज्यादा आय पुरानी रिजीम को नहीं बचाती। सिर्फ ज्यादा छूटें बचाती हैं।
₹8 से ₹25 लाख की सैलरी पर दोनों रिजीम में पूरा टैक्स ₹8 से ₹25 लाख की सैलरी पर टैक्स में है, और नई रिजीम में ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर टैक्स क्यों नहीं लगता, ये ₹12 लाख तक ज़ीरो टैक्स में है।
ब्रेक-ईवन: पुरानी रिजीम को कितनी छूट चाहिए
तो लोन पलड़ा कब पलटता है? तभी जब वो कई बड़ी छूटों में से एक हो। इनकम टैक्स कैलकुलेटर के मुताबिक, कुल छूट (स्टैंडर्ड डिडक्शन के ऊपर) कितनी हो तो पुरानी रिजीम का टैक्स नई के बराबर हो जाए:
| सैलरी | नई रिजीम का टैक्स | पुरानी को बराबरी के लिए चाहिए छूट |
|---|---|---|
| ₹15 लाख | ₹97,500 | ₹5,44,000 |
| ₹18 लाख | ₹1,50,800 | ₹6,42,000 |
| ₹20 लाख | ₹1,92,400 | ₹7,09,000 |
| ₹25 लाख | ₹3,19,800 | ₹8,00,000 |
| ₹30 लाख | ₹4,75,800 | ₹8,00,000 |
मान्यताएं: नौकरीपेशा, 60 से कम, FY 2026-27 के स्लैब, सरचार्ज नहीं। छूट मतलब पुरानी रिजीम का सब कुछ मिलाकर: धारा 123, हेल्थ इंश्योरेंस, NPS, HRA, होम लोन का ब्याज वगैरह। ₹12 लाख से नीचे रिबेट की वजह से नई रिजीम का टैक्स शून्य है, इसलिए वहां ब्रेक-ईवन जैसा कुछ नहीं।
होम लोन इस ढेर में ज्यादा से ज्यादा ₹3.5 लाख लाता है: ₹2 लाख ब्याज और ₹1.5 लाख मूलधन (मूलधन तभी, जब धारा 123 में और कुछ न हो)। ₹25,000 का हेल्थ इंश्योरेंस और NPS की अतिरिक्त ₹50,000 की छूट जोड़ें तो निरव ₹4.25 लाख पर पहुंचता है, ₹15 लाख की सैलरी पर अभी भी ₹1.19 लाख कम। कैलकुलेटर उसका पुरानी रिजीम का टैक्स ₹1,24,800 बताता है, नई में ₹97,500। फासला आमतौर पर HRA भरता है, और अभी-अभी खरीदे घर में रहने वाले को HRA नहीं मिलता। निरव का एक साथी, जिसने सूरत में घर लिया है पर हफ्ते के दिन अहमदाबाद में काम करता है और वहां ₹10,000 किराया देता है, उसे मिलता है: ऊपर से ₹1.2 लाख का HRA जोड़ें तो पुरानी रिजीम ₹97,240 आती है, नई से ₹260 कम। यानी बराबरी।
सीधा नियम: नौकरीपेशा के लिए अकेला होम लोन पुरानी रिजीम को कभी नहीं जिताता। लोन HRA या दूसरी बड़ी छूटों के ढेर के साथ बैठा हो तभी जीतता है। इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर अपने आंकड़े दोनों रिजीम में चलाइए, और बिना होम लोन के हर आय पर ब्रेक-ईवन के लिए FY 2026-27 के लिए नई या पुरानी टैक्स रिजीम देखिए।
फ्लैट किराए पर हो तो: एक ही केस जहां नई रिजीम मदद करती है
मान लीजिए निरव और हेतल उसके माता-पिता के साथ ही रहते हैं और वेसु का फ्लैट महीने के ₹15,000 पर किराए पर देते हैं। घर से आय का हिसाब, दोनों रिजीम में, ये रहा:
| मद | रकम |
|---|---|
| मिला किराया | ₹1,80,000 |
| घटाएं 30% स्टैंडर्ड डिडक्शन (धारा 22(1)(a)) | ₹54,000 |
| घटाएं ब्याज, पहला साल, किराए के घर पर सीमा नहीं | ₹4,21,182 |
| घर से आय में घाटा | ₹2,95,182 |
मान्यताएं: 12 महीने महीने के ₹15,000 किराया, म्युनिसिपल टैक्स नहीं गिना, पहले साल का ब्याज ऊपर की टेबल से। यहां ब्याज पर ₹2 लाख की कोई सीमा नहीं। सीमा उस घाटे पर है जो आप इस्तेमाल कर सकते हैं।
पुरानी रिजीम: धारा 109 (पुरानी 71(3A)) इस घाटे में से ₹2,00,000 उसी साल सैलरी के सामने सेट-ऑफ करने देती है। बाकी ₹95,182 धारा 110 के तहत आठ साल तक आगे ले जाया जा सकता है, पर सिर्फ आगे की किराए की आय के सामने। ₹2 लाख के सेट-ऑफ के साथ ₹15 लाख पर निरव का टैक्स ₹1,40,400 आता है, अपने रहने वाले घर के केस जितना ही, ऊपर से किराया बिना टैक्स का।
नई रिजीम: किराया अब भी स्टैंडर्ड डिडक्शन और ब्याज से धुल जाता है, इसलिए ₹1.8 लाख टैक्स-फ्री आता है। यही फायदा है। ₹2,95,182 का घाटा उसकी सैलरी को छू नहीं सकता, और उसका टैक्स ₹97,500 ही रहता है। नई रिजीम में बचा हुआ घाटा आगे के किराए के सामने ले जाया जा सकता है या नहीं, इसे अलग-अलग CA अलग तरह से पढ़ते हैं, इसलिए उस पर भरोसा करने से पहले अपने CA से पूछिए। जो भी हो, निरव के लिए ₹97,500 ₹1,40,400 को हराता है, किराए पर हो या न हो।
जॉइंट लोन: दोनों क्लेम कर सकते हैं, पर रिजीम हर कोई अपनी चुनता है
फ्लैट दोनों के नाम है और दोनों उधारकर्ता हैं, दोनों के क्लेम के लिए यही शर्त है। Taxguru पर मई 2026 का ये नोट समझाता है कि हर सह-मालिक जो सह-उधारकर्ता भी हो, अपने हिस्से का ब्याज अपने ₹2 लाख तक और मूलधन अपने ₹1.5 लाख तक क्लेम करता है। हिस्सा मतलब रजिस्टर्ड दस्तावेज में मालिकाना हिस्सा, और पैसा सच में उसके अपने या जॉइंट खाते से जाना चाहिए।
50:50 पर पहले साल का ₹4,21,182 का ब्याज हरेक के ₹2,10,591 होता है, इसलिए दोनों पूरे ₹2 लाख क्लेम कर सकते हैं, और ₹99,511 का मूलधन हरेक के ₹49,756। कागज पर दंपति साल में ₹2 लाख की जगह ₹4 लाख ब्याज घटा सकता है, इसीलिए CA को जॉइंट लोन पसंद है।
पेंच ये है कि रिजीम की पसंद हर व्यक्ति की अपनी है। हेतल ₹12 लाख कमाती है। नई रिजीम में उसका टैक्स ₹0 है, क्योंकि रिबेट ₹12 लाख तक की टैक्सेबल इनकम को कवर करता है। पुरानी रिजीम में टोकरी भरी हो, ₹25,000 का हेल्थ इंश्योरेंस और उसका ₹2 लाख का ब्याज हो तब भी वो ₹70,200 देती है। लोन का उसका हिस्सा उसके किसी काम का नहीं, और वो निरव को दिया भी नहीं जा सकता। जॉइंट लोन छूट तभी दोगुनी करता है जब दोनों कमाने वाले पुरानी रिजीम इस्तेमाल कर सकें, जिसका मतलब असल में दोनों ₹15 लाख से काफी ऊपर और HRA या दूसरी बड़ी छूटों के साथ। और लोन जॉइंट हो पर फ्लैट एक के नाम हो, तो सिर्फ मालिक ही क्लेम कर सकता है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट: ब्याज पांच किस्तों में
मान लीजिए वेसु की बिल्डिंग तैयार नहीं थी और पजेशन मार्च 2028 में मिला, लोन शुरू होने के दो साल बाद। पजेशन के साल से पहले चुकाए ब्याज को प्री-कंस्ट्रक्शन (या प्रायर पीरियड) ब्याज कहते हैं। धारा 22 इसे घर पूरा होने वाले साल से पांच बराबर किस्तों में क्लेम करने देती है। इस लोन में वो ₹4,21,182 और ₹4,12,387, यानी ₹8,33,569, यानी पांच साल तक साल के ₹1,66,714।
बोनस जैसा लगता है, और किराए पर दिए घर के लिए है भी। अपने रहने वाले घर के लिए ये ज्यादातर कागज पर ही, क्योंकि ₹2 लाख की सीमा उस साल के ब्याज और किस्त दोनों को मिलाकर है। तीसरे साल अकेला नियमित ब्याज ही ₹4,02,813, सीमा का दोगुना, इसलिए ₹1,66,714 की किस्त को कुछ नहीं मिलता। ₹50 लाख के लोन में नियमित ब्याज 15वें साल जाकर ₹2 लाख से नीचे आता है, और तब तक पांचों किस्तें कब की खत्म हो चुकी होती हैं। छोटे लोन में, जहां साल का ब्याज सीमा से नीचे हो, किस्तें सच में काम आती हैं।
दो नियम और। लोन लेने वाले टैक्स साल के अंत से पांच साल में कंस्ट्रक्शन पूरा न हो तो सीमा ₹2 लाख से घटकर ₹30,000 रह जाती है, जिसमें अटके प्रोजेक्ट वाले कई लोग फंसे हैं। और पूरा होने वाले साल तक कुछ भी क्लेम नहीं होता, पुरानी रिजीम में भी नहीं, भले हर महीने प्री-EMI जा रही हो।
क्या संभालकर रखें: ब्याज का सर्टिफिकेट और तीन और कागज
जनवरी में HR आपकी बताई छूटों का सबूत मांगता है। होम लोन के लिए मुख्य कागज ब्याज का सर्टिफिकेट है, जो हर बैंक और हाउसिंग फाइनेंस कंपनी नेट बैंकिंग या ऐप से देती है, आमतौर पर Loans, फिर Certificates या Tax Services के नीचे। उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक के सितंबर 2026 के इस नोट के मुताबिक, प्रोविजनल सर्टिफिकेट बताता है कि चालू साल में आप कितना ब्याज और मूलधन भरने वाले हैं, और 31 मार्च के बाद मिलने वाला फाइनल सर्टिफिकेट बताता है कि असल में कितना भरा। जनवरी में HR को प्रोविजनल दीजिए और जुलाई के रिटर्न के लिए फाइनल इस्तेमाल कीजिए।
तीन चीजें और संभालिए: बिल्डर का पजेशन या कम्प्लीशन लेटर (ये तय करता है किस साल से क्लेम होगा), मालिकाना हिस्से दिखाता सेल डीड (ये तय करता है कौन क्या क्लेम करेगा), और स्टांप ड्यूटी-रजिस्ट्रेशन की रसीदें (खरीद के साल धारा 123 के लिए)। जॉइंट लोन में सर्टिफिकेट दोनों के नाम के साथ लीजिए।
नई रिजीम में भी एक बात के लिए सर्टिफिकेट चाहिए: किराए पर दिया घर, जहां ब्याज रिटर्न के हाउस प्रॉपर्टी शेड्यूल में जाता है।
निरव और हेतल ने आखिर क्या किया
निरव नई रिजीम में ही रहा। लोन की छूट उसके साल के ₹62,400 बचाती, और उसे गिनने के बाद भी पुरानी रिजीम ₹42,900 ज्यादा ही पड़ती। हेतल नई रिजीम में रही क्योंकि वहां उसका टैक्स शून्य है। जॉइंट लोन उन्होंने बड़ी मंजूरी और साफ मालिकाना रिकॉर्ड के लिए रखा, टैक्स के लिए नहीं।
इसके बजाय उन्होंने ब्याज को ही देखा। पहले साल का ₹4,21,182 असली खर्च है, और उसमें से ₹2.21 लाख को कोई रिजीम नहीं छूती। निरव के दिवाली बोनस से अवधि घटाने के लिए किया प्रीपेमेंट किसी भी छूट से ज्यादा ब्याज काटता है। प्रीपेमेंट से EMI घटाएं या अवधि वाली पोस्ट में वो आंकड़े हैं। और जब तक साल का ब्याज ₹2 लाख से नीचे न आए, प्रीपेमेंट ₹2 लाख की छूट बर्बाद नहीं करता, जो इस लोन में 15वें साल तक नहीं होता।
फैसला पक्का भी नहीं है। बिना बिजनेस आय वाला नौकरीपेशा हर साल रिटर्न में नए सिरे से रिजीम चुनता है। इसलिए हर जनवरी, ब्याज का सर्टिफिकेट हाथ में लेकर, इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर दोनों रिजीम अगल-बगल देखिए। जिस साल लोन का ब्याज, HRA और बाकी छूटें मिलकर आपकी सैलरी की ब्रेक-ईवन लाइन पार करें, उसी साल बदलिए। ₹15 लाख की सैलरी के लिए वो लाइन ₹5.44 लाख है। लोन आपको आधे से थोड़ा आगे ले जाता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
क्या नई टैक्स रिजीम में होम लोन पर कोई टैक्स बेनिफिट मिलता है?
जिस घर में आप रहते हैं उस पर नहीं। इनकम-टैक्स एक्ट 2025 की धारा 202 नई रिजीम में ₹2 लाख की ब्याज छूट और ₹1.5 लाख की मूलधन छूट दोनों बंद कर देती है। किराए पर दिए घर पर ब्याज किराए के सामने घट जाता है, इसलिए किराया आमतौर पर टैक्स-फ्री हो जाता है, पर वो घाटा आपकी सैलरी की आय कम नहीं कर सकता।
₹50 लाख के होम लोन से पुरानी रिजीम में कितना टैक्स बचता है?
30% स्लैब वाले के लिए ₹2 लाख की ब्याज सीमा साल के ₹62,400 बचाती है (सेस के साथ 31.2%)। 8.5% पर 20 साल के ₹50 लाख के लोन में सालाना ब्याज 14वें साल तक ₹2 लाख से ऊपर रहता है, इसलिए चौदह साल ₹62,400 बचते हैं, फिर घटकर 20वें साल ₹7,240। 20 साल में कुल ₹10,86,860।
क्या होम लोन से पुरानी रिजीम नई से सस्ती हो जाती है?
आमतौर पर अकेले लोन से नहीं। ₹15 लाख की सैलरी पर ₹1.5 लाख धारा 123, ₹25,000 हेल्थ इंश्योरेंस और ₹2 लाख ब्याज के साथ पुरानी रिजीम का टैक्स ₹1,40,400 और नई में ₹97,500। उस सैलरी पर पुरानी को बराबरी के लिए करीब ₹5.44 लाख की कुल कटौती चाहिए, और होम लोन ज्यादा से ज्यादा ₹3.5 लाख लाता है।
क्या जॉइंट लोन में पति-पत्नी दोनों टैक्स बेनिफिट ले सकते हैं?
हां, अगर दोनों सह-मालिक और सह-उधारकर्ता हैं और दोनों सच में चुकाते हैं। हर कोई अपने हिस्से का ब्याज ₹2 लाख तक और मूलधन ₹1.5 लाख तक क्लेम करता है। ₹50 लाख के लोन में 50:50 पर पहले साल का ब्याज हरेक का ₹2,10,591 है, इसलिए दोनों को पूरे ₹2 लाख मिलते हैं। पर रिजीम हर कोई अपनी चुनता है, और ₹12 लाख कमाने वाले जीवनसाथी का नई रिजीम में टैक्स वैसे भी शून्य है।
इनकम-टैक्स एक्ट 2025 में होम लोन की धाराओं के नए नंबर क्या हैं?
अपने रहने वाले घर का ब्याज, पुरानी 24(b), अब धारा 22(1)(b), वही ₹2 लाख की सीमा। मूलधन और स्टांप ड्यूटी, पुरानी 80C, अब धारा 123 और शेड्यूल XV, ₹1.5 लाख। घर के घाटे का सैलरी के सामने ₹2 लाख तक सेट-ऑफ, पुरानी 71(3A), अब धारा 109। पुरानी 80EEA अब धारा 131 है, जो सिर्फ अप्रैल 2019 से मार्च 2022 के बीच मंजूर हुए लोन पर लागू होती है।
अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट का ब्याज कैसे क्लेम होता है?
पजेशन के साल से पहले चुकाया ब्याज, कंस्ट्रक्शन पूरा होने के साल से पांच बराबर किस्तों में क्लेम होता है। ₹50 लाख के लोन का दो साल का ब्याज ₹8,33,569 है, यानी साल के ₹1,66,714। अपने रहने वाले घर के लिए वो किस्त उस साल के नियमित ब्याज के साथ उसी ₹2 लाख की सीमा में आती है, और तीसरे साल का ब्याज ही ₹4,02,813 है, इसलिए असल में कोई फायदा नहीं होता। कंस्ट्रक्शन पांच साल से ज्यादा चले तो सीमा ₹30,000 रह जाती है।
यह लेख आम जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं। रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए। कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए। एडिटोरियल पॉलिसी · संपर्क