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होम लोन 20 साल का लें या 30 साल का? EMI और कुल ब्याज का पूरा हिसाब

₹50 लाख पर 30 साल का होम लोन हर महीने करीब ₹5,000 EMI बचाता है और ₹34 लाख ज्यादा ब्याज लेता है। लंबा लोन कब फिर भी सही है, और उसे छोटे लोन की तरह कैसे चुकाएं, यहां पढ़िए।

बार चार्ट में ₹50 लाख के होम लोन पर 8.5% पर अवधि के हिसाब से कुल ब्याज: 15 साल में ₹38.6 लाख, 20 में ₹54.1 लाख, 25 में ₹70.8 लाख और 30 में ₹88.4 लाख, साथ में हर अवधि की EMI
₹50 लाख का होम लोन, 8.5% सालाना: अवधि के हिसाब से कुल ब्याज और महीने की EMI।

होम लोन की फाइल लेकर बैंक वाले सेल्स ऑफिसर के सामने बैठिए, तो शुरू में ही एक सवाल आता है: "सर, 20 साल का करें या 30 साल का?" ज्यादातर लोग वही चुन लेते हैं जिसकी EMI कम हो, क्योंकि हर महीने सैलरी अकाउंट से वही नंबर कटता है। ₹50 लाख के लोन पर 20 की जगह 30 साल लेने से EMI ₹4,945 कम हो जाती है। पर इसी से कुल ब्याज करीब ₹34 लाख बढ़ भी जाता है। ये टाइपिंग की गलती नहीं है।

अपने आप में कोई भी चुनाव गलत नहीं है। लंबा लोन भी समझदारी का फैसला हो सकता है, बस उसे ठीक से चलाना आना चाहिए। और छोटा लोन किसी नई फैमिली का बजट चुपचाप तंग कर सकता है। नीचे 20, 25 और 30 साल के असली आंकड़े हैं, आपकी उम्र चॉइस को कितना छोटा कर देती है, और आखिर में ये कि 30 साल के लोन पर साइन करके भी उसे 20 साल वाले लोन की तरह कैसे खत्म करें।

₹50 लाख, 8.5%: चार अवधि आमने-सामने

पहले ब्याज दर की बात। अक्टूबर 2026 की शुरुआत में बड़े बैंक अच्छे क्रेडिट स्कोर वालों के लिए होम लोन करीब 7.2–7.75% से शुरू बता रहे थे। फिर 7 अक्टूबर को RBI ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया, तो रेपो से जुड़े लोन अगले रीसेट पर करीब 0.25% महंगे होंगे। काफी लोग विज्ञापन वाले रेट से ज्यादा पर लोन पाते हैं, इसलिए यहां मुख्य उदाहरण 8.5% पर है, जो गोल और थोड़ा सावधानी वाला नंबर है। रेट कुछ भी हो, तस्वीर यही रहती है।

ये रहा ₹50 लाख का लोन 8.5% पर, होम लोन EMI कैलकुलेटर से:

अवधिमहीने की EMIकुल ब्याजकुल चुकाया
15 साल₹49,237₹38.63 लाख₹88.63 लाख
20 साल₹43,391₹54.14 लाख₹1.04 करोड़
25 साल₹40,261₹70.78 लाख₹1.21 करोड़
30 साल₹38,446₹88.40 लाख₹1.38 करोड़

अब इसे सौदे की तरह देखिए:

  • 20 से 25 साल: EMI ₹3,130 महीना कम होती है। ब्याज ₹16.65 लाख बढ़ता है।
  • 25 से 30 साल: EMI सिर्फ ₹1,816 और कम होती है। ब्याज ₹17.62 लाख और बढ़ जाता है।
  • 20 से 30 साल: आप हर महीने ₹4,945 बचाते हैं और ब्याज में ₹34.27 लाख ज्यादा भरते हैं।

आखिरी पांच साल का खेल देखिए। हर एक्स्ट्रा साल पिछले साल से कम EMI बचाता है, पर ब्याज लगभग उतना ही जोड़ता है। 30 साल के लोन पर सिर्फ ब्याज ही ₹88.4 लाख है, यानी जितना उधार लिया उसका करीब 1.8 गुना।

रेट अच्छा मिले तो फर्क थोड़ा कम होता है, खत्म नहीं होता। 7.5% पर 20 साल की EMI ₹40,280 और 30 साल की ₹34,961 है, और कुल ब्याज ₹46.67 लाख के मुकाबले ₹75.86 लाख। मतलब ₹5,319 महीना बचाने के लिए फिर भी करीब ₹29 लाख ज्यादा।

इसीलिए सिर्फ EMI देखकर फैसला करना गलत है। बैंक EMI बताए तो हर अवधि का कुल ब्याज भी पूछिए। बैंक को जो Key Fact Statement देना होता है उसमें APR और पूरा रीपेमेंट शेड्यूल होता है, और EMI कैलकुलेटर कुल ब्याज कुछ सेकंड में दिखा देता है।

₹5,000 कम EMI, ₹34 लाख ज्यादा ब्याज: ऐसा क्यों

होम लोन घटते बैलेंस (रिड्यूसिंग बैलेंस) पर चलता है। हर महीने बैंक पहले बचे हुए कर्ज पर ब्याज लेता है, और EMI का बाकी हिस्सा ही लोन घटाता है (फॉर्मूला EMI कैसे कैलकुलेट होती है में समझाया है)। EMI छोटी हो तो मूल रकम के लिए कम बचता है, यानी बड़े बैलेंस पर ज्यादा समय तक ब्याज भरते रहते हैं।

पहले साल में ये साफ दिखता है। 30 साल के लोन पर पहले साल आप ₹4.61 लाख की EMI भरते हैं, और उसमें से सिर्फ ₹37,798 लोन घटाते हैं। बाकी करीब ₹4.24 लाख ब्याज है। 20 साल के लोन पर आप ₹5.21 लाख भरते हैं और ₹99,511 मूल रकम में जाते हैं। यानी ढाई गुना से भी ज्यादा।

₹50 लाख, 8.5% पर20 साल का लोन30 साल का लोन
5 साल बाद बाकी कर्ज₹44.06 लाख₹47.75 लाख
10 साल बाद बाकी कर्ज₹35.00 लाख₹44.30 लाख
15 साल बाद बाकी कर्ज₹21.15 लाख₹39.04 लाख
20 साल बाद बाकी कर्जकुछ नहीं₹31.01 लाख

10 साल वाली लाइन एक बार फिर पढ़िए। 30 साल के लोन में तब तक आप करीब ₹46 लाख की EMI भर चुके होंगे, और फिर भी ₹44.3 लाख बाकी होंगे। बहुत से लोगों को ये तब पता चलता है जब वो फोरक्लोजर लेटर मांगते हैं।

लंबे लोन के फायदे

30 साल के लोन को लोग बुरा मानते हैं, पर इसके असली फायदे भी हैं।

  • हर महीने का बोझ कम। ₹4,945 महीना कम EMI का मतलब है स्कूल फीस या दो नौकरियों के बीच के गैप के लिए थोड़ी सांस।
  • ज्यादा लोन मिलता है। बैंक देखता है कि आपकी इनकम का कितना हिस्सा EMI में जा रहा है। होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर पर ₹1 लाख महीने की इनकम, 50% लिमिट और 8.5% पर 20 साल में करीब ₹57.6 लाख, 25 साल में ₹62.1 लाख और 30 साल में ₹65 लाख का लोन बनता है। पसंद का फ्लैट थोड़ा पहुंच से बाहर हो तो काम का है, पर अगर ये आपको ऐसे फ्लैट में धकेल दे जो असल में आपके बजट का नहीं, तो खतरनाक।
  • महंगाई कर्ज लेने वाले के साथ है। रेट न बदले तो EMI रुपयों में वही रहती है, जबकि सैलरी आमतौर पर बढ़ती है। जो EMI 30 की उम्र में भारी लगती है, वो 40 तक काफी हल्की लगने लगती है।
  • जल्दी चुकाने का रास्ता हमेशा खुला। किसी व्यक्ति के फ्लोटिंग रेट होम लोन पर बैंक प्रीपेमेंट की पेनल्टी नहीं ले सकते, तो लंबा लोन आपको बांधता नहीं। इस पर आगे बात करेंगे।

लंबे लोन के नुकसान

  • ब्याज का बिल। 30 साल का लोन वैसे ही चलने दिया तो ₹54.1 लाख की जगह ₹88.4 लाख ब्याज।
  • घर धीरे-धीरे अपना होता है। पहले दस साल में लोन मुश्किल से घटता है। 8–10 साल में घर बेचा तो जो भरा उसका बड़ा हिस्सा बैंक के पास गया।
  • रेट बढ़े तो ज्यादा चुभता है। फ्लोटिंग रेट बढ़ने पर बैंक आमतौर पर EMI वही रखकर अवधि बढ़ा देते हैं। मान लीजिए 5 साल बाद रेट 8.5% से 9% हो गया। 20 साल वाला लोन उसी EMI पर करीब 12 महीने लंबा चलेगा, या EMI करीब ₹1,300 बढ़ेगी। 30 साल वाले लोन को उसी EMI पर करीब 59 महीने, यानी लगभग 5 साल और चाहिए। उम्र की लिमिट की वजह से बैंक अक्सर इतना खींच नहीं पाते, तो EMI करीब ₹1,620 बढ़ जाती है। इस पर ज्यादा रेपो रेट बदलने से होम लोन EMI कैसे बदलती है में है।
  • खर्चे बढ़ने का लालच। कम EMI देखकर बड़ा फ्लैट भी बजट में लगने लगता है, और आप 30 साल के लोन में फंस जाते हैं, प्रीपेमेंट की कोई गुंजाइश नहीं बचती।
  • रिटायरमेंट के बाद EMI। 35 की उम्र में लिया 30 साल का लोन 65 पर खत्म होगा। 60 पर रिटायर हुए तो आखिरी EMI बचत से जाएंगी।

उम्र और रिटायरमेंट: ये लिमिट नजरअंदाज नहीं होती

ज्यादातर बैंक होम लोन 30 साल तक ही देते हैं, और चाहते हैं कि एक तय उम्र तक लोन खत्म हो जाए। SBI के रेगुलर होम लोन पेज पर अवधि 30 साल तक और उम्र 18 से 70 साल लिखी है। HDFC Bank के होम लोन EMI पेज पर 30 साल तक की अवधि है, पर आपकी और को-एप्लिकेंट की उम्र और रिटायरमेंट उम्र के हिसाब से, और नौकरीपेशा लोगों के लिए उम्र 18 से 60। तो असल में जो अवधि मिलेगी, वो ब्रोशर से कम हो सकती है।

60 पर रिटायर होने वाले नौकरीपेशा इंसान के लिए असल में ऐसा बनता है:

  • उम्र 28: 30 साल का लोन मिल सकता है, करीब 58 पर खत्म। सबसे ज्यादा चॉइस आपके पास है।
  • उम्र 35: 25 साल आपको 60 तक ले जाता है। 30 साल का लोन मिला भी तो रिटायरमेंट के बाद तक चलेगा।
  • उम्र 42: करीब 18–20 साल ही ठीक बैठता है। फिर ऊंची EMI तय करती है कि कितना लोन मिलेगा।

कमाने वाला कम उम्र का को-एप्लिकेंट जोड़ने से लोन की रकम और कभी-कभी अवधि भी बढ़ सकती है, और सेल्फ-एम्प्लॉयड लोगों को आमतौर पर कुछ साल ज्यादा मिलते हैं। लोन की रकम तय करने से पहले बैंक से पूछ लीजिए कि आपके केस में ज्यादा से ज्यादा कितने साल मिलेंगे।

प्रीपेमेंट पर पेनल्टी नहीं, तो 30 साल कोई उम्रकैद नहीं

प्रीपेमेंट पर पेनल्टी नहीं है, तो आप कम EMI और सेफ्टी मार्जिन के लिए 30 साल का लोन ले सकते हैं, और जब हाथ में पैसा हो तब जल्दी चुका सकते हैं। RBI के Pre-payment Charges on Loans Directions, 2025 कहते हैं कि किसी व्यक्ति को बिजनेस के अलावा किसी काम के लिए दिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज नहीं ले सकते, चाहे थोड़ा चुकाएं या पूरा, पैसा कहीं से भी आए, और कोई लॉक-इन भी नहीं। ये 1 जनवरी 2026 या उसके बाद मंजूर या रिन्यू हुए लोन पर लागू है, और फ्लोटिंग रेट होम लोन पर तो बैंक इससे पहले भी ये चार्ज नहीं ले सकते थे। फिक्स्ड रेट लोन पर चार्ज लग सकता है, तो सैंक्शन लेटर देख लीजिए।

ये रहा वही ₹50 लाख 8.5% पर, जल्दी चुकाने के कुछ आम तरीकों के साथ (कैलकुलेटर वाले रिड्यूसिंग बैलेंस तरीके से महीने-दर-महीने निकाला गया):

कैसे चुकाते हैंलोन कब खत्मकुल ब्याज
30 साल का लोन, सिर्फ EMI30 साल₹88.40 लाख
30 साल का लोन + हर साल ₹50,000 एक्स्ट्रा21 साल 3 महीने₹58.51 लाख
30 साल का लोन, पर EMI ₹43,391 भरें (20 साल वाली)20 साल₹54.14 लाख
30 साल का लोन + हर साल ₹1 लाख एक्स्ट्रा17 साल₹45.23 लाख
30 साल का लोन, हर साल EMI 5% बढ़ाएं14 साल 3 महीने₹42.48 लाख
20 साल का लोन + हर साल ₹1 लाख एक्स्ट्रा14 साल₹35.58 लाख

दूसरी लाइन ध्यान से देखिए। साल में ₹50,000 मतलब एक महीने की EMI से थोड़ा ही ज्यादा, और इससे लोन के लगभग 9 साल और करीब ₹30 लाख ब्याज कम हो जाते हैं। 30 साल तक सिर्फ EMI भरते रहना होम लोन चलाने का सबसे महंगा तरीका है।

प्रीपेमेंट करते समय बैंक को लिखकर बताइए कि EMI घटानी है या अवधि। ब्याज बचाना है तो अवधि घटाना बेहतर है। पूरी तुलना लोन प्रीपे करें तो EMI घटाएं या अवधि में है।

प्रीपेमेंट करें या बचा पैसा निवेश करें?

कुछ लोग 30 साल का लोन लेकर बचे ₹4,945 इक्विटी SIP में डाल देते हैं। SIP कैलकुलेटर पर ₹4,945 महीना, 20 साल के लिए, और उस समय 30 साल वाले लोन पर बाकी ₹31.01 लाख के मुकाबले:

मानकर चला SIP रिटर्न20 साल बाद SIPलॉन्ग-टर्म गेन पर करीब 13% टैक्स के बादलोन चुकाकर बचा
12% सालाना₹49.41 लाखकरीब ₹44.7 लाखकरीब ₹13.7 लाख
10% सालाना₹37.86 लाखकरीब ₹34.6 लाखकरीब ₹3.6 लाख
8% सालाना₹29.32 लाखकरीब ₹27.2 लाखकरीब ₹3.8 लाख कम पड़ेंगे

(टैक्स: ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन पर 12.5% और 4% सेस, मानकर कि सब एक ही साल में बेचा। मोटा हिसाब है।)

कागज पर, अगर इक्विटी लोन रेट से अच्छे-खासे अंतर से आगे रहे तो निवेश जीतता है। पर लोन की बचत पक्की है और SIP का रिटर्न नहीं। जिस साल लोन बंद करने का प्लान है, ठीक उसी साल बाजार नीचे हो सकता है, और SIP को 20 साल तक हर गिरावट में चलते रहना होगा। ज्यादातर लोगों के लिए सही बंटवारा: रिटायरमेंट के लिए लंबी SIP वैसे भी चलाइए, और बोनस व इंक्रीमेंट होम लोन में डालिए। नई रिजीम वाले के लिए 8.5% का लोन प्रीपे करना मतलब पक्का, टैक्स-फ्री 8.5% रिटर्न।

"लोन लंबा लो, टैक्स बचेगा": इस बात में कितना दम है?

कुछ लोग इसलिए लोन लंबा कर लेते हैं ताकि ब्याज की छूट ज्यादा साल तक मिलती रहे। हिसाब शायद ही बैठता है।

  • नई रिजीम: खुद रहने वाले घर के लोन पर न ब्याज की छूट, न प्रिंसिपल की। तो अवधि से टैक्स पर कोई फर्क नहीं।
  • पुरानी रिजीम, ब्याज: खुद रहने वाले घर पर साल में ₹2 लाख तक (पुराना सेक्शन 24(b))। ₹50 लाख, 8.5% पर पहले साल का ब्याज दोनों अवधि में करीब ₹4.2 लाख है, यानी दोनों लिमिट पार। लंबा लोन बस ज्यादा साल तक लिमिट के ऊपर रखता है (20 साल वाले में ब्याज 15वें साल में ₹2 लाख से नीचे आता है, 30 साल वाले में 24वें साल में)। यानी ₹34 लाख ज्यादा ब्याज, ऐसी छूट के लिए जो 30% स्लैब और सेस पर भी साल में ज्यादा से ज्यादा ₹62,400 की है।
  • पुरानी रिजीम, प्रिंसिपल: सेक्शन 123 (पुराना 80C) की ₹1.5 लाख की लिमिट में गिना जाता है, PF, PPF, बीमा वगैरह के साथ। 20 साल वाला लोन शुरू में ज्यादा प्रिंसिपल चुकाता है, तो ये लिमिट ज्यादा भरती है।

होम लोन के साथ कौन सी रिजीम ठीक है, पक्का नहीं पता तो इनकम टैक्स कैलकुलेटर में अपने नंबर डालकर दोनों देख लीजिए।

कब 20 साल का लोन सीधे-सीधे बेहतर है

लंबी अवधि एक औजार है, और बहुत से लोगों को इसकी जरूरत ही नहीं। अगर 20 साल की EMI आपकी इन-हैंड सैलरी के करीब 30–35% के अंदर रहती है और नौकरी स्थिर है, तो 15–20 साल लीजिए और बात खत्म। ऐसे ही, अगर आप जानते हैं कि अकाउंट में बचा पैसा टिकता नहीं, तब भी छोटा लोन ठीक है। वो जबरदस्ती बचत करवाता है, जो "बाद में प्रीपे कर देंगे" वाला प्लान अक्सर नहीं करवा पाता।

20 साल की EMI थोड़ी टाइट लगे, या आप 35 के आसपास हैं और 25 साल वैसे भी आपको रिटायरमेंट तक ले जाता है, तो 25 साल बीच का समझदार रास्ता है।

अगर EMI सिर्फ 30 साल में ही फिट हो रही है, तो संभल जाइए। इसका मतलब आमतौर पर ये है कि लोन आपकी इनकम के हिसाब से बड़ा है, और असली इलाज छोटा फ्लैट या ज्यादा डाउन पेमेंट है। 40 के बाद तो अवधि ज्यादातर आपकी रिटायरमेंट उम्र ही तय करती है। बैंक ज्यादा दे तब भी, रिटायरमेंट से पहले लोन खत्म करने का प्लान रखिए।

तो 30 साल का लोन असल में किसे सूट करता है? जिसकी उम्र 20 के आखिर या 30 की शुरुआत में है, इनकम बढ़ने की उम्मीद है, और जो सच में हर साल प्रीपेमेंट करेगा या EMI बढ़ाएगा। और वो घर जहां कमाने वाला एक ही है और बफर के तौर पर सबसे कम फिक्स्ड खर्च चाहिए। इनके लिए आखिरी सेक्शन ही प्लान है।

₹50 लाख के लोन का पूरा खर्च, डाउन पेमेंट, स्टांप ड्यूटी और कितनी सैलरी चाहिए, ये सब ₹50 लाख के होम लोन की EMI में है।

30 साल का लो, 20 की तरह चुकाओ: असल में कैसे

उम्र कम है और सैलरी बढ़ रही है, तो साइन करने लायक वर्जन यही है। वही ₹50 लाख, 8.5%, कागज पर 30 साल।

सैंक्शन के वक्त: सैंक्शन लेटर में तीन चीजें चेक कीजिए। रेट फ्लोटिंग है, प्रीपेमेंट चार्ज नहीं है, और अवधि आपकी रिटायरमेंट उम्र से पहले खत्म होती है। इनमें से कुछ भी गड़बड़ हो तो साइन से पहले ठीक करवाइए, बाद में नहीं।

पहली EMI से ही: महीने में ₹38,446 नहीं, ₹43,391 भरिए। कुछ बैंक लिखकर कहने पर EMI बढ़ा देते हैं। आपका बैंक न बढ़ाए, तो ₹4,945 का फर्क हर महीने पार्ट-पेमेंट के तौर पर भेजिए और कहिए कि इससे अवधि घटाएं। दोनों तरह से लोन 20 साल में, ₹54.14 लाख ब्याज के साथ खत्म होता है, बिल्कुल 20 साल वाले लोन जैसा, और कम भरने का हक आपके पास रहता है।

पहले साल ₹43,391 भारी पड़े तो: ₹38,446 से शुरू कीजिए और हर अप्रैल, इंक्रीमेंट के बाद, EMI 5% बढ़ाइए। सिर्फ इतने से लोन करीब 14 साल 3 महीने में, ₹42.48 लाख ब्याज के साथ खत्म हो जाता है। यानी सीधे 20 साल वाले लोन से भी कम ब्याज। ऊपर से बोनस डालें तो और जल्दी खत्म होगा।

हर तिमाही: बैंक जो स्टेटमेंट भेजता है, उसे खोलकर देखिए। RBI के फ्लोटिंग रेट रीसेट वाले नियम कहते हैं कि रेट बदलने पर बैंक को आपको ज्यादा EMI, लंबी अवधि या दोनों का मेल चुनने देना होगा, और हर तिमाही एक स्टेटमेंट भेजना होगा जिसमें दिखे कि कितनी EMI बची हैं। वो नंबर बढ़ गया है तो समझिए बैंक ने लोन खींच दिया। उसकी जगह EMI बढ़वाइए।

तंग महीने में: ₹38,446 पर लौट आइए। 30 साल का लोन लेने का पूरा मतलब यही है। कम EMI आपका बैकअप है, प्लान नहीं। और नौकरी जाने या अस्पताल के बिल के लिए रखे पैसे से प्रीपेमेंट मत कीजिए, क्योंकि सैलरी रुकी तो कम लोन बैलेंस से EMI नहीं भरेगी।

आखिर में एक सीधी बात। ये सब तभी काम करता है जब एक्स्ट्रा पैसा सच में लोन तक पहुंचे। अगर आप जानते हैं कि बचे ₹5,000 चुपचाप फूड डिलीवरी और वीकेंड ट्रिप में चले जाएंगे, तो ये होशियारी छोड़िए और 20 साल का लोन लीजिए। जो लोन जबरदस्ती बचत करवाए, वो उस प्लान से बेहतर है जिसे आप निभा न पाएं।

लोग अक्सर पूछते हैं

होम लोन 20 साल का अच्छा है या 30 साल का?

कुल खर्च 20 साल में काफी कम है: ₹50 लाख, 8.5% पर ब्याज ₹54.1 लाख, जबकि 30 साल में ₹88.4 लाख। 30 साल की EMI कम है (₹38,446 vs ₹43,391), और ये तब ठीक है जब आप कम उम्र के हैं और नियमित प्रीपेमेंट करेंगे या EMI बढ़ाएंगे। प्रीपेमेंट नहीं करना, तो छोटी अवधि आमतौर पर बेहतर है।

50 लाख के होम लोन की EMI 20, 25 और 30 साल में कितनी होगी?

8.5% सालाना पर EMI 20 साल में करीब ₹43,391, 25 साल में ₹40,261 और 30 साल में ₹38,446 है। कुल ब्याज करीब ₹54.1 लाख, ₹70.8 लाख और ₹88.4 लाख है। 7.5% पर 20 और 30 साल की EMI ₹40,280 और ₹34,961 है।

30 साल का होम लोन लेकर जल्दी बंद कर सकते हैं?

हां। किसी व्यक्ति के बिजनेस के अलावा वाले फ्लोटिंग रेट लोन पर बैंक प्रीपेमेंट पेनल्टी नहीं ले सकते, चाहे थोड़ा चुकाएं या पूरा। ₹50 लाख के 30 साल वाले लोन पर 8.5% में 20 साल वाली EMI (₹43,391) भरें तो लोन ठीक 20 साल में बंद होता है। फिक्स्ड रेट लोन पर चार्ज लग सकता है, सैंक्शन लेटर देख लीजिए।

मेरी उम्र में होम लोन ज्यादा से ज्यादा कितने साल का मिलेगा?

ज्यादातर बैंक 30 साल तक देते हैं और चाहते हैं कि लोन एक तय उम्र तक, आमतौर पर रिटायरमेंट के आसपास, खत्म हो। SBI 30 साल तक की अवधि और 18 से 70 साल की उम्र बताता है, जबकि HDFC Bank अवधि को आपकी और को-एप्लिकेंट की रिटायरमेंट उम्र से जोड़ता है। 60 पर रिटायर होने वाले 42 साल के नौकरीपेशा को करीब 18–20 साल मानकर चलना चाहिए।

होम लोन लंबा लेने से टैक्स ज्यादा बचता है?

खास नहीं। नई रिजीम में खुद रहने वाले घर पर कोई छूट ही नहीं है। पुरानी रिजीम में ब्याज की छूट साल में ₹2 लाख तक है, और ₹50 लाख, 8.5% के लोन पर शुरू के सालों में दोनों अवधि में ब्याज इससे ऊपर रहता है। लंबा लोन बस ज्यादा साल तक पूरी छूट दिलाता है, पर ब्याज कहीं ज्यादा लेता है।

होम लोन प्रीपे करें या EMI का बचा पैसा SIP में लगाएं?

₹4,945 महीना 20 साल तक लगाने पर 10–12% इक्विटी रिटर्न मिले तो ये लोन से आगे निकल सकता है, पर ये पक्का नहीं है, और 8% पर ये बाकी लोन से कम पड़ता है। प्रीपेमेंट से लोन रेट जितनी पक्की बचत होती है। बहुत लोग रिटायरमेंट के लिए SIP चलाते हैं और बोनस व इंक्रीमेंट से होम लोन प्रीपे करते हैं।

यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क