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EMI कैसे कैलकुलेट होती है: फॉर्मूला, उदाहरण और किस्त का पूरा हिसाब

EMI के फॉर्मूले में तीन नंबर और एक तय किस्त है। बैंक इसे कैसे निकालता है, स्टेप बाय स्टेप, और शुरुआती सालों में होम लोन का बकाया मुश्किल से क्यों घटता है।

20 साल के ₹30 लाख होम लोन का लाइन चार्ट: हर साल के ब्याज की लाइन ₹2.53 लाख से गिरकर ₹0.14 लाख होती है और प्रिंसिपल की लाइन ₹0.6 लाख से बढ़कर ₹2.98 लाख, दोनों करीब 12वें साल में एक-दूसरे को काटती हैं
₹30 लाख, 8.5%, 20 साल: हर साल की ₹3.12 लाख की EMI ब्याज और प्रिंसिपल में कैसे बंटती है।

अपनी EMI ज्यादातर लोगों को रुपये-रुपये तक याद रहती है। सैलरी आने के दो-चार दिन बाद हर महीने यही रकम खाते से कटती है, सालों तक। पर बहुत कम लोग जानते हैं कि बैंक ने ये नंबर निकाला कैसे, या होम लोन की तीन साल EMI भरने के बाद भी बकाया रकम लगभग वहीं की वहीं क्यों खड़ी है।

EMI के पीछे का हिसाब मुश्किल नहीं है। एक बार समझ आ जाए, तो लोन के कई फैसले आसान हो जाते हैं: कितने साल का लोन लें, प्रीपेमेंट करें या नहीं, और बैंक कहे कि आपका रेट बढ़ गया है तो क्या करें। और लेख खत्म होते-होते आप अपने लोन का स्टेटमेंट उठाकर बैंक के नंबर खुद चेक कर पाएंगे।

किस्त एक, पर अंदर के दो हिस्से बदलते रहते हैं

EMI यानी equated monthly instalment, बराबर मासिक किस्त। असली बात "बराबर" शब्द में है। आप हर महीने एक ही रकम भरते हैं, पर वो रकम हर महीने अलग काम करती है।

हर EMI के दो हिस्से होते हैं। एक हिस्सा उस महीने का ब्याज है, जो आपकी बची हुई बकाया रकम पर लगता है। बाकी हिस्सा लोन की असली रकम (प्रिंसिपल) में जाता है और बकाया घटाता है। अगले महीने बकाया थोड़ा कम होता है, तो ब्याज वाला हिस्सा भी थोड़ा कम होता है, और EMI तय है इसलिए प्रिंसिपल में थोड़ा ज्यादा जाता है। ये सिलसिला आखिरी EMI पर बकाया जीरो होने तक चलता है।

इसे रिड्यूसिंग बैलेंस तरीका कहते हैं, और भारत में लगभग सारे होम लोन, बैंक के कार लोन और पर्सनल लोन इसी से गिने जाते हैं। ब्याज सिर्फ उस पैसे पर लगता है जो अभी भी आप पर बकाया है, जो लौटा चुके उस पर नहीं।

हर बैंक जो फॉर्मूला लगाता है

बैंक का सॉफ्टवेयर हो, लोन ऐप हो या ऑनलाइन EMI कैलकुलेटर, सबमें यही एक फॉर्मूला चलता है:

EMI = P × r × (1 + r)n ÷ ((1 + r)n − 1)

  • P यानी लोन की रकम, प्रिंसिपल।
  • r यानी महीने का ब्याज रेट: सालाना रेट को 12 से भाग दीजिए, फिर 100 से। तो सालाना 9% बनता है 0.0075।
  • n यानी कुल कितनी EMI। 5 साल के लोन में 60, 20 साल के लोन में 240।

इसे रटने की जरूरत नहीं। ये फॉर्मूला वो एक तय मासिक रकम निकालता है जो हर महीने बचे बकाया पर ब्याज लगने के बावजूद ठीक n महीनों में P को पूरा चुका दे। (1 + r)n वाला हिस्सा कंपाउंडिंग है, यानी उस रेट पर पूरी अवधि में ₹1 कितना बन जाता है।

एक जगह लोग अक्सर अटकते हैं: जो रेट आपको बताया जाता है (जैसे 8.5%) वो सालाना है, पर ब्याज हर महीने लगता है। फॉर्मूले में सालाना रेट सीधा डाल दिया तो जवाब बेतुका आएगा।

हाथ से हिसाब: ₹10 लाख, 9%, 5 साल

मान लीजिए ₹10 लाख का लोन है, 9% सालाना, 5 साल के लिए, जैसे कोई कार लोन। फोन का कैलकुलेटर हाथ में रखिए।

  1. महीने का रेट: 9 ÷ 12 ÷ 100 = 0.0075।
  2. कुल EMI: 5 × 12 = 60।
  3. (1 + r)n: 1.0075 की पावर 60 = 1.56568। (कोई भी साइंटिफिक कैलकुलेटर ये कर देगा। फोन के कैलकुलेटर को आड़ा कर दीजिए, साइंटिफिक मोड खुल जाता है।)
  4. ऊपर वाला हिस्सा: 10,00,000 × 0.0075 × 1.56568 = 11,742.61।
  5. नीचे वाला हिस्सा: 1.56568 − 1 = 0.56568।
  6. EMI: 11,742.61 ÷ 0.56568 = ₹20,758।

EMI कैलकुलेटर ₹20,758.36 दिखाता है, यानी हाथ का हिसाब बिल्कुल मिलता है। Excel या Google Sheets में =PMT(9%/12, 60, -1000000) डालेंगे तो भी यही आंकड़ा आएगा।

अब काम की बात। ₹20,758 की 60 EMI मिलाकर ₹12,45,501 बनती हैं। आपने ₹10 लाख लिए थे, तो इस लोन पर ₹2,45,501 ब्याज गया, यानी उधार ली गई रकम का करीब एक चौथाई।

महीने-दर-महीने: हर EMI जाती कहां है

यही ₹10 लाख का लोन, महीने-दर-महीने। इस टेबल को अमॉर्टाइजेशन शेड्यूल कहते हैं, और बैंक को ये आपको देना ही होता है।

महीनाEMIब्याज वाला हिस्साप्रिंसिपल वाला हिस्साबचा बकाया
1₹20,758₹7,500₹13,258₹9,86,742
2₹20,758₹7,401₹13,358₹9,73,384
3₹20,758₹7,300₹13,458₹9,59,926
30₹20,758₹4,292₹16,466₹5,55,807
60₹20,758₹155₹20,604₹0

पहले महीने का ब्याज आसानी से जांच सकते हैं: ₹10,00,000 × 0.0075 = ₹7,500। EMI में से जो बचा, ₹13,258, वो बकाया घटाता है। दूसरे महीने का ब्याज ₹9,86,742 पर लगता है, इसलिए थोड़ा कम है। आखिरी महीने तक ब्याज सिर्फ ₹155 रह जाता है।

साल के हिसाब से देखें तो कैलकुलेटर बताता है कि पहले साल आप ₹83,270 ब्याज भरते हैं और पांचवें साल सिर्फ ₹11,730, जबकि दोनों साल EMI में कुल ₹2,49,100 ही गए।

होम लोन में सालों तक "सिर्फ ब्याज" क्यों लगता है

5 साल के लोन में ब्याज से प्रिंसिपल की तरफ झुकाव जल्दी आ जाता है। 20 साल के होम लोन में ये बहुत धीरे होता है, और ज्यादातर लोगों को यहीं झटका लगता है।

मान लीजिए ₹30 लाख का होम लोन है, 8.5% पर 20 साल के लिए। EMI बनती है ₹26,035। पहले ही महीने में ₹21,250 ब्याज में जाते हैं और लोन घटाने में सिर्फ ₹4,785।

सालउस साल भरेब्याजप्रिंसिपलसाल के आखिर में बकाया
1₹3,12,416₹2,52,709₹59,707₹29,40,293
5₹3,12,416₹2,28,632₹83,785₹26,43,815
10₹3,12,416₹1,84,452₹1,27,964₹20,99,815
13₹3,12,416₹1,47,432₹1,64,985₹16,43,969
15₹3,12,416₹1,16,977₹1,95,440₹12,68,962
20₹3,12,416₹13,921₹2,98,495₹0

पहले साल आप जो भरते हैं उसका करीब 81% ब्याज है। दस साल में ₹31 लाख की EMI भरने के बाद भी करीब ₹21 लाख बकाया है। प्रिंसिपल वाला हिस्सा ब्याज से आगे करीब 12वें साल में जाकर निकलता है, और बकाया आधा (₹15 लाख) 14वें साल में जाकर होता है। पूरे 20 साल में ₹32.5 लाख ब्याज जाता है, लोन की रकम से भी ज्यादा।

इसमें कोई धोखा नहीं है। ब्याज बस बड़े बकाये पर 8.5% है, और बकाया बड़ा इसलिए रहता है क्योंकि EMI 240 महीनों में बंटी हुई है, तो हर महीने प्रिंसिपल में छोटा हिस्सा ही जाता है। पर इससे ये जरूर पता चलता है कि एक्स्ट्रा पैसा लोन पर सबसे ज्यादा असर कब करता है: शुरुआत में। 12वीं EMI के ठीक बाद ₹1 लाख प्रीपे कीजिए और EMI वही रखिए, तो लोन करीब 18 EMI पहले खत्म होगा और करीब ₹3.7 लाख ब्याज बचेगा। यही ₹1 लाख 17वें साल में डालें तो बचत काफी कम होगी। पर्सनल इस्तेमाल के लिए लिए गए फ्लोटिंग रेट लोन पर बैंक प्रीपेमेंट चार्ज नहीं ले सकते। इस पर और बात प्रीपेमेंट के बाद EMI घटाएं या अवधि वाले लेख में है।

जब डीलर "फ्लैट" रेट बताए

ऊपर का सारा हिसाब रिड्यूसिंग बैलेंस का है। कुछ लोन देने वाले, खासकर कंज्यूमर ड्यूरेबल, टू-व्हीलर और कुछ कार डीलर फाइनेंस में, इसकी जगह फ्लैट रेट बताते हैं। सुनने में सस्ता लगता है, पर होता नहीं।

फ्लैट रेट में ब्याज पूरी अवधि तक शुरुआती पूरी रकम पर लगता है, भले आप हर महीने पैसा लौटा रहे हों। मान लीजिए ₹3 लाख का लोन, "फ्लैट 10%", 3 साल:

  • ब्याज = ₹3,00,000 × 10% × 3 = ₹90,000।
  • EMI = (₹3,00,000 + ₹90,000) ÷ 36 = ₹10,833।

असली 10% रिड्यूसिंग बैलेंस पर ₹3 लाख, 3 साल की EMI ₹9,680 बनती है और कुल ब्याज ₹48,486। रिड्यूसिंग बैलेंस पर ₹10,833 की EMI आए, इसके लिए रेट करीब 17.9% होना चाहिए। मतलब "फ्लैट 10%" असल में करीब 18% है। इसका पूरा हिसाब फ्लैट रेट vs रिड्यूसिंग बैलेंस रेट वाले लेख में है।

अच्छी बात ये है कि 1 अक्टूबर 2024 से मंजूर हर नए रिटेल लोन के साथ RBI ने की फैक्ट्स स्टेटमेंट (KFS) देना जरूरी कर दिया है। इसमें APR (सालाना असली रेट, जिसमें फीस भी जुड़ी होती है) और पूरा रीपेमेंट शेड्यूल दिखाना होता है। डीलर फ्लैट रेट बताए तो KFS मांगिए और APR देखिए।

EMI किन चीजों से बदलती है: रकम, रेट और अवधि

फॉर्मूले में तीन ही चीजें जाती हैं, तो EMI भी इन्हीं तीन से बदलती है।

लोन की रकम

लोन दोगुना, EMI दोगुनी। 8.5% पर 20 साल के लिए हर ₹1 लाख की EMI करीब ₹868 महीना है। तो ₹30 लाख पर ₹26,035 और ₹40 लाख पर करीब ₹34,713। EMI छोटी करने का सबसे सीधा रास्ता है बड़ा डाउन पेमेंट।

अवधि

यही ₹30 लाख, 8.5% पर, अलग-अलग अवधि के लिए:

अवधिEMIकुल ब्याजलोन के मुकाबले ब्याज
10 साल₹37,196₹14.63 लाख49%
15 साल₹29,542₹23.18 लाख77%
20 साल₹26,035₹32.48 लाख108%
25 साल₹24,157₹42.47 लाख142%
30 साल₹23,067₹53.04 लाख177%

पैटर्न देखिए। 10 से 15 साल करने पर EMI ₹7,600 से ज्यादा घटती है। 25 से 30 साल करने पर सिर्फ करीब ₹1,100 घटती है, पर ब्याज ₹10 लाख से ज्यादा बढ़ जाता है। 20 साल के बाद हर एक्स्ट्रा साल से राहत बहुत कम मिलती है। लंबी अवधि का एक असली फायदा है: कम EMI से लोन मिलना आसान होता है और तंग बजट में थोड़ी गुंजाइश रहती है। नुकसान ये कि ब्याज कहीं ज्यादा भरना पड़ता है, और बेचने वाले ये बात नहीं बताते। 30 साल के लोन पर "बस ₹23,000 महीना" बोलने वाला डीलर या एजेंट असल में ₹30 लाख के लोन पर ₹53 लाख का ब्याज बेच रहा है, इसलिए EMI के साथ कुल ब्याज भी हमेशा पूछिए। अवधि चुनने पर और बात होम लोन 20 साल या 30 साल वाले लेख में है।

ब्याज रेट

वही ₹30 लाख, 20 साल, अलग-अलग रेट:

रेटEMIकुल ब्याज
7.5%₹24,168₹28.00 लाख
8%₹25,093₹30.22 लाख
8.5%₹26,035₹32.48 लाख
9%₹26,992₹34.78 लाख
9.5%₹27,964₹37.11 लाख

इस लोन पर हर 0.5% का मतलब है महीने के करीब ₹950, और 20 साल में ₹2.2–2.3 लाख एक्स्ट्रा ब्याज। इसीलिए अच्छा क्रेडिट स्कोर, जिससे कम रेट मिलता है, लोगों की सोच से ज्यादा कीमती है। बड़े बैंक आपकी प्रोफाइल के हिसाब से होम लोन करीब 7.25% से 9% तक के रेट पर दे रहे हैं, और पर्सनल लोन आमतौर पर 10% के आसपास से शुरू होकर 15% से काफी ऊपर तक जाते हैं। ये रेट बार-बार बदलते हैं, इसलिए तुलना करने से पहले बैंक का मौजूदा रेट जरूर देखिए।

लोन के बीच में रेट बदल जाए तो

आजकल ज्यादातर नए होम लोन फ्लोटिंग रेट पर होते हैं और RBI के रेपो रेट से जुड़े होते हैं। 7 अक्टूबर 2026 को RBI ने रेपो रेट 0.25% बढ़ाकर 5.50% कर दिया, और उसी हफ्ते कई बैंकों ने अपने रेपो-लिंक्ड लेंडिंग रेट बढ़ा दिए। यानी लाखों लोगों के लिए फॉर्मूले का "r" अभी-अभी बदल गया।

ऐसा होने पर बैंक आपके बचे बकाये और बचे महीनों पर दोबारा हिसाब लगाता है। वो या तो EMI बढ़ा सकता है, या EMI वही रखकर अवधि लंबी कर सकता है। कई बैंक अपने आप अवधि बढ़ा देते हैं, और बहुत से लोगों को पता भी नहीं चलता। इस तरह EMI में एक रुपया बदले बिना 20 साल का लोन 21 या 22 साल का हो जाता है। EMI रीसेट पर RBI के नियमों के तहत बैंक को आपको बताना होता है, और चुनने का हक आपका है: ज्यादा EMI, लंबी अवधि, दोनों का मेल, या प्रीपेमेंट। साथ में हर तीन महीने एक स्टेटमेंट भी मिलना चाहिए जिसमें अब तक भरा प्रिंसिपल, ब्याज और बची EMI दिखें।

वापस ₹30 लाख, 8.5% वाले लोन पर चलते हैं। 3 साल बाद बकाया करीब ₹28.05 लाख है और 204 EMI बाकी हैं। अब रेट बढ़ता है:

नया रेटतरीका A: EMI बढ़ाएंतरीका B: EMI वही, अवधि बढ़ाएं
8.75% (+0.25%)EMI ₹26,461 (+₹426); एक्स्ट्रा ब्याज करीब ₹87,000करीब 8 EMI ज्यादा; एक्स्ट्रा ब्याज करीब ₹2.05 लाख
9% (+0.5%)EMI ₹26,890 (+₹856); एक्स्ट्रा ब्याज करीब ₹1.75 लाखकरीब 17 EMI ज्यादा; एक्स्ट्रा ब्याज करीब ₹4.38 लाख

अगर महीने के ₹426 या ₹856 ज्यादा भरना आपके बजट में बैठता है, तो EMI बढ़ाना चुपचाप अवधि बढ़ने के मुकाबले आधे से भी कम महंगा पड़ता है। बैंक से लिखित में पूछिए कि उन्होंने कौन सा तरीका लगाया है। इस पर और जानकारी रेपो रेट और होम लोन EMI वाले लेख में है।

EMI के नंबर में क्या नहीं दिखता

EMI का फॉर्मूला सिर्फ प्रिंसिपल और ब्याज गिनता है। लोन की असली लागत में कुछ और चीजें भी जुड़ती हैं:

  • प्रोसेसिंग फीस: शुरुआत में ही लगती है, ऊपर से GST। पर्सनल लोन में ये लोन का एक-दो प्रतिशत तक हो सकती है, जो मिलने वाली रकम से ही कट जाती है।
  • ब्रोकन पीरियड इंटरेस्ट: लोन 18 तारीख को मिला और EMI की तारीख 5 है, तो बीच के दिनों का ब्याज बैंक अलग से लेता है। आमतौर पर ये छोटी रकम होती है।
  • अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट पर प्री-EMI: बैंक बिल्डर को लोन किस्तों में देता है, जैसे-जैसे काम आगे बढ़ता है, और तब तक आप सिर्फ उतनी रकम का ब्याज भरते हैं जितनी जारी हुई है। पूरी EMI बाद में शुरू होती है। प्री-EMI से आपका लोन जरा भी नहीं घटता।
  • इंश्योरेंस: लोन प्रोटेक्शन कवर अक्सर साथ में जोड़ दिया जाता है, कभी-कभी लोन की रकम में ही, यानी आप प्रीमियम पर भी ब्याज भरते हैं। पूछिए कि ये लेना जरूरी है या नहीं।

ये सब KFS में दिखना चाहिए, और जो चार्ज उसमें नहीं लिखा, वो बाद में आपकी मंजूरी के बिना नहीं जोड़ा जा सकता।

एक लिमिट आपको खुद तय करनी चाहिए। बैंक आपकी सारी EMI मिलाकर हाथ में आने वाली सैलरी का 50% या उससे ज्यादा भी होने देते हैं। वो उनकी सहूलियत है, आपकी नहीं। कुल EMI करीब 30–40% के अंदर रहे, तो स्कूल फीस, दवा-अस्पताल और नौकरी बदलने जैसी चीजों के लिए जगह बचती है। साइन करने से पहले होम लोन एलिजिबिलिटी कैलकुलेटर पर देख लीजिए कि आपकी सैलरी पर असल में कितना लोन बनता है, और लोन के हिसाब से EMI होम लोन EMI कैलकुलेटर, कार लोन EMI कैलकुलेटर या पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर पर निकाल लीजिए।

दस मिनट में अपना लोन खुद चेक कीजिए

ये सब सिर्फ थ्योरी नहीं है। दो कागज और एक स्प्रेडशीट से आप देख सकते हैं कि बैंक आपके लोन में क्या कर रहा है। सैंक्शन लेटर या KFS (मूल रकम, रेट, अवधि) और लोन का ताजा स्टेटमेंट या रीपेमेंट शेड्यूल पास रखिए। ज्यादातर बैंकों में ये नेट बैंकिंग से डाउनलोड हो जाता है। फिर इसी क्रम में चेक कीजिए।

  1. EMI चेक कीजिए। Excel या Google Sheets में सैंक्शन लेटर के नंबरों के साथ =PMT(सालाना रेट/12, महीने, -लोन की रकम) लिखिए। ऊपर वाले ₹30 लाख के लोन के लिए =PMT(8.5%/12, 240, -3000000) डालें तो ₹26,034.70 आता है, जिसे बैंक ₹26,035 कर देता है। आपकी असली EMI कुछ सौ रुपये अलग है, तो या तो लोन शुरू होने के बाद रेट बदला है, या इंश्योरेंस प्रीमियम जैसा कुछ लोन की रकम में जुड़ा है। आगे बढ़ने से पहले ये पता कर लीजिए।
  2. एक महीने का ब्याज चेक कीजिए। किसी भी महीने की शुरुआत का बकाया लीजिए, सालाना रेट से गुणा कीजिए और 12 से भाग दीजिए। इसी लोन में पहले साल के बाद बकाया ₹29,40,293 है, तो 13वें महीने का ब्याज ₹29,40,293 × 8.5% ÷ 12 = ₹20,827 आना चाहिए, और EMI के बाकी ₹5,208 प्रिंसिपल में दिखने चाहिए। जो बैंक महीने के असली दिनों के हिसाब से ब्याज लगाते हैं, उनमें 31 दिन वाले महीने और फरवरी में थोड़ा फर्क आएगा। पर हजारों का फर्क हो तो बात कुछ और है, पूछना बनता है।
  3. बकाया चेक कीजिए। =FV(सालाना रेट/12, भरी गई EMI, EMI, -लोन की रकम) किसी भी EMI के बाद का बकाया बता देता है। =FV(8.5%/12, 12, 26035, -3000000) ₹29,40,289 देता है, जो शेड्यूल से बस कुछ रुपये अलग है, वो भी सिर्फ इसलिए कि EMI राउंड की गई है। आपके स्टेटमेंट में इससे साफ ज्यादा बकाया दिखे, तो प्री-EMI के महीने, बाउंस हुई कोई EMI या ऐसा रेट बदलाव देखिए जिस पर आपका ध्यान नहीं गया। रेट बदला है तो आखिरी रीसेट की तारीख से दोबारा हिसाब लगाइए: उस दिन का बकाया, नया रेट, बचे महीने।
  4. कितनी EMI बाकी हैं, ये चेक कीजिए। =NPER(सालाना रेट/12, -EMI, बकाया) आज के रेट पर बचे महीने बताता है। रेट रीसेट वाले उदाहरण का ₹28.05 लाख का बकाया लीजिए: =NPER(8.75%/12, -26035, 2805000) करीब 212 महीने आता है, रेट बढ़ने से पहले वाले 204 नहीं। स्टेटमेंट में बची EMI, मूल अवधि में से भरी गई EMI घटाने पर जो बचे उससे ज्यादा हैं, तो समझ लीजिए आपका लोन लंबा कर दिया गया है।
  5. अभी कितना ब्याज और भरना है, ये निकालिए। EMI × बची EMI, उसमें से बकाया घटा दीजिए। ₹28.05 लाख पर ₹26,035 की 204 EMI बाकी हों, तो करीब ₹25 लाख। कोई भी प्रीपेमेंट इसी नंबर में से काटता है, इसीलिए वही ₹1 लाख लोन की शुरुआत में डालें तो आखिरी सालों के मुकाबले कहीं ज्यादा काम करता है।

ज्यादातर बार नंबर मिल जाएंगे, और ये भी काम की बात है, क्योंकि अब आपको ठीक-ठीक पता है कि लोन कितने में पड़ रहा है और एक्स्ट्रा रुपया कहां सबसे ज्यादा काम आता है। नंबर न मिलें तो फोन पर बहस मत कीजिए। बैंक को लिखित में भेजिए और ये मांगिए: लोन मिलने से अब तक हर तारीख पर कौन सा रेट लगा, आज के रेट के हिसाब से नया रीपेमेंट शेड्यूल, और कोई रेट बढ़ोतरी अवधि बढ़ाकर तो नहीं संभाली गई। ऊपर लिंक किए RBI के रीसेट नियमों के तहत EMI या अवधि बदलने पर बैंक को आपको बताना ही होता है, इसलिए लिखित सवाल का जवाब आमतौर पर सीधा मिलता है। साल में एक बार ये चेक कर लीजिए, और जब भी रेट को लेकर बैंक की कोई चिट्ठी आए, तब दोबारा।

लोग अक्सर पूछते हैं

EMI कैसे कैलकुलेट होती है?

बैंक EMI = P × r × (1 + r)^n ÷ ((1 + r)^n − 1) फॉर्मूला इस्तेमाल करते हैं, जिसमें P लोन की रकम, r महीने का रेट (सालाना रेट ÷ 12 ÷ 100) और n कुल किस्तें हैं। हर महीने बचे बकाये पर ब्याज लगता है और EMI का बाकी हिस्सा बकाया घटाता है। इसे रिड्यूसिंग बैलेंस तरीका कहते हैं।

₹10 लाख का लोन 9% पर 5 साल के लिए लूं तो EMI कितनी होगी?

करीब ₹20,758 महीना। 60 किस्तों में कुल ₹12,45,501 भरने होंगे, यानी ब्याज करीब ₹2.46 लाख, लोन का लगभग एक चौथाई।

Excel या Google Sheets में EMI कैसे निकालें?

PMT फंक्शन लगाइए: =PMT(सालाना रेट/12, कुल महीने, -लोन की रकम)। ₹10 लाख, 9%, 5 साल के लिए =PMT(9%/12, 60, -1000000) डालें तो ₹20,758.36 आता है, बिल्कुल EMI कैलकुलेटर जितना। रेट को 12 से भाग देना भूले तो जवाब गलत आएगा।

होम लोन की EMI का ज्यादातर हिस्सा ब्याज में क्यों जाता है?

क्योंकि ब्याज बकाया रकम पर लगता है, और शुरुआती सालों में बकाया बड़ा होता है। ₹30 लाख के 8.5% वाले 20 साल के लोन में पहले साल जो भरते हैं उसका करीब 81% ब्याज है, और प्रिंसिपल वाला हिस्सा करीब 12वें साल में जाकर ब्याज से आगे निकलता है। जल्दी प्रीपेमेंट इसे सबसे ज्यादा घटाता है।

फ्लैट रेट और रिड्यूसिंग बैलेंस रेट में क्या फर्क है?

फ्लैट रेट में पूरी अवधि तक शुरुआती पूरे लोन पर ब्याज लगता है, जबकि रिड्यूसिंग बैलेंस में सिर्फ बचे बकाये पर। ₹3 लाख का लोन फ्लैट 10% पर 3 साल के लिए हो तो EMI ₹10,833 बनती है, जो रिड्यूसिंग बैलेंस पर करीब 17.9% के बराबर है। की फैक्ट्स स्टेटमेंट में APR देखिए।

रेपो रेट बढ़ने पर मेरी EMI का क्या होगा?

रेपो से जुड़े फ्लोटिंग लोन में बैंक बचे बकाये पर दोबारा हिसाब लगाता है और या तो EMI बढ़ाता है या अवधि। RBI के नियमों के तहत आप ज्यादा EMI, लंबी अवधि, दोनों, या प्रीपेमेंट चुन सकते हैं। 17 साल बाकी वाले ₹28 लाख के बकाये पर 0.25% बढ़ने का मतलब है महीने के करीब ₹426 ज्यादा, या करीब 8 किस्तें ज्यादा।

यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क