जामनगर के जय ने दिवाली सेल के दूसरे ही दिन फोन कार्ट में डाल लिया था। ₹60,000, और दाम के ठीक नीचे एक हरी लाइन: "No Cost EMI ₹6,667 × 9"। तनख्वाह ₹45,000 महीना, फोन की कोई जल्दी नहीं थी, पर ₹6,667 महीना तो कुछ लगा ही नहीं। टैप किया, क्रेडिट कार्ड चुना, और एक मिनट में ऑर्डर हो गया। हरी लाइन के नीचे छोटे अक्षरों में लिखा "GST on interest will be charged by the bank", वो उसने खोलकर देखा ही नहीं।
नौ महीने बाद जय ने ₹60,000 के फोन के लिए ₹60,939 चुकाए थे, और उसी पेज पर नकद देने वालों को मिला ₹1,500 का instant discount भी गंवा दिया था। आम क्रेडिट कार्ड EMI के मुकाबले ये सौदा फिर भी ठीक है, उसमें करीब ₹64,800 लगते। पर ये ज़ीरो नहीं है, और "no cost" का लेबल छुपाता है कि पैसा जाता कहां है। पूरा हिसाब यहां है, हर आंकड़ा साइट के EMI calculator से।
No cost EMI का मतलब: ब्याज असल में भरता कौन है
कोई बैंक ₹60,000 नौ महीने के लिए मुफ्त में नहीं देता। No cost EMI में तीन पक्ष होते हैं, और ब्याज उनके बीच ऐसे घूमता है:
- बैंक अपना सामान्य EMI ब्याज लेता है, मान लीजिए साल का 15%, reducing balance पर। उसकी तरफ कुछ नहीं बदलता।
- सेलर या ब्रांड आपको checkout पर ठीक उतना ही discount देता है जितना बैंक का ब्याज। Flipkart की अपनी no cost EMI की शर्तें साफ कहती हैं: आपको "an upfront discount equal to the EMI interest cost charged by the bank" मिलता है, discount सेलर की तरफ से है, और बैंक फिर monthly reducing basis पर ब्याज लेता है।
- आप discount के बाद की रकम और बैंक का ब्याज चुकाते हैं, जो जोड़कर फिर sticker price जितना ही हो जाता है। यानी ₹6,667 की नौ EMI = ₹60,000, और प्रोडक्ट पेज पर "ब्याज" शब्द कहीं दिखता ही नहीं।
ये ढांचा एक नियम की वजह से है। सितंबर 2013 में RBI ने बैंकों से कहा कि "zero percent" स्कीमें, जिनमें ब्याज processing fee में छुपा हो, बंद करें, और प्रोडक्ट पर जो भी discount हो वो loan की रकम से ही घटना चाहिए (RBI सर्कुलर RBI/2013-14/292, 17 सितंबर 2013)। 2022 का क्रेडिट और डेबिट कार्ड का Master Direction (पैरा 6(b)(iii)) एक कदम आगे जाता है: कार्ड का कोई भी transaction EMI में बदलने से पहले कार्ड issuer को आपको principal, ब्याज और मर्चेंट या issuer का "to make it no cost" दिया गया upfront discount दिखाना होगा, और यही बंटवारा आपके statement में भी अलग से आना चाहिए। ब्याज वाली EMI को "zero-interest/no-cost EMI" बताकर छुपाया नहीं जा सकता। इसीलिए बैंक के EMI confirmation में ब्याज की लाइन हमेशा होती है। Discount मर्चेंट की तरफ, ब्याज बैंक की तरफ, और GST ब्याज के पीछे-पीछे।
जय के ₹60,000 के फोन का हिसाब
मान लीजिए बैंक का EMI रेट साल का 15% है, reducing balance, 9 महीने। पहले ₹60,000 पर सादी EMI कैसी दिखती है, calculator से:
| ₹60,000, 15%, 9 महीने | रकम |
|---|---|
| सामान्य EMI | ₹7,090 |
| कुल ब्याज | ₹3,812 |
| कुल भुगतान | ₹63,812 |
अब no cost वाला version। सेलर को ऐसा discount ढूंढना है कि EMI ठीक ₹60,000 ÷ 9 = ₹6,667 बने। उल्टा चलिए: 15% पर 9 महीने के लिए किस loan रकम की EMI ₹6,667 आती है? जवाब ₹56,416। तो checkout पर ₹3,584 का discount दिखता है, बैंक ₹56,416 देता है, नौ महीने में ₹3,584 ब्याज लेता है, और आप ₹6,667 × 9 = ₹60,000 भरते हैं। बैंक की तरफ, महीने-दर-महीने:
| महीना | 15% पर ब्याज | चुकाया principal | EMI के बाद बकाया | ब्याज पर 18% GST |
|---|---|---|---|---|
| 1 | ₹705 | ₹5,961 | ₹50,454 | ₹127 |
| 2 | ₹631 | ₹6,036 | ₹44,418 | ₹114 |
| 3 | ₹555 | ₹6,111 | ₹38,307 | ₹100 |
| 6 | ₹323 | ₹6,344 | ₹19,510 | ₹58 |
| 9 | ₹82 | ₹6,584 | ₹0 | ₹15 |
| कुल | ₹3,584 | ₹56,416 | ₹645 |
Loan ₹56,416, 15% reducing, ₹6,667 की 9 EMI। Discount (₹3,584) पूरे ₹60,000 पर के ब्याज (₹3,812) से थोड़ा कम है, क्योंकि बैंक कम उधार दे रहा है। सेलर ठीक ब्याज जितना ही भरता है, एक रुपया ज़्यादा नहीं। और आखिरी कॉलम पहला असली खर्च है।
18% GST, जिसे कोई discount नहीं ढकता
आम loan के ब्याज पर GST नहीं है। GST छूट के Notification 12/2017-Central Tax (Rate) की Entry 27 "extending deposits, loans or advances in so far as the consideration is represented by way of interest" को छूट देती है, पर कोष्ठक में एक अपवाद है: "other than interest involved in credit card services"। यानी क्रेडिट कार्ड के ब्याज पर 18% GST लगता है, और क्रेडिट कार्ड EMI भी क्रेडिट कार्ड का ही ब्याज है। सेलर का discount ब्याज ढकता है। उस पर का GST कोई नहीं ढकता। बैंक उसे हर महीने आपके statement में, EMI के बगल में बिल करता है।
जय के फोन पर नौ महीने में ये ₹645 होता है (GST 18%, अक्टूबर 2026 का रेट)। छोटा, पर बैंक के रेट और tenure के साथ बढ़ता है:
| ₹60,000 का फोन, no cost EMI | बैंक रेट | सेलर जो ब्याज discount करता है | आप जो GST भरते हैं |
|---|---|---|---|
| 9 महीने | 15% | ₹3,584 | ₹645 |
| 9 महीने | 18% | ₹4,263 | ₹767 |
| 9 महीने | 21% | ₹4,930 | ₹887 |
| 3 महीने | 15% | ₹1,469 | ₹264 |
| 6 महीने | 15% | ₹2,540 | ₹457 |
| 12 महीने | 15% | ₹4,603 | ₹829 |
हर लाइन में reducing balance ब्याज, सिर्फ ब्याज वाले हिस्से पर 18% GST। लंबा "no cost" tenure भी मुफ्त नहीं है: सेलर ज़्यादा discount करता है, और आप ज़्यादा पर GST भरते हैं।
एक ज़रूरी फर्क। GST का ये अपवाद सिर्फ क्रेडिट कार्ड के ब्याज के लिए है। डेबिट कार्ड पर EMI, या दुकान में NBFC का consumer durable loan, सादा loan है, इसलिए उसका ब्याज खुद छूट में है। उस पर की processing fee सर्विस चार्ज है, और उस पर 18% GST लगता ही है।
GST क्या है और बिल पर कैसे दिखता है, ये GST क्या है में समझाया गया है।
क्रेडिट कार्ड EMI conversion के चार्ज
दूसरा खर्च processing fee है, और ये कार्ड और रास्ते के हिसाब से बदलता है:
- मर्चेंट पर EMI (Amazon, Flipkart, ब्रांड स्टोर पर checkout): HDFC Bank की कार्ड शर्तों में मर्चेंट पर ली गई EMI के लिए EasyEMI processing fee ₹299 तक, और SmartEMI (खरीद के बाद transaction बदलना) के लिए ₹249 और GST लिखा है, जो 1 अक्टूबर 2026 से बदला है (HDFC Bank क्रेडिट कार्ड MITC, 9 अक्टूबर 2026 को अपडेट)।
- पुराना transaction खुद EMI में बदलना: SBI Card की Flexipay शर्तों (जून 2026) के मुताबिक booking रकम का 1% या ₹2,000, जो कम हो, और ब्याज दर bureau score के हिसाब से साल का 10% से 25%। ₹60,000 पर वो fee ₹600 और GST।
- Marketplace की fee: Flipkart कहता है कि वो खुद processing fee नहीं लेता, पर बैंक ले सकता है, और फोन लौटाने पर भी बैंक की fee वापस नहीं मिलती।
जय के लिए ₹249 और 18% GST लीजिए, यानी ₹294, पहले statement में बिल होता है। Pre-closure, बोनस के बाद सब एक साथ भर देना हो तो, HDFC Bank और SBI Card दोनों में बकाया principal का 3%। ₹30,000 बकाया हो तो ₹900 और GST, जो बचाना चाहा था उस पूरे GST से ज़्यादा। No cost EMI हो तो उसे चलने दीजिए।
वो discount जो नकद देने वालों को मिला, आपको नहीं
ये वो खर्च है जो प्रोडक्ट पेज पर कोई नहीं लिखता। फेस्टिव सेल में दाम के ऊपर बैंक ऑफर चलते हैं: "SBI डेबिट कार्ड से 10% instant discount", "HDFC क्रेडिट कार्ड से ₹1,500 ऑफ"। ऐसे किसी भी ऑफर की शर्तें पढ़िए तो जुलाई 2026 के SBI के Amazon Prime Day ऑफर जैसी लाइन मिलेगी (SBI डेबिट कार्ड ऑफर FAQ): "the discount under this Offer is not applicable on Credit Card EMI, Downpayment EMI and Debit Card EMI", और "Offer not valid for No Cost EMI"। उस सेल में मोबाइल पर discount 10%, ज़्यादा से ज़्यादा ₹750, और ₹59,990 या उससे ऊपर के एक transaction पर bonus ₹750। ₹60,000 का फोन पूरे पैसे देकर लिया होता तो ₹1,500 कम लगते।
तो जय के लिए सही तुलना "₹60,000 नकद बनाम ₹60,000 EMI में" नहीं है। ये है:
| ₹60,000 का फोन चुकाने का तरीका | कुल आप भरते हैं | सबसे सस्ते से ज़्यादा |
|---|---|---|
| पूरे पैसे, ₹1,500 instant discount लेकर | ₹58,500 | ₹0 |
| No cost EMI, 9 महीने (GST ₹645 + fee ₹294) | ₹60,939 | ₹2,439 |
| सामान्य कार्ड EMI 15%, 9 महीने (ब्याज ₹3,812 + GST ₹686 + fee ₹294) | ₹64,792 | ₹6,292 |
बैंक रेट 15% reducing, processing fee ₹249 + GST, instant discount ₹1,500 ऊपर वाले SBI ऑफर के हिसाब से। No cost EMI सामान्य EMI से कहीं बेहतर है। पूरे पैसे देने से ₹2,439 बदतर है। और आखिरी जाल: दुकान में EMI पूछने से पहले नकद का दाम पूछिए। काउंटर नकद पर ₹57,500 और "no cost EMI पर" ₹60,000 बताए, तो सेलर ने ब्याज आपके दाम में ही जोड़ दिया है।
"0%" EMI का असली APR
APR, annual percentage rate, वो एक आंकड़ा है जो हर चार्ज को सालाना दर में समेटता है, और RBI का 15 अप्रैल 2024 का Key Facts Statement सर्कुलर 1 अक्टूबर 2024 से मंज़ूर हर retail term loan के लिए lender से इसे छपवाता है। सर्कुलर APR की परिभाषा देता है: "the annual cost of credit to the borrower which includes interest rate and all other charges"। इस पोस्ट के लिए पेंच: "credit card receivables are exempted", यानी क्रेडिट कार्ड EMI के साथ KFS नहीं आता। डेबिट कार्ड EMI या दुकान के consumer loan के साथ आता है।
तो APR हम खुद निकालते हैं। सबसे सस्ते नकद दाम को loan की रकम मानिए, और जो असल में भरते हैं (नौ EMI, हर महीने का GST, पहले महीने की fee) उसे किस्तें मानिए। फिर रेट निकालिए, जैसे flat vs reducing वाली पोस्ट flat रेट को सही रेट में बदलती है:
| "No cost EMI" में असल में क्या था | ज़्यादा भरा | असली APR |
|---|---|---|
| सिर्फ ब्याज पर GST, fee नहीं, discount नहीं गंवाया | ₹645 | करीब 2.6% |
| GST + ₹294 processing fee | ₹939 | करीब 3.8% |
| GST + fee + ₹1,500 instant discount गंवाया | ₹2,439 | करीब 10% |
| GST + fee + ₹3,000 discount या नकद दाम का फर्क गंवाया | ₹3,939 | करीब 16.4% |
₹60,000 का फोन, ₹6,667 की 9 EMI, बैंक रेट 15%, GST हर महीने, fee पहले महीने। यही फैलाव पूरी बात है। Fee नहीं और discount नहीं गंवाया तो no cost EMI लगभग मुफ्त है, साल का 3% से कम। वही EMI उस फोन पर, जो नकद वालों को ₹3,000 सस्ता मिलता है, 16% का loan है, लगभग personal loan जितना। लेबल दोनों में एक ही है। सिर्फ छोटे अक्षर और नकद का दाम उन्हें अलग करते हैं।
EMI on debit card: किसे मिलता है और कैसे चलता है
अब इसके लिए क्रेडिट कार्ड की ज़रूरत नहीं। SBI अपनी साइट पर इसे "EMI facility to pre-approved customers, for purchasing consumer durables from merchant stores by swiping their debit cards and online from Flipkart & Amazon portals" कहता है, 100 से ज़्यादा मर्चेंट से टाई-अप, जिनमें 42 zero-cost EMI देते हैं (SBI, salary package पेज)। ज़्यादातर बड़े निजी बैंक यही प्रोडक्ट अपने नाम से चलाते हैं।
कार्ड EMI से ये कैसे अलग है:
- ये pre-approved loan है, आपका बैंक बैलेंस नहीं। बैंक आपके खाते की हिस्ट्री देखकर पहले से EMI लिमिट तय करता है। SBI की 2022-23 की Directors' Report कहती है कि ये प्रोडक्ट pre-approved ग्राहकों को "based on their account behaviour and other parameters" मिलता है, दिसंबर 2022 से ज़्यादा से ज़्यादा loan ₹2 लाख और tenure 3 से 36 महीने। आप लिस्ट में हैं या नहीं, ये रजिस्टर्ड मोबाइल से DCEMI लिखकर 567676 पर SMS करके जान सकते हैं। जवाब में लिमिट ज़ीरो आए तो checkout पर आपके कार्ड के लिए EMI का विकल्प दिखेगा ही नहीं।
- खरीद के वक्त पैसा आपके सेविंग्स खाते से नहीं जाता। बैंक छोटे loan से मर्चेंट को देता है, और standing instruction हर महीने आपके खाते से EMI खींचती है। Due date पर खाते में पैसा कम हो तो वो loan default है, किसी भी दूसरे loan की तरह credit bureau में रिपोर्ट होता है।
- ब्याज GST-मुक्त, fee नहीं। ये loan है, credit card service नहीं, इसलिए सेलर जो ब्याज discount करता है उस पर GST नहीं। Processing fee पर 18% GST लगता ही है। "No cost" वाला हिस्सा क्रेडिट कार्ड जैसा ही चलता है।
- इसके साथ KFS आता है। डेबिट कार्ड EMI retail term loan है, इसलिए अक्टूबर 2024 से बैंक को APR वाला Key Facts Statement देना होगा। वहीं fee और ब्याज एक आंकड़े में साथ बैठे होते हैं।
क्रेडिट लिमिट और CIBIL score पर क्या असर
कार्ड EMI आपके कार्ड पर loan की तरह बैठती है। SBI Card की Flexipay शर्तें ठीक यही कहती हैं: मंज़ूरी पर "the SBI Credit Cardholder's Credit Limit shall be blocked up to Flexipay Principal Amount + Processing Fee + GST", और लिमिट "gets adjusted as and when the installment payments are made"। दूसरे issuer भी ऐसे ही करते हैं। ₹1 लाख की लिमिट पर जय का फोन पहले दिन ₹56,416 और fee और GST ब्लॉक करता है, लिमिट का करीब 57%, और जगह महीने में सिर्फ ₹6,000 के आसपास वापस आती है।
इससे तीन बातें निकलती हैं:
- Utilisation. ब्लॉक हुई रकम कार्ड पर outstanding गिनी जाती है, इसलिए "No Cost EMI" टैप करने वाले दिन आपका credit utilisation उछलता है और पूरे tenure तक ऊंचा रहता है। ऐसी दो-तीन EMI ₹1 लाख के कार्ड को साल के बड़े हिस्से में 80% utilisation पर रख सकती हैं, और ऊंचा utilisation उन चीज़ों में से है जिन पर bureau अंक काटते हैं।
- Minimum due में नई लाइन। हर EMI minimum amount due का हिस्सा है। बाकी बिल पर सिर्फ minimum भरें तो बचा हुआ कार्ड के सामान्य रेट पर चलता है, उसी MITC के मुताबिक ज़्यादातर HDFC Bank कार्ड पर महीने का 3.75% यानी साल का 45%, और आप "मुफ्त" EMI पर खुश रहते हैं।
- Loan eligibility. होम या कार loan कितना देना है, ये तय करते वक्त बैंक कार्ड EMI को fixed obligation गिनते हैं। फोन की ₹6,667 महीने की EMI बंद होने तक आपको मिलने वाला होम loan करीब ₹7.7 लाख घटा देती है (8.5% पर 20 साल)। बड़ा loan आने वाला हो तो home loan eligibility calculator पर देख लीजिए।
हर EMI due date पर भरें तो इनमें से कुछ नहीं चुभता। समय पर चुकाया loan रिपोर्ट में प्लस है। नुकसान उन महीनों में है जब आप खिंचे हुए हों।
No cost EMI कब ठीक है, और कब जाल
ये पांचों बातें सच हों तो सौदा अच्छा है:
- No cost EMI का दाम और पूरे पैसे का दाम एक ही है, और आपने बैंक ऑफर की शर्तें देख ली हैं कि नकद वाले को क्या मिलता।
- बैंक की processing fee ज़ीरो या उसके करीब है, और टैप करने से पहले आपको आंकड़ा पता है।
- आप वही चीज़ उसी दाम पर इस महीने वैसे भी लेने वाले थे। EMI सिर्फ ये बदलती है कि कब भरते हैं, क्या लेते हैं ये नहीं।
- जो पैसा अभी नहीं भर रहे वो किसी काम की जगह पड़ा रहता है। ₹56,416 FD में 6.5% पर 9 महीने रहें तो करीब ₹2,973 मिलते हैं, जो ₹645 के GST से कहीं ज़्यादा है। सेविंग्स खाते में 3% पर करीब ₹1,360, फिर भी आगे। कहीं और खर्च हो जाए तो कुछ नहीं।
- EMI आपके महीने में आराम से बैठती है, और अगले साल होम या कार loan की अर्ज़ी नहीं आने वाली।
जाल तब है जब EMI की वजह से ही खरीद मुमकिन हुई हो। "महीने के" ₹6,667 वो तरीका है जिससे ₹45,000 की तनख्वाह पर ₹60,000 का फोन लिया जाता है, और अगले सेल में ₹40,000 का TV उसके पीछे आता है। No cost EMI दाम को जितना है उसके नौवें हिस्से जैसा महसूस कराती है, और असल में वही बेचा जा रहा है। GST और fee छोटे हैं। ₹60,000 में जो फोन आप नहीं लेते, वो महंगा हिस्सा है।
दो और चेतावनियां। सिर्फ 12 या 18 महीने पर, ऊंचे दाम पर मिलने वाली "no cost EMI" यानी सेलर ब्याज दाम में फैला रहा है। और दुकान का loan flat रेट पर ("सिर्फ 8% flat") बताए तो वो no cost है ही नहीं: 9 महीने के लिए 8% flat यानी करीब 14.2% reducing, जैसा flat vs reducing वाली पोस्ट में समझाया है।
टैप करने से पहले दो मिनट की जांच
Checkout पर EMI का विकल्प चुनने से पहले इतना कीजिए:
- पूरे पैसे का आखिरी दाम नोट कीजिए, बैंक और कूपन के सारे discount लगाकर। यही आपका सही नकद दाम है।
- EMI का breakdown खोलिए। 2022 के RBI direction के मुताबिक कार्ड issuer को principal, ब्याज और upfront discount दिखाना होगा। ब्याज का आंकड़ा लिख लीजिए, सेलर उतना ही भरता है।
- उस ब्याज का 18% जोड़िए, और GST समेत processing fee। जय के फोन पर: ₹645 + ₹294 = ₹939।
- जो discount छोड़ रहे हैं वो जोड़िए। कदम 1 और no cost EMI के दाम का फर्क।
- कुल बढ़ी हुई रकम EMI calculator में डालिए, जैसे वो tenure के लिए नकद दाम पर ब्याज हो। करीब 4% से कम आए तो आगे बढ़िए। 10% से ऊपर आए तो आप मीठे नाम वाला personal loan ले रहे हैं, और personal loan EMI calculator दिखाएगा कि असली loan उतने का ही पड़ सकता है, क्रेडिट लिमिट के साइड इफेक्ट के बिना।
जय ने ये किया होता तो जवाब करीब 10% आता। फोन शायद फिर भी लेता। पर उसे पता होता कि वो कितने का पड़ा, और no cost EMI और no questions EMI में बस इतना ही फर्क है।
लोग अक्सर पूछते हैं
No cost EMI का मतलब क्या है?
बैंक अपना सामान्य EMI ब्याज लेता है, और सेलर या ब्रांड आपको उतना ही upfront discount देता है, इसलिए आपकी EMI जोड़कर sticker price जितनी होती हैं। ₹60,000 के फोन पर 15%, 9 महीने में discount ₹3,584, बैंक ₹56,416 देता है, और आप ₹6,667 × 9 = ₹60,000 भरते हैं। RBI के 2022 के कार्ड नियमों के मुताबिक issuer को conversion से पहले principal, ब्याज और discount दिखाना होगा।
क्या no cost EMI पर GST लगता है?
हां, क्रेडिट कार्ड EMI पर। Credit card services का ब्याज loan के ब्याज की GST छूट से बाहर है, इसलिए बैंक हर महीने ब्याज वाले हिस्से पर 18% GST बिल करता है। ₹60,000 के फोन पर 15%, 9 महीने में ये करीब ₹645। सेलर का discount ब्याज ढकता है, उस पर का GST नहीं।
क्रेडिट कार्ड की खरीद EMI में बदलने के चार्ज क्या हैं?
Processing fee और GST, और मर्चेंट का discount no cost न बनाए तो कार्ड के EMI रेट पर ब्याज। अक्टूबर 2026 के मुताबिक HDFC Bank SmartEMI के लिए ₹249 और GST लिखता है, और SBI Card का Flexipay रकम का 1%, ज़्यादा से ज़्यादा ₹2,000, ब्याज साल का 10% से 25%। Pre-closure आमतौर पर बकाया principal का 3%।
डेबिट कार्ड पर EMI कैसे चलती है और किसे मिलती है?
ये आपके बैंक का छोटा pre-approved loan है, बैलेंस से कटौती नहीं। बैंक मर्चेंट को देता है और standing instruction हर महीने आपके खाते से EMI खींचती है। SBI, मिसाल के तौर पर, pre-approved ग्राहकों को ₹2 लाख तक 3 से 36 महीने के लिए देता है। रजिस्टर्ड मोबाइल से DCEMI लिखकर 567676 पर SMS करके eligibility देख सकते हैं।
क्या no cost EMI से क्रेडिट लिमिट और CIBIL score पर असर पड़ता है?
Loan की रकम और fee और GST आपकी क्रेडिट लिमिट से ब्लॉक होती है और भरने पर छूटती है। ₹1 लाख के कार्ड पर ₹60,000 का फोन शुरू में utilisation करीब 57% रखता है, जिस पर bureau नज़र रखते हैं। हर EMI समय पर भरें तो नुकसान नहीं। चूकी हुई EMI या भरा हुआ कार्ड नुकसान करता है।
No cost EMI की असली ब्याज दर कितनी है?
आप क्या छोड़ते हैं, उस पर निर्भर। ₹60,000 के फोन पर सिर्फ ₹645 GST हो तो असली APR करीब 2.6%। ₹294 processing fee जोड़ें तो 3.8%। नकद वालों को मिला ₹1,500 instant discount जोड़ें तो करीब 10%। नकद दाम ₹3,000 कम हो तो करीब 16.4%, लगभग personal loan जितना।
यह लेख आम जानकारी के लिए है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं। रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए। कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए। एडिटोरियल पॉलिसी · संपर्क