आज सुबह बोनस खाते में आ गया, पिछले साल से बड़ा, या फिर पापा का नब्बे के दशक में लिया प्लॉट आखिरकार बिक गया। जो भी हो, सेविंग्स खाते में ₹5 लाख पड़े हैं और हर किसी के पास सलाह है। बैंक वाले RM भैया "वन-टाइम प्रीमियम" प्लान दिखा रहे हैं, ऑफिस का साथी कह रहा है आज ही सब फंड में डाल दो, और आपका मन कह रहा है कि बाजार ऊपर है, थोड़ा रुक जाओ।
असल सवाल सीधा है: पूरी रकम एक साथ लगाएं, या कुछ महीनों में बांटकर? सच कहें तो एक साथ लगाने में कागज पर ज्यादातर फायदा ज्यादा है, बांटकर लगाने में रात को नींद अच्छी आती है, और बीच का एक समझदारी वाला रास्ता है जो ज्यादातर लोगों के लिए ठीक बैठता है। नीचे हर तरीके का हिसाब रुपयों में है, और आखिर में दो काल्पनिक लोग, बिल्कुल अलग बोनस के साथ, पूरा हिसाब करके दिखाते हैं।
लमसम, SIP और STP: बोनस लगाने के तीन तरीके
लमसम का मतलब है पूरे ₹5 लाख एक ही दिन म्यूचुअल फंड में। उस दिन की NAV मिलती है, और उसके बाद पूरी रकम बाजार के साथ ऊपर-नीचे होती है।
SIP बनाकर बांटना यानी पैसा सेविंग्स खाते में रखिए और हर महीने, मान लीजिए, ₹41,667 करके 12 महीने में लगाइए। ये चलता है, लेकिन इंतजार करता पैसा सिर्फ सेविंग्स खाते का ब्याज कमाता है, ज्यादातर बड़े बैंकों में करीब 2.5–3%, और फोन या घूमने के लिए उसमें से "थोड़ा उधार" ले लेना बहुत आसान होता है।
STP (सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान) इसी आइडिया का साफ-सुथरा तरीका है। पूरी रकम एक लिक्विड फंड (या किसी और कम रिस्क वाले फंड) में डालिए, और फंड हाउस को स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन दीजिए कि हर हफ्ते या महीने तय रकम एक इक्विटी फंड में डालता रहे। दोनों फंड एक ही फंड हाउस के होने चाहिए। इंतजार करते पैसे पर लिक्विड फंड का रिटर्न मिलता है, जो पिछले एक साल में करीब 6% रहा है, और ट्रांसफर अपने आप होते रहते हैं। इसका पूरा तरीका हमने अलग पोस्ट में समझाया है: STP से एकमुश्त रकम कैसे लगाएं।
अगर आपका पैसा हर महीने आता है, जैसे सैलरी, तो SIP ही सही तरीका है और सोचने को कुछ नहीं है। लमसम या बांटकर, ये सवाल तभी उठता है जब बड़ी रकम पहले से हाथ में हो।
एक भी रुपया लगाने से पहले
ज्यादातर परिवारों के लिए बोनस या एकमुश्त रकम ही वो मौका होता है जब वो काम निपटाए जा सकते हैं जो महीने की सैलरी से कभी पूरे नहीं होते। तो इस क्रम में चलिए:
- महंगा कर्ज पहले चुकाइए। क्रेडिट कार्ड के बकाए पर अक्सर महीने का 3–4% लगता है, यानी साल का 36–48%। कोई फंड इसे नहीं हरा सकता। पर्सनल लोन भी आमतौर पर दो अंकों के ब्याज पर होता है, उसे भी प्रीपे करना फायदे का सौदा है; कुछ हिस्सा चुकाने से कितना ब्याज बचेगा, ये पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर बता देगा।
- हाथ में नकद का सहारा रखिए। कल नौकरी चली जाए और दो-चार महीने में किराए और EMI के लिए उधार लेना पड़े, तो पहले वो कमी पूरी कीजिए। इमरजेंसी फंड FD या स्वीप-इन खाते में रहता है, इक्विटी में नहीं।
- जिस पैसे की तारीख तय है, उसे अलग रखिए। अगर इसमें से ₹2 लाख अगले साल गाड़ी या 2028 की शादी के लिए हैं, तो वो इक्विटी में जाने ही नहीं चाहिए। लक्ष्य की तारीख वाली FD में रखिए; कितना बनेगा, ये FD कैलकुलेटर बता देगा।
- उसके बाद ही तय कीजिए कि लंबे समय वाला हिस्सा कैसे लगाना है।
ये भी याद रखिए कि बोनस पर सैलरी की तरह टैक्स लगता है। कंपनी देने से पहले TDS काट लेती है, तो जो खाते में आया वो टैक्स के बाद की रकम है। अगर काफी TDS कटा है, तो इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर देख लीजिए कि साल का कुल टैक्स मेल खा रहा है या नहीं, ताकि मार्च में कोई झटका न लगे।
लमसम ज्यादातर क्यों जीतता है: बाजार में बिताया समय
लंबे दौर में बाजार गिरने से ज्यादा बार चढ़ा है, इसलिए किनारे बैठा पैसा आमतौर पर कुछ बढ़त गंवा देता है। लमसम के पक्ष में पूरी दलील बस इतनी है।
इस पर सबसे जानी-मानी स्टडी Vanguard की है। अमेरिका में 1926 से 2011 तक के 10-10 साल के दौरों में, पूरी रकम एक साथ लगाना 12 महीने में बांटकर लगाने से करीब तीन में से दो बार आगे रहा, और ब्रिटेन व ऑस्ट्रेलिया में भी यही पैटर्न दिखा। औसत फायदा छोटा था, करीब 2.3%। बांटने का समय 36 महीने कर दें तो लमसम और भी ज्यादा बार जीता। Morningstar India पर इसका छोटा सा सार पढ़ सकते हैं। भारत पर इतनी लंबी कोई स्टडी नहीं है, पर तर्क यहां भी वही है।
रुपयों में देखें तो 12% सालाना मानकर, आज लगाए ₹5 लाख लमसम कैलकुलेटर पर 10 साल में ₹15,52,924 बनते हैं। अब सबसे उल्टा केस लीजिए: आप पूरा पैसा एक साल लिक्विड फंड में 6% पर रखते हैं (₹5.3 लाख) और उसके बाद लगाते हैं। 12% पर नौ साल में ये ₹14,69,732 बनते हैं। एक साल रुकने की कीमत करीब ₹83,000। और "क्रैश" का इंतजार अक्सर एक साल पर नहीं रुकता। महीने साल बन जाते हैं, और पैसा 2.5% वाले सेविंग्स खाते में पड़ा रहता है। पक्का नहीं है तो STP शुरू कर दीजिए। वो एक फैसला है, इंतजार फैसला नहीं। 10% पर सीधा लमसम ₹12,96,871 देता है, तो अपनी प्लानिंग कम वाले आंकड़े से कीजिए।
पेंच यहां है: एक खराब महीना लमसम का क्या करता है
औसत के आंकड़ों में वो चीज छुप जाती है जो लोगों को असल में याद रहती है। आपने ₹5 लाख लगाए और अगले ही महीने बाजार 20% गिर गया, तो स्टेटमेंट में ₹4 लाख दिखेंगे। चार हफ्ते में कागज पर ₹1 लाख साफ। 2008 में और फिर मार्च 2020 में कुछ ही महीनों में इक्विटी की वैल्यू एक-तिहाई या उससे ज्यादा गिरी थी, तो ये डर हवा-हवाई नहीं है।
नुकसान भले थोड़े समय का हो, पर उस पर जो रिएक्शन होता है वो अक्सर थोड़े समय का नहीं होता। बहुत से नए निवेशक वो लाल नंबर देखते हैं, घबराकर बेच देते हैं, और अगले दस साल FD में ही रहते हैं। ये एक फैसला लमसम के 2% वाले औसत फायदे से कहीं ज्यादा महंगा पड़ता है।
बांटकर लगाने से गिरावट रुकती नहीं। बस गिरावट के वक्त आपका कम पैसा बाजार में होता है, और बाद की किस्तें सस्ते में खरीदती हैं। Vanguard के आंकड़े ये पहलू भी दिखाते हैं: गिरते बाजार में बांटकर लगाने वालों का नुकसान कम रहा। औसतन लमसम का नतीजा बेहतर आता है। बांटकर लगाएं तो नतीजे बहुत ऊपर-नीचे नहीं होते, और सबसे बुरा हाल भी कम बुरा रहता है।
₹5 लाख, चार तरीके, चार तरह के बाजार
नीचे ₹5 लाख का 10 साल का हिसाब है, टैक्स से पहले। हर लाइन में फर्क सिर्फ इतना है कि पहले छह महीने बाजार क्या करता है; उसके बाद इक्विटी 12% सालाना बढ़ती मानी गई है। STP के इंतजार में बैठा पैसा लिक्विड फंड में 6% कमाता है। ये हमने एक सीधे मॉडल में महीने-दर-महीने निकाला है, और पहला खाना लमसम कैलकुलेटर से बिल्कुल मेल खाता है।
| शुरू में बाजार क्या करता है | लमसम | आधा अभी, आधा 6 महीने में | 6 महीने का STP | 12 महीने का STP |
|---|---|---|---|---|
| सीधा, 12% सालाना | ₹15.53 लाख | ₹15.40 लाख | ₹15.28 लाख | ₹14.99 लाख |
| पहले महीने 20% गिरावट | ₹12.31 लाख | ₹13.52 लाख | ₹14.74 लाख | ₹14.72 लाख |
| 6 महीने में धीरे-धीरे 25% गिरावट | ₹11.01 लाख | ₹11.78 लाख | ₹12.56 लाख | ₹13.63 लाख |
| 6 महीने में 25% तेजी | ₹18.34 लाख | ₹17.60 लाख | ₹16.86 लाख | ₹15.78 लाख |
इसमें कुछ बातें साफ दिखती हैं।
- सीधे चलते बाजार में 12 महीने का STP लमसम से करीब ₹54,000 पीछे रहता है। कुछ गलत न हो, तो सावधानी की कीमत इतनी है। 6 महीने का STP करीब ₹25,000 पीछे, और आधा-आधा करीब ₹13,000।
- लगाते ही बाजार गिर जाए, तो लमसम 6 महीने वाले STP से करीब ₹2.4 लाख पीछे रह जाता है, क्योंकि पूरी रकम ने मार खाई जबकि STP ने ज्यादातर यूनिट गिरावट के बाद खरीदीं।
- लंबी, धीमी गिरावट में लंबा STP साफ जीतता है, क्योंकि वो नीचे तक खरीदता रहता है।
- तेजी में लमसम 12 महीने वाले STP से करीब ₹2.6 लाख आगे निकल जाता है। इनमें से कौन सी लाइन आने वाली है, ये पहले से किसी को नहीं पता।
पहले साल का सबसे बुरा पल भी देखिए। "20% गिरावट" वाले केस में लमसम का स्टेटमेंट ₹4,00,000 दिखाता है। 12 महीने के STP में ये ज्यादा से ज्यादा करीब ₹4,93,900 तक गिरता है। बाजार वही, एहसास बिल्कुल अलग।
ये बाजार के काल्पनिक केस हैं, फायदे-नुकसान का अंदाजा देने के लिए, भविष्यवाणी नहीं।
STP कैसे चलता है, और इसका खर्च क्या है
पूरी रकम सोर्स फंड में डालिए, उसी फंड हाउस का टारगेट इक्विटी फंड चुनिए (सीधा डायवर्सिफाइड फंड, न कि उस हफ्ते RM जो नया फंड ऑफर या सेक्टर फंड बेच रहा हो), और रकम, कितने दिन में ट्रांसफर और शुरू होने की तारीख तय कीजिए। ज्यादातर फंड हाउस हफ्ते, महीने या तिमाही के ट्रांसफर देते हैं, और कम से कम अवधि आमतौर पर छह महीने से एक साल होती है। इसके प्रकार HDFC म्यूचुअल फंड के इस लेख में समझाए गए हैं।
पैसा कहां रखें। आमतौर पर लिक्विड फंड। इसकी वैल्यू बहुत कम हिलती है, और एग्जिट लोड बहुत छोटा है जो सिर्फ छह दिन रहता है (पहले दिन 0.007%, सातवें दिन से जीरो)। दूसरा ऑप्शन आर्बिट्राज फंड है। इस पर इक्विटी फंड की तरह टैक्स लगता है, जो ऊंचे स्लैब वालों के काम आता है, पर इसका रिटर्न आमतौर पर लिक्विड फंड के आसपास रहा है, कभी थोड़ा कम, और कई फंड कुछ हफ्तों के अंदर निकलने पर एग्जिट लोड लेते हैं। दोनों में स्कीम का डॉक्यूमेंट जरूर देखिए।
हर ट्रांसफर पर टैक्स। हर ट्रांसफर असल में लिक्विड फंड की यूनिट की बिक्री है। अप्रैल 2023 से खरीदी यूनिट पर हर बिक्री का छोटा सा मुनाफा आपके स्लैब रेट से टैक्स होता है, बिल्कुल FD के ब्याज की तरह। ₹5 लाख, 12 महीने, 6% पर ये मुनाफा कुल मिलाकर करीब ₹13,100 बनता है। 30% स्लैब में, सेस मिलाकर, करीब ₹4,100 टैक्स। 6 महीने में करीब ₹6,000 का मुनाफा और ₹1,900 टैक्स। रकम छोटी है, पर ITR में दिखानी है।
इक्विटी की तरफ, हर ट्रांसफर की होल्डिंग अलग गिनी जाती है। 12 महीने के अंदर बेचा तो शॉर्ट-टर्म गेन, 20% टैक्स (इनकम-टैक्स एक्ट, 2025 का सेक्शन 196)। उसके बाद लॉन्ग-टर्म, साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के गेन पर 12.5% (सेक्शन 198)। ऊपर से 4% सेस। 10 साल के लक्ष्य में इससे खास फर्क नहीं पड़ता, बस 12 महीने के STP में आखिरी किस्त लमसम के मुकाबले करीब एक साल बाद लॉन्ग-टर्म बनती है।
कई इक्विटी फंड एग्जिट लोड भी लेते हैं, अक्सर साल भर के अंदर बेचने पर करीब 1%। ये तभी चुभता है जब आप जल्दी निकलें।
बीच का एक काम का रास्ता
ज्यादातर सैलरी वालों के लिए ये तरीका चलता है:
- पहले से लगे पैसे के मुकाबले छोटी रकम (जैसे ₹60,000 का बोनस और फंड में पहले से ₹8 लाख): एक साथ लगा दीजिए। ₹60,000 की टाइमिंग पर दिमाग खपाने का कोई फायदा नहीं।
- पोर्टफोलियो के मुकाबले बड़ी रकम (फंड में ₹2 लाख हैं और ₹5 लाख आ गए, या पहली बार लगा रहे हैं): एक-तिहाई से आधा तुरंत लगाइए, बाकी का 6 महीने का STP।
- आपको पता है कि गिरावट में घबरा जाएंगे: पूरा 6–12 महीने का STP। थोड़ा रिटर्न छोड़कर आप सबसे बुरे हाल को काफी छोटा कर लेते हैं, और अगर इससे आप निवेश में टिके रहते हैं तो सौदा ठीक है।
- 12 महीने से लंबा मत खींचिए। पैसा जितना ज्यादा इंतजार करेगा, सामान्य बाजार में उतना ज्यादा छूटेगा।
STP एक बार चालू हो जाए तो उसे छेड़िए मत। तीसरे महीने बाजार गिरा, तो बाकी किस्तें ठीक वही काम कर रही हैं जिसके लिए STP चुना था।
अगर आप कोई तय एसेट मिक्स मानते हैं, मान लीजिए 60% इक्विटी और 40% FD व PPF, तो बोनस बैलेंस ठीक करने का मौका है। पैसा वहां डालिए जहां मिक्स कम पड़ गया है, बिना सोचे सब इक्विटी में नहीं।
आपकी उम्र और लक्ष्य से जवाब बदल जाता है
आप नौजवान हैं, नौकरी पक्की है और लक्ष्य 20 साल से ज्यादा दूर है, तो लमसम या आधा-आधा ठीक है। खराब शुरुआत झेलने के लिए आपके पास इतना वक्त है, और कंपाउंडिंग का हर साल मायने रखता है। 12% पर पैसा मोटे तौर पर हर छह साल में दोगुना होता है (रूल ऑफ 72 ये शॉर्टकट समझाता है), तो 15 साल छोड़े गए ₹5 लाख कैलकुलेटर पर करीब ₹27.4 लाख बनते हैं।
इक्विटी में पहली बार आ रहे हैं, तो 6–12 महीने का STP लीजिए। आखिरी ₹25,000 के रिटर्न से ज्यादा जरूरी है पहली गिरावट में बिना बेचे टिके रहना।
रिटायरमेंट पास है, या ग्रेच्युटी या PF का पैसा आया है, तो इसका ज्यादातर हिस्सा इक्विटी में जाना ही नहीं चाहिए। जो हिस्सा इक्विटी में जाए, उसके लिए 6–12 महीने का STP ठीक है। असल में कितना चाहिए, ये ग्रेच्युटी कैलकुलेटर और रिटायरमेंट कैलकुलेटर से अंदाजा लगाइए।
पैसा तीन साल के अंदर चाहिए, तो दोनों में से कोई नहीं। FD या RD। ये चुनाव कर रहे हैं तो हमारी SIP vs FD वाली तुलना देख लीजिए।
दो बोनस, दो अलग हिसाब
मान लीजिए रोहन 26 साल का है, पहली नौकरी में तीन साल हुए हैं, और TDS कटने के बाद उसका बोनस ₹2 लाख आया। क्रेडिट कार्ड पर ₹45,000 बकाया घूम रहा है, और इस महीने की सैलरी के अलावा कोई बचत नहीं है। महीने का खर्च करीब ₹35,000 है।
पहले कार्ड। महीने के 3.5% के हिसाब से उस ₹45,000 पर हर महीने करीब ₹1,575 ब्याज जा रहा है, और कोई फंड इसके आसपास भी नहीं आता। बचे ₹1.55 लाख उसके करीब साढ़े चार महीने के खर्च के बराबर हैं, तो वो स्वीप-इन FD में जाते हैं और वहीं रहते हैं। पूरा बोनस इतने में खत्म। इस साल फंड में कुछ नहीं जाता, और लमसम या STP का सवाल उठता ही नहीं। बैंक के RM का "वन-टाइम प्रीमियम" प्लान के लिए फोन आए, तो जवाब ना है।
इक्विटी के लिए रोहन सैलरी से SIP शुरू कर सकता है, चाहे ₹5,000 महीना ही सही, और हर अप्रैल उसे बढ़ाता जाए। 15 साल में स्टेप-अप SIP अक्सर किसी एक बोनस से ज्यादा काम कर जाती है; SIP कैलकुलेटर पर आजमा कर देखिए। बाजार में जाने की बारी अगले साल के बोनस की है।
अब मान लीजिए मीरा 36 साल की है। TDS के बाद उसका बोनस ₹5 लाख है। सात साल से SIP चल रही है, फंड की वैल्यू करीब ₹12 लाख है, मार्च 2020 में भी उसने SIP बंद नहीं की थी, और होम लोन के अलावा कोई कर्ज नहीं है। नकद का सहारा पहले से तैयार है।
बोनस में से करीब ₹1 लाख अगले साल गाड़ी खरीदने के लिए है, तो वो गाड़ी की तारीख तक वाली FD में जाता है। बाकी ₹4 लाख रिटायरमेंट के लिए हैं, जो 20 साल से ज्यादा दूर है। फंड में पहले से पड़े ₹12 लाख के सामने ये बड़ा जोड़ है, पर इक्विटी में उसका पहला रुपया नहीं, और एक गिरावट वो बिना बेचे देख चुकी है। औसत के हिसाब से उसके लिए लमसम सही है।
फिर भी उसे आधा अभी और आधा छह महीने में ठीक लगता है। सीधे बाजार में ₹5 लाख पर इसकी कीमत ऊपर की टेबल बताती है: 10 साल में करीब ₹13,000। वो इसे सस्ता बीमा मानती है। ₹2 लाख उसी फ्लेक्सी-कैप फंड में जाते हैं जिसमें SIP चलती है, और ₹2 लाख उसी फंड हाउस के लिक्विड फंड में, वहां से 6 महीने के STP के साथ। चालू SIP को वो छेड़ती नहीं, अप्रैल के इंक्रीमेंट पर उसे बढ़ाती है, और नोट कर लेती है कि लिक्विड फंड का छोटा मुनाफा अगले साल के ITR में दिखाना है। अगर उसका इक्विटी वाला हिस्सा पहले से ही उसकी सोच से काफी ऊपर चला गया होता, तो यही ₹4 लाख PPF या FD में जाते, ताकि मिक्स वापस ठीक हो।
गौर कीजिए, दोनों केस में जिस बात पर सब बहस करते हैं, लमसम या STP, वो सबसे छोटा फैसला निकला। ज्यादातर काम तो कर्ज, नकद के सहारे और तारीख वाले पैसे ने तय कर दिया। ये सब निपट जाए, तो ज्यादातर मौकों पर लमसम बेहतर दांव है। फिर भी सबसे अच्छा प्लान वही है जिस पर आप बाजार के खराब महीने में भी टिके रहें।
लोग अक्सर पूछते हैं
बोनस लमसम में लगाएं या SIP से?
पैसा 7–10 साल या उससे दूर के लक्ष्य के लिए है और गिरावट में आप घबराते नहीं, तो एक साथ लगाना ज्यादातर बेहतर रहा है, क्योंकि बाजार में ज्यादा समय रहा पैसा ज्यादा बढ़ता है। पहले से लगे पैसे के मुकाबले रकम बड़ी है, या इक्विटी में नए हैं, तो एक-तिहाई से आधा अभी लगाइए और बाकी STP से 6 महीने में डालिए। पहले महंगा कर्ज चुकाइए और इमरजेंसी फंड पूरा कीजिए।
₹5 लाख लमसम 10 साल में कितने बनेंगे?
12% सालाना मानें तो लमसम कैलकुलेटर पर करीब ₹15.53 लाख, और 10% पर करीब ₹12.97 लाख। ये अंदाजा है, गारंटी वाला रिटर्न नहीं। लगाने के तुरंत बाद बाजार 20% गिर जाए, तो नतीजा काफी कम आ सकता है, हमारे उदाहरण में करीब ₹12.3 लाख।
क्या STP लमसम से बेहतर है?
औसत में नहीं। सीधे या चढ़ते बाजार में लमसम आगे रहता है; हमारे उदाहरण में ₹5 लाख पर 10 साल में 12 महीने का STP करीब ₹54,000 पीछे रहा। लेकिन लगाने के तुरंत बाद बाजार गिरे, तो STP काफी आगे निकलता है और कागज पर सबसे बड़ा नुकसान बहुत छोटा रहता है। STP खराब टाइमिंग के खिलाफ बीमा है, और इसकी कीमत है।
लमसम के लिए STP कितने महीने का रखें?
ज्यादातर लोगों के लिए छह से बारह महीने ठीक हैं। इससे लंबा रखेंगे तो लिक्विड फंड में इंतजार करता पैसा इक्विटी की बढ़त गंवाता रहेगा, और स्टडी बताती हैं कि लंबे समय तक बांटने के मुकाबले लमसम और ज्यादा बार जीतता है। कई फंड हाउस भी कम से कम करीब छह महीने मांगते हैं।
STP पर टैक्स कैसे लगता है?
हर ट्रांसफर लिक्विड फंड की यूनिट की बिक्री है, तो उसके छोटे मुनाफे पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है (अप्रैल 2023 से खरीदी यूनिट पर)। ₹5 लाख, 12 महीने, 6% पर करीब ₹13,100 का मुनाफा बनता है, यानी 30% स्लैब में सेस मिलाकर करीब ₹4,100 टैक्स। इक्विटी फंड में हर ट्रांसफर की 12 महीने की गिनती अलग चलती है: शॉर्ट-टर्म गेन पर 20%, लॉन्ग-टर्म में साल के ₹1.25 लाख से ऊपर 12.5%।
लमसम लगाते ही बाजार गिर जाए तो क्या करें?
स्टेटमेंट में नुकसान दिखेगा, शायद बड़ा: 20% गिरावट में ₹5 लाख के ₹4 लाख दिखेंगे। पैसा कई साल दूर के लक्ष्य के लिए है, तो टिके रहना अब तक बेहतर साबित हुआ है, और घबराकर बेचने से नुकसान पक्का हो जाता है। अगर आपको पता है कि आप बेच देंगे, तो लमसम की जगह STP चुनिए।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क