ज्यादातर लोग SIP उसी रकम से शुरू करते हैं जो पहली या दूसरी नौकरी में ठीक लगी थी। ₹3,000, ₹5,000, बहुत हुआ तो ₹10,000। फिर हर अप्रैल में सैलरी बढ़ती है, खर्चे भी साथ में बढ़ जाते हैं, और SIP वहीं की वहीं खड़ी रहती है। दस साल बाद भी वही ₹5,000 कट रहे होते हैं, जबकि खाते में आने वाली सैलरी दोगुनी से ज्यादा हो चुकी होती है।
स्टेप-अप SIP बस इसी एक आदत को ठीक करती है। आप एक बार तय कर देते हैं कि SIP हर साल बढ़ेगी, और फिर ये अपने आप होता रहता है, याद रखने का झंझट नहीं। नीचे ₹5,000 महीने की SIP पर 5%, 10% और 15% स्टेप-अप के आंकड़े हैं (SIP कैलकुलेटर पर निकाले हुए, उसमें स्टेप-अप वाला खाना भी है), असली सैलरी के सामने इनका मतलब क्या है, कब स्टेप-अप नहीं करना चाहिए, और फंड हाउस में टॉप-अप सेट या बदलना कैसे है।
स्टेप-अप SIP असल में है क्या
स्टेप-अप SIP (फंड हाउस इसे टॉप-अप SIP भी कहते हैं) एक नॉर्मल मंथली SIP ही है, बस इसमें एक एक्स्ट्रा निर्देश जुड़ा होता है: तय समय पर किस्त बढ़ा दो। फंड वही, तारीख वही, बैंक से ऑटो-डेबिट वही। बढ़ोतरी दो तरह से हो सकती है:
- तय रकम: मान लीजिए हर साल किस्त में ₹500 या ₹1,000 जोड़ दिए। कई AMC में कम से कम टॉप-अप ₹500 का होता है, और वो भी ₹500 के गुणकों में। SBI म्यूचुअल फंड के टॉप-अप पेज पर ठीक यही नियम लिखे हैं।
- प्रतिशत: किस्त को पिछली किस्त से, मान लीजिए, 10% बढ़ा दिया। कुछ फंड हाउस ये ऑप्शन भी देते हैं। हर बार बढ़ोतरी बड़े बेस पर होती है, तो रुपयों में बढ़ोतरी भी हर साल बड़ी होती जाती है।
मंथली SIP में ज्यादातर AMC छमाही या सालाना टॉप-अप की सुविधा देते हैं। नौकरी वाले ज्यादातर लोग सालाना ही चुनते हैं, अप्रेजल के ठीक बाद। यहां के उदाहरणों में सालाना प्रतिशत वाला स्टेप-अप लिया है, क्योंकि कैलकुलेटर यही करता है: 12 महीने किस्त एक जैसी, फिर चुने हुए प्रतिशत से बढ़ जाती है।
₹5,000 महीना: बिना स्टेप-अप vs 5%, 10% और 15% स्टेप-अप
नीचे ₹5,000 महीने की इक्विटी फंड SIP है, रिटर्न सालाना 12% मानकर और थोड़ा संभलकर देखने के लिए 10% मानकर। ये अंदाजे हैं, वादा नहीं। कुछ दौर में इक्विटी इससे काफी कम भी देती है।
15 साल में
| सालाना स्टेप-अप | आखिरी साल की SIP | आपने कुल लगाया | 12% पर वैल्यू | 10% पर वैल्यू |
|---|---|---|---|---|
| कोई नहीं (फ्लैट) | ₹5,000 | ₹9.00 लाख | ₹25.23 लाख | ₹20.90 लाख |
| 5% | ₹9,900 | ₹12.95 लाख | ₹32.65 लाख | ₹27.50 लाख |
| 10% | ₹18,987 | ₹19.06 लाख | ₹43.42 लाख | ₹37.19 लाख |
| 15% | ₹35,379 | ₹28.55 लाख | ₹59.18 लाख | ₹51.52 लाख |
20 साल में
| सालाना स्टेप-अप | आखिरी साल की SIP | आपने कुल लगाया | 12% पर वैल्यू | 10% पर वैल्यू |
|---|---|---|---|---|
| कोई नहीं (फ्लैट) | ₹5,000 | ₹12.00 लाख | ₹49.96 लाख | ₹38.28 लाख |
| 5% | ₹12,635 | ₹19.84 लाख | ₹68.69 लाख | ₹54.13 लाख |
| 10% | ₹30,580 | ₹34.36 लाख | ₹99.44 लाख | ₹80.73 लाख |
| 15% | ₹71,159 | ₹61.47 लाख | ₹1.51 करोड़ | ₹1.26 करोड़ |
10% वाली लाइन ही वो है जिसके साथ ज्यादातर लोग आराम से चल सकते हैं। 12% पर ₹5,000 की फ्लैट SIP 20 साल में करीब ₹50 लाख पर खत्म होती है। 10% स्टेप-अप के साथ वही SIP ₹1 करोड़ के बिल्कुल करीब पहुंच जाती है। सिर्फ 5% का हल्का सा स्टेप-अप भी फ्लैट वाले आंकड़े में करीब ₹19 लाख जोड़ देता है।
"आखिरी साल की SIP" वाला कॉलम भी देखिए। 10% स्टेप-अप में 10वें साल आपकी किस्त ₹11,790 महीना होगी और 20वें साल ₹30,580। आज के हिसाब से ये बड़ी लगती है, पर तब ये कहीं बड़ी सैलरी में से जाएगी।
फर्क इतना बड़ा क्यों है, और इसमें पेंच क्या है
यहां दो चीजें साथ चल रही हैं। आप ज्यादा पैसा लगा रहे हैं, और हर एक्स्ट्रा रुपये को भी सालों तक कंपाउंडिंग मिल रही है। 10 साल बाद 10% स्टेप-अप वाली SIP करीब ₹16.87 लाख पर होती है, फ्लैट वाली ₹11.62 लाख पर। 20वें साल तक फर्क करीब ₹50 लाख का हो जाता है।
अब वो बात जो SIP के विज्ञापन अक्सर नहीं बताते। स्टेप-अप कोई जादू नहीं है जिससे पैसा तेजी से बढ़े। ये इसलिए काम करता है क्योंकि आप ज्यादा पैसा डालते हैं। रुपये-रुपये का हिसाब देखें, तो जल्दी लगाया पैसा देर से लगाए पैसे से हमेशा आगे रहता है।
20 साल, 10% स्टेप-अप वाला केस लीजिए: आपने कुल ₹34.36 लाख लगाए। यही ₹34.36 लाख अगर पहले दिन से बराबर बांटकर लगाते, यानी करीब ₹14,319 महीने की फ्लैट SIP, तो 12% पर ये ₹99.44 लाख नहीं, करीब ₹1.43 करोड़ बनता। पैसा उतना ही, फायदा करीब ₹44 लाख ज्यादा, सिर्फ इसलिए कि ज्यादा पैसा जल्दी लगा।
तो सीधी सी बात है। अगर आज ₹10,000 निकाल सकते हैं, तो ₹10,000 से ही शुरू कीजिए, ₹5,000 से शुरू करके "बाद में बढ़ा देंगे" वाला वादा मत कीजिए। स्टेप-अप उस पैसे के लिए है जो अभी आपके पास है ही नहीं, यानी आगे आने वाले इंक्रीमेंट।
टाइमिंग का भी यही हाल है। तीन साल SIP फ्लैट चलाई और उसके बाद 10% सालाना बढ़ाना शुरू किया, तो 12% पर 20 साल का आंकड़ा गिरकर करीब ₹83.76 लाख रह जाता है, यानी करीब ₹15.7 लाख कम। शुरू के इंक्रीमेंट देने में सबसे आसान होते हैं और सबसे ज्यादा काम भी वही करते हैं।
कितना स्टेप-अप करें: सैलरी के हिसाब से चलिए
स्टेप-अप तभी टिकता है जब आमदनी भी साथ बढ़े। Aon के सालाना सैलरी सर्वे (फरवरी 2026) के मुताबिक भारत में 2025 में औसत सैलरी बढ़ोतरी 8.9% रही और 2026 के लिए 9.1% का अनुमान है (Aon की प्रेस रिलीज)। औसत बहुत कुछ छुपा लेता है। किसी साल 15% हाइक मिलती है, किसी साल 4%।
एक छोटा सा हिसाब लगाइए। मान लीजिए आज आपकी सैलरी ₹50,000 महीना है और आप ₹5,000 की SIP शुरू करते हैं, यानी सैलरी का 10%। सैलरी हर साल 8% बढ़े तो 20वें साल तक करीब ₹2.16 लाख महीना हो जाएगी। अब देखिए उस सैलरी में SIP का हिस्सा कितना बनता है:
| सालाना स्टेप-अप | 20वें साल की SIP | ₹2.16 लाख सैलरी में हिस्सा |
|---|---|---|
| 5% | ₹12,635 | करीब 6% (आज से भी कम) |
| 10% | ₹30,580 | करीब 14% |
| 15% | ₹71,159 | करीब 33% |
मतलब 8% सैलरी बढ़ोतरी पर 10% का स्टेप-अप आपकी बचत को धीरे-धीरे सैलरी के 10% से करीब 14% तक ले जाता है। ज्यादातर घर ये संभाल लेते हैं। 20 साल तक 15% स्टेप-अप का मतलब है आखिर में सैलरी का एक-तिहाई एक ही SIP में। टेबल में ये बहुत अच्छा दिखता है। इसे करियर के शुरुआती सालों के लिए रखिए जब हाइक बड़ी मिलती है, और बाद में घटाने का प्लान रखिए।
एक सीधा नियम: जितना इंक्रीमेंट मिलने की उम्मीद है, उतना या उससे थोड़ा कम स्टेप-अप। हाइक 8–10% मिलती है तो 10% स्टेप-अप ठीक है। हाइक छोटी या ऊपर-नीचे होती है तो 5% या हर साल ₹500–₹1,000 की तय बढ़ोतरी ज्यादा सुरक्षित है।
तय रकम वाला तरीका थोड़ा हल्का पड़ता है। ₹5,000 में हर साल ₹500 जोड़ें तो 20वें साल किस्त ₹14,500 होगी और 12% मानकर SIP करीब ₹79.25 लाख पर खत्म होगी (कुल ₹23.40 लाख लगाए)। हर साल ₹1,000 जोड़ें तो करीब ₹1.09 करोड़ (कुल ₹34.80 लाख लगाए)। कैलकुलेटर सिर्फ प्रतिशत वाला स्टेप-अप करता है, इसलिए ये दोनों आंकड़े उसी महीने-दर-महीने वाले तरीके से अलग से निकाले गए हैं।
महंगाई: फ्लैट SIP चुपचाप छोटी होती जाती है
आज के ₹5,000 और 2040 के ₹5,000 एक जैसे पैसे नहीं हैं। अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई 4.82% थी, और लंबी प्लानिंग में ज्यादातर लोग 5–6% मानकर चलते हैं। 6% पर कीमतें करीब हर 12 साल में दोगुनी हो जाती हैं।
यानी असल में फ्लैट SIP हर साल घटती SIP है। 12वें साल तक आपके ₹5,000 में उतना ही आएगा जितना आज करीब ₹2,500 में आता है। 5–6% का स्टेप-अप बस SIP की असली कीमत को बराबर रखता है। उससे ऊपर जो है, वही असली एक्स्ट्रा बचत है।
आखिर में भी यही कहानी है। 6% महंगाई पर फ्लैट SIP के 20 साल बाद के ₹49.96 लाख में करीब उतना आएगा जितना आज ₹15.6 लाख में आता है। 10% स्टेप-अप वाले ₹99.44 लाख आज की कीमतों पर करीब ₹31 लाख के बराबर हैं। हेडलाइन जितना चमकदार नहीं, पर प्लानिंग का ईमानदार तरीका यही है। अगर आप किसी लक्ष्य से पीछे की तरफ हिसाब लगा रहे हैं, तो ₹1 करोड़ के लिए कितनी SIP चाहिए वाली पोस्ट और रिटायरमेंट कैलकुलेटर, दोनों में महंगाई जुड़ी हुई है।
कब स्टेप-अप नहीं करना चाहिए
स्टेप-अप असल में आगे के सालों के लिए आज किया गया वादा है। कुछ हालात में रुक जाना, या शुरू ही न करना, बेहतर है:
- पीछे कोई गद्दी नहीं है। कोई भी SIP बढ़ाने से पहले घर के कुछ महीनों का खर्च FD या स्वीप-इन अकाउंट में अलग रख दीजिए। इसके बिना स्टेप-अप किया, तो पहला ही अस्पताल का बिल SIP तुड़वा देगा।
- महंगा कर्ज। क्रेडिट कार्ड का बकाया (जिस पर अक्सर 3% महीना या उससे ज्यादा ब्याज लगता है) या डबल-डिजिट ब्याज वाला पर्सनल लोन पहले निपटाइए। कोई इक्विटी फंड भरोसे से इतना नहीं कमा के देता। हाइक का पैसा पहले लोन चुकाने में लगाइए, फिर स्टेप-अप।
- लक्ष्य करीब है। अगर लक्ष्य 2–3 साल दूर है, तो एक्स्ट्रा पैसा उस लक्ष्य के लिए FD या RD में डालिए, ज्यादा इक्विटी में नहीं। जिस वक्त पैसा चाहिए, ठीक उसी वक्त इक्विटी 20% नीचे हो सकती है। SIP vs FD वाली पोस्ट में ये तुलना खुलकर है।
- टैक्स बचाने वाली ELSS। पुराने 80C (नए इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 123) की छूट साल में ₹1.5 लाख तक ही है, और वो भी सिर्फ पुरानी रिजीम में। यानी ₹12,500 महीना। इससे ऊपर ELSS में स्टेप-अप करने से बस तीन-तीन साल के लॉक-इन बढ़ते हैं, तो एक्स्ट्रा पैसा किसी रेगुलर इक्विटी फंड में डालिए।
जिस साल इंक्रीमेंट ही न आए, वो अलग मामला है। उसमें पूरा प्लान नहीं छोड़ना, बस एक सीढ़ी छोड़नी है। उसकी बात आखिर में अलग से की है।
टैक्स: हर किस्त की घड़ी अलग चलती है
टैक्स ठीक वैसे ही लगता है जैसे किसी भी इक्विटी SIP पर। हर किस्त एक अलग खरीद है और उसका होल्डिंग पीरियड भी अलग गिना जाता है। 12 महीने से ज्यादा रखी यूनिट पर लॉन्ग-टर्म गेन बनता है, जिस पर साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के मुनाफे पर 12.5% टैक्स है। 12 महीने या उससे कम रखी यूनिट पर शॉर्ट-टर्म गेन, जिस पर 20%। दोनों पर ऊपर से 4% सेस (लॉन्ग-टर्म वाला नियम इनकम टैक्स एक्ट, 2025 के सेक्शन 198 में है)। बेचते वक्त यूनिट "पहले आई, पहले गई" के हिसाब से निकलती हैं, यानी सबसे पुरानी यूनिट पहले बिकती हैं।
बड़ा फंड एक ही साल में पूरा निकालना महंगा पड़ता है। 20 साल, 10% स्टेप-अप और 12% वाले उदाहरण में मुनाफा करीब ₹65 लाख है। सब एक साथ बेच दिया तो टैक्स करीब ₹8.3 लाख बनता है (₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन पर सेस समेत 13% से करीब ₹8.27 लाख, और आखिरी साल के शॉर्ट-टर्म गेन पर करीब ₹5,000), और हाथ में करीब ₹91 लाख आते हैं।
इसे कम करने के लिए लक्ष्य से कुछ साल पहले से पैसा निकालना शुरू कीजिए, ताकि ₹1.25 लाख की छूट हर साल इस्तेमाल हो। रिटायरमेंट की आमदनी के लिए SWP से धीरे-धीरे निकालिए; SWP कैलकुलेटर बताता है कि मंथली पेआउट कितने साल चलेगा।
रेजिडेंट निवेशकों के इस मुनाफे पर कोई TDS नहीं कटता, तो ITR में इसे खुद दिखाइए।
टॉप-अप सेट करना, या चलती SIP में बदलना
फंड हाउस की अपनी वेबसाइट या ऐप पर ये ऑप्शन SIP रजिस्टर करने वाले फॉर्म में ही होता है, ज्यादातर "Top-up" या "Step-up" नाम से। वहां तय रकम या प्रतिशत (अगर मिले) चुनिए, फ्रीक्वेंसी (आमतौर पर सालाना), और चाहें तो एक कैप: या तो किस्त की ज्यादा से ज्यादा रकम, या एक तारीख, जिसके बाद SIP आखिरी किस्त पर ही चलती रहे। कैप जरूर लगाइए। यही 15% वाले प्लान को धीरे-धीरे सैलरी का एक-तिहाई बनने से रोकता है। इन्वेस्टमेंट ऐप में अक्सर SIP शुरू करने वाली स्क्रीन पर ही स्टेप-अप का ऑप्शन आता है। उस पर भरोसा करने से पहले देख लीजिए कि बाद में बदलना हो तो कैसे होगा, क्योंकि कुछ ऐप में बंद करके दोबारा शुरू करने के अलावा कोई रास्ता नहीं होता।
फिर बैंक मैंडेट, जहां ज्यादातर टॉप-अप चुपचाप अटक जाते हैं। आपके ऑटो-डेबिट मैंडेट (OTM या ई-मैंडेट) की एक ऊपरी लिमिट होती है। ₹5,000 का मैंडेट बनाया तो ₹5,500 वाला स्टेप-अप फेल हो सकता है, या किस्त बाउंस हो जाती है। लिमिट मौजूदा SIP से काफी ऊपर रखिए, मान लीजिए ₹50,000। इससे बस ये तय होता है कि ज्यादा से ज्यादा कितना कट सकता है; इसका मतलब ये नहीं कि ₹50,000 कट जाएंगे। DSP म्यूचुअल फंड की टॉप-अप शर्तों में साफ लिखा है: किस्त की सीमा ₹5 लाख या बैंक मैंडेट लिमिट, जो भी कम हो।
SIP पहले से चल रही है तो अड़चन ये है कि कई फंड हाउस में चलती SIP में टॉप-अप नहीं जोड़ सकते, और रजिस्टर होने के बाद टॉप-अप बदल भी नहीं सकते। रास्ता एक ही है: पुरानी SIP बंद करके टॉप-अप के साथ नई SIP रजिस्टर कीजिए।
या फिर फॉर्म का झंझट ही छोड़िए। हर साल इंक्रीमेंट के बाद उसी फंड में बढ़ी हुई रकम की एक दूसरी SIP शुरू कर दीजिए। ₹5,000 की SIP और ₹500 की SIP मिलकर असल में ₹5,500 की SIP ही है। स्टेटमेंट थोड़ा बिखरा दिखेगा, पर रकम हर साल आप नए सिरे से तय करते हैं, जो उन लोगों को सूट करता है जिनकी हाइक ऊपर-नीचे होती रहती है।
जो भी रास्ता लें, उसका महीना वही रखिए जिसमें नई सैलरी पहली बार खाते में आती है। एक्स्ट्रा पैसा तीन महीने सेविंग अकाउंट में पड़ा रहे तो ज्यादातर खर्च हो जाता है। और प्रतिशत तय करने से पहले अपनी शुरुआती रकम और स्टेप-अप SIP कैलकुलेटर में डालकर देखिए कि 10वें और 20वें साल किस्त कितनी बनती है।
जिस साल इंक्रीमेंट न आए
किसी साल इंक्रीमेंट 4% आता है, या आता ही नहीं। सैलरी कटती है, दो नौकरियों के बीच गैप आता है, धंधे में मंदी का साल आता है। ऑटोमैटिक टॉप-अप को इसकी कोई खबर नहीं। सैलरी बढ़ी हो या नहीं, तय महीने में वो कटने वाली रकम बढ़ा ही देगा।
ऐसे साल में स्टेप-अप छोड़ दीजिए और बेस SIP चलने दीजिए। ऑटोमैटिक टॉप-अप है तो आमतौर पर मौजूदा रकम पर कैप लगा सकते हैं, या बंद करके मौजूदा रकम पर दोबारा शुरू कर सकते हैं। हाथ से एक्स्ट्रा SIP जोड़ते आ रहे हैं, तो इस साल बस नई मत जोड़िए। पूरी SIP बंद मत कीजिए, खासकर तब जब साथ में बाजार भी गिर रहा हो। गिरते बाजार में ही हर किस्त सबसे ज्यादा यूनिट खरीदती है। कटौती करनी हो तो स्टेप-अप में कीजिए, बेस SIP में नहीं।
एक साल छोड़ना उतना महंगा नहीं जितना लगता है। 10 साल तक 10% स्टेप-अप चलाइए, फिर अगले 10 साल SIP ₹11,790 पर फ्लैट रखिए, तब भी 12% पर 20 साल बाद करीब ₹83 लाख बनते हैं, कुल ₹23.71 लाख लगाकर। फ्लैट वाले ₹50 लाख से ये बहुत आगे है। बीच में एक साल छूट जाए तो वो छोटा सा झटका है, प्लान का अंत नहीं।
अच्छी हाइक लौटे तो SIP जहां खड़ी है वहीं से स्टेप-अप फिर शुरू कीजिए। छूटे साल की भरपाई के लिए बढ़ोतरी दोगुनी मत कीजिए; अपने हमेशा वाले प्रतिशत पर लौट आइए। और अगर इंक्रीमेंट नहीं आया पर एक बार का बोनस आ गया, तो वो लमसम का पैसा है, SIP का नहीं। बोनस लमसम में लगाएं या SIP में वाली पोस्ट ये समझाती है, और लमसम कैलकुलेटर दिखाता है कि एकमुश्त रकम कितनी बढ़ सकती है।
तो स्टेप-अप उतना रखिए जितनी हाइक की उम्मीद है उससे थोड़ा कम, उस पर कैप लगाइए, और साल में एक बार, नई सैलरी आने पर, उसे देख लीजिए: बढ़ाना है, छोड़ना है या फ्लैट रखना है। शुरू में कितना प्रतिशत रखा, उससे ज्यादा फर्क साल के इस एक फैसले से पड़ता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
स्टेप-अप SIP क्या होती है?
ये एक नॉर्मल मंथली SIP ही है, जिसमें तय समय पर, ज्यादातर साल में एक बार, किस्त बढ़ाने का निर्देश जुड़ा होता है। बढ़ोतरी तय रकम की हो सकती है (अक्सर कम से कम ₹500, ₹500 के गुणकों में) या कुछ फंड हाउस में पिछली किस्त के प्रतिशत के हिसाब से। फंड हाउस इसे टॉप-अप SIP भी कहते हैं।
₹5,000 की SIP 10% स्टेप-अप के साथ 20 साल में कितनी बनेगी?
सालाना 12% मानें तो करीब ₹99.44 लाख, जबकि ₹5,000 की फ्लैट SIP करीब ₹49.96 लाख बनती है। आप कुल ₹34.36 लाख लगाते हैं, और आखिरी साल में SIP ₹30,580 महीने तक पहुंच जाती है। 10% रिटर्न पर स्टेप-अप वाला आंकड़ा करीब ₹80.73 लाख है। ये अंदाजे हैं, गारंटी नहीं।
कितने प्रतिशत का स्टेप-अप रखें?
मोटे तौर पर उतना जितना सालाना इंक्रीमेंट मिलने की उम्मीद है, या थोड़ा कम। ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों के लिए 5–10%। 15% स्टेप-अप कागज पर बढ़िया लगता है, पर 20 साल में सैलरी का एक-तिहाई ले सकता है, इसलिए इसे करियर के शुरुआती सालों के लिए रखिए।
क्या चलती हुई SIP में स्टेप-अप जोड़ सकते हैं?
कई फंड हाउस में नहीं। टॉप-अप SIP रजिस्टर करते वक्त ही चुनना पड़ता है और बाद में बदला नहीं जा सकता, तो पुरानी SIP बंद करके टॉप-अप के साथ नई रजिस्टर करनी पड़ती है। आसान रास्ता ये है कि हर इंक्रीमेंट के बाद उसी फंड में बढ़ी हुई रकम की दूसरी SIP शुरू कर दें।
स्टेप-अप SIP बेहतर है या शुरू से बड़ी SIP?
शुरू से बड़ी SIP। रुपये-रुपये का हिसाब देखें तो जल्दी लगाया पैसा ज्यादा बढ़ता है। वही ₹34.36 लाख 20 साल तक ₹14,319 महीने की फ्लैट SIP में लगाएं तो 12% पर करीब ₹1.43 करोड़ बनते हैं, जबकि ₹5,000 से 10% स्टेप-अप में ₹99.44 लाख। आज जितना आराम से निकाल सकें उतने से शुरू कीजिए, और आगे के इंक्रीमेंट के लिए स्टेप-अप रखिए।
स्टेप-अप SIP पर टैक्स कैसे लगता है?
किसी भी इक्विटी SIP की तरह। हर किस्त का होल्डिंग पीरियड अलग गिना जाता है। 12 महीने से ज्यादा रखी यूनिट पर साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म मुनाफे पर 12.5%, और 12 महीने या कम रखी यूनिट पर 20%, ऊपर से 4% सेस। कुछ सालों में थोड़ा-थोड़ा बेचें तो ₹1.25 लाख की छूट एक से ज्यादा बार मिलती है।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क