किसी भी फंड हाउस के ऐप में STP का ऑप्शन खोलिए, फॉर्म छोटा सा ही होता है। "कहां से" स्कीम, "कहां" स्कीम, रकम, कितने दिन में, शुरू होने की तारीख और कितनी किस्तें। पूरा प्रोडक्ट लगभग इतना ही है। ये खाने बस इतना करते हैं कि कम रिस्क वाले फंड में रखी आपकी एकमुश्त रकम तय टुकड़ों में, थोड़ी-थोड़ी करके, इक्विटी फंड में जाए। यानी पूरी रकम किसी एक बुरे दिन अंदर नहीं जाती।
उसी बुरे दिन के डर से लोग ये स्क्रीन ढूंढते हुए आते हैं। मान लीजिए दस साल बाद के किसी लक्ष्य के लिए आपके पास ₹6 लाख हैं। आज पूरे डाल दिए और अगले महीने बाजार 15% गिर गया, तो? बस यही एक डर बहुत सारा पैसा सालों तक सेविंग्स अकाउंट में पड़ा रहने देता है। सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान इसका आम बीच का रास्ता है। ये काम करता है, पर मुफ्त नहीं है। बाजार सीधा ऊपर जाए तो इसका खर्च होता है, हर ट्रांसफर पर थोड़ा टैक्स बनता है, और ये हमेशा एक बार में पैसा लगाने से बेहतर नहीं निकलता। नीचे देखते हैं ये क्या करता है, इसकी कीमत क्या है, चार अलग-अलग बाजार हालात में ₹6 लाख का हिसाब, और आखिर में वो फॉर्म कैसे भरना है।
STP असल में है क्या
फॉर्म के पीछे, STP आपके म्यूचुअल फंड को दिया गया एक स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन है: हर महीने (या हफ्ते) एक तय तारीख पर फंड A से तय रकम बेचो और उससे फंड B खरीद लो। दोनों फंड एक ही फंड हाउस के होने चाहिए। SEBI का जुलाई 2026 का सर्कुलर भी इसे ऐसे ही बताता है: एक स्कीम से रिडेम्पशन और उसी म्यूचुअल फंड की दूसरी स्कीम में सब्सक्रिप्शन।
फंड A में पैसा इंतजार करता है। आमतौर पर ये लिक्विड फंड होता है, जो बहुत कम अवधि (91 दिन तक) के डेट पेपर रखता है, इसलिए इसकी वैल्यू मुश्किल से हिलती है। कुछ लोग आर्बिट्राज फंड लेते हैं, जो कैश और फ्यूचर्स बाजार के छोटे से भाव के फर्क से कमाता है और टैक्स में इक्विटी जैसा माना जाता है। फंड B वो इक्विटी फंड है जिसमें आप असल में पैसा लगाना चाहते हैं।
सीधी सी बात, STP एक तरह की SIP है जिसका पैसा आपकी सैलरी से नहीं, आपकी ही रखी हुई एकमुश्त रकम से आता है। इंतजार करता पैसा लिक्विड फंड का रिटर्न कमाता है (पिछले एक साल में करीब 6–6.5%), न कि वो 2.5% जो बड़े बैंक का सेविंग्स अकाउंट देता है।
हर ट्रांसफर की तारीख पर क्या होता है
एक बार रजिस्टर हो गया, तो आगे का काम फंड हाउस करता है। हर STP तारीख पर वो तय रकम की लिक्विड फंड यूनिट बेचता है और उस दिन की NAV पर इक्विटी फंड खरीद लेता है। आपके स्टेटमेंट में ये दो एंट्री दिखती हैं, एक लिक्विड फंड से बाहर और एक इक्विटी फंड में अंदर। किस्तें पूरी होते ही, या बैलेंस खत्म होते ही, STP अपने आप बंद हो जाता है।
फिक्स्ड STP में हर बार उतनी ही रकम जाती है, और ज्यादातर लोगों के लिए यही ठीक है। कैपिटल एप्रिसिएशन STP में सिर्फ सोर्स फंड का मुनाफा जाता है। फ्लेक्सी STP में बाजार गिरा हो तो ज्यादा और चढ़ा हो तो कम रकम जाती है, और इसका फॉर्मूला हर फंड हाउस का अलग होता है।
ज्यादातर फंड हाउस रोज, हफ्ते, महीने या तिमाही का ट्रांसफर देते हैं और कम से कम कुछ किस्तें मांगते हैं। जैसे, HSBC म्यूचुअल फंड कम से कम 6 किस्तें मांगता है, हर किस्त ₹500 की (उसके लिक्विड फंड से ₹1,000), और सोर्स फंड में कम से कम ₹6,000। बाकी फंड हाउस की अपनी लिमिट हैं।
अगर आपके फंड ब्रोकर के जरिए डीमैट में हैं, तो वहां STP का स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन अभी नहीं मिलता। उसी SEBI सर्कुलर ने डीमैट होल्डिंग पर यूनिट वाले STP के लिए 31 जनवरी 2027 और रकम वाले STP के लिए 30 अप्रैल 2027 की डेडलाइन दी है।
₹6 लाख: लमसम vs 6 महीने का STP vs 12 महीने का STP
हिसाब ऐसे है: आपके पास ₹6 लाख हैं। पहला तरीका, पहले ही दिन सारा पैसा इक्विटी फंड में। दूसरा, 6% सालाना कमाने वाले लिक्विड फंड में रखिए और 6 महीने तक हर महीने के आखिर में ₹1 लाख ट्रांसफर कीजिए। तीसरा, 12 महीने तक हर महीने ₹50,000। आखिरी ट्रांसफर में लिक्विड फंड में बचा ब्याज भी साथ चला जाता है।
अगले साल बाजार क्या करेगा, कोई नहीं जानता, इसलिए पहले 12 महीनों के लिए चार काल्पनिक रास्ते लिए हैं। टेबल में हर तरीके की वैल्यू 12वें महीने के आखिर में है, टैक्स से पहले।
| पहले साल बाजार | पहले दिन लमसम | 6 महीने का STP | 12 महीने का STP |
|---|---|---|---|
| धीरे-धीरे बढ़ा, साल में 12% | ₹6,72,000 | ₹6,61,230 | ₹6,51,998 |
| 4 महीने में 20% गिरा, 12वें महीने तक वापस शुरुआत पर | ₹6,00,000 | ₹7,10,103 | ₹6,89,280 |
| तेज रैली, साल में 30% ऊपर | ₹7,80,000 | ₹7,30,094 | ₹6,94,376 |
| 6 महीने चढ़ा, फिर उस ऊंचाई से 20% गिरा | ₹5,07,984 | ₹4,99,843 | ₹5,38,274 |
कोई भी कॉलम हर लाइन में नहीं जीतता। बाजार सीधा ऊपर जाए तो लमसम साफ जीतता है, और लंबे दौर में भारतीय इक्विटी गिरने वाले सालों से ज्यादा सालों में चढ़ी है। इसीलिए कागज पर लमसम ज्यादा बार आगे निकलता है।
गिरावट वाले केस में 6 महीने का STP सबसे आगे रहा, क्योंकि उसके ट्रांसफर नीचे के भाव पर हुए। जब गिरावट साल के आखिर में आई, तब 12 महीने का STP सबसे अच्छा रहा, क्योंकि उसका आधा पैसा तब भी लिक्विड फंड में था। उसी लाइन में 6 महीने वाले STP ने ऊंचाई के पास खरीदा और सबसे पीछे रहा।
अब कौन जीता ये छोड़िए, रेंज देखिए। लमसम ₹5.08 लाख से ₹7.80 लाख के बीच कहीं भी खत्म होता है। 12 महीने का STP ₹5.38 लाख से ₹6.94 लाख के बीच। STP से असल में यही छोटी रेंज मिलती है। (ये रास्ते सिर्फ उदाहरण हैं, अंदाजा नहीं।)
बाजार बस चढ़ता रहे तो STP कितना महंगा पड़ता है
सबसे सीधा केस लीजिए: दस साल तक हर साल 12%। पहले दिन लगाए ₹6 लाख लमसम कैलकुलेटर पर 10 साल में ₹18,63,509 बनते हैं। STP के लिए हमने पहले साल के आखिर की वैल्यू ली और उसे बाकी नौ साल उसी 12% पर बढ़ाया।
| तरीका (हर साल 12% वाला बाजार) | 1 साल बाद | 10 साल बाद | लमसम से कितना पीछे |
|---|---|---|---|
| पहले दिन लमसम | ₹6,72,000 | ₹18,63,509 | कुछ नहीं |
| 6 महीने का STP | ₹6,61,230 | ₹18,33,643 | ₹29,866 |
| 12 महीने का STP | ₹6,51,998 | ₹18,08,042 | ₹55,467 |
यानी सीधे चढ़ते बाजार में 12 महीने का STP आखिरी रकम का करीब 3% खा जाता है, और 6 महीने वाला उसका आधा। इसे ऐसे समझिए कि पैसा लगाते ही गिरावट आ जाए, उसके खिलाफ ये बीमे का प्रीमियम है। दस साल में ₹55,000 देना ठीक है या नहीं, ये इस पर है कि दो महीने बाद आपके ₹6 लाख ₹4.8 लाख दिखें तो आप क्या करेंगे। अगर सब बेचकर वापस FD की तरफ भागेंगे, तो ये प्रीमियम सस्ता है।
एक और तुलना। बहुत लोग "STP" ऐसे करते हैं कि पैसा सेविंग्स अकाउंट में रखते हैं और हर महीने ₹50,000 खुद हाथ से लगाते हैं। 2.5% पर वो इंतजार करता पैसा साल भर में करीब ₹8,000 कमाता है, जबकि 6% वाले लिक्विड फंड में करीब ₹19,700। यानी लगभग ₹11,500 का नुकसान, और वो महीने अलग जब लोग भूल जाते हैं या "थोड़ा गिरे तब डालेंगे" सोचकर बैठे रहते हैं।
टैक्स: हर ट्रांसफर एक बिक्री है
हर STP ट्रांसफर सोर्स फंड से रिडेम्पशन है, इसलिए हर बार थोड़ा कैपिटल गेन बनता है। इक्विटी वाली तरफ ट्रांसफर के वक्त कोई टैक्स नहीं; वो तभी लगेगा जब आप आखिर में बेचेंगे।
लिक्विड फंड सोर्स हो तो। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद खरीदी यूनिट "स्पेसिफाइड म्यूचुअल फंड" (65% से ज्यादा डेट में) मानी जाती हैं, इसलिए मुनाफे पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, चाहे जितने दिन रखा हो। ICICI प्रूडेंशियल AMC का 2026-27 टैक्स रेकनर इनकम-टैक्स एक्ट 2025 के हिसाब से ये साफ बताता है। रेजिडेंट निवेशकों के इस मुनाफे पर TDS नहीं कटता, तो ITR में इसे खुद दिखाना होता है। रकम छोटी होती है, पर आपके AIS में तो दिखेगी ही, और CAMS या KFintech के कैपिटल गेन स्टेटमेंट में हर ट्रांसफर लिखा होता है।
आर्बिट्राज फंड सोर्स हो तो। टैक्स इक्विटी जैसा। 12 महीने या उससे कम रखी यूनिट पर शॉर्ट-टर्म गेन 20% (नए एक्ट का सेक्शन 196), ऊपर से 4% सेस। ₹1.25 लाख की छूट सिर्फ लॉन्ग-टर्म गेन पर है, तो यहां काम नहीं आती।
हमारे ₹6 लाख वाले उदाहरण में ट्रांसफर के जरिए लिक्विड फंड का मुनाफा 6 महीने वाले STP में ₹10,389 और 12 महीने वाले में ₹19,674 बनता है। 4% सेस मिलाकर टैक्स:
| सोर्स फंड और आपका स्लैब | टैक्स, 6 महीने का STP | टैक्स, 12 महीने का STP |
|---|---|---|
| लिक्विड फंड, 5% स्लैब | ₹540 | ₹1,023 |
| लिक्विड फंड, 10% स्लैब | ₹1,080 | ₹2,046 |
| लिक्विड फंड, 20% स्लैब | ₹2,161 | ₹4,092 |
| लिक्विड फंड, 30% स्लैब | ₹3,241 | ₹6,138 |
| आर्बिट्राज फंड, कोई भी स्लैब | ₹2,161 | ₹4,092 |
आर्बिट्राज वाली लाइन में मान लिया है कि वो भी लिक्विड फंड जितना 6% कमाता है। पिछले एक साल में दोनों कैटेगरी करीब 6–7% के आसपास रही हैं, लेकिन शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों के साथ ये ऊपर-नीचे होता रहता है।
तो 30% स्लैब में आर्बिट्राज फंड ₹6 लाख के 12 महीने वाले STP पर करीब ₹2,000 बचाता है, या ₹25 लाख पर करीब ₹8,500। 20% स्लैब या उससे नीचे लिक्विड फंड उतना ही अच्छा या बेहतर है, और आसान भी। आर्बिट्राज फंड के अपने झंझट हैं: कई फंड 15 दिन के अंदर बेचने पर 0.25% एग्जिट लोड लेते हैं (HDFC और ICICI प्रूडेंशियल ने 2026 के बीच में इसे 30 दिन से घटाकर 15 दिन किया), तो पहला ट्रांसफर उसके बाद रखिए।
हर खरीद पर 0.005% स्टांप ड्यूटी लगती है, STP ट्रांसफर पर भी (निप्पॉन इंडिया MF इसे समझाता है): ₹6 लाख पर ₹30। इक्विटी फंड में हर ट्रांसफर की अपनी घड़ी चलती है: लॉन्ग-टर्म टैक्स के लिए 12 महीने, और फंड के एग्जिट लोड के लिए भी अक्सर 12 महीने। सोर्स फंड चुनने से पहले इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर देख लीजिए आपकी इनकम किस स्लैब में आती है।
STP किस चीज से बचाता है, और किससे नहीं
STP पछतावे से बचाता है। लमसम में सबसे बुरा ये होता है कि गिरावट से ठीक एक हफ्ता पहले सब डाल दिया, और शुरुआती कुछ महीनों के लिए STP ये खतरा हटा देता है। इंतजार करता पैसा सेविंग्स अकाउंट का ब्याज नहीं, लिक्विड फंड का रिटर्न कमाता है। और सब अपने आप होता है, तो "बाजार बहुत ऊपर है, एक महीना और रुक जाते हैं" वाली बात ही खत्म। इसी चक्कर में बहुत सी एकमुश्त रकम कभी निवेश ही नहीं होती।
पर ये तभी काम करता है जब बाजार गिरने पर भी STP चलता रहे। वो लाल महीने ही तो वो वक्त हैं जिनके लिए STP बनाया था। तभी बंद कर दिया, तो बचाव का प्रीमियम भी भरा और जिस हिस्से में फायदा मिलना था, वही छोड़ दिया।
किससे नहीं बचाता: चढ़ते बाजार में, जो ज्यादा आम है, इसका खर्च होता है। हमारे सीधे उदाहरण में दस साल में ₹55,467। हर ट्रांसफर सोर्स फंड से टैक्स वाली बिक्री है, और सब ITR में जाता है। सोर्स फंड उसी फंड हाउस का होना चाहिए, तो पैसा कहां रखें, इसकी चॉइस कम रहती है। और ये सिर्फ शुरुआती कुछ महीनों को बचाता है। तीसरे साल बाजार 30% गिरा, तो STP वाला पैसा भी लमसम की तरह ही गिरेगा।
6 महीने या 12 महीने?
ज्यादातर लोगों के लिए 6 से 12 महीने के बीच, हर महीने वाला। 3 महीने से कम में बचाव बहुत थोड़ा मिलता है। 12 महीने से ज्यादा में आप ज्यादातर इक्विटी से बाहर रहने की कीमत चुकाते हैं। 24 या 36 महीने वाले STP अक्सर बस डर होते हैं, जिसे स्ट्रैटेजी का नाम दे दिया गया है।
फैसला इस बात से कीजिए कि ये रकम आपके पहले से इक्विटी में लगे पैसे के मुकाबले कितनी बड़ी है:
- पहले वाली इक्विटी के मुकाबले छोटी (फंड में पहले से ₹30 लाख हैं और ये ₹6 लाख हैं): लमसम, या 3–6 महीने का STP।
- पहली बार इक्विटी में बड़ी रकम, या आपकी बाकी सारी होल्डिंग से भी बड़ी: 12 महीने। दूसरे ही महीने क्रैश आ जाए तो कई लोग हमेशा के लिए इक्विटी से दूर हो जाते हैं, और वो नुकसान ₹55,000 के कम रिटर्न से कहीं बड़ा है।
- इनके बीच में: 6 महीने ठीक डिफॉल्ट है।
"बाजार ऑल-टाइम हाई पर है" सोचकर STP लंबा मत खींचिए। चढ़ते बाजार में ये अक्सर ऑल-टाइम हाई पर ही होता है। और रोज या हर हफ्ते के ट्रांसफर से महीने वाले के मुकाबले कुछ खास फर्क नहीं पड़ता, बस कैपिटल गेन रिपोर्ट में भीड़ बढ़ती है।
STP, SIP या सीधा लमसम: जैसा पैसा, वैसा तरीका
SIP उस पैसे के लिए है जो आप हर महीने कमाएंगे। लमसम और STP उस पैसे के लिए हैं जो आपके पास पहले से है।
| आपका केस | क्या ठीक बैठता है |
|---|---|
| हर महीने सैलरी से बचत | SIP। अपना हिसाब SIP कैलकुलेटर पर देखिए |
| एकमुश्त रकम, लक्ष्य 7+ साल दूर, इक्विटी के उतार-चढ़ाव की आदत है | लमसम, या छोटा STP |
| एकमुश्त रकम, इक्विटी में पहला बड़ा पैसा, या पता है कि घबरा जाएंगे | 6–12 महीने का STP |
| रकम 3 साल के अंदर चाहिए | दोनों नहीं। FD या कोई डेट ऑप्शन; FD कैलकुलेटर देखिए |
| रिटायर हैं, फंड से हर महीने आमदनी चाहिए | उल्टा तरीका, यानी SWP। कितने साल चलेगा, SWP कैलकुलेटर पर देखिए |
STP आपकी मंथली SIP की जगह नहीं लेता। SIP चलती रहने दीजिए और STP को एक अलग, एक बार का काम समझिए। खास तौर पर बोनस का सवाल हो, तो बोनस लमसम में डालें या SIP में वाली पोस्ट ज्यादा डिटेल में जाती है, और SIP vs FD उस पैसे की बात करती है जिसका घटना आप झेल नहीं सकते।
फॉर्म भरते हैं: ₹6 लाख का 12 महीने वाला STP
ऊपर की टेबल वाला 12 महीने का तरीका, वैसे ही जैसे आप फंड हाउस के ऐप या वेबसाइट, MF Central या अपने प्लेटफॉर्म पर सच में करेंगे। ब्रांच में पेपर फॉर्म भरें तो भी यही चीजें पूछी जाती हैं।
1. पहले इक्विटी फंड तय कीजिए। दस साल तक साथ रहने वाला फैसला यही है; STP तो बस पैसा पहुंचाने का रास्ता है। दोनों फंड एक ही फंड हाउस के चाहिए, तो अगर पहले लिक्विड फंड ले लिया और फिर उस फंड हाउस का जो भी इक्विटी फंड था वो ले लिया, तो अक्सर लोग किसी औसत फंड में फंस जाते हैं। लक्ष्य के बारे में भी ईमानदारी से सोचिए। 5 साल से कम दूर है (7 या ज्यादा हो तो बेहतर), तो ये पैसा इक्विटी में जाना ही नहीं चाहिए, STP हो या न हो। नौकरी छूट जाए या किसी को अस्पताल में भर्ती करना पड़े, तब जो पैसा चाहिए, वो भी इसमें मत डालिए।
2. ₹6 लाख उसी फंड हाउस के लिक्विड फंड में डालिए। 30% स्लैब और बड़ी रकम हो तो उसका आर्बिट्राज फंड। थोड़े ज्यादा रिटर्न के लिए क्रेडिट रिस्क या मीडियम ड्यूरेशन फंड मत लीजिए। वो गिर भी सकते हैं, और पार्किंग फंड का एक ही काम है, बोरिंग बने रहना। यूनिट अलॉट होते ही आपका फोलियो बन जाता है, और STP उसी फोलियो पर रजिस्टर होता है।
3. सोर्स और टारगेट। "कहां से" में लिक्विड फंड, "कहां" में आपका इक्विटी फंड। इक्विटी फंड का सही प्लान चुना है, ये चेक कर लीजिए (डायरेक्ट या रेगुलर, ग्रोथ या IDCW)। ये खाना गलत भरना आसान है और बाद में ठीक करना सिरदर्द।
4. टाइप, रकम, कितने दिन में, कितनी किस्तें। फिक्स्ड STP, ₹50,000, हर महीने, 12 किस्तें। 6 महीने वाले तरीके में ₹1 लाख की 6 किस्तें। दोनों HSBC की 6 किस्तों जैसी लिमिट आराम से पार कर लेते हैं।
5. शुरू होने की तारीख, और एग्जिट लोड का वक्त। तारीख चुनने से पहले दोनों फंड का एग्जिट लोड देख लीजिए। आर्बिट्राज फंड है तो पहला ट्रांसफर 15 दिन के बाद ही रखिए, वरना जो यूनिट बिकेंगी उन पर 0.25% लगेगा। इक्विटी वाली तरफ हर किस्त की एग्जिट लोड की अपनी 12 महीने की घड़ी चलती है, तो इस पैसे को छेड़ना नहीं है।
6. बचा हुआ पैसा। ₹50,000 के 12 ट्रांसफर आपके ₹6 लाख तो ले जाते हैं, पर लिक्विड फंड का ब्याज पीछे रह जाता है। हमारी टेबल में वो आखिरी ट्रांसफर में गिना है; असल में उसे आपको खुद ले जाना होगा। आखिरी किस्त के अगले महीने का फोन रिमाइंडर लगाइए और वो रकम भी स्विच कर दीजिए।
7. अगला जुलाई। ITR भरते वक्त CAMS या KFintech का कैपिटल गेन स्टेटमेंट डाउनलोड कीजिए। हर ट्रांसफर उसमें होगा, और उसका मुनाफा आपके स्लैब रेट से ITR में जाता है।
इसके बाद असली काम एक ही है, इसे छूना नहीं। और सालों बाद जब लक्ष्य दो साल दूर रह जाए, तो यही फॉर्म उल्टा काम आता है: इक्विटी फंड से लिक्विड फंड में STP, हर महीने थोड़ा-थोड़ा, ताकि बच्चे की कॉलेज फीस जिस साल भरनी है, उस साल वो पैसा इक्विटी में न पड़ा हो।
लोग अक्सर पूछते हैं
म्यूचुअल फंड में STP क्या होता है?
सिस्टेमैटिक ट्रांसफर प्लान एक स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन है जिसमें तय अंतराल पर तय रकम एक फंड से उसी फंड हाउस के दूसरे फंड में जाती है, आमतौर पर लिक्विड फंड से इक्विटी फंड में। हर ट्रांसफर पहले फंड से रिडेम्पशन और दूसरे में खरीद है। लोग इसे एकमुश्त रकम एक दिन की बजाय धीरे-धीरे लगाने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
STP अच्छा है या एक बार में लमसम?
हमेशा STP नहीं। ₹6 लाख के उदाहरण में बाजार धीरे-धीरे चढ़ा (एक साल बाद लमसम ₹6.72 लाख vs 12 महीने का STP ₹6.52 लाख) या तेज रैली आई, तो लमसम आगे रहा, जबकि बाजार साल की शुरुआत या आखिर में गिरा तो STP आगे रहा। STP नतीजों की रेंज छोटी करता है, ज्यादा रिटर्न का वादा नहीं करता।
STP पर टैक्स कैसे लगता है?
हर ट्रांसफर सोर्स फंड से बिक्री है। 1 अप्रैल 2023 के बाद खरीदी लिक्विड फंड यूनिट के मुनाफे पर आपके स्लैब रेट से टैक्स लगता है, और आर्बिट्राज फंड में 12 महीने तक रखी यूनिट पर 20% और सेस। 6% वाले लिक्विड फंड से 12 महीने में ₹6 लाख ट्रांसफर करने पर मुनाफा करीब ₹19,674 बनता है, यानी 30% स्लैब में टैक्स करीब ₹6,138।
6 महीने का STP लें या 12 महीने का?
ज्यादातर लोगों के लिए 6–12 महीने काफी हैं। रकम पहले से इक्विटी में लगे पैसे के मुकाबले छोटी है तो एक बार में लगाइए या 3–6 महीने रखिए; इक्विटी में पहला बड़ा निवेश है तो 12 महीने ठीक हैं। इससे लंबा शायद ही फायदा देता है: लगातार चढ़ते बाजार में ₹6 लाख पर 12 महीने का STP 10 साल बाद लमसम से करीब ₹55,000 पीछे रहा।
STP के लिए लिक्विड फंड लें या आर्बिट्राज फंड?
30% स्लैब और बड़ी रकम हो तो आर्बिट्राज फंड थोड़ा टैक्स बचा सकता है, ₹6 लाख पर 12 महीने में करीब ₹2,000, क्योंकि शॉर्ट-टर्म गेन पर 30% की जगह 20% लगता है। कई आर्बिट्राज फंड 15 दिन के अंदर बेचने पर 0.25% एग्जिट लोड लेते हैं, ये देख लीजिए। 20% स्लैब या उससे नीचे लिक्विड फंड आसान है और उतना ही अच्छा।
क्या दो अलग फंड हाउस के बीच या डीमैट यूनिट पर STP हो सकता है?
नहीं, दोनों फंड एक ही फंड हाउस के होने चाहिए; अलग फंड हाउस में पैसा ले जाना हो तो खुद बेचकर खुद लगाना पड़ेगा। डीमैट में रखी म्यूचुअल फंड यूनिट पर STP का स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन अभी नहीं मिलता। SEBI ने यूनिट वाले STP के लिए 31 जनवरी 2027 और रकम वाले के लिए 30 अप्रैल 2027 की डेडलाइन दी है।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क