बैंक का RM हो, LIC एजेंट हो या मोबाइल पर आने वाली फाइनेंस रील, सबके पास एक ही लाइन होती है: "आपका पैसा डबल हो जाएगा।" कितने साल में, ये बहुत कम लोग बताते हैं। रूल ऑफ 72 ये जवाब आपको मन में, करीब पांच सेकंड में दे देता है, बिना किसी ऐप या एक्सेल के।
72 को सालाना रिटर्न से भाग दीजिए। जो जवाब आए, मोटे तौर पर उतने साल में आपका पैसा डबल होगा। 6.5% की FD? करीब 11 साल। इक्विटी में 12% मानकर? करीब 6 साल। आगे देखेंगे कि ये असल में कितना करीब बैठता है, महंगाई और टैक्स पर क्या बताता है, और कहां गड़बड़ा जाता है।
पूरा रूल बस इतना: 72 ÷ रेट
पैसा डबल होने के साल ≈ 72 ÷ सालाना रिटर्न (% में)
रेट को सीधा नंबर मानकर भाग दीजिए। 8% का मतलब 72 ÷ 8, यानी 9 साल। 6% पर 12 साल। 9% पर 8 साल।
ये उल्टा भी चलता है। आपको पता है कितने साल हैं, तो 72 ÷ साल से पता चल जाता है कि सालाना कितना रिटर्न चाहिए। ₹2 लाख को 8 साल में ₹4 लाख बनाना है? सालाना करीब 9% चाहिए (72 ÷ 8)। 5 साल में? करीब 14.4% सालाना, जो भारत में कोई FD नहीं देती।
ये रूल कंपाउंडिंग मानकर चलता है: ब्याज पर भी ब्याज बनता है, और बीच में न कुछ डाला जाता है, न निकाला जाता है। क्यूम्युलेटिव FD, KVP या म्यूचुअल फंड में एक बार की गई रकम ऐसे ही चलती है। साधारण ब्याज और हर महीने की SIP पर ये फिट नहीं बैठता। इस पर आगे बात करेंगे।
72 ही क्यों, 70 या 100 क्यों नहीं
साधारण ब्याज (सिंपल इंटरेस्ट) में पैसा डबल होने में 100 ÷ रेट साल लगते हैं। 8% सिंपल इंटरेस्ट पर 12.5 साल। कंपाउंडिंग में ये जल्दी होता है, क्योंकि ब्याज खुद भी कमाने लगता है, इसलिए भाग देने वाला नंबर 100 से घटकर करीब 70 के आसपास आ जाता है।
एकदम सही जवाब के लिए लॉगरिदम लगाना पड़ता है (log 2 ÷ log(1 + रेट)), जो बैंक के काउंटर पर कोई नहीं करता। जो रेट हम आमतौर पर देखते हैं, 4% से 15%, उन पर असली साल 72 ÷ रेट के काफी करीब निकलते हैं। 72 ही क्यों, 70 क्यों नहीं? ज्यादातर सुविधा के लिए। 72 को 2, 3, 4, 6, 8, 9 और 12 से आराम से भाग दिया जा सकता है, तो मन में हिसाब आसान रहता है। और ये रूल 8% के आसपास सबसे सटीक बैठता है, जहां FD, PPF और छोटी बचत योजनाएं चलती हैं।
ये तरीका पुराना है। रूल ऑफ 72 पर विकिपीडिया का पेज बताता है कि ये 1494 में वेनिस में छपी लूका पचोली की गणित की किताब में भी मिलता है। कुछ लोग 70 या 69.3 इस्तेमाल करते हैं, जो बहुत कम रेट पर बेहतर बैठते हैं। रोजमर्रा के हिसाब के लिए 72 ठीक है।
FD, PPF, KVP और इक्विटी में पैसा कितने साल में डबल होता है
ज्यादातर लोग जहां पैसा रखते हैं, वहां रूल और असली समय का मिलान ये रहा।
| पैसा कहां है | रेट | 72 ÷ रेट | डबल होने का असली समय |
|---|---|---|---|
| बड़े बैंक का सेविंग्स खाता | करीब 2.5% | 28.8 साल | करीब 28 साल |
| पोस्ट ऑफिस सेविंग्स खाता | 4% | 18 साल | 17.7 साल |
| बड़े बैंक की FD (तिमाही कंपाउंडिंग) | 6.5% | 11.1 साल | 10.75 साल |
| PPF (सालाना कंपाउंडिंग) | 7.1% | 10.1 साल | 10.1 साल |
| किसान विकास पत्र | 7.5% | 9.6 साल | 115 महीने (9 साल 7 महीने) |
| स्मॉल फाइनेंस बैंक की FD | 8% | 9 साल | 8.75 साल |
| इक्विटी फंड (मानकर, गारंटी नहीं) | 12% | 6 साल | 6.1 साल |
सबसे साफ सबूत KVP है। पोस्ट ऑफिस इसे पैसा डबल करने वाली स्कीम के तौर पर ही बेचता है, और 7.5% पर इसकी 115 महीने की मैच्योरिटी इसी हिसाब से निकलती है। रूल कहता है 9.6 साल; 115 महीने यानी 9.58 साल। PPF का 7.1%, KVP का 7.5% और पोस्ट ऑफिस सेविंग्स का 4%, तीनों अक्टूबर–दिसंबर 2026 के लिए बिना बदलाव के हैं, सरकार के तिमाही ऐलान के मुताबिक।
बैंक FD के रेट ज्यादा जल्दी बदलते हैं। SBI का कार्ड रेट 5–10 साल के लिए अभी 6.05% है, यानी SBI की लंबी FD करीब 12 साल में डबल होगी (72 ÷ 6.05)। इस लेवल पर रेट में हर 1% की बढ़त डबल होने का समय एक साल या उससे ज्यादा घटा देती है।
टेबल का सीधा मतलब: सुरक्षित जगहों पर पैसा करीब दस साल में एक बार डबल होता है। इससे तेज चाहिए, तो बाजार का रिस्क लेना पड़ेगा, और बाजार का रिटर्न सीधी लाइन में नहीं आता। 3–5 साल दूर के लक्ष्य के लिए डबल करना मकसद ही नहीं है; पैसा सही-सलामत रहे, यही काफी है। 15–20 साल दूर के लक्ष्य में 10 की जगह हर 6 साल में डबल होना बहुत बड़ा फर्क डालता है, जैसा अगले हिस्से में दिखेगा।
कैलकुलेटर पर रूल की जांच
लमसम कैलकुलेटर में ₹1 लाख, 12% और 6 साल डालिए, ₹1,97,382 आता है। पूरे ₹2 लाख नहीं, पर काफी करीब। 8% पर 9 साल में ₹1,99,900। 15% पर 5 साल में ₹2,01,136, क्योंकि रूल के 4.8 साल को 5 कर दिया।
FD कैलकुलेटर पर ₹1 लाख, 6.5%, तिमाही कंपाउंडिंग के साथ 10.75 साल में ₹1,99,997 बन जाते हैं। रूल ने 11.1 साल कहा था। FD थोड़ी तेज है, क्योंकि तिमाही कंपाउंडिंग से 6.5% असल में सालाना 6.66% जैसा काम करता है, और 72 ÷ 6.66 = 10.8।
कुछ बार डबल होने पर कितना बनता है
अब उसी ₹1 लाख को 12% मानकर 30 साल तक छोड़ दीजिए।
| कितने साल बाद | रूल ऑफ 72 के हिसाब से | कैलकुलेटर में |
|---|---|---|
| 6 साल | ₹2 लाख | ₹1,97,382 |
| 12 साल | ₹4 लाख | ₹3,89,598 |
| 18 साल | ₹8 लाख | ₹7,68,997 |
| 24 साल | ₹16 लाख | ₹15,17,863 |
| 30 साल | ₹32 लाख | ₹29,95,992 |
फर्क इसलिए बढ़ता जाता है कि रूल 6.12 साल को 6 मान लेता है, और ये छोटी सी गलती भी कंपाउंड होती है। अंदाजा लगाने के लिए रूल बढ़िया है। प्लान बनाने के लिए कैलकुलेटर चलाइए।
आखिरी लाइन देखिए। 24वें से 30वें साल के बीच पैसा ₹15.18 लाख से ₹29.96 लाख हो जाता है। ये एक आखिरी डबल ₹14.8 लाख जोड़ता है, जो पहले 24 साल की पूरी कमाई से भी ज्यादा है। छह साल देर से शुरू किया, तो नतीजे का छठा हिस्सा नहीं, आधा हाथ से जाता है। 31 की जगह 25 की उम्र में शुरू करने की असली दलील यही है।
यही ₹1 लाख PPF के 7.1% पर 30 साल में करीब तीन बार डबल होकर ₹7.83 लाख बनता है। सुरक्षित, टैक्स-फ्री, और इक्विटी वाले आंकड़े का करीब एक-चौथाई, अगर इक्विटी सच में 12% दे। ये "अगर" छोटा नहीं है, उस पर भी आएंगे।
महंगाई वाला रूप: दाम कितने साल में डबल होते हैं
ये रूल दामों पर भी चलता है। 72 ÷ महंगाई दर बताता है कि कितने साल में चीजों के दाम डबल होंगे, यानी आपके रुपये से आधा ही सामान आएगा।
MoSPI के CPI आंकड़ों के मुताबिक अगस्त 2026 में खुदरा महंगाई 4.82% रही, और RBI को इस साल करीब 5.2% का अंदाजा है। 5% पर दाम करीब 14 साल में डबल होते हैं (72 ÷ 5 = 14.4)। घर के खर्च के लिए बहुत से प्लानर 6% मानते हैं, क्योंकि स्कूल की फीस और इलाज का खर्च CPI से तेज बढ़ता है। 6% पर दाम हर 12 साल में डबल।
मान लीजिए आपके घर का महीने का खर्च आज ₹50,000 है। इसे लमसम कैलकुलेटर में ऐसे डालिए जैसे 6% पर निवेश हो, तो यही रहन-सहन 12 साल बाद ₹1,00,610 महीना और 24 साल बाद ₹2,02,447 महीना पड़ेगा। आप आज 36 के हैं और 60 पर रिटायर होना है, तो बस इसी तरह जीने के लिए आज के खर्च का करीब चार गुना चाहिए। रिटायरमेंट कैलकुलेटर ये हिसाब अपने आप जोड़ लेता है।
असली रिटर्न, जल्दी वाला तरीका
पैसा 12 साल में डबल हुआ और दाम भी 12 साल में डबल हो गए, तो आपके हाथ असल में कुछ नहीं आया। इसलिए रिटर्न में से महंगाई घटाइए, फिर 72 से भाग दीजिए। इक्विटी में 12% मानें और महंगाई 6% हो, तो करीब 6% असली बचता है, यानी आपके पैसे की खरीदने की ताकत करीब 12 साल में डबल होती है (एकदम सही हिसाब से 12.6)। 5% महंगाई के सामने 6.5% की FD करीब 1.5% असली देती है। 72 ÷ 1.5 = 48 साल। सही जवाब 44 के करीब है। जो भी लें, FD आपकी खरीदने की ताकत को मुश्किल से हिलाती है, और ये टैक्स से पहले की बात है।
टैक्स के बाद डबल होने में और देर
FD का ब्याज आपकी इनकम में जुड़ता है और उस पर हर साल स्लैब रेट से टैक्स लगता है, क्यूम्युलेटिव FD में भी। 30% स्लैब में 4% सेस मिलाकर ब्याज के हर रुपये पर 31.2% टैक्स। तब 6.5% की FD टैक्स के बाद करीब 4.47% देती है, और 72 ÷ 4.47 करीब 16 साल है, 11 नहीं। लमसम कैलकुलेटर पर 4.47% पर 16 साल में ₹2,01,310 बनते हैं। अकेला टैक्स पांच साल जोड़ देता है।
ऊपर से महंगाई जोड़ दीजिए तो और बुरा हाल। टैक्स के बाद 4.47% और महंगाई 6%, यानी सालाना करीब 1.4% का माइनस असली रिटर्न। खरीदने की ताकत के हिसाब से ये पैसा कभी डबल नहीं होता। धीरे-धीरे घटता है।
इक्विटी म्यूचुअल फंड पर टैक्स सिर्फ बेचते वक्त लगता है: साल के ₹1.25 लाख से ऊपर के लॉन्ग-टर्म गेन पर 12.5%, 12 महीने या उससे कम रखा तो 20%, ऊपर से सेस। 12% पर 6 साल में ₹1 लाख पर ₹97,382 का गेन बनता है, जो ₹1.25 लाख से कम है। उस साल यही अकेला लॉन्ग-टर्म गेन है, तो टैक्स जीरो। डबल होने का समय लगभग वही रहता है। बड़ी रकम पर कुछ टैक्स लगेगा, पर वो आखिर में एक बार लगता है, हर साल नहीं।
आप कम स्लैब में हैं या रिबेट के बाद टैक्स नहीं बनता, तो FD वाला 11 साल का आंकड़ा ही चलेगा। आपका ब्याज किस स्लैब में पड़ता है, ये इनकम टैक्स कैलकुलेटर पर देखिए, और TDS व फॉर्म 121 के लिए FD के ब्याज पर टैक्स वाला लेख पढ़िए।
कहां काम आता है: कर्ज और "पैसा डबल" वाले ऑफर
ये रूल किसी भी अवधि पर चलता है, बस रेट और जवाब एक ही अवधि के हों। महीने का रेट डालेंगे, तो जवाब महीनों में आएगा।
क्रेडिट कार्ड का कर्ज। ज्यादातर कार्ड बकाया रकम पर महीने का करीब 3–3.75% ब्याज लेते हैं (स्टेटमेंट में फाइनेंस चार्ज के नाम से दिखता है)। 3.5% महीने पर 72 ÷ 3.5 करीब 20 महीने। ₹50,000 बकाया छोड़ दिया और कुछ नहीं भरा, तो लेट फीस और ब्याज पर GST से पहले ही ये दो साल के अंदर ₹1 लाख की तरफ बढ़ने लगता है। कहीं भी निवेश से पहले कार्ड का बकाया चुकाइए। एक बार में न हो पाए, तो काफी कम रेट वाला पर्सनल लोन आमतौर पर सस्ता पड़ता है; पर्सनल लोन EMI कैलकुलेटर बता देगा कि महीने की EMI कितनी बनेगी।
पैसा डबल करने के वादे। रूल को उल्टा चलाइए। 3 साल में डबल के लिए रूल के हिसाब से सालाना करीब 24% चाहिए (सही हिसाब से 26%)। 2 साल में डबल के लिए करीब 36% (सही हिसाब से 41%)। कोई बैंक FD या सरकारी स्कीम इसके आसपास भी नहीं आती। तो कोई चिट स्कीम, WhatsApp का ट्रेडिंग टिप्स ग्रुप या चेन वाला प्लान दो-तीन साल में "पक्का डबल" बोले, तो वहीं से लौट आइए। एक रुपया डालने से पहले देखिए कि वो कंपनी SEBI या RBI में रजिस्टर्ड है या नहीं।
धीमे वादे भी पकड़ में आ जाते हैं। सिंगल-प्रीमियम पॉलिसी जो "20 साल में पैसा डबल" करती है, वो सालाना करीब 3.6% बैठती है (72 ÷ 20)। ये पोस्ट ऑफिस सेविंग्स खाते से भी कम है।
तीन गुना और चार गुना: 114 और 144 के रूल
इसी रूल के दो भाई:
- 114 ÷ रेट = तीन गुना होने के साल। 12% पर 9.5 साल। लमसम कैलकुलेटर पर ₹1 लाख 10 साल में ₹3,10,585 बनता है, यानी 3.1 गुना।
- 144 ÷ रेट = चार गुना होने के साल। ये बस दो बार डबल होना है। 12% पर 12 साल; कैलकुलेटर ₹3,89,598 दिखाता है, यानी 3.9 गुना।
PPF के 7.1% पर एक बार की रकम करीब 16 साल में तीन गुना होती है (114 ÷ 7.1)। किसी फैमिली फंक्शन में कोई बोले कि उसका प्लॉट "15 साल में तीन गुना हो गया", तो ये काम आता है। ये सालाना करीब 7.6% हुआ, पोस्ट ऑफिस स्कीम जितना ही, और वो भी स्टांप ड्यूटी और मेंटेनेंस गिनने से पहले।
ये रूल कहां कम पड़ता है
- ये अंदाजा है। करीब 6% से 10% के बीच लगभग एकदम सही बैठता है। ऊंचे रेट पर कम बताता है: 24% पर 3 साल कहता है जबकि असल में 3.2 लगते हैं, 36% पर 2 कहता है जबकि 2.25 लगते हैं। बहुत कम रेट पर थोड़ा ज्यादा बताता है।
- ये एक बार की रकम के लिए है, SIP के लिए नहीं। ₹5,000 महीने की SIP 12% मानकर 6 साल बाद SIP कैलकुलेटर पर ₹5,28,785 दिखाती है, जबकि आपने ₹3,60,000 डाले। ये 1.47 गुना है, क्योंकि ज्यादातर पैसा बाद में गया। डाली गई रकम को मोटे तौर पर डबल होने में करीब 10 साल लगते हैं (₹6 लाख पर ₹11.62 लाख)। हर साल प्रीमियम वाली पॉलिसी में भी यही दिक्कत है। SIP का असली रिटर्न XIRR से नापा जाता है, जो SIP रिटर्न कैसे नापते हैं वाले लेख में समझाया है।
- बाजार का रिटर्न एक जैसा नहीं रहता। 12% एक औसत अंदाजा है। पैसा चाहिए उससे ठीक पहले एक खराब साल आ गया, तो डबल होने में कई साल और लग सकते हैं। रूल बताता है कि औसत टिका रहे तो क्या होगा, ये नहीं कि वो टिकेगा ही। और इसमें पिछले साल का आंकड़ा मत डालिए: जिस फंड ने पिछले साल 25% दिया, वो "हर 3 साल में डबल" नहीं होता। इक्विटी के लिए 10–12% मानकर चलिए, और ये भी मानिए कि कम भी आ सकता है।
- रेट बदलते हैं। FD कम रेट पर रिन्यू हुई, या PPF का रेट बदला, तो उस दिन से डबल होने का समय भी बदल जाता है।
- टैक्स और महंगाई का इसे कुछ पता नहीं, जब तक आप इसमें वो रेट न डालें जो असल में आपके हाथ में बचता है।
30 की उम्र में याद रखने लायक डबल होने के चार आंकड़े
इस पूरी बात में से सिर्फ चार आंकड़े याद रखने हों, तो ये रखिए। पहले तीन वो जगहें हैं जहां नौकरी करने वाले का लंबे समय का पैसा ज्यादातर जाता है। चौथा वो है जो इन तीनों के खिलाफ काम करता है।
| क्या | रेट | करीब कितने साल में डबल | 30 की उम्र में डाले ₹1 लाख, 60 पर |
|---|---|---|---|
| FD, टैक्स के बाद (30% स्लैब) | 4.47% | 16 साल | ₹3.71 लाख |
| PPF | 7.1% | 10 साल | ₹7.83 लाख |
| इक्विटी फंड (मानकर) | 12% | 6 साल | ₹29.96 लाख |
| दाम, 5% महंगाई पर | 5% | 14 साल | आज का ₹1 लाख का खर्च ₹4.32 लाख का हो जाता है |
पहले आखिरी लाइन पढ़िए, क्योंकि बाकी तीनों का मतलब उसी से बदल जाता है। 5% महंगाई पर 30 साल में दाम करीब 4.3 गुना हो जाते हैं। टैक्स कटने के बाद FD 3.7 गुना होती है। यानी ऊंचे स्लैब वाला कोई 30 साल का इंसान रिटायरमेंट का पैसा FD में रखकर रिन्यू करता रहे, तो 60 पर उसके पास रुपये ज्यादा होंगे, पर उनसे सामान कम आएगा। बैंक के काउंटर पर ये कोई खुलकर नहीं बोलेगा, पर हिसाब यही है।
PPF दामों से करीब 1.8 गुना आगे रहता है (₹4.32 लाख के सामने ₹7.83 लाख), टैक्स-फ्री और बाजार के रिस्क के बिना। बहुत से प्लानर घर के खर्च के लिए जैसे 6% महंगाई मानते हैं, वैसे मानें, तो आज का ₹1 लाख का खर्च ₹5.74 लाख का हो जाता है, और PPF की बढ़त घटकर करीब 1.4 गुना रह जाती है। लंबे समय के सुरक्षित हिस्से के लिए ये अच्छी नींव है, अमीर बनने का रास्ता नहीं। इक्विटी, अगर 12% सच में मिले, तो दामों से करीब 7 गुना आगे रहती है। इसी "अगर" की वजह से टेबल में "मानकर" लिखा है, और प्लान एक पक्के आंकड़े पर नहीं, एक रेंज पर बनाना चाहिए।
टेबल में एक चीज नहीं दिखती: समय। चारों लाइनें 30 साल मानकर चलती हैं। 36 पर शुरू किया तो 24 साल ही मिलेंगे, यानी इक्विटी में एक डबल कम: उसी ₹1 लाख पर ₹29.96 लाख की जगह ₹15.18 लाख। छह साल रुकने की कीमत आधा नतीजा है। "सैलरी थोड़ी बढ़ जाए फिर शुरू करेंगे" की जगह 30 पर शुरू करने की पूरी दलील यही है।
तो जिस पैसे को दशकों तक छूना नहीं है, उसका बंटवारा सीधा है। अगले कुछ साल में जो चाहिए वो FD में, लंबे समय का स्थिर हिस्सा PPF में, और 60 के लिए रखा ज्यादातर पैसा इक्विटी में, ये याद रखते हुए कि उसका 12% बस अंदाजा है। असली पैसा लगाने से पहले रुपयों में आमने-सामने तुलना देख लीजिए। SIP vs FD वाले लेख में यही किया गया है, SIP के सामने RD और लमसम के सामने FD, जो 72 से भाग देकर नहीं हो सकता।
लोग अक्सर पूछते हैं
रूल ऑफ 72 क्या है?
72 को सालाना रिटर्न से भाग दीजिए, तो मोटे तौर पर पता चलता है कि कंपाउंडिंग के साथ एक बार की रकम कितने साल में डबल होगी। 8% पर 9 साल, 12% पर 6 साल। ये उल्टा भी चलता है: 72 ÷ साल से पता चलता है कि सालाना कितना रिटर्न चाहिए।
FD में पैसा कितने साल में डबल होता है?
6.5% पर तिमाही कंपाउंडिंग के साथ करीब 10.75 साल (रूल 11.1 बताता है)। 8% पर, जो कुछ स्मॉल फाइनेंस बैंक देते हैं, करीब 9 साल। 30% स्लैब में टैक्स के बाद 6.5% की FD करीब 4.47% देती है, तो करीब 16 साल लगते हैं।
किसान विकास पत्र में पैसा कितने महीने में डबल होता है?
अभी के 7.5% रेट पर 115 महीने, यानी 9 साल 7 महीने। अक्टूबर–दिसंबर 2026 के लिए ये रेट नहीं बदला है। रूल ऑफ 72 से 9.6 साल आता है, लगभग उतना ही।
क्या रूल ऑफ 72 SIP पर चलता है?
सीधे नहीं। ये रूल एक बार की रकम के लिए है जो यूं ही बढ़ती रहे। SIP में पैसा महीने-महीने जाता है, इसलिए ₹5,000 महीना 12% मानकर 6 साल बाद डाली गई रकम का सिर्फ करीब 1.47 गुना होता है, और करीब 10 साल में डाली गई रकम डबल होती है।
महंगाई से दाम कितने साल में डबल होते हैं?
72 को महंगाई दर से भाग दीजिए। 6% पर दाम करीब 12 साल में डबल होते हैं, 5% पर करीब 14 साल में। यानी आज का ₹50,000 महीने का खर्च 6% महंगाई पर 12 साल में करीब ₹1 लाख महीना हो जाता है।
रूल ऑफ 72 कितना सही है?
करीब 6% से 10% के बीच काफी सटीक। ऊंचे रेट पर कम बताता है: 24% पर 3 साल कहता है, जबकि असल में 3.2 लगते हैं। तीन गुना के लिए 114 ÷ रेट और चार गुना के लिए 144 ÷ रेट लगाइए। असली प्लानिंग के लिए कैलकुलेटर पर पक्का आंकड़ा देख लीजिए।
यह लेख Gainly टीम ने आम जानकारी के लिए लिखा है, निवेश या टैक्स की सलाह के तौर पर नहीं. रेट और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले लेटेस्ट चेक कर लीजिए. कुछ पुराना लगे तो हमें बताइए. संपर्क