₹50 लाख से दो लोगों की महीने की आमदनी
Senior के 7.5% उदाहरण रेट पर ₹50 लाख की monthly payout FD महीने में ₹31,250 देती है, दोनों के हिस्से के ₹15,625। ₹30,000 का खर्च निकल जाता है और थोड़ा बचता है। खतरा renewal का है। FD पूरी होने पर रेट कम हों, मान लीजिए 6.5%, तो वही ₹50 लाख महीने में सिर्फ ₹27,083 देंगे, और महंगाई तो बढ़ती ही रहेगी। अलग-अलग tenure की FD करें तो सब एक साथ कम रेट पर renew नहीं होतीं।
दोनों अलग depositor हैं, इसलिए DICGC हर बैंक में गोपाल जी के ₹5 लाख और कमला जी के ₹5 लाख अलग cover करता है। पांच बैंकों में हर एक के नाम ₹5 लाख रखें तो पूरे ₹50 लाख insured रहते हैं। इस बंटवारे से TDS भी नहीं कटता, क्योंकि हर FD का ब्याज साल में ₹37,500 बनता है, seniors की ₹1 लाख की सीमा से नीचे। 7.5% पर एक नाम से एक बैंक में करीब ₹13,33,333 से ज़्यादा हो, तभी TDS शुरू होता है। हर एक का ₹1,87,500 का ब्याज आमदनी तो गिना जाएगा, पर कोई और आमदनी न हो तो new regime में tax शून्य बनता है।
लोग अक्सर पूछते हैं
₹50 लाख FD पर monthly interest कितना?
7% पर महीने का करीब ₹29,167, यानी साल का ₹3,50,000। 7.5% पर महीने का ₹31,250। 7% पर quarterly payout ₹87,500 देता है। Monthly payout में बैंक अक्सर discounted रेट लगाते हैं, इसलिए थोड़ा कम आ सकता है।
₹60 लाख की FD पर महीने का कितना ब्याज मिलेगा?
उसी 7% के उदाहरण रेट पर ₹60 लाख महीने में करीब ₹35,000 देते हैं। 7% पर हर अतिरिक्त ₹10 लाख महीने में करीब ₹5,833 जोड़ते हैं।
क्या ₹50 लाख की FD ₹1 करोड़ बन जाएगी?
7% तिमाही compounding पर, ब्याज न निकालें तो 10 साल में करीब ₹1,00,07,987 बनती है। 7 साल में ₹81,27,064। ब्याज पर tax हर साल भरना होता है, इसलिए tax के बाद ज़्यादा समय लगता है।
क्या ₹50 लाख एक ही बैंक में रखना सुरक्षित है?
Deposit insurance एक बैंक में एक depositor के सिर्फ ₹5 लाख cover करता है, तो बड़ा हिस्सा cover से बाहर रहेगा। बैंक डूबने के मामले कम हैं, पर बैंक मुश्किल में आए तो निकासी रुक सकती है। पैसा सच में दोनों का हो तो दोनों के नाम से और अलग-अलग बैंकों में बांटें, तब काफी बड़ा हिस्सा insured रहता है।