₹25 लाख को 3 साल बढ़ने दें तो
3 साल तक हर महीने ₹14,583 लें तो कुल ₹5,25,000 बनते हैं। Cumulative FD उसी समय में ₹5,78,598 कमाती है, करीब ₹53,598 ज़्यादा, इसलिए जिसे आमदनी की ज़रूरत नहीं उसके लिए cumulative ज़्यादा देती है। पर tax maturity तक इंतज़ार नहीं करता। बैंक ब्याज को हर साल कमाया हुआ मानता है, और पहले साल ये ₹1,79,648 है, 60 से कम उम्र की ₹50,000 की TDS सीमा से काफी ज़्यादा। उस साल करीब ₹17,965 कटेंगे, आम तौर पर FD से ही, इसलिए असली maturity ₹30,78,598 से थोड़ी कम आएगी। कारोबार की आमदनी की वजह से परेश भाई tax slab में हैं, तो बाकी tax ITR के समय slab के हिसाब से भरना होगा।
दूसरी बात insurance की। DICGC एक बैंक में एक depositor के ₹5 लाख तक, मूलधन और ब्याज मिलाकर, cover करता है। 3 साल की cumulative FD में ₹5 लाख ₹6,15,720 हो जाते हैं, यानी कुछ हिस्सा cover से बाहर रहता है। पूरी maturity insured रखनी हो तो हर बैंक में करीब ₹4,06,029 तक ही रखना होगा। ₹25 लाख कुछ बैंकों में बांटें तो बड़ा हिस्सा insured रहता है, और emergency में एक FD तोड़ें तो बाकी चलती रहती हैं।
लोग अक्सर पूछते हैं
₹25 लाख FD पर हर महीने कितना ब्याज मिलेगा?
7% पर महीने का करीब ₹14,583, यानी साल का ₹1,75,000। Senior citizen को 7.5% के उदाहरण रेट पर महीने का ₹15,625 मिलेगा। Monthly payout में बैंक अक्सर discounted रेट लगाते हैं, इसलिए थोड़ा कम आ सकता है।
₹25 लाख की FD 5 साल में कितनी होगी?
7% तिमाही compounding पर करीब ₹35,36,945, यानी ₹10,36,945 ब्याज। 1 साल में ₹26,79,648 और 2 साल में ₹28,72,204 होगी।
क्या ₹25 लाख पर TDS रोकने के लिए Form 121 दे सकते हैं?
तभी, जब साल का आपका कुल tax शून्य बनता हो, और 60 से कम उम्र में घोषित ब्याज भी ₹4 लाख के अंदर हो। दूसरी आमदनी की वजह से tax बनता हो तो Form 121 नहीं दे सकते। गलत Form 121 देना अपराध है।
क्या ₹25 लाख अलग-अलग बैंकों में बांटने से tax बचता है?
नहीं। हर बैंक ₹50,000 की TDS सीमा के नीचे रह सकता है, पर सारे बैंक आपका ब्याज PAN पर report करते हैं और tax कुल ब्याज पर लगता है। बांटने से insurance बदलता है, क्योंकि हर बैंक में ₹5 लाख तक cover मिलता है।